Friday, November 20, 2020

Facebook कंटेंट के हर 10,000 में से 10 से 11 नफरत फैलाने वाले पोस्ट, कंपनी ने लिया एक्शन

आजकल ज्यादातर लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। लोग अपनी बात रखने के लिए या किसी बात का विरोध करने के लिए भी ट्विटर (Twitter), इंस्टाग्राम (Instagram) और फेसबुक (Facebook) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेते हैं। हालांकि पिछले कुछ समय में इन प्लेटफॉर्म्स पर नेगेटिविटी भी बढ़ गई है। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद लोगों ने कई सेलेब्स को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया। इसी वजह से बहुत से सेलेब्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से दूरी बना ली थी। अब फेसबुक ने पहली बार हेट स्पीच का खुलाया किया है।

किया हेट स्पीच का खुलासा
फेसबुक पोस्ट में भी किए जाने कमेंट्स में कई हेट स्पीच वाले कमेंट होते हैं। फेसबुक ने खुलासा करते हुए बताया कि साल 2020 में जुलाई से सितंबर तक की अवधि में फेसबुक में हेट स्पीच या नफरत फैलाने वाली बातों इत्यादि का प्रसार 0.10 से 0.11 प्रतिशत के बीच में रहा। मतलब फेसबुक पर पोस्ट किसी कंटेंट के हर 10,000 व्यूज में से 10 से 11 हेट स्पीच में शामिल रहे। कंपनी ने खुद इस बात की जानकारी दी है।

95 फीसदी हेट स्पीच को किया गया रिमूव
फेसबुक को अक्सर नफरत या हिंसा फैलाने वाले पोस्ट, स्पीच या कमेंट्स के चलते आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से पहली बार अपने प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच के प्रसार का खुलासा करते हुए फेसबुक ने कहा कि कंपनी ने सक्रियता से इस दिशा में काम करते हुए लगभग 95 फीसदी हेट स्पीच को रिमूव कर दिया है।

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कैलकुलेट कर करते हैं लेबलिंग
फेसबुक ने अपने एक बयान में कहाकि फेसबुक पर हेट स्पीच की संख्या को कैलकुलेट करते हैं और फिर हम इस आधार पर इनकी लेबलिंग करते हैं कि इसने हमारी हेट स्पीच पॉलिसी का कितना उल्लंघन किया है। चूंकि हेट स्पीच भाषा और संस्कृति पर आधारित होती है, तो हम समीक्षकों को भिन्न भाषाओं व क्षेत्रों से संबंधित इनमें से कुछ चुने हुए सैंपल भेजते हैं।

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हेट स्पीच को परिभाषित करना आसान नहीं
हालांकि फेसबुक का मानना है कि हेट स्पीच को परिभाषित करना आसान नहीं है क्योंकि हेट स्पीच किसे कहेंगे और किसे नहीं, इस पर अलग-अलग राय है। कंपनी ने आगे कहा कि इतिहास, भाषा, धर्म, बदलते सांस्कृतिक मानंदड सभी वे महत्वपूर्ण कारक हैं, जिन पर हम अपनी नीतियों को परिभाषित करते हैं।



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