Thursday, December 31, 2020

अजब गजब- इस बातूनी चैटबॉट के दुनिया में 66 करोड़ से ज्यादा यूजर्स

माइक्रोसॉफ्ट के चैटबोट 'झियाओआइस' (Microsoft’s XiaoIce) दुनिया की एकमात्र चैटबोट (chatbot) है जो लोगों को इतनी पसंद है कि वे उससे दोस्ती किए बिना नहीं रह पाते। दुनिया भर में इसके रजिस्टर्ड यूजर्स की संख्या 66 करोड़ (660 मिलियन) से भी ज्यादा है। कुछ सप्ताह इस चैटबोट से बात करने वालों में से ज्यादातर ने अपने दोस्तों की बजाय इससे बात करने की इच्छा जताई है।

53 लाख फॉलोवर्स भी
ट्विटर के चीनी संस्करण वीबो पर इसके 53 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं। जबकि इसके अंग्रेजी अवतार के केवल 23 हजार फॉलोवर्स हैं।

बातें करना पसंद, देती जवाब
इंसानों की तुलना में बातचीत के दौरान यह प्रति यूजर 23 बार सवाल-जवाब करती है जो औसत व्यक्ति से ज्यादा है। वहीं औसतन एक यूजर ने इससे 29 घंटे बातचीत की है।

भविष्य में वॉयस कमांड वाले चैटबॉट्स ही सबसे बड़े साथी
वॉयस असिस्टेंट या कमांड वाले चैटबॉट्स ही भविष्य में लोगों के सबसे करीबी साथी होंगे। कारण चिकित्सा में तकनीकी विकास के साथ हमारी जीवन प्रत्याशा बढ़ जाएगी। 90 और 100 साल का होना आम बात होगी। लेकिन उम्र के इस तोहफे के साथ अकेलापन तब लोगों की सबसे बड़ी समस्या होगी। ऐसे में हम वॉयस कमांड पर एक्टिव होने वाले स्मार्टफोन, सोशल रोबोट या इंटरनेट ऑफ थिंग्स से जुड़े एक ऐसे घर में गैजेट्स के साथ जियेंगे जो हमें अच्छे से जानते होंगे। यह हमें समय से जगाए, दवा लेने की याद दिलाए और अगर आप कई बार जगाने पर भी न जगें तो यह आपके परिजनों को कॉल कर सके। हमारी दिनभर की शाारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर हमेशा निगरानी रखेंगे। मेडिकल के क्षेत्र में भी इन तकनीकों का गहरा असर पड़ेगा।



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20 वर्षीय मिहिर गारीमेल्ला फ्लाइंग ड्रोन रोबोट्स बनाते हैं

भारतीय मूल के 20 वर्षीय मिहिर गारीमेल्ला की रोबोट्स में रुचि दो साल की उम्र में हुई। एक रोबोटिक पेट डॉग के साथ खेलकर बड़े हुए मिहिर ने 10 साल की उम्र में ही अपने लिए एक असिस्टेंट रोबोट 'मोज़ार्ट' बना लिया जो उसे संगीत की कक्षा के दौरान गलतियां करने पर टोक देता था। यह रोबोट वायलिन की धुन सुनकर मिहिर को बता देता है कि वह किस जगह गलत तार या सुर छेड़ रहा है।

मधुमक्खियों से प्रेरित है डिज़ाइन
उनके बनाए फ्लाइबोट कम लागत के ड्रोन रोबोट हंै। वे अपने ड्रोन बोट्स को स्वचालित बना रहे हैं। इसमें उन्होंने सेंसर भी लगाए हैं जो आग, भूकंप और गैस रिसाव जैसी घटनाओं के दौरान फंसे हुए लोगों को आसानी से ढूंढ सके। इस छोटे रोबोट में चार रोटर्स लगे हैं। इसका डिजाइन मधुमक्खियों से प्रेरित है। उनका कहना है की ये ड्रोन सुरक्षा कर्मियों और आपदा प्रबंधन कर्मियों के लिए मददगार साबित होंगे।



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Jio ने दिया यूजर्स को न्यू ईयर गिफ्ट, अब किसी भी नेटवर्क पर करें अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग

अग्रणी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने अपने यूजर्स को नए साल का तोहफा दिया है। अब आप जियो (Jio) से किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग (Unlimited Free Calling) कर सकते है। अन्य नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए अब आपसे कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। कंपनी ने वोडाफोन आइडिया, बीएसएनल, एयरटेल सहित सभी नेटवर्क पर आउटगोइंग कॉल फ्री कर दी है। अब 1 जनवरी, 2021 से जियो से अन्य नेटवर्क पर कॉल करने के लिए IUC (इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज) नहीं देना होगा। जियो ने यह फैसला ट्राई के निर्देश पर लिया है।

अन्य नेटवर्क पर कॉल के लिए मिलते थे फ्री मिनट
बता दें कि अभी तक जियो का कोई भी प्लान लेने पर यूजर्स को प्लान के हिसाब से अन्य नेटवर्क पर कॉल करने के लिए फ्री मिनट मिलते थे। फ्री मिनट खत्म हो जाने के बाद यूजर्स को अन्य नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए अलग से आईयूसी रिचार्ज करना होता था। अब 1 जनवरी के बाद से इसकी जरूरत नहीं होगी। अब यूजर्स किसी भी नेटवर्क पर अनमिलिटेड फ्री कॉलिंग कर सकेंगे।

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ट्राई के आदेश पर शुरू किया था चार्ज लेना
जियो ने एक बयान में कहा कि वो अपने सभी ऑफ-नेट ( जियो से अन्य नेटवर्क पर) डॉमेस्टिक कॉलिंग के लिए 1 जनवरी, 2021 से कोई चार्ज नहीं करेंगे। कंपनी ने अपने फ्री डोमेस्टिक वॉयस कॉलिंग के वादे को पूरा किया है। यूजर्स अब किसी भी नेटवर्क पर फ्री वॉयस कॉलिंग कर सकेंगे। बता दें कि सितंबर 2019 से पहले भी जियो पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा थी।

लेकिन सितंबर 2019 में अन्य टंेलिकॉम कंपनियों की शि कायत के बाद ट्राई ने जियो को अन्य नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए चार्ज देने के लिए आदेश जारी किया था। इसके बाद जियो ने जनवरी 2021 से अन्य नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए यूजर्स को फ्री मिनट देना शुरू कर दिया था।

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जियो के 40 करोड़ यूजर्स
बता दें कि अक्टूबर माह में जियोे ने लगभग 22 लाख यूजर्स जोड़े हैं। इस बात का खुलासा ट्राई की रिपोर्ट में हुआ। वहीं जियो के कुल यूजर्स की बात करें तो इसके यूजर्स की संख्या करीब 40 करोड़ है। वायरलाइन सब्सक्राइबर्स की बात करें तो कंपनी ने अक्टूबर में सबसे ज्यादा 2,45,912 ग्राहक जोड़ें हैं। हालांकि मोबाइल यूजर्स जोड़ने के मामले में अक्टूबार माह में एयरटेल ने जियो को पीछे छोड़ दिया।

अक्टूबर में एयरटेल ने जियो से ज्यादा मोबाइल सब्सक्राइबर्स जोड़ें। वहीं एयरटेल ने अक्टूबर में 48,397 फिक्सड लाइन सब्सक्राइबर्ज जोड़े हैं। हालांकि यूजर्स के मामले में जियो अब भी देष की नंबर 1 टेलिकॉम कंपनी बनी हुई है।



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नए दशक में पेट्रोल-डीजल का विकल्प होंगी पावरफुल 'बैट्री'

भविष्य में तेज गति के वाहन आज के परंपरागत ईंधनों पर नहीं चलेंगे। यही वजह है कि वैज्ञानिक अब पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में ज्यादा क्षमतावान बैट्री और बायोफ्यूल विकसित कर रहे हैं। आइए जानते हैं वाहनों को नया जीवन देने के लिए किस तरह की बैट्री इन दिनों विकसित की जा रही हैं

-अमरीकी सेना की रिसर्च विंग (डार्पा) ने 5जी तकनीक की मदद से एक रेडियो-फ्रीक्वेंसी स्विच विकसित किया है जो आज उपयोग किए जाने वाले ईंधन की तुलना में 50 गुना अधिक ऊर्जा देता है।
-पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी कार बैट्री विकसित की है जो 10 मिनट चार्ज करने पर 200 से 300 मील (322 से 483 किमी) तक चलती है। 25000 बार चार्जिंग साइकल्स से 5 लाख मील की क्षमता तक पहुंचाने का लक्ष्य है। लीथियम-आयन बैट्री की तुलना में यह 10 मिनट के चार्ज में 80 फीसदी तक चार्ज हो सकती है वह भी बिना बैट्री को नुकसान पहुंचाए।
-लीथियम-आयन बैट्री बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी चीन की सीएटीएल ने भी ऐसी बैट्री बनाई है जो आज इस्तेमाल होने वाली बैट्री (अधिकतम उम्र 8 साल या 2 लाख 40 हजार किमी) की तुलना में 16 साल तक यानी करीब 20 लाख किमी (अधिकतम 1.24 मिलियन मील) तक चलेंगी। इतने लंबे समय के दौरान इन बैट्री को दोबारा या अन्य वाहन में भी उपयोग किया जा सकेगा। इससे इलेक्ट्रिक कारों की लागत भी कम होगी

नए दशक में पेट्रोल-डीजल का विकल्प होंगी पावरफुल 'बैट्री'

-भारतीय जगदीप सिंह के स्टार्टअप क्वांटम स्केप ने भी सितंबर, 2020 में सॉलिड-स्टेट लीथियम मेटल बैट्री बनाने का दावा किया है। यह 15 मिनट में ही 80 फीसदी तक चार्ज हो जाती है।
-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया स्थित मैकेन्ज़ी एंड कंपनी बैट्री की बजाय चार्जिँग मशीन को ही और असरदार बना रही है। कंपनी की बनाई अत्याधुनिक चार्जर मशीनों से इलेक्ट्रिक कार को एक मिनट में इतना चार्ज किया जा सकता है कि वे 32 किमी तक का सफर तय कर सकती हैं।
-एक अन्य ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ट्रिटिअम के बनाए कार बैट्री चार्जर पांच मिनट में 120 किमी से ज्यादा की दूरी तय करने लायक बैट्री को चार्ज करने में सक्षम हैं।

नए दशक में पेट्रोल-डीजल का विकल्प होंगी पावरफुल 'बैट्री'

आंकड़ों पर एक नजर
-2 करोड़ से ज्यादा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन की जरुरत होगी 2030 तक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार
-ब्लूमबर्ग के अनुसार साल 2040 तक सभी नई कारों की बिक्री में आधी से ज्यादा कारें इलेक्ट्रिक होंगी।
-28 अरब डॉलर तक होने का अनुमान है इलेक्ट्रिक कार चार्जर का बाजार 2027 तक
-10 साल का समय लगेगा अभी कार बैट्री के लिए अल्ट्रा चार्जर आने में
-ब्लूमबर्ग एनईएफ को उम्मीद है कि 2025 में खरीदे गए 10 वाहनों में से एक बैटरी से चलने वाला होगा और 2040 तक दुनिया को बुनियादी ढांचे पर खर्च किए जाने वाले कुछ 12 मिलियन सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट्स और लगभग 400 बिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी।
-यूरोपीय संघ ने हाल ही में 2025 तक 1 मिलियन सार्वजनिक चार्जर्स के लक्ष्य की घोषणा की।
-ग्लोबल इलेक्ट्रिक व्हीकल आउटलुक 2020 के अनुसार दुनिया भर में इस साल 21 लाख तक पहुंच गई
-चीन दुनिया का सबसे बड़ा ईवी बाजार है। इस साल अकेले चीन में 23 लाख इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर थे



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2021- यूं बदल जाएगी हमारी सवारी और सफर का अंदाज़

1.1 का होगा ट्रेंड
आज ज्यादातर कार टैक्सी 4 सीटर होती हैं। लेकिन आने वाले सालों में बड़ी टैक्सी प्रोवाइडर कंपनियां दो सीटर वाले छोटे कॉम्पैक्ट ऑटोनोमस पॉड से सेवाएं देने लगेंगी। यह सस्ता और सुगम यातायात होगा। इतना ही नहीं, यह ट्रेंड धीरे-धीरे सार्वजनिक वाहनों जैसे बसों और ट्राम में भी देखने को मिलेगा। वहीं कम दूरी के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध होंगे। इनका इस्तेमाल कर हम पिकअप प्वॉइंट तक भी जा सकेंगे। २०२४ तक विकसित देशों से होता हुआ यह ट्रेंड भारत के मेट्रो शहरों में भी देखने को मिल सकता है।

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स्वच्छ ऊर्जा-ईंधन का उपयोग
2030 तक हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढऩे लगेंगे जहां वाहनों से लेकर घरों तक हमारी ऊर्जा आरैर ईंधन का सबसे बड़ा जरिया सोलर एनर्जी, जिओ थर्मल पॉवर, पवन ऊर्जा और बायोईंधन होगा। इससे न केवल जींवांश्म ईंधन बचेगा, जलवायु परिवर्तन को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।

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567 अरब डॉलर का बाजार
ट्रेंड पंडितों की मानें तो ऑटोनोमस कारों का बाजार 2026 तक 567 अरब डॉलर से ज्यादा का होगा। इतना ही नहीं उस समय तक इन कारों के नए अपडेट वर्जन तेजी से लोगों की पसंद बन जाएंगे। इसी के साथ ऑटोनोमस कारों का बाजार साल 2030तक अकेले 4 और 5 पीढ़ी के स्वाचालित वाहनों का बाजार 60 अरब डॉलर का होगा।

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मैगलेव ट्रेन

मैग्नेटिक लेविटेशन या मैगलेव ट्रेन होवर अपने ट्रैक से 4 इंच ऊपर चलेंगी और इन्हें इलेक्ट्रिकली चाज्र्ड चुंबक के जरिए तेज गति प्रदान की जाएगी। परीक्षण में ट्रेप को बहुत आरामदायक और सुरक्षित माना गया है। अब तक की टॉप स्पीड 603 किमी प्रतिघंटा रही है। ये फिलहाल जर्मनी और चीन में संचालित हो रही हैं। 2030 तक ये सामान्य परिवहन के साधन बन जाएंगी।

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सैटेलाइट आधारित एयर ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था
हमारी आज की ट्रैफिक व्यवस्था छह दशक पुरानी है। इसलिए भविष्य के परिवहन साधनों के लिए हमें नवीन ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था विकसित करनी होगी। अमरीका वर्तमान में नेक्स्टजेन पर काम कर रहा है। यह एक उपग्रह-आधारित वायु यातायात नियंत्रण प्रणाली है जिसे 2025 तक व्यवहारिक बनाने पर काम चल रहा है। सटीकता और छोटे मार्गों को नियंत्रित करने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। नेक्स्टजेन से उम्मीद है कि वह समय और ईंधन बचाने में सहयोगी होगा।

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सेल्फ ड्राइविंग इलेक्ट्रिक बसें
निकट भविष्य में स्वचालित सिटी बसें और शटल परिचालन में होंगी। स्वायत्त वाहन ट्रैफिक लाइटों को पहचानने और संचार करने के लिए कैमरे, रडार और जीपीएस सिस्टम का उपयोग करेंगे। भविष्य की ये बसें पर्यावरण संरक्षण भी करेंगी। स्वचालित ड्राइविंग बसें पहले से ही चीन और जर्मनी में परिचालन में हैं और अमरीका में परीक्षण के दौर में हैं।

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एलिवेटेड बसें
चीन ऐसी बस प्रणाली पर काम कर रहा है जो यातायात की भीड़ को कम करेगा। एलिवेटेड बस एक ऐसा ही वाहन है जो ट्रैफिक को खींचने का काम करता है। यह एक विशेष ट्रैक पर चलता है जो नियमित वाहनों को नीचे ड्राइव करने की अनुमति देता है। ट्रांजिट एलिवेटेड बस प्रणाली को वर्तमान में चीन में डिजाइन किया जा रहा है और उम्मीद है कि यातायात में 30 प्रतिशत की कमी आएगी।

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फ्लाइंग होटल पॉड्स
ड्रोन का एक बेड़ा जो पोर्टेबल होटल के रूप में काम करेगा। कनाडा की एक कंपनी ने इसे डिजाइन किया है। यह एक मोबाइल ऑटोनोमस होटल है जो ड्रोन तकनीक का उपयोग करता है। ड्रिफ्टस्केप मेहमानों को सोते समय घूमने या विविध स्थानों पर नीचे ऊपर टहलने की सुविधा देता है। इसमें कई मॉड्यूलर इकाइयां होती हैं जिसमें भोजन और पेय तत्व शामिल हैं। इसमें बैठकर हम आकाश से 360 डिग्री में नजारों का आनंद ले सकते हैं।

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स्मार्ट रोड
सड़कें परिवहन के भविष्य की नींव हैं, जो समाज को स्मार्ट गतिशीलता प्रदान करती हैं। एक विशिष्ट स्मार्ट रोड अधिक एनिमेटेड होगी, जो सेंसर, डेटा कैप्चर क्षमताओं और पर्यावरण में परिवर्तन के लिए उत्तरदायी होने का उपयोग करने वाले वाहनों और लोगों के साथ संवाद करने में सक्षम होगी। भविष्य की स्मार्ट सड़कें बिजली या गर्म पानी का उपयोग करके बर्फ को पिघलाने में सक्षम होंगी, जिससे यातायात दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

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बायसाइकिल शेयर प्रोग्राम
साइकिल शेयर कार्यक्रम यात्रियों को कम दूरी तय करने और एक सीमित क्षेत्र में घूमने के लिए साइकिल की सवारी उपलब्ध करवाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में यातायात को सुगम और तेज बनाया जा सकता है। कार चलाने की तुलना में बाइक चलाना ज्यादा अच्छा विकल्प है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होता न ही यह पार्किंग की जगह घेरती है और आसानी से उपलब्ध भी हैं। साइकिल परिवहन का एक इको फ्रेंडली तरीका है और साथ ही सवारों को स्वस्थ व्यायाम करने का अवसर प्रदान करता है।

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Wednesday, December 30, 2020

1 जनवरी से इन iphone और Android फोन्स में नहीं चलेगा WhatsApp, यहां देखें लिस्ट

दो दिन बाद नया साल आने वाला है। इस नए साल में बहुत कुछ बदलने वाला है। बता दें कि 1 जनवरी, 2021 से व्हाट्सएप कुछ आईफोन के साथ-साथ एंड्रॉइड स्मार्टफोन के लिए काम करना बंद कर देगा। ऐसे कई एंड्रॉइड और आईओएस फोन हैं, जो एप को चलाने में सक्षम नहीं होंगे, क्योंकि कंपनी अगले साल से ओएस के पुराने वर्जन के लिए सपोर्ट वापस ले लेगी। इसकी जानकारी व्हाट्सएप के एफएक्यू सेक्शन में भी दी गई है। ऐसे में अगर आप भी व्हाट्सएप यूज करते हैं तो यह खबर आपके काम की हो सकती है।

इन आईफोन्स में सपोर्ट नहीं करेगा व्हाट्सएप
व्हाट्सएप एफएक्यू सेक्शन पर दी गई जानकारी के अनुसार, व्हाट्सएप केवल एंड्रॉइड 4.0.3 ऑपरेटिंग सिस्टम या नए और साथ ही आईओएस 9 और नए पर चलने वाले आईफोन पर चल पाएगा। आईफोन 4 तक के सभी आईफोन मॉडल अगले कुछ दिनों में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए सपोर्ट खो देंगे। आईफोन मॉडल में आईफोन 4एस, आईफोन 5, आईफोन 5एस, आईफोन 6 और आईफोन 6एस शामिल हैं।

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इन एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स को नहीं करेगा सपोर्ट
वहीं एंड्रॉइड के लिए, एचटीसी डिजायर, मोटोरोला ड्रॉयड रेजर, एलजी ऑप्टिमस ब्लैक और सैमसंग गैलेक्सी एस 2 2020 के अंत तक व्हाट्सएप सपोर्ट खो देंगे। इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म काईओएस 2.5.1 ओएस या नए के साथ चुनिंदा फोन के लिए एप को चालू रखेगा, जिसमें जियोफोन और जियोफोन 2 शामिल हैं।

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ऐसे पता करें सॉफ्टवेयर का
यह पता लगाने के लिए कि कौन सा ओएस या आईफोन पर यह चल सकता है, उसके लिए सेटिंग्स मेनू पर उसके बाद जनरल और सूचना विकल्प पर सॉफ्टवेयर और उपयोगकर्ता को देख सकते हैं। एंड्रॉइड उपयोगकर्ता सेटिंग्स पर जा सकते हैं, फिर फोन के बारे में यह देखने के लिए कि उनका स्मार्टफोन किस एंड्रॉयड संस्करण पर चल रहा है।



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साल 2021 में ये तकनीकी बदलाव होंगे हमारी 'ड्राइविंग सीट' पर

01. टॉप-5 टेक ट्रेंड
एआइ आधारित स्वचालित वाहन
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) आधारित स्वायत्त वाहन 2021 के टेक बदलाव में सबसे आगे हैं। एआइ पहले से ही सेल्फ ड्राइविंग कारों के जरिए स्मार्ट ट्रैवल को साकार कर रही है। इन कारों में नेविगेशन और नियंत्रण के लिए सेंसर और सॉफ्टवेयर पर भरोसा करते हैं। स्वायत्त वाहनों का उद्देश्य मानव चालकों की आवश्यकता को कम करना और रोजमर्रा के परिवहन को आसान बनाना है। अध्ययन के अनुसार आज अमरीका की सड़कों पर लगभग 1400 सेल्फ ड्राइविंग कारें दौड़ रही हैं। लेकिन जल्द ही पूरी दुनिया में शहरों के अंदर ऐसे वाहनों की भरमार होगी। टेस्ला, ऐपल, गूगल और उबर जैसे बड़े खिलाड़ी इस तकनीक को व्यावहारिक बनाने पर दिनरात जुटे हुए हैं। 2026 तक स्वायत्त वाहन उद्योग का मूल्य करीब 41 अरब रुपए (556 मिलियन अमरिकी डॉलर) होने का अनुमान है।

साल 2021 में ये तकनीकी बदलाव होंगे हमारी 'ड्राइविंग सीट' पर

डिजिटल मार्केटिंग और डीलिंग
कोरोनोवायरस महामारी के दौरान ऑटोमोटिव वाहनों को ऑनलाइन बेचने का भविष्य भी नजर आया। कोरोना के चलते ट्रायल ड्राइविंग न के बराबर हो गई। लॉकडाउन प्रोटोकॉल में यह ऑनलाइन माध्यम में बदल गया। एक बड़े तबके को यह बदलाव पसंद भी आया। अब वाहन खरीदार डीलर के सुझाव पर चलने की बजाय विभिन्न कार मॉडल की तुलना करने में सक्षम हैं। अब भी 81 फीसदी खरीदार नई या पुरानी कारों को ऑनलाइन खरीदने के पक्ष में नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों को लगता है कि 2021 तक इस ट्रेंड में भी बदलाव आएगा।

साल 2021 में ये तकनीकी बदलाव होंगे हमारी 'ड्राइविंग सीट' पर

इलेक्ट्रिक कारों का नया दौर
जीवाश्म ईंधन दर में वृद्धि और उनके उपयोग से पर्यावरण को होने वाले नुकसान ने मोटर वाहन उद्योग के दृष्टिकोण को इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवीएस) में बदल दिया है। कार्बन उत्सर्जन में कारें 15 फीसदी का योगदान करती हैं। दूसरी ओर इलेक्ट्रिक कारें इस समस्या का विकल्प बनकर उभरी हैं। अगस्त 2020 में, अमरीका में 16 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ रहे थे। जो 2024 तक अनुमानित 14 लाख से अधिक है। यानी आने वाला साल इलेक्ट्रिक कार बाजार के नए युग का आरंभ होगा।

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ब्लॉकचेन का नेटवर्क
ब्लॉकचेन की तुलना इंटरनेट की दूसरी पीढ़ी से की गई है। इसमें कनेक्टिविटी के लिए एक सुरक्षित नेटवर्क पर वाहन डेटा साझा करना, ऐप से ऑनलाइन कार बुक करना (राइड-हेलिंग), शहरी परिवहन और कारों की तेज डिलीवरी जैसे समाधान शामिल हैं। ब्लॉकचेन सत्यापन प्रक्रिया को बढ़ाकर डिलीवरी और बैक-ऑफिस कामों में लगने वाले समय को भी बचाता है। इसका उपयोग वाहन की जानकारी और डेटा के बेहतर प्रबंधन के लिए भी किया जा सकता है। आने वाले सालों में यह ट्रेंड भी छाया रहेगा।

साल 2021 में ये तकनीकी बदलाव होंगे हमारी 'ड्राइविंग सीट' पर

3डी प्रिंटिग
ऑटोमोटिव उद्योग नए मॉडल और बेहतर प्रदर्शन करने वाले वाहनों की मांग पूरी करने के लिए 3 डी प्रिंटिंग तकनीक पर भी निर्भर करेगा। ऑटोमोटिव उत्पादन के सभी क्षेत्रों में 3 डी प्रिंटिंग तकनीक की उपयोगिता बढ़ रही है। तेजी से प्रोटोटाइप बनाने के अलावा, इस तकनीक का उपयोग बेहतर टूल, आंतरिक पुर्जे और कार के अंदरूनी हिस्से कम से कम लागत पर किया जा रहा है। यह ट्रेंड आगे और जोर पकड़ेगा।



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अलसी के तेल से ठीक कर सकते हैं स्मार्टफोन की टूटी डिस्प्ले को, यहां जानिए कैसे

जब स्मार्टफोन हमारे हाथ से फिसलकर या किसी भी तरह से हमारे हाथ से गिर जाए तो सबसे पहले फोन की स्क्रीन ही टूटती है। डिस्प्ले टूटने से हम दुखी हो जाते हैं। डिस्पले बदलवाने में काफी पैसा खर्च होता है। सर्विस सेंटर पर फोन को छोड़ना पड़ता है। अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका इजाद किया है, जिसकी मदद से घर बैठे ही आपके फोन की टूटी डिस्पले ठीक हो जाएगी। जल्द ही फोन की टूटी हुई स्क्रीन को जोड़ने का काम अलसी का तेल कर देगा।

अलसी का तेल भरेगा डिस्प्ले की दरारें
दरअसल, दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि मोबाइल स्क्रीन की दरारों को भरने के लिए अलसी के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इसका इस्तेमाल माइक्रोकैप्सूल के रूप में किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च में पता चला है कि पारदर्षी अलसी के तेल से डिस्प्ले की दरारों को भरा जा सकता है। शोध के दौरान 95 फीसदी तक टूटी हुई स्क्रीन को 20 मिनट में ठीक कर दिया गया।

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गर्म तापमान और अल्ट्रावायलेट रोशनी
टूटी स्क्रीन को ठीक करने का प्रयोग प्रयोगषाला में किया गया। अगर यही प्रक्रिया घर पर की जाए तो कई घंटे लग सकते हैं। शोध में पता चला है कि सामान्य तरीके से टूटी स्क्रीन को जोड़ने में घंटों लग सकते हैं, लेकिन गर्म तापमान और अल्ट्रावायलेट रोशनी से इस प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है। यह शोध कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (केआईएसटी) में इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड कंपोजिट मैटेरियल में किया गया।

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दो परतों का मेल बनाता है सिंगल मैटेरियल
इस रिसर्च का नेतृत्व कर रहे सेंटर हेड डॉ. योंग-चाई जुंग क कहना है कि स्क्रीन को ठीक करने वाले इस मैटेरियल को एक पॉलिमर बाइलेयर फिल्म (पीबीएफ) कहा जाता है। ये दो परतों का मेल है जो मिलकर एक सिंगल मैटेरियल बनाती है। इसमें ऊपरी सतह में अलसी के तेल के माइक्रोकैप्सूल होते हैं।

वहीं दूसरी परत फोन, टैबलेट और अन्य गैजेट में इस्तेमाल होने वाले कांच जैसे मैटेरियल से बनी होती है। इस परत कोे सीपीआई कहा जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सीपीआई एक पारदर्शी प्लास्टिक होता है, जो मजबूत, लचीला और विद्युत संचालन करता है।



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Tuesday, December 29, 2020

2021 में 5जी के आने से बढ़ेगी नई ऐप्स और स्मार्ट डिवाइसेज की डिमांड, भारत ने लगाया बड़ा दांव

वर्ष 2020 के बीतने में अब चंद दिन ही बाकी हैं और विश्व एक नए दशक में प्रवेश करने जा रहा है। साल 2020 को मानव स्मृति में सबसे विघटनकारी वर्ष के रूप में याद किया जाएगा। जैसे ही महामारी दुनियाभर में फैली, वह दूरसंचार नेटवर्क और प्रौद्योगिकी सेवाएं ही थीं, जिसने लोगों को आपस में जोड़े रखा। व्यापक Lockdown के बावजूद 4जी नेटवर्क वैश्विक अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में कामयाब रहा। हालांकि वैश्विक आर्थिक गतिविधि काफा मंद पड़ गई, मगर लोगों के पास उनके घरों पर इंटरनेट के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सूचना और मनोरंजन की पहुंच बरकरार रही।

उच्च गति वाली दूरसंचार सेवाओं के लिए यह काफी महत्वपूर्ण समय रहा। उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारत की टेलीकॉम स्टोरी को पुनर्जीवित करने और भविष्य की प्रौद्योगिकियों को तेजी से पेश करने के प्रति मानसिकता में बदलाव आया है।

5जी स्पेक्ट्रम बैंड की घोषणा जल्द
इस महीने की शुरुआत में प्रौद्योगिकी मामलों के दूरसंचार विभाग (डीओटी) के सदस्य के. रामचंद ने कहा था कि वह जल्द ही नीलामी के लिए 5जी स्पेक्ट्रम बैंड की घोषणा करेंगे। यह एक स्पष्ट संकेत है कि 5जी को अपनाना अब सरकार के लिए प्राथमिकता है। अधिकांश भारतीय दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के पास वर्तमान में 5जी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए निवेश और निर्माण को लेकर वित्तीय कमी कमी है, लेकिन सरकार ने संकेत दिया है कि वह प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार है।

5जी का पड़ेगा व्यापक प्रभाव
सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. एस.पी. कोचर ने कहा कि 5जी प्रौद्योगिकी व्यवसाय मॉडल के संदर्भ में कई संभावनाओं को खोलने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि इससे सभी की जीवनशैली पर भी प्रभाव पड़ने वाला है। उन्होंने कहा, हम क्षैतिज विकास और देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में एक भूमिका निभाने के लिए उद्योग को सक्षम करने में सरकार के समर्थन की तलाश कर रहे हैं। 5जी की क्षमता बहुत अधिक है और यह भारत के लिए पूरे खेल को बदलने में सक्षम है। इसके साथ ही यह सरकार के अभियानों जैसे कि मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत के लिए उत्प्रेरक बन सकता है।

सइएंट के अध्यक्ष और सीओओ कार्तिक नटराजन ने कहा, हम संचार नेटवर्क के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश देख रहे हैं। वर्तमान डिजिटल परिवर्तन से उपयोगकर्ता (यूजर्स) के अनुभव में वृद्धि होगी, परिचालन क्षमता बढ़ेगी और उद्यम व्यवसायों के लिए प्रतिस्पर्धा में बढ़त होगी। विश्व स्तर पर नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर के डिजाइन, वितरण, परिनियोजन, माइग्रेशन और समर्थन में हमारा अनुभव हमें 5जी की शुरुआत (रोलआउट) के लिए एक आदर्श भागीदार बनाता है।

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हो रहे महत्वपूर्ण निवेश
पिछले कुछ वर्षो में कई वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों ने भारत में विनिर्माण आधार स्थापित किया है। सैमसंग को हाल ही में अपने नोएडा कारखाने में ओएलईडी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से मंजूरी मिली है। हालांकि इस तरह के निवेश महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी), सेमीकंडक्टर्स और भविष्य की तकनीक में निवेश के लिए बहुत अधिक प्रोत्साहन की जरूरत है।

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बढ़ेगी स्मार्ट डिवाइसेज की डिमांड
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत के सामने बड़ी चुनौती विश्व स्तरीय सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई (एफएबी) की कमी है। अब समय आ गया है कि सरकार या तो वैश्विक दिग्गजों को भारत में निवेश कि लिए आकर्षित करे या फिर घरेलू स्तर पर ही इस पर काम शुरू किया जाए। मीडियाटेक इंडिया के प्रबंध निदेशक अंकु जैन ने कहा कि 2020 में 5जी के लिए मुख्यधारा तय करने के लिए मंच निर्धारित किया गया है और 2021 में यह अगली जनरेशन 5जी स्मार्टफोन, नई ऐप्स और स्मार्ट टीवी जैसे स्मार्ट डिवाइस, टैबलेट्स, वॉयस इंटरफेस के साथ एकीकृत फोन जैसे स्मार्ट उपकरणों की मांग में वृद्धि करेगा।

यह देखना दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि भारत कैसे टीएमटी उद्योग में 5जी के साथ भविष्य की तकनीकों में निवेश को आकर्षित कर सकता है और अगले तीन से पांच वर्षों में आर्थिक अवसरों की एक श्रृंखला पेश कर सकता है।



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कहीं गोलियां चलाने वाले तो कहीं मलेरिया भगाने वाले ड्रोन

तुर्की दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने अचूक निशाना लगाने वाली मशीन गन से लैस ड्रोन 'सोनगर' को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया है। 225 किग्रा. वजनी इस ड्रोन में 200 राउंड गोलियां हैं जो 15 सेमी स्क्वायर से भी छोटे ऑब्जेक्ट को 200 मीटर दूर से भी निशाना बना सकता है। यह सिंगल शॉट के अलावा एक साथ 15 राउंड भी फायर कर सकता है। इतना ही नहीं यह 10 किमी के एरिया में 9200 फीट (करीब 3 किमी) की ऊंचाई तक उड़ सकता है। नाइट विजन के साथ यह 10गुना जूम पॉवर वाला ड्रोन है।
-भारत ड्रोन का इस्तेमाल कर टिड्डी भगाने वाला पहला देश बन गया है। कीनिया और रवांडा में तो ड्रोन की मदद से कीटनाशकों का छिउ़काव, मलेरिया के मच्छरों को मारने और लारवा पनपने की जगहों को नष्ट करने में भी काम ले रहे हैं।

कहीं गोलियां चलाने वाले तो कहीं मलेरिया भगाने वाले ड्रोन

-अमरीका स्थित फर्म 'एईवम' ने रैवन एक्स नाम का एक ड्रोन बनाया है। इसे खासतौर से छोटे उपग्रहों के लिए एक ऑटोनोमस, हवाई प्रक्षेपण प्रणाली के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 'एईवम' कंपनी का दावा है कि उनका बनाया रैवन एक्स दुनिया का सबसे बड़ा ड्रोन है, जो ऑटोनोमस रूप से करीब 1.6 किमी लंबे रनवे पर भी उतर सकता है। यह ड्रोन करीब 80 फीट लंबा (24 मीटर), 18 फुट (5.5 मीटर) ऊंचा और 60 फुट (पंखों का व्यास 18 मीटर) चौड़ा है। इसे 8 हजार वर्ग फुट (743 वर्ग मीटर) हैंगर में खड़ा किया जाता है। रैवन एक्स में नियमित विमान के समान ही जेट ईंधन का उपयोग होता है। 'एईवम' का कहना है कि रैवन एक्स पर मौसमी परिस्थितियों का कोई असर नहीं होता है और यह लगभग सभी जटिल परिस्थितियों में लॉन्च हो सकता है। इस ड्रोन का 70 प्रतिशत हिस्सा दोबारा उपयोग किया जा सकता है। लेकिन कंपनी इसे 100 फीसदी रीयूजेबल बनाने पर काम कर रही है। पूरी तरह से तैयार होने पर रेवन एक्स 180 मिनट प्रति लॉन्च की गति से अंतरिक्ष में पेलोड फायर करने में सक्षम होगा।

कहीं गोलियां चलाने वाले तो कहीं मलेरिया भगाने वाले ड्रोन

-ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में गूगल की पैरेंटल कंपनी अल्फाबेट की विंग डिलीवरी शाखा को ड्रोन से डिलीवरी को हरी झंडी मिल गई है। ड्रोन के माध्यम से घरों तक सामान पहुंचाने की शुरुआत से रिटेल सेक्टर के अलावा डिलीवरी व्यवसाय में भी जबरदस्त बदलाव आएगा। सड़क यातायात में फंसे बिना सुरक्षित और शीघ्र पहुंचाने का यह सबसे सुगम साधन होगा। ऑस्ट्रेलिया में 70 हजार से ज्यादा उड़ानों का परीक्षण करने के बाद एफएए ने यह प्रमाण पत्र दिया है।
-गूगल की पैरेंटल कंपनी 'अल्फाबेट इंक' की विंग एलएलसी ने बीते साल 'ओपन स्काई' नाम का ऐप लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह ऐप निजी ड्रोन के लिए बेहतर एयर ट्रैफिक नियंत्रक साबित होगा। कंपनी ने तीन महाद्वीपों में 80 हजार से ज्यादा ड्रोन उड़ानों का परीक्षण किया है। जैसे-जैसे डिलिवरी ड्रोन ज्यादा उन्नत ट्रैकिंग उपकरणों से लैस होते जाएंगे ओपन स्काई जैसे ऐप कम ऊंचाई पर उडऩे वाले ड्रोन के लिए एक एयर-ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली का आधार बन जाएंगे। इनके जरिए कंप्यूटर से ही ड्रोन को हवा में स्वचालित रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे ड्रोन दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

कहीं गोलियां चलाने वाले तो कहीं मलेरिया भगाने वाले ड्रोन

-जापान का टोकुशिमा राज्य जहां नाका शहर के ऊपर उडऩे वाले छोटे मानव रहित ड्रोन अब इस जगह की पहचान बन गए हैं। दरअसल इस क्षेत्र में रोजगार और असुविधाओं के कारण स्थानीय लोग लगातार पलायन कर रहे हैं। लोगों को रोकने और पर्यटन आकर्षण बढ़ाने के लिए स्थानीय नगरपालिका ने इसे 'ड्रोन टूूरिज्म स्पॉट' के रूप में विकसित किया है। इसके लिए खास डिजिटल मैप भी बनाया गया है। ड्रोन उड़ाने के अलावा यहां होम डिलीवरी के लिए भी ड्रोन का उपयोग हो रहा है। इतना ही नहीं ड्रोन टूरिज्म को प्रमोट करने के लिए अब स्थानीय निकाय यहां ड्रोन रेस का आयोजन भी कर रहे हैं। साथ ही वन संपदा पर नजर रखने, पेड़ों की कटाई और उनके सुरक्षित परिवहन में भी ड्रोन काम आ रहे हैं।
-नीदरलैंड स्थित एयरबस समूह 'स्काईवेज प्रोजेक्ट' का परीक्षण कर रहा है। 'एयरबस' के नाम से कंपनी ने हाल ही सिंगापुर में ड्रोन डिलीवरी ट्रायल किया। इसमें मानव रहित ड्रोन बंदरगाहों पर खड़े जहाजों पर पैकेज पहुंचाएंगे। इन्हें खास लोडिंग परिचालनों को सुव्यवस्थित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। परीक्षण में ड्रोन ने 1.5 किलो सामान स्वचालित तकनीक का उपयोग कर पहुंचाया। इस दौरान ने ड्रोन ने 10 मिनट में करीब 2 किलोमीटर की उड़ान पूरी की।

कहीं गोलियां चलाने वाले तो कहीं मलेरिया भगाने वाले ड्रोन

-'ईसीजी स्मार्ट' कंपनी ने छोटा लेकिन शक्तिशाली मिनी क्वाड 'यू-ड्रोन' बनाया है जिसे 'यू-माइंड' नाम के खास उपकरण के जरिए अपने दिमाग से नियंत्रित किया जा सकता है। इस उपकरण को हैडसेट की तरह सिर पर पहनना पड़ता है। इसमें लगे सेंसर ड्रोन को सिग्नल भेजते हैं। ड्रोन दिमागी तरंगों और सिर के हिलने पर प्रतिक्रिया करता है जिससे हम इसे आसानी से हवा में 360 डिग्री पर मोड़ सकते हैं। 85 ग्राम वजनी क्वाडकॉप्टर डिजायन वाले इस ड्रोन को एक बार चार्ज करने पर 6 से 7 मिनट तक उड़ाया जा सकता है। इस ड्रोन में 8 मेगापिक्सल का कैमरा लगा हुआ है जिससे हाई डेफिनिशन वीडियो और फोटो लिए जा सकते हैं। हालांकि अभी यह परीक्षण दौर में है लेकिन भविष्य के पोर्टेबल ड्रोन की झलक देता है।
-स्पेनिश स्टार्टअप 'क्वांटरनियम' का हाइब्रिड ड्रोन संस्करण बैट्री-इलेक्ट्रिक मल्टीकॉप्टर 'हाइब्रिक्स 2.1' ने ड्रोन की उड़ानों के सभी रिकॉड्र्स को तोड़ते हुए 10 घंटे हवा में उड़ान भरकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इसमें 16 लीटर का गैसोलीन बैटरी का इलेक्ट्रिक हाइब्रिड ड्राइव सिस्टम है। यह 360 डिग्री पर hd पिक्सल क्वालिटी में वीडियो और 40 मेगापिक्सल फोटो खींचने में सक्षम है। 2 स्ट्रोक इंजन वाले 'हाइब्रिक्स 2.1' का वजन करीब 13 किग्रा है। यह 10 किग्रा तक वजन ढो सकता है।

कहीं गोलियां चलाने वाले तो कहीं मलेरिया भगाने वाले ड्रोन

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Vodafone Idea अपने यूजर्स को दे रहा 50 जीबी डाटा फ्री, ऐसे उठा सकते हैं लाभ

टेलिकॉम कंपनियां यूजर्स को लुभाने के लिए समय—समय पर सस्ते प्रीपेड और पोस्टपेड प्लान लॉन्च करती रहती है। इन प्लान्स में यूजर्स को हाई—स्पीड डाटा और फ्री कॉलिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं। अब Vi (वोडाफोन आइडिया) ने अपने यूजर्स को एक प्लान में 50 जीबी डाटा अतिरिक्त देने का ऐलान किया है। हालांकि 50 जीबी एक्स्ट्रा डाटा की सुविधा सभी यूजर्स के लिए नहीं है। इस सुविधा का लाभ सिर्फ उन्हीें यूजर्स को मिलेगा, जिन्होंने 1,499 रुपए वाला प्री-पेड प्लान ले रखा है।

1,499 रुपए वाले प्लान में मिलेगा ज्यादा डाटा
Vodafone Idea के 1,499 रुपए वाले प्री-पेड प्लान में यूजर्स को कुल 24 जीबी डाटा ही मिलता है। अब कंपनी के नए ऑफर के तहत इस प्लान में कुल 74 जीबी डाटा मिलेगा। बता दें कि इस प्लान की वैलिडिटी 365 दिनों की है और इसमें यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग मिलती है। इसके साथ ही 3,600 SMS फ्री कर सकते हैं। इसके अलावा वोडाफोन आइडिया के इस प्लान में यूजर्स को Vi मूवीज और टीवी एप का भी फ्री सब्सक्रिप्शन मिलता है।

चुनिंदा यूजर्स को ही मिल रहा लाभ
हालांकि फिलहाल वोडाफोन आइडिया में 50 जीबी अतिरिक्त डाटा इस प्लान के कुछ चुनिंदा यूजर्स को ही मिल रहा है। अब कंपनी अपने यूजर्स को इसके बारे में मैसेज करके जानकारी दे रही है। वोडाफोन आइडिया ने अपने इस ऑफर को Extra Data Offer नाम दिया है। 1,499 रुपए वाले प्लान के अलावा भी वोडफोन आइडिया ने हाल ही कुछ और भी नए प्लान लॉन्च किए हैं।

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Digital Exclusive प्लान
बता दें कि हाल ही वोडाफोन आइडिया ने एक नया प्रीपेड प्लान लॉन्च किया था। इस प्लान का नाम Digital Exclusive प्लान रखा गया है। इस प्लान की कीमत 399 रुपए रखी गई है। इसकी वैलिडिटी 56 दिनों की है। बता दें कि यह सेवा उन लोगों के लिए है जो ऑनलाइन सिम ऑर्डर करते हैं और घर पर डिलीवरी चाहते हैं।

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सभी नेटवर्क पर अनमिलिटेड कॉलिंग
बता दें कि 399 रुपए वाले प्लान के साथ अगर वोडफोन आइडिया की सिम खरीदते हैं तो इसकी डिलीवरी आपके घर पर होगी। इस प्लान में यूजर्स को रोजाना 1.5 जीबी हाई स्पीड डाटा मिलेगा। इसके साथ ही यूजर्स किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग कर सकते हैं। साथ ही इस प्लान में रोजाना 100 SMS भी फ्री कर सकते हैं।



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2021- फ्लाइंग कार नहीं ड्राइविंग ड्रोन होंगे हमारी हवाई सवारी

विज्ञान फंतासी की तरह उड़ने वाली कार हमारा हमेशा से सपना रही है। लेकिन एमआइटी (Massachusetts Institute of Technology) इंजीनियर्स का मानना है कि भविष्य में हर घर में कोई उड़ने वाली कार नहीं बल्कि ड्राइविंग ड्रोन (Driving drones) होंगे। एमआइटी विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेबोरेट्री की टीम ने आठ मिनी-क्वाडकॉप्टरों के एक बेड़े में पहिए लगाकर ड्राइविंग और उड़ान भरने का परीक्षण किया। कार्डबोर्ड और फैब्रिक से बने इस छोटे ड्रोन ने शहर के चारों ओर उड़ान भरी। उनका मानना है कि किसी फ्लाइंग कार की तुलना में बिना पहियों का ड्रोन 14 प्रतिशत ज्यादा दूर तक उड़ सकता है।

यानी भविष्य में हमारे शहरों के ऊपर कारें नहीं ड्रोन मंडराएंगे? जीहां, यह बहुत हद तक संभव है। अब वैज्ञानिक भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि फ्लाइंग कार की तुलना में ड्रोंन अधिक बेहतर विकल्प हैं। यहां तक की अब तक विकसित ज्यादातर कथित फ्लाइंग कारों का डिजाइन भी ड्रोन से ही मेल खाता है। चीन में विकसित किए जा रहे ई-हैंग 184 ऑटोनोमस एरियल व्हीकल एक क्वाडकॉप्टर जैसा ऑल-इलेक्ट्रिक विमान है। इसमें बस एक सीट है। दरअसल, बैट्री से चलने वाले ड्रोन अधिक कॉम्पैक्ट, कलाबाज और पर्यावरण के अनुकूल हैं, जो उन्हें शहरी वातावरण के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

ड्रोन सॉफ्टवेयर होंगे अगले पायलट
ये सॉफ्टवेयर पायलटों की एक नई पीढ़ी है। जो ऑटो-पायलट वाहनों या ड्रोन के लिए विकसित की गई है। जल्द ही इंसानों की तुलना में ये सॉफ्टवेयर्स सबसे अधिक समय तक उड़ान भरने का रेकॉर्ड बनाएंगे। विशाल फ्लाइंग डेटा के संयोजन से, ड्रोन-निययंत्रित सॉफ्टवेयर एप्लीकेशंस जल्द ही दुनिया के सबसे अनुभवी पायलट बनने के लिए तैयार हो रहे हैं। एक निजी पायलट बनने के लिए भी कम से कम 40 घंटो की हवाई उड़ान का अनुभव जरूरी है। ऐसे ही कॉमर्शियल प्लेन में को-पायलट बनने के लिए 1000 घंटो की हवाई उड़ान का अनुभव जरूरी है। ड्रोन सॉफ्टवेयर जैसे ऑटो-पायलट के साथ यात्रा करने के लिए केवल 17 फीसदी लोग ही तैयार हैं।



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कंप्यूटर दुकानदार ने Twitter पर किया 50 करोड़ डॉलर का मानहानि केस, जानिए क्या है पूरा माजरा

अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के बेटे हंटर का नाम हाल ही में न्यूयॉर्क पोस्ट की एक विवादास्पद रिपोर्ट में सामने आई थी। इसमें अपना नाम शामिल किए जाने के चलते यहां के एक कम्प्यूटर रिपेयर शॉप के मालिक ने Twitter पर 50 करोड़ डॉलर का मानहानि का मुकदमा किया है। बता दें कि अक्टूबर में आई इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि डेलावेयर में स्थित एक शॉप को हंटर बाइडन के लैपटॉप से डेटा रिकवरी के लिए भुगतान किया गया था। इसमें कथित तौर पर हार्ड ड्राइव की एक कॉपी से ईमेल और तस्वीरें भी प्रकाशित की गईं।

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Facebook और Twitter ने लगा दी थी रोक
इस आर्टिकल के वायरल होने के बाद Facebook और Twitter दोनों ने ही इसके प्रदर्शन पर अपने प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी थी और Twitter ने इसके लिए स्पष्टीकरण के रूप में हैक्ड मैटेरियल्स को पोस्ट करने के इसके बैन की ओर इशारा किया था।

हैकर के रूप में कराया परिचय
एक रिपोर्ट के मुताबिक, शॉप के मालिक रह चुके जॉन पॉल आइजैक ने यह कहते हुए Twitter पर मुकदमा ठोका है कि इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दुनिया से मैक का परिचय एक हैकर के रूप में कराया गया है। आइजैक ने कहा है कि Twitter की ही वजह से लोग अब उन्हें एक हैकर के रूप में जानते हैं। उन्होंने अब Twitter से 50 करोड़ डॉलर और सार्वजनिक रूप से अपने इस बयान की वापसी की मांग की है।

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शिकायत में दिया नेगेटिव रिव्यूज का हवाला
आईजैक ने अपनी शिकायत में कई नेगेटिव बिजनेस रिव्यूज का हवाला दिया है, जिसमें कहानी के इस तथ्य के आधार पर मैक की आलोचना की गई है, लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि इन नकारात्मक समीक्षाओं के लिए Twitter को ही क्यों जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। Twitter ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।



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2021- ऑटोनोमस कार और एआइ का संगम कितना सुरक्षित?

इंटरनेट आधारित कण्ट्रोल सिस्टम, ऑटोमोमस कार और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस 2021 में हमारी कारों को बदल देंगे या यूँ कहें की हमारी ड्राइविंग का अंदाज़ बदल देंगे। आइटी ऑटोमेशन यानी गुणवत्ता, रफ्तार और क्षमता। लेकिन एआइ के इस्तेमाल के काफी खतरे हैं। कार में इस्तेमाल होने वाली एआइ एप्लीकेशन में मामूली-सा बदलाव भी कारों के पहिए थाम सकता है। वहीं मशीन लर्निंग के जरिए ड्राइवरलैस कार का सपना पूरा होने में डेटा की पर्याप्त उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।

वहीं हैकर भी कार के सिस्टम को हैक कर सकते हैं और उसका पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं। 2019 में हैकर्स ने अमरीका के कुछ शहरों में ऑनलाइन कनेक्ट कारों के सिस्टम को हैक ऐसा कर के भी दिखाया है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपोल और साइबरस्पेसिटी कंपनी ट्रेंड माइक्रो, साइबर-अपराधी स्वायत्त कारों, ड्रोन और आइओटी से जुड़े वाहनों का उपयोग सासइबर हमले करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसी प्रौद्योगिकियों का लाभ उठा सकते हैं। नए वाहनों में उपयोग होने वाली एम्बेडेड टेथर या स्मार्टफोन मिररिंग या फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए आसानी से निजी डेटा चुराया जा सकता है।

जियोलोकेशन, पर्सनल ट्रिप रेकॉर्ड, और वित्तीय विवरण, क्रिप्टोग्राफिक कीज, इंजिन फेल्योर, एंटी लॉक ब्रेक सिस्टम डिसएबल्ड, व्यक्तिगत जानकारी के कुछ उदाहरण हैं जो संभवत: एआई और एमएल का उपयोग करके वाहन के सिस्टम के माध्यम से चुराए जा सकते हैं। स्वचालित ड्रोन को हैक कर भी हमले किया जा सकते हैं।

फैक्ट्स
-2019 में जीपीएस पासवर्ड में सेंधमारी से भारत, दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को, फिलिपींस समेत दुनिया के कई देशों में कार हैकिंग की गई।
-10 हजार से अधिक गाडिय़ों के जीपीएस सिस्टम की हैकिंग का दावा अब तक एल एंड एम नामक हैकर ग्रुप का
-330 फीट की दूरी से भी ब्लूटूथ ऐप की मदद से जीपीएस सॉफ्टवेयर को हैक कर सकते हैं।
-04 साल में जीपीएस फीचर वाली कारों की संख्या 77.7 करोड़ होने का अनुमान है
-1.06 खरब रुपए से ज्यादा का होगा कार जीपीएस सिस्टम का बाजार 2025 तक
-12345 था ज्यादातर गाडिय़ों का पासवर्ड जिनका जीपीएस सिस्टम हैक किया गया, यह दुनिया का सबसे कॉमन पासवर्ड है



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ये आसान तरीके अपनाकर आप हैकर्स से सुरक्षित रख सकते हैं अपना डाटा

स्मार्टफोन और इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस बन गए हैं। हालांकि टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ साइबर क्राइम भी बढ़ गया है। साइबर क्रिमिनल्स द्वारा डाटा लीक करना या सिस्टम हैक करना आम बात हो गई है। इसकी वजह से कई लोग ठगी का शिकार होते हैं तो कई लोगों के बैंक अकाउंट में सेंध लगा दी जाती है। आजकल लोग अपना ज्यादातर डाटा स्मार्टफोन या लैपटॉप में ही रखते हैं। स्मार्टफोन से डिजिटल ट्रांसजेक्शन का चलन भी बढ़ गया है। ऐसे में हमारे फोन में ही हमारी बैंक डिटेल्स भी रहती है। कई बार हैकर्स सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी हैक कर लेते हैं। ऐसे डाटा को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं, जिससे आप अपने डाटा को हैकर्स से सुरक्षित रख सकते हैंं

पासवर्ड स्ट्रॉन्ग रखें
आप अपने मोबाइल व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का पासवर्ड स्ट्रॉन्ग रखें। पासवर्ड ऐसा होना चाहिए जो, आसानी से कोई खोल न पाए। पासवर्ड स्ट्रॉन्ग रखने के लिए आप स्पेशल कैरेक्टर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ज्यादातर लोग 12345 या अपने नाम का पासवर्ड रख लेते हैं, जिन्हें हैक करना आसान होता है। ऐसे में पासवर्ड बड़ा और स्ट्रॉन्ग रखें। साथ ही टू फैक्‍टर ऑथेंटिफिकेशन भी ऑन करके रखें।

चैट या मैसेजपर आने वाले url जरूर चेक करें
मैसेजिंग एप्स जैसे व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एप्स पर बहुत सारे url आते हैं। इनमें यूजर्स को लुभावने ऑफर्स और स्कीम का झांसा दिया जाता है। कई बार लोग इनके झांसे में आ जाते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप इन यूआरएल को खोलने से पहले ये सुनिश्चित कर लिजिए कि वेबसाइट यूआरएल क्‍या है। अगर यूआरएल संबंधित वेबसाइट का हो तभी उसे ओपन करें।

बिना ईमेल वेरिफाई किए अटैचमेंट ओपन न करें
ईमेल के जरिए भी फ्रॉड होते हैं। ऐसे में कोई ऐसा ईमेल आपके पास आए, जिसमें आपकी कोई गोपनीय जानकारी मापंगी जाए या पासवर्ड रीसेट करने के लिए कहा जाए तो उसे ओपन करने से पहले उसका ‘ट्रू’ एड्रेस जरूर वैरीफाई करें। ईमेल चेक करने के बाद, उसे वैलिड पाने पर ही अटैचमेंट डाउनलोड करें।

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चैट पर शेयर न करें पासवर्ड
इन दिनों इंस्टेंट मैसेजिंग एप ज्यादा पॉपुलर हैं। लोग इन चैट पर अपनी पर्सनल बातें भी शेयर करते हैं। कई बार चैट पर लोग अपने परिवार के सदस्य या करीबी को क्रेडिट कार्ड,डेबिट कार्ड या कोई अन्‍य गोपनीय जानकारी मैसेजिंग एप, टैक्‍सट मैसेज में शेयर कर देते हैं। ऐसी गलती कभी नहीं करनी चाहिए। ऐसी जानकारी को टुकड़ों में अलग—अलग प्लेटफॉर्म्स पर दें। मैसेजिंग एप की चैट को लीक किया जा सकता है। ऐसे में हैकर्स आपकी निजी जानकारी का फायदा उठा सकते हैं। चैट की बैकअप फाइल, जिस भी लोकेशन पर स्‍टोर होती हैं, वह लोकेशन या डायरेक्‍टरी या फोल्‍डर बाकी एप्‍स के साथ भी शेयर होती हैं और वे उसे रीड कर सकते हैं।

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ऐप्स को दें कम से कम परमिशन
हम स्मार्टफोन्स में बहुत सारी ऐप्स डाउनलोड करके खरते हैं। सभी एप्स यूजर्स से डाटा एक्सेस करने की कुछ परमशनि मांगती हैं। ये ऐप्स आपके डाटा को सर्वर पर स्टोर रखती है। यहां से आपका डाटा चेारी हो सकता है। बता दें कि कई बार ऐसी ऐप्स के बारे में जानकारियां सामने आई हैं, जो यूजर्स का डाटा थर्ड पार्टी को बेच देती थीं। ऐसे में अपने स्मार्टफोन में एप्स को कम से कम परमिशन दें।



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Friday, December 25, 2020

अक्टूबर में BSNL ने गंवाए 50 हजार ब्राडबैंड कनेक्क्शन, Airtel ने फिर पछाड़ा Jio को पढें पूरी रिपोर्ट

कोराना वायरस की वजह से इंटरनेट की खतप बढ़ गई है। वर्क फ्रॉम होम और स्टडी फ्रॉम होम के चलते काफी लोगों ने ब्राडबैंड कनेक्षन भी लगवा लिए हैं। हालांकि भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने अपने बहुत सारे ब्राडबैंड सबसक्राइबर्स गंवा दिए हैं। वहीं अन्य टेलिकॉम कंपनियों रिलायंस जियो और एयरटेल के सब्सक्राइबर्स में बढ़ोतरी हुई है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर माह में बीएसएनल ने करीब 50 हजार वायर्ड ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स गंवा दिए। हालांकि इस नुकसान के बाद भी बीएसएनएल अभी भी ब्रॉडबैंड सेगमेंट में सबसे ऊपर है।

सितंबर में इतने सब्सक्राइबर्स थे बीएसएनएल के
ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर माह में बीएसएनएल के ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 78 लाख थी। वहीं अक्टूबर में यह संख्या घटकर 77.6 लाख रह गई है। वहीं अक्टूबर महीने में जियो और एयरटेल के उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ी है। सितंबर में एयरटेल एक्सट्रीम फाइबर के यूजर्स की संख्या 26 लाख थी, जो अक्टूबर में बढ़कर 26.7 लाख पहुंच गई। वहीं वायरलेस सेगमेंट में रिलायंस जियो टॉप पोजिशन पर है। जियो के वायरलेस यूजर्स की संख्या 40.636 करोड़ हो गई है।

एयरटेल दूसरे नंबर पर
वायर्ड यूजर्स के मामले में भारती एयरटेल दूसरे नंबर पर है। इसके वायर्ड यूजर्स की संख्या 26.7 लाख हो गई है। वहीं तीसरे नंबर पर ।जतपं ब्वदअमतहमदबम है। इसके वायर्ड यूजर्स की संख्या 17.4 लाख है। रिलायंस जियो इस सूची में चौथे नंबर है। जियो के वायर्ड यूजर्स की संख्या 17 लाख है। बता दें कि सितंबर महीने में जियो के ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या 15.2 लाख थी, जो अक्टूबर महीने में 17 लाख पहुंच गई है।

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1.17 अरब वासरलेस कनेक्शन
वहीं वायरलेस कनेक्शन की बात करें तो ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल फोन कनेक्शनों की संख्या अक्टूबर में बढ़कर 1.17 अरब पर पहुंच गई। वायरलेस कनेक्षन के मामले में अक्टूबर माह में एयरटेल ने जियो को पछाड़ दिया। अक्टूबर में एयरटेल ने जियो से ज्यादा यूजर्स जोड़े। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की मासिक रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में देश में कुल फोन कनेक्शनों में से 98 प्रतिशत मोबाइल कनेक्शन थे।

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एयरटेल के वायरलेस यूजर्स हुए 33.02 करोड़
नए वायरलेस यूजर्स के मामले में एयरटेल ने एक बार फिर से जियो को पछाड़ दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, एयरटेल ने अक्टूबर माह में जियो से ज्यादा वायरलेस सब्सक्राइबर्स जोड़े। इससे पहले सितंबर में भी एयरटेल ने नए कनेक्शनों के मामले में जियो को पछाड़ा था। ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार, एयरटेल ने अक्टूबर में 36.7 लाख नए ग्राहक जोड़े। इससे उसके मोबाइल कनेक्शनों की संख्या बढ़कर 33.02 करोड़ पर पहुंच गई है। वहीं जियो ने अक्टूबर में 22.2 लाख नए मोबाइल ग्राहक बनाए। अब जियो के वायरलेस यूजर्स की संख्या 40.63 करोड़ हो गई है।



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अगर नहीं किया ये काम तो 2021 से पुराने स्मार्टफोन में नहीं चला पाएंगे इंटरनेट, यहां जानें डिटेल

आजकल मार्केट में जो एंड्रॉड स्मार्टफोन आ रहे हैं, वे लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम और लेटेस्ट फीचर्स से लैस होते हैं। हालांकि अब भी बहुत सारे लोग पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन ही काम में ले रहे हैं। ऐसे में उन्हें अगले साल यानि 2021 में इन पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में इंटरनेट चलाने में परेषानी का सामना करना पड़ सकता है। पिछले दिनों एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ। रिपोर्ट में बताया गया था कि 2021 से पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में वेब ब्राउजिंग नहीं कर पाएंगे।

इन स्मार्टफोन्स में आ सकती है परेशानी
पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स पर अगले वर्ष से सिक्योर वेबसाइट्स एक्सेस नहीं हो पाएंगी। 7.1.1 nougat या इससे पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर सिक्योर वेबसाइट्स को सर्च करने पर सर्टिफिकेशन्स एरर का मैसेज मिलेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुराने एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले स्मार्टफोन पर कई तरह की जरूरी वेबसाइट को एक सितंबर 2021 के बाद खोला नही जा सकेगा।

खत्म हो रही पार्टनरशिप
बता दें कि Let’s Encrypt ने ऐलान किया है कि प्रमाणन प्राधिकरण IdenTrust के साथ कंपनी की साझेदारी 1 सितंबर 2021 से समाप्त हो रही है। साथ ही इस पार्टनरशिप को रिन्यू करने का फिलहाल कोई प्लान भी नहीं है। ऐसे में सितंबर 2021 से यह पार्टनरशिप खत्म होने के बाद सिक्योर वेबसाइट को एक्सेस नही किया जा सकेगा।

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ऐसे बच सकते हैं इस समस्या से
अगर आप इस समस्या से बचना चाहते हैं तो या तो आप अपना स्मार्टफोन बदलकर लेटेस्ट वर्जन ले लें। या फिर आप अपने पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन को अपग्रेड कर लें। इसके अलावा एक और विकल्प है। आप अपने फोन में Firefox ब्राउजर का इस्तेमाल कर लें। बता दें कि Firefox उन चुनिंदा ब्राउजर में से है, जिसके पास अपनी खुद की ट्रस्टेड सर्टिफिकेशन रूट मौजूद है। ऐसे में इसका लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल करें।

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वर्ष 2016 से सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं हुआ जारी
बता दें कि Lets Encrypt दुनिया की लीडिंग सर्टिफिकेट अथॉरिटी है। यह करीब 30 फीसदी वेब डोमेन को सर्टिफिकेशन जारी करता है। वहीं वर्ष 2016 के बाद से इसकी तरफ से कोई सॉफ्टवेयर अपडेट जारी नही किया गया है। बता दें कि दुनियाभर में करीब 66.2 फीसदी एंड्रॉयड डिवाइस पुराने एंड्राइड वर्जन 7.1 और उससे अपग्रेड वर्जन के ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं। जबकि 33.8 फीसदी एंड्रॉयड डिवाइस अभी भी 7.1 और उससे कम वर्जन वाले ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं। ऐसे में ये 33.8 फीसदी यूजर सितंबर 2021 के बाद सिक्योर वेबसाइट्स एक्सेस नही कर पाएंगे।



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Thursday, December 24, 2020

Google Chrome में जुड़ेगा नया फीचर, वॉयस सर्च करना होगा और भी आसान, जानिए कैसे

सॉफ्टवेयर दिग्गज कंपनी गूगल (Google) अपनी सर्विसेज और एप्स को यूजर्स के लिए बेहतर बनाने में जुटी है। इसके लिए वह अपने एप्स में नए-नए फीचर्स जोड़ रही है। अब गूगल क्रोम (Google Chrome) ब्राउजर में एक नया फीचर जोड़ा गया है। इस फीचर की मदद से यूजर्स को वॉयस सर्च में और आसानी होगी। बता दें कि गूगल क्रोम ब्राउजर पर पहले से ही वॉयस सर्च का ऑप्शन है, जो कि अब काफी पुरानी हो चुका है।

वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अब गूगल असिस्टेंट इंटीग्रेशन लेकर आ रहा है जो कि वॉयस सर्च से भी ज्यादा आसान होगी। हालांकि गूगल क्रोम ब्राउजर का यह नया फीचर एंड्रॉयड यूजर्स के लिए ही रोल आउट किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि आईओएस यूजर्स के लिए भी जल्द ही यह फीचर जारी किया जाएगा।

कुछ भी पूछ सकेंगे गूगल से
रिपोर्ट के अनुसार, इस नए फीचर से यूजर्स गूगल असिस्टेंट को गूगल क्रोम से इंटीग्रेट कर पाएंगे। गूगल असिस्टेंट को गूगल क्रोम से इंटीग्रेट करने के बाद यूजर्स माइक पर टैप करके गूगल से कुछ भी पूछ सकेंगे।. इस फीचर से वॉयस सर्च और ज्यादा आसान होगी। गूगल यूजर्स के हर सवाल का जवाब देगा। यह फीचर वॉयस सर्च को ज्यादा आसान बनाएगा। हालांकि कंपनी की तरफ से फिलहाल इस फीचर को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी इस फीचर को अगले साल जनवरी में रोल आउट कर सकती है।

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लेटेस्ट वर्जन को करेगा सपोर्ट
यूजर्स को इस फीचर का लाभ उठाने के लिए अपने डिवाइस में गूगल क्रोम ब्राउजर को अपडेट करना होगा। गूगल क्रोम का यह नया फीचर लेटेस्ट वर्जन को ही सपोर्ट करेगा। गूगल ने दावा किया है कि पिछले कुछ सालों में क्रोम में 87 अपडेट सबसे ज्यादा यूज किया गया है। वहीं कंपनी का कहना है कि क्रोम का यह वर्जन पहले के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा फास्ट है। साथ ही यह रैम की भी कम खपत करता है। इसके अलावा बैटरी भी कम यूज होती है।

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गूगल सर्च में भी होगा बदलाव
बता दें कि गूगल अपने सर्च इंजन गूगल सर्च में भी कुछ बदलाव करने जा रहा है। हाल ही इसको लेकर जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि गूगल सर्च के इंटरफेस में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। इस बदलाव से यूजर्स को गूगल पर कुछ भी सर्च करने में आसानी होगी। इसमें यूजर्स को गूगल सर्च में समय की बचत होगी। बताया जा रहा है कि गूगल सर्च का यह फीचर फिलहाल टेस्टिंग मोड में चल रहा है।



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Apple के साथ प्राइवेसी पॉलिसी की लड़ाई में Facebook ने उठाया बड़ा कदम, जानिए क्या

आईफोन निर्माता कंपनी एप्पल (Apple) की नई प्राइवेसी पॉलिसी (Apple Privacy Policy) को लेकर फेसबुक (Facebook) और एप्पल में ठन गई है। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के सीईओ टिम कुक इस मामले में आमने-सामने आ गए हैं। अब इनकी लड़ाई एक कदम और आगे बढ़ गई है और दोनों कंपनियां खुलकर एक-दूसरे के खिलाफ सामने आ गई हैं। बता दें कि फेसबुक को एप्पल की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर आपत्ति है।

वहीं यूजर्स के लिए इस प्राइवेसी पॉलिसी को लाभदायक बताया जा रहा है। फेसबुक का आरोप है कि एप्पल की यह प्राइवेसी पॉलिसी एकतरफा है और इससे छोटे व्यापारियों को नुकसा होगा। वहीं एप्पल ने भी फेसबुक के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए जवाब दिया था।

एप्पल के फेसबुक पेज का वेरिफिकेशन हटाया
अब फेसबुक ने इस प्राइवेसी पॉलिसी की लड़ाई में एक कदम आगे बढ़ाते हुए एप्पल कंपनी के फेसबुक पेज का वेरिफिकेशन हटा दिया है। हालांकि फेसबुक ने यह नहीं बताया कि उसने ऐसा क्यों किया। बता दें कि फेसबुक पर तमाम बड़ी कंपनियों और ऑर्गेनाइजेशन के फेसबुक पेज ब्लू टिक के साथ वेरिफाइड हैं। एप्पल का इंस्टाग्राम पेज अभी भी ब्लू टिक के साथ वेरिफाइड है, लेकिन फेसबुक पेज का वेरिफिकेशन हटा दिया गया है।

क्या है एप्पल की नई प्राइवेसी पॉलिसी में
ब्ता दें कि एप्पल ने हाल ही अपने एप स्टोर के लिए नई प्राइवेसी पॉलिसी जारी की है। इस प्राइवेसी पॉलिसी के तहत एप्पल के एप स्टोर पर मौजूद सभी एप्स को एप स्टोर पर अपने एप पब्लिश करने से पहले ही बताना होगा कि वह यूजर्स की कौन-कौन सी जानकारियां इकट्ठा करेंगी। साथ ही एप्स को यह भी बताना होगा कि वह यूजर्स का डाटा किस काम में लेगी। एप स्टोर में हर एप के साथ प्राइवेसी पॉलिसी में डाटा कलेक्शन और एक्सेस समेत कई जानकारियां देनी होंगी।

यह भी पढ़ें -एक विज्ञापन को लेकर आमने-सामने आए Apple और Facebook, जानें क्या है मामला

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यूजर्स के लिए फायदेमंद
एप्पल की इस नई प्राइवेसी पॉलिसी को यूजर्स के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है। इससे यूजर्स को यह पता चल जाएगा कि कौन सी एप उनका कौन सा डाटा और कौन सी जानकारियां इकट्ठा कर रही हैं और क्यों। इससे यूजर चाहे तो उस एप की प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ने के बाद उसे डाउनलोड करे या न करे, यह यूजर पर निर्भर होगा। बता दें कि नई पॉलिसी एप्पल के इनहाउस एप्स पर भी लागू होगी।

यह भी पढ़ें -जानिए क्या है Apple App Privacy फीचर, हर एप को बतानी होंगी यूजर्स के डाटा के बारे में ये जानकारियां

फेसबुक ने जताया विरोध
वहीं फेसबुक को एप्पल की इस नई प्राइवेसी पॉलिसी पर आपत्ति है। इसी वजह से फेसबुक ने पिछले दिनों अमरीका के कई अखबरों में विज्ञापन छपवाकर एप्पल की इस प्राइवेसी पॉलिसी पर आपत्ति जताई थी। वहीं व्हाट्सएप ने भी एप्पल की इस नई पॉलिसी की आलोचना करते हुए कहा कि एपल का नया एप न्यूट्रिशन लेबल पक्षपातपूर्ण है। वहीं एप्पल का कहना है कि नया प्राइवेसी नियम थर्ड पार्टी एप और एप्पल के सभी इनहाउस एप्स पर भी लागू होगा।



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Apple के साथ प्राइवेसी पॉलिसी की लड़ाई में Facebook ने उठाया बड़ा कदम, जानिए क्या

आईफोन निर्माता कंपनी एप्पल (Apple) की नई प्राइवेसी पॉलिसी (Apple Privacy Policy) को लेकर फेसबुक (Facebook) और एप्पल में ठन गई है। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के सीईओ टिम कुक इस मामले में आमने-सामने आ गए हैं। अब इनकी लड़ाई एक कदम और आगे बढ़ गई है और दोनों कंपनियां खुलकर एक-दूसरे के खिलाफ सामने आ गई हैं। बता दें कि फेसबुक को एप्पल की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर आपत्ति है।

वहीं यूजर्स के लिए इस प्राइवेसी पॉलिसी को लाभदायक बताया जा रहा है। फेसबुक का आरोप है कि एप्पल की यह प्राइवेसी पॉलिसी एकतरफा है और इससे छोटे व्यापारियों को नुकसा होगा। वहीं एप्पल ने भी फेसबुक के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए जवाब दिया था।

एप्पल के फेसबुक पेज का वेरिफिकेशन हटाया
अब फेसबुक ने इस प्राइवेसी पॉलिसी की लड़ाई में एक कदम आगे बढ़ाते हुए एप्पल कंपनी के फेसबुक पेज का वेरिफिकेशन हटा दिया है। हालांकि फेसबुक ने यह नहीं बताया कि उसने ऐसा क्यों किया। बता दें कि फेसबुक पर तमाम बड़ी कंपनियों और ऑर्गेनाइजेशन के फेसबुक पेज ब्लू टिक के साथ वेरिफाइड हैं। एप्पल का इंस्टाग्राम पेज अभी भी ब्लू टिक के साथ वेरिफाइड है, लेकिन फेसबुक पेज का वेरिफिकेशन हटा दिया गया है।

क्या है एप्पल की नई प्राइवेसी पॉलिसी में
ब्ता दें कि एप्पल ने हाल ही अपने एप स्टोर के लिए नई प्राइवेसी पॉलिसी जारी की है। इस प्राइवेसी पॉलिसी के तहत एप्पल के एप स्टोर पर मौजूद सभी एप्स को एप स्टोर पर अपने एप पब्लिश करने से पहले ही बताना होगा कि वह यूजर्स की कौन-कौन सी जानकारियां इकट्ठा करेंगी। साथ ही एप्स को यह भी बताना होगा कि वह यूजर्स का डाटा किस काम में लेगी। एप स्टोर में हर एप के साथ प्राइवेसी पॉलिसी में डाटा कलेक्शन और एक्सेस समेत कई जानकारियां देनी होंगी।

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यूजर्स के लिए फायदेमंद
एप्पल की इस नई प्राइवेसी पॉलिसी को यूजर्स के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है। इससे यूजर्स को यह पता चल जाएगा कि कौन सी एप उनका कौन सा डाटा और कौन सी जानकारियां इकट्ठा कर रही हैं और क्यों। इससे यूजर चाहे तो उस एप की प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ने के बाद उसे डाउनलोड करे या न करे, यह यूजर पर निर्भर होगा। बता दें कि नई पॉलिसी एप्पल के इनहाउस एप्स पर भी लागू होगी।

यह भी पढ़ें -जानिए क्या है Apple App Privacy फीचर, हर एप को बतानी होंगी यूजर्स के डाटा के बारे में ये जानकारियां

फेसबुक ने जताया विरोध
वहीं फेसबुक को एप्पल की इस नई प्राइवेसी पॉलिसी पर आपत्ति है। इसी वजह से फेसबुक ने पिछले दिनों अमरीका के कई अखबरों में विज्ञापन छपवाकर एप्पल की इस प्राइवेसी पॉलिसी पर आपत्ति जताई थी। वहीं व्हाट्सएप ने भी एप्पल की इस नई पॉलिसी की आलोचना करते हुए कहा कि एपल का नया एप न्यूट्रिशन लेबल पक्षपातपूर्ण है। वहीं एप्पल का कहना है कि नया प्राइवेसी नियम थर्ड पार्टी एप और एप्पल के सभी इनहाउस एप्स पर भी लागू होगा।



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Wednesday, December 23, 2020

लॉन्च हुई स्वदेशी क्लाउड सर्विस DigiBoxx, फ्री में स्टोर कर सकते हैं 20 जीबी तक डाटा

लोग अपना डाटा स्टोर करने के लिए क्लाउड सर्विस (Cloud Service) का इस्तेमाल करते हैं। वहीं हाल ही गूगल (Google) ने घोषणा की थी वह 1 जून 2021 से अनलिमिटेड फ्री फोटो अपलोड की बंद कर देगी। इस बीच मेड इन इंडिया क्लाउड सर्विस की घोषणा की गई है। इसमें यूजर्स को 20 जीबी डाटा स्टोर करने की सुविधा मिलेगी। दरअसल नीति आयोग ने क्लाउड स्टोरेज सर्विस डिजी बॉक्स (DigiBoxx)का लॉन्च कर दिया है। इस सर्विस के लॉन्च होने से भारतीयों का डाटा देश में ही सुरक्षित रहेगा। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कान्त ने इस क्लाउड स्टोरेज और फाइल शेयरिंग सेवा की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा देगा।

क्या है क्लाउड सर्विस
बता दें कि क्लाउड एक ऐसी सर्विस होती है, जिसमें यूजर अपना डाटा ऑनलाइन स्टोर करके रख सकते हैं। वहीं जरूरत पड़ने पर इसे एक्सेस किया जा सकता है। अभी तक भारत में यह क्लाउड सर्विस विदेशी कंपनी ही दे रही थी। अब स्वदेशी सर्विस डिजी बॉक्स के आ जाने से भारतीयों के लिए यह सर्विस काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। DigiBoxx के जरिए यूजर्स अपना डाटा स्टोर कर सकते हैं। इसके उन्हें अपनी आईडी बनानी होगी। इसेें ई-मेल और मोबाइल नंबर के जरिए दूसरों के साथ भी शेयर कर सकते हैं।

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अभी सिर्फ वेब एक्सेस
DigiBoxx को अभी सिर्फ वेब एक्सेस किया जा सकता है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार यह सर्विस एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइसेज के लिए भी जल्द ही लॉन्च की जाएगी। इसमें यूजर्स को 20 जीबी तक फ्री सर्विस मिलेगी। इसमें यूजर्स अधिकतम 2जीबी तक की फाइल्स अपलोड कर सकते हैं। इसके प्लान वीकली और ईयरली मिलेगा।

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ये हैं प्लान
अन्य क्लाउड सर्विस की तरह DigiBoxx में भी यूजर्स को सब्सक्रिप्शन प्लान सालाना और प्रतिमाह के हिसाब से मिलेगा। इस स्वदेषी क्लाउड सर्विस का सब्सक्रिप्शन यूजर्स मात्र 30 रुपये प्रति माह के हिसाब से ले सकते हैं। इस प्लान में यूजर्स को 5 टीबी स्टोरेज मिलेगी और अधिकतम 10जीबी तक की फाइल को अपलोड कर पाएंगे। इसमें यूजर्स अपने जीमेल को भी कनेक्ट कर सकते हैं। वहीं 999 रुपए वाले प्लान में 50टीबी तक की स्टोरेज मिलेगी और अधिकतम 10जीबी की फाइल को अपलोड किया जा सकेगा। इसमें 500 लोगों को एक्सेस मिल सकता है।



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