Friday, December 11, 2020

70 लाख भारतीयों के बैंक अकाउंट खतरे में, लीक हुआ निजी डाटा, यहां जानें पूरी डिटेल

इंटरनेट की दुनिया में टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ—साथ साइबर क्राइम में भी काफी बढ़ोतरी हो गई है। आए दिन हैकर्स द्वारा किसी के मोबाइल, लैपटॉप या अन्य गैजेट्स को हैक करने या ठगी करने की खबरें आती रहती हैं। वहीं यूजर्स के निजी डाटा लीक्स की घटनाएं भी आम हो गई हैं। हैकर्स यूजर्स के निजी डाटा जैसे फोन नंबर, ई-मेल आईडी, क्रेडिट और डेबिट कार्ड तक की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं और फिर उनके अकाउंट में सेंध लगाते हैं।

ऐसी ही निजी जानकारियां लीक होने की खबर आ रही है। दरअसल, सिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर रजारिया के अनुसार, 70 लाख से ज्यादा भारतीयों का निजी डाटा ‘डार्क वेब’ (हैकर्स द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला इंटरनेट सर्विस) पर लीक हुआ है।

ये जानकारियां हुईं लीक
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय यूजर्स की जो जानकारियां लीक हुईं हैं, उनमेंं यूजर्स के नाम, वार्षिक इनकम और एंप्लायर की जानकारियां आदि शामिल हैं। बताया जा रहा है कि डार्क वेब पर लीक हुई जानकारियों का डाटा बेस करीब 2GB साइज का है। इनमें हैकर्स के हाथ इस तरह की जानकारियां भी लगी हैं कि यूजर्स किस तरह का अकाउंट इस्तेमाल कर रहे हैं।

मोबाइल अलर्ट सर्विस ली है या नहीं। सिक्योरिटी रिसर्चर का कहना है कि यह डाटाबेस वर्ष 2010 से लेकर 2019 के बीच का है। भारतीय यूजर्स की इन जानकारियों का हैकर्स और साइबर क्रिमिनल्स गलत फायदा उठा सकते हैं।

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ऐसे लीक हुए 5 लाख यूजर्स के PAN कार्ड नंबर
साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर का कहना है कि डार्क वेब पर लीक हुई जानकारियां फाइनेंशियल डाटाबेस है। ऐसे में ये जानकारियां हैकर्स और स्कैमर्स के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें फिशिंग अटैक करने के लिए निजी डिटेल्स शामिल हैं। सिक्योरिटी फर्म का मानना है कि इस तरह के डाटा थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा लीक हुए हैं जो बैंक के क्रेडिट या डेबिड कार्ड्स कस्टमर्स को सेल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि लीक हुए डाटा में करीब 5 लाख यूजर्स के PAN कार्ड नंबर आदि भी शामिल हैं।

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सबसे मंहगे में बिकता है फाइनेंशियल डाटा
रिसर्चर ने फिलहाल यह कंफर्म नहीं किया है कि लीक हुआ डाटा एक्यूरेट है या नहीं। 70 लाख से ज्यादा यूजर्स का ये डाटा असली है या नहीं इसके बारे में उन्होंने कोई दावा नहीं किया है। हांलांकि सिक्योरिटी रिसर्चर का मानना है कि किसी ने इस डाटा को पहले डार्क वेब मे बेचा होगा जो बाद में पब्लिकली लीक हो गया है। बता दें कि इस समय इंटरनेट पर फाइनेंशियल डाटा सबसे मंहगे में बिकता है।



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