Monday, November 30, 2020

PUBG की लॉन्चिंग से पहले गूगल प्ले-स्टोर पर लाइव हुआ मेड इन इंडिया गेम FAU-G, ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

पॉपुलर गेम PUBG Mobile के बैन की घोषणा के बाद बॉलीवुड अभिनेता क्कर देने के लिए मेड इन इंडिया गेम FAU-G का ऐलान किया था। हालांकि अब पबजी भी जल्द ही भारत में फिर से लॉन्च होने जा रहा है। इसकी लॉन्चिंग से पहले FAU-G गेम के प्री—रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। FAU-G: Fearless and United Guards गेम गूगल प्ले-स्टोर पर लिस्ट हो गया है, जहां रजिस्ट्रेशन का विकल्प दिख रहा है। बता दें कि इस गेम का ऐलान पबजी के रिप्लेसमेंट के तौर पर किया गया था।

पहला एपिसोड गलवान घाटी पर आधारित
इस मल्टीप्लेयर FAU-G गेम में प्लेयर्स भारतीय सेना के अवतार में होंगे। पिछले महीने इसका टीजर भी जारी किया गया था। इसका टीजर अभिनेता अक्षय कुमार ने जारी किया था। बता दें कि टीजर के अनुसार, FAU-G गेम का पहला एपिसोड गलवान घाटी की घटना पर आधारित है। टीजर में गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों को चीनी सैनिकों से लड़ते हुए दिखाया गया था।

डिस्क्रिप्शन में यह लिखा
गूगल प्ले-स्टोर पर लिस्ट किए गए फौजी गेम के डिस्क्रिप्शन में लिखा है कि भारत की उत्तरी सीमा पर चोटियों एक ग्रुप राष्ट्र के गौरव और संप्रभुता की रक्षा करता है। सबसे साहसी: द फियरलेस और यूनाइटेड गार्ड्स के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण काम है। आप भी खतरनाक सीमा क्षेत्र में गश्त पर एफएयू-जी कमांडो की एक विशेष इकाई में शामिल हों और एक देशभक्त सैनिक की तरह बहादुरी, भाईचारे और बलिदान का अनुभव करें।

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फिलहाल सिर्फ एंड्रॉयड यूजर्स के लिए
FAUG एप डेवलपर्स n-Core गेम्स ने गुरूपूरव पर्व के पावन मौके पर गेम के प्री-रजिस्ट्रेशन का ऐलान किया। यूजर्स Google Play Store से गेम का प्री-रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। हालांकि FAUG गेम का प्री-रजिस्ट्रेशन फिलहाल सिर्फ एंड्रॉयड यूजर्स के लिए ही उपलब्ध कराया गया है। कंपनी ने अभी इस बात की जानकारी नहीं दी है कि iOS यूजर के लिए गेम को कब लॉन्च किया जाएगा।

ऐसे करें प्री-रजिस्ट्रेशन
FAUG गेम के प्री रजिस्ट्रेशन के लिए एंड्रॉयड यूजर्स को nCore के ट्वीटर हैंडल पर जाना होगा। यहां यूजर्स को रजिस्ट्रेशन का लिंक मिलेगा। इसके अलावा यूजर्स को Google Play Store से भी रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। गूगल प्ले स्टोर से रजिस्ट्रेशन कराने के लिए यूजर्स को प्ले स्टोर पर जाकर FauG सर्च करना होगा। इसके बाद उनको वहां प्री रजिस्ट्रेशन का ऑप्शन दिखेगा।

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कमाई का 20 फीसदी हिस्सा जाएगा भारत के वीर ट्रस्ट में
बता दें कि FAU-G गेम को भारतीय गेम डेवलपर कंपनी nCore गेम्स ने तैयार किया है। इसके को—फाउंडर का कहना है कि यह गेम पबजी रिप्लेस करेगा। बता दें कि इस गेम से होने वाली कमाई का 20 फीसदी हिस्सा भारत के वीर ट्रस्ट को जाएगा। 'भारत के वीर' को सेना के जवानों को समर्पित एक संस्था है, जिसकी स्थापना गृह मंत्रालय की ओर से की गई है।



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गैजेट: भारतीय की कंपनी ने बनाई ऐसी 'स्मार्ट रिंग' जो कोरोना संक्रमण का पता लगाने में सक्षम

कोरोना के संक्रमण (Novel Corona Virus) से बचने के लिए सोशल-फिजिकल डिस्टैन्सिंग (Social Distancing or Physical Distancing) और मास्क (Use of Facemask) के उपयोग को ही सबसे अधिक कारगर माना जा रहा है। लेकिन फ्रंटलाइन में खड़े चिकित्साकर्मियों और नर्सिंग स्टाफ को संक्रमण से खुद को बचाना और रोगियों का इलाज करना एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इस परेशानी को समझते हुए एक भारतीय ने अपनी कंपनी में ऐसी डिवाइस (Usefull Device) है जो न केवल संक्रमण से है, बल्कि स्वास्थय सम्बन्धी ज़रूरी सलाह भी दे रही है।

गैजेट: भारतीय की कंपनी ने बनाई ऐसी 'स्मार्ट रिंग' जो कोरोना संक्रमण का पता लगाने में सक्षम

सैन फ्रांसिस्कों के रहने वाले भारतीय मूल के अमरीकी हरप्रीत सिंह राय की कंपनी ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है जो कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने में सक्षम है। उनकी कंपनी ने अंगूठी के आकार का एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस एल्गोरिदम 'औरा' (OURA) बनाया है जिसे सैन फ्रांसिस्को और कैलिफोर्निया के अस्पतालोंमें 2 हजार से ज्यादा चिकित्साकर्मी पहने हुए हैं। इस डिवाइस में 1.5 लाख से ज्यादा लोगों का डेटा है जिसे स्कैन कर डिवाइस उपयोगकर्ता को आसपास मौजूद संभावित कोरोना संक्रमित के बारे में सूचित करता है।

गैजेट: भारतीय की कंपनी ने बनाई ऐसी 'स्मार्ट रिंग' जो कोरोना संक्रमण का पता लगाने में सक्षम

इतना ही नहीं यह पहनने वाले के स्वास्थ्य संबंधी शुरुआती लक्ष्णों के आधार पर भी कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि करने में सक्षम है। कंपनी इसे दुनिया की पहली वैलनेस रिंग (WORLD'S FIRST WELLNESS RING) कह रही है। यह डिवाइस हमारी नींद लेने की प्रक्रिया (Sleeping Pattern) , जीवनशैली (Life Style), गतिविधियों में व्यस्त रहने की समयावधि और शरीर के मानसिक प्रतिक्रिया के आधार पर रूटीन जांच भी करता है।

गैजेट: भारतीय की कंपनी ने बनाई ऐसी 'स्मार्ट रिंग' जो कोरोना संक्रमण का पता लगाने में सक्षम

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LG का cloi servebot करेगा इंडोर डिलिवरी, ट्रायल शुरू, जानिए कैसे काम करेगा यह रोबोट

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (LG Electronics) इन दिनों नई—नई टेक्नोलॉजी पर प्रयोग कर रही है। पिछले दिनों LG ने रोलेबल टीवी लॉन्च किया था,जिसे पोस्टर की तरह पलेटकर एक बॉक्स में रखा जा सकता है। इसके अलावा हाल ही एलजी ने एक रोलेबल लैपटॉप भी पेटेंट कराया है। इस लैपटॉप की स्क्रीन और की—बोर्ड को यूजर्स अपनी आवश्यकता अनुसार छोटी—बड़ी कर सकते हैं। अब कंपनी ने इंडोर डिलिवरी सर्विस के लिए रोबोट पर ट्रायल शुरू किया है। इस रोबोट को क्लोई सर्वबोट (cloi servebot) नाम दिया है।

15KG तक के सामान की कर सकता है डिलीवरी
एलजी ने क्लोई सर्वबोट के नाम से अपने इंडोर रोबोट के लिए ट्रायल शुरू कर दिया है। इसमें तीन ड्रॉअर्स होंगे, जिसमें 15 किलोग्राम तक के सामान को कैरी कर रिमोट कंट्रोल के बिना अपने गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा।

कंपनी ने एक बयान में कहा कि एलजी साइंस पार्क के भीतर लोकल स्टोर चेन जीएस25 द्वारा संचालित दुकानों में सुविधा के मद्देनजर क्लोई सर्वबोट की मदद से उपभोक्ताओं तक उत्पादों की डिलीवरी की जाएगी।

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सोल नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में रोबोट असिस्टेंट
बता दें कि कंपनी की तरफ से इससे पहले सोल नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में रोबोट असिस्टेंट की तैनाती की जा चुकी है, जहां ये तमाम उपकरण, ब्लड सैंपल, प्रेसक्रिप्शन सहित कई अन्य सामानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते हैं, जिससे यहां के कर्मियों पर अतिरिक्त काम का बोझ नहीं पड़ता और वे अपने मरीजों को ज्यादा से ज्यादा वक्त दे पाते हैं।

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यूजर्स एप के जरिए दे सकेंगे ऑर्डर
एलजी ने कहा कि लंच बॉक्स, सैंडविच, ड्रिंक्स पहुंचाने के लिए ये रोबोट बेसमेंट से लेकर नौवें माले तक खुद-ब-खुद लिफ्ट में चढ़ने व उतरने में सक्षम हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कस्टमर्स काकाओ टॉक चैट एप के इस्तेमाल से अपना ऑर्डर दे सकेंगे, जिसके बाद स्टोर के कर्मचारी ऑर्डर के हिसाब से रोबोट के ड्रॉअर्स में सामान रख देंगे और डेस्टिनेशन को इन्पुट कर देंगे।



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Sunday, November 29, 2020

अब जल्द ही एंड्राइड मोबाइल एप विंडोज-10 में भी चल सकेंगे

नई दिल्ली । माइक्रोसॉफ्ट एक ऐसे प्रोजेक्ट 'लाटे' के साथ काम कर रहा है, जिससे ऐप डवलपर्स कोड्स में थोड़े बहुत बदलाव के साथ अपने एंड्राइड ऐप को सीधे विंडोज ऐप पर चला सकेंगे। विंडोज सेंट्रल की रिपोर्ट्स के अनुसार, डवलपर्स को अपने एंड्राइड ऐप्स को एमएसआईएक्स फॉरमेट के अनुसार पैकेज करना होगा और इसे माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में सबमिट करना होगा।

एमएसआईएक्स एक विंडोज ऐप पैकेज फॉरमेट है जो सभी विंडोज ऐप्स को आधुनिक पैकेजिंग अनुभव मुहैया कराता है। मैजूदा समय में यूजर विंडोज 10 के लिए बने ऐप 'योर फोन' के जरिए अपने पीसी पर एंड्राइड ऐप चला सकते हैं। इसका इस्तेमाल हालांकि कुछ सेमसंग फोन से ही किया जा सकता है।

प्रोजेक्ट लाटे से अब डवलपर्स अपने उन ऐप को विंडोज 10 पर ला सकेंगे जो जिसका विंडोज वर्जन उपलब्ध नहीं थे। प्रोजेक्ट लाटे हालांकि प्ले सर्विस को सपोर्ट नहीं करेगा, क्योंकि गुगल नेटिव एंड्राइइ ऐप और क्रोम ओसएस के छोड़कर इस सेवा को कहीं भी इंस्टाल करने की अनुमति नहीं देता है।



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79,900 रुपए के iPhone 12 को बनाने में खर्च होते हैं मात्र 27,500 रुपए, यहां जानें लागत व कीमत का सच

iPhone को लग्जरी आइटम में गिना जाता है। लोग इसे स्टेटस सिंबल से भी जोड़ते हैं। ऐसे में आईफोन की काफी डिमांड रहती है। हालांकि यह सामान्य स्मार्टफोन्स से ज्यादा मंहगे होते हैं। iPhone निर्माता कंपनी Apple ने इसी वर्ष अक्टूबर माह में iPhone 12 सीरीज लॉन्च की। इस सीरीज के तहत कंपनी ने iPhone 12 Mini, iPhone 12, iPhone 12 Pro और iPhone 12 Pro Max लॉन्च किए। बता दें कि भारत में iPhone 12 की कीमत 79,900 रुपए और iPhone 12 Pro की कीमत 1,19,900 रुपए है। अब आईफोन्स की लागत और कीमत से जुड़ी डिटेल्स सामने आई हैं।

iPhone 12 बनाने में आता है इतना खर्च
Nikkei ने टोक्यो बेस्ड रिसर्च स्पेशलिस्ट Fomalhaut Techno Solutions के साथ मिलकर iPhone 12 और iPhone 12 Pro के Bill of Materials बताए हैं। इन बिल ऑफ मटीरियल्स के अनुसार, iPhone 12 बनाने में 373 डॉलर (करीब 27,500 रुपए) का खर्च आता है। वहीं iPhone 12 Pro बनाने में 406 डॉलर (करीब 30,000 रुपए) का खर्च आता है। हालांकि, रिटेल में जाने के बाद कई पार्ट्स की कीमत बढ़ जाती है।

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आईफोन के ये पार्ट्स हैं सबसे महंगे
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि iPhone 12 और iPhone 12 Pro के कुछ पार्ट्स महंगे हैं। इनमें Qualcomm X55 5G मॉडेम, सैमसंग की ओर से मैन्युफैक्चर किया गया OLED डिस्प्ले, सोनी कंपनी के कैमरा सेंसर और A14 Bionic चिप हैं। क्वालकॉम के प्रोसेसर की कीमत करीब 90 डॉलर (करीब 6,600 रुपए) बताई ज रही है। वहीं सैमसंग द्वारा बनाई गई OLED डिस्प्ले की कीमत लगभग 70 डॉलर (करीब 5,200 रुपए) बताई जा रही है।

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इसलिए बढ़ जाती है कीमत
आईफोन 12 को बनाने की लागत तो कम है फिर इसकी कीमत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि फाइनल प्रोडक्ट मार्केट में आने पर कंपनी के प्रॉफिट के अलावा कई तरह के टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी भी उसमें जुड़ जाती है। इसके अलावा रिपोर्ट में iPhone 12 सीरीज बनाने के लिए किस देश से कितने कॉम्पोनेंट्स आते हैं, इस बारे में भी बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इसका सबसे ज्यादा 26.8 प्रतिशत शेयर साउथ कोरिया के पास है। इसी तरह US और यूरोप से 21.9 प्रतिशत पार्ट्स, चीन से आने वाले पार्ट्स के पास 5 प्रतिशत से कम और जापान व ताइवान से क्रमश: 13.6 प्रतिशत और 11.1 प्रतिशत कॉम्पोनेंट्स की सप्लाई होती है।



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अब विंडोज 10 पर चला सकेंगे Android apps, माइक्रोसॉफ्ट कर रही प्रोजेक्ट पर काम

दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसके जरिए यूजर्स विंडोज 10 (windows 10) पर एंड्रॉयड एप्स (Android apps) चला सकेंगे। माइक्रोसॉफ्ट के इस प्रोजेक्ट का नाम प्रोजेक्ट लाटे (Project Latte) है। इसमें एप डेवलपर्स कोड्स में थोड़े बहुत बदलाव के साथ अपने एंड्राइड एप को सीधे विंडोज एप पर चला सकेंगे। विंडोज सेंट्रल की रिपोर्ट्स के अनुसार, डेवलपर्स को अपने एंड्राइड एप्स को एमएसआईएक्स फॉरमेट के अनुसार पैकेज करना होगा और इसे माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में सबमिट करना होगा।

फिलहाल योर फोन के जरिए व्यवस्था
एमएसआईएक्स एक विंडोज ऐप पैकेज फॉरमेट है जो सभी विंडोज एप्स को आधुनिक पैकेजिंग अनुभव मुहैया कराता है। मैजूदा समय में यूजर विंडोज 10 के लिए बने एप योर फोन के जरिए अपने पीसी पर एंड्राइड ऐप चला सकते हैं। हालांकि इसका इस्तेमाल कुछ सैमसंग फोन से ही किया जा सकता है।

प्ले सर्विस को सपोर्ट नहीं करेगा
प्रोजेक्ट लाटे से अब डेवलपर्स अपने उन एप को विंडोज 10 पर ला सकेंगे, जिनके विंडोज वर्जन उपलब्ध नहीं थे। प्रोजेक्ट लाटे हालांकि प्ले सर्विस को सपोर्ट नहीं करेगा, क्योंकि गूगल नेटिव एंड्रॉयड एप और क्रोम ओसएस को छोड़कर इस सेवा को कहीं भी इंस्टाल करने की अनुमति नहीं देता है।

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माइक्रोसॉफ्ट डेवलेप करेगा 50 करोड़ एप्स
माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) द्वारा अगले पांच वर्षो में 50 करोड़ से अधिक नए एप्लिकेशन डेवलप किए जाने की उम्मीद है। पिछले दिनों माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर राजीव सोढ़ी ने एक वर्चुअल इवेंट में इस बात के संकेत दिए। राजीव सोढ़ी ने कहा कि अधिकांश एप्स के लो कोड-प्लेटफॉर्म पर विकसित होने की उम्मीद है।

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विंडोज पीसी के लिए लॉन्च की अत्यधिक सुरक्षित चिप
इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले दिनों एक नई सुरक्षा चिप लॉन्च की है, जिसका नाम प्लूटोन है। इसे भविष्य के विंडोज पर्सनल कम्प्यूटर की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह प्लूटोन सिक्योरिटी प्रोसेसर अगली पीढ़ी के पीसी को हार्डवेयर सुरक्षा देगा। यह चिप-टू-क्लाउड सुरक्षा तकनीक जो एक्सबॉक्स और एज्योर क्षेत्र में अग्रणी है। यह भविष्य के विंडोज पीसी के लिए और भी अधिक सुरक्षा लाएगी।



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Saturday, November 28, 2020

Airtel फ्री में दे रहा है 5 जीबी डाटा, लाभ उठाने के लिए करना होगा यह काम, यहां जानें डिटेल

टेलिकॉम कंपनियां अपने यूजर्स के लिए समय—समय पर कई आकर्षक ऑफर्स लाती रहती हैं। रिलांयस जियो के आने के बाद अन्य टेलिकॉम कंपनियां भी प्री—पेड यूजर्स को लुभाने के लिए कम कीमत में अनलिमिटेड कॉलिंग और हाई स्पीड डाटा के प्लान्स लाती रहती हैं। टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल (Airtel) भी अपने यूजर्स को लुभाने के लिए कई आकर्षक ऑफर्स लॉन्च करती रहती है। अब Airtel अपने ग्राहकों के लिए एक नया ऑफर लेकर आई है। इस ऑफर के तहत यूजर्स 5 जीबी तक डाटा फ्री में ले सकते हैं।

Free Data Coupons
Airtel अपने यूजर्स के लिए जो नया ऑफर लाई है, उसे New 4G SIM or 4G Upgrade Free Data Coupons के नाम से बाजार में पेश किया गया है। इस ऑफर के तहत टेलिकॉम कंपनी अपने यूजर्स को 5 जीबी तक डाटा फ्री में दे रही है। ये डाटा यूजर्स को एक—एक जीबी के पांच कूपन में मिलेगा।

डाउनलोड करना होगा एप
एयरटेल के इस फ्री डाटा ऑफर का लाभ उठाने के लिए यूजर्स को Airtel Thanks एप डाउनलोड करना होगा। यह एप इंस्टॉल करते ही यूजर्स को एक जीबी डाटा मिल जाएगा। इसके अलावा नई एयरटेल की सिम लेने वालों को भी इस ऑफर का लाभ मिलेगा। यूजर्स को Airtel Thanks एप डाउनलोड करने के बाद अपने एयरटेल के मोबाइल नंबर से उसमें रजिस्ट्रेशन भी करना होगा।

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इन यूजर्स को मिलेगा लाभ
हालांकि एयरटेल के इस ऑफर का लाभ सिर्फ उन्हीं यूजर्स को मिल पाएगा, जो पहली बार एयरटेल थैंक्स एप डाउनलोड कर रहे हैं। इसके अलावा इसका फायदा उन लोगों को भी मिलेगा जो एयरटेल का नया सिम कार्ड ले रहे हैं या फिर अपने 3जी सिम कार्ड को 4जी में अपग्रेड कर रहे हैं।

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72 घंटे में मिल जाएंगे कूपन
यदि यूजर्स इन शर्तों को पूरा करते हैं तो उन्हें एप डाउनलोड करने के बाद अपने एयरटेल के मोबाइल नंबर से उसमें रजिस्ट्रेशन करें। ध्यान रहे कि यह रजिस्ट्रेशन सिम लेने के 30 दिनों के अंदर करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद यूजर्स के अकाउंट में एक-एक जीबी के पांच कूपन 72 घंटे के अंदर मिल जाएंगे, जिन्हें यूजर्स कभी भी इस्तेमाल कर सकेंगे।



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Amazon और Flipkart की टक्कर में भारत सरकार ला रही स्वदेशी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म

इन दिनों स्वदेशी एप्स पर जोर दिया जा रहा है। चीनी एप्स पर बैन के बाद स्वदेशी एप्स काफी पॉपुलर हो रही हैं। ऐसे में अब भारत सरकार एक स्वदेशी ई—कॉमर्स प्लेटफॉर्म विकसित करने जा रही है। डिपार्टमेंट फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) इस स्वदेशी ई—कॉमर्स प्लेटफॉर्म को विकसित कर रहा है। इसके लिए सरकार ने एक कमेटी का भी गठन किया है। सरकार की इस पहल का मकसद ई-कॉमर्स बिजनेस प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जिसे सरकार की तरफ से सहायता प्राप्त होगी।

यह काम करेगी कमेटी
स्वदेशी ई—कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लि सरकार द्वारा बनाई गई संचालन कमेटी को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) नाम से जाना जाएगा। इस कमेटी का काम एक ई-कॉमर्स कंपनी को लेकर एक पॉलिसी बनाना और उसे लागू कराना होगा। इसके साथ ही यह कमेटी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक पॉलिसी तैयार करना है। इस स्वदेशी ई—कॉमर्स कंपनी के आने से भारतीय बाजार में फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी ई—कॉमर्स कंपनियों की मोनोपॉली खत्म होगी।

ये लोग होंगे कमेटी में शामिल
स्वेदशी ई—कॉमर्स प्लेटफॉर्म डेवलेप करने के लिए जो कमेटी बनाई गई है उसमें अध्यक्ष के तौर पर सीनियर DPIIT ऑफिसर को चुना गया है। इसके अलावा इस कमेटी में डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स, मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी मिनिस्ट्री, मिनिस्ट्री ऑफ MSME और नीति आयोग के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।

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इंडस्ट्री इनपुट के लिए कैट
उपरोक्त प्रतिनिधियों के अलावा इस सरकारी कमेटी में क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन आदिल जैनुलभाई, NPCI टेक्नोलॉजी के सीईओ दिलीप अस्बे, NSDL टेक्नोलॉजी के सीईओ सुरेश सेठ भी शामिल होंगे। वहीं इंडस्ट्री इनपुट के लिए कैट (CAIT) के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाएगा। बता दें कि कैट लंबे वक्त से विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों का विरोध करता रहा है। हाल ही कैट ने अमेजन पर 7 दिनों के प्रतिबंध की मांग भी की है।

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Amazon और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स को मिलेगी टक्कर
बता दें कि फिलहाल भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट में Amazon और Fipkart की हिस्सेदारी ज्यादा है। हालांकि स्वदेशी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के आने से Amazon और Flipkart को जोरदार टक्कर मिल सकती है। साथ ही इंडियन मार्केट में इनकी मोनोपॉली भी खत्म होगी। इसके अलावा पीएम नरेन्द्र मोदी की डिजिटल इंडिया मुहिम और वोकल फॉर लोकल को भी बढ़ावा मिलेगा।



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Google लाया ऑफर, फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं फिल्में, यहां जानें पूरी डिटेल

गूगल (Google) अपने यूजर्स के लिए एक अनोखा ऑफर लाया है। इसके जरिए यूजर्स फ्री में फिल्में डाउनलोड कर सकते हैंं। हालांकि यह सुविधा सिर्फ ब्रिटेन के यूजर्स के लिए ही है। दरअसल, गूगल ने ब्रिटेन में टॉप नॉस्टैल्जिक फिल्मों के एक्सेस के लिए अनुमति दी है। यूजर्स खास तौर पर नए पिक्सल 5जी (Google pixel 5G) पर 10 दिसंबर तक मुफ्त में फिल्मों को डाउनलोड कर सकते हैं।

खुद को ले जाएं नॉस्टैल्जिया की दुनिया में
यूजर्स छुट्टियों के मौसम में फोर वेडिंग्स एंड ए फ्यूनरल या मोंटी पाइथन्स लाइफ ऑफ ब्रायन जैसी क्लासिक फिल्में डाउनलोड कर सकते हैं। कंपनी ने शुक्रवार को अपने बयान में कहा, प्रासंगिक स्थानों में फिल्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतीकों को मानचित्र पर खोजकर अपने आप को नॉस्टैल्जिया की दुनिया में ले जाएं।

कोई भी ले सकता है हिस्सा
जब यूजर्स कोई सर्च करेंगे, तो उनको गूगल प्ले में मूवी को फिर से देखने और आनंद लेने के लिए एक कोड दिया जाएगा। इसमें कोई भी हिस्सा ले सकता है, भले ही उनके पास कोई भी फोन हो। लेकिन यदि आप एक नए पिक्सेल 5जी- इनेबल्ड डिवाइस के मालिक हैं, तो आप कुछ ही सेकंड में इसे देख पाएंगे।

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ऑफर 10 दिसंबर तक
वर्तमान में किसी भी डिवाइस पर मूवी डाउनलोड करने के सबसे तेज तरीकों में से 5जी एक है। गूगल ने कहा, पिक्सल 5 और पिक्सल 4ए दोनों 5जी इनेबल्ड के साथ आप कुछ ही सेकंड में फिल्म डाउनलोड कर सकते हैं। गूगल यह ऑफर 25 नवंबर से शुरू 10 दिसंबर तक दे रहा है।

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अकाउंट नीतियों में किया बदलाव
बता दें कि Google ने हाल ही अपनी विभिन्न एप्स में कई नए फीचर्स जारी किए हैं। इसके अलावा कई एप्स के Logo में बदलाव किए गए गए हैं। साथ ही गूगल ने यूजर्स के अकाउंट की नीतियों में भी बदलाव किए हैं। दरअसल, गूगल अपने यूजर्स के अकाउंट के लिए नई नीतियां ला रहा है, जो अगले वर्ष 1 जून से प्रभावी होंगी।

नई नीतियों के अनुसार यदि कोई यूजर दो साल से जीमेल, ड्राइव या फोटो को लेकर निष्क्रिय हैं, तो कंपनी अपने उन प्रोडक्ट्स में से उनके कंटेन्ट को हटा सकती है, जिनमें वह एक्टिव नहीं हैं।



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Amazon के खिलाफ शुरू किया गया ऑनलाइन अभियान, यहां जानें क्या है माजरा

ई—कॉमर्स वेबसाइट Amazon के खिलाफ एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान जलवायु के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने शुरू किया है। इस अभियान को मेक अमेजन पे (Make Amazon pay) नाम से शुरू किया है। इस अभियान में अमेजन के वेयरहाउस कर्मचारी भी कार्यकर्ताओं का साथ दे रहे हैं। इन्होंने मांग की है कि ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कार्बन फुटप्रिंट कम करे और कर्मचारियों को बेहतर वेतन देकर उनके अधिकार का सम्मान करे।

ये संगठन हुए अभियान में शामिल
इस गठबंधन में भारत की आप्ती इंस्टीट्यूट, ऑल इंडिया आईटी और आईटीईएस एम्प्लॉइज यूनियन, अमेजन एम्प्लॉइज फॉर क्लाइमेट जस्टिस, प्रोग्रेसिव इंटरनेशन और यूएनआई ग्लोबल यूनियन आदि शामिल हैं। ब्लैक फ्राइडे की लॉन्चिंग पर इस गठबंधन ने मांग की है कि अमेजन अपनी नीतियों में बदलाव करे और सरकारें कार्यस्थल को बेहतर बनाने के लिए अपने कानूनों में बदलाव करें। अमेजन के सभी वेयरहाउस में कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया जाए और व्यस्त समय के लिए उनका प्रीमियम पे भी बढ़ाया जाए।

संगठनों ने की यह मांग
गठबंधन ने मांग की है कि अमेजन को उन देशों में पूरा टैक्स चुका कर समाज को वापस भी लौटाना चाहिए, जहां उसकी वास्तविक आर्थिक गतिविधियां होती हैं। साथ ही टैक्स हेवन कहे जाने वाले देशों में टैक्स बचाकर अपना प्रॉफिट बढ़ाने और नियमों में खामियों का फायदा उठाया जाता है, उसे अपने टैक्स को लेकर पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

यह भी पढ़ें—Amazon पर 7 दिनों का प्रतिबंध लगाए जाने की हो रही मांग, जानिए क्या है मामला

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जलवायु को नुकसान
गठबंधन ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि जैसा कि अमेजन के कॉर्पोरेट साम्राज्य का विस्तार होता जा रहा है। लिहाजा, इसका कार्बन फुटप्रिंट भी बढ़ रहा है, जो दुनिया के कुल कार्बन फुटप्रिंट का दो तिहाई से भी बड़ा है। अमेजन की बढ़ती डिलीवरी और क्लाउड कंप्यूटर व्यवसाय वैश्विक जलवायु को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है।

शून्य उत्सर्जन का वादा करे अमेजन
गठबंधन ने मांग की कि अमेजन वर्ष 2030 तक शून्य उत्सर्जन का वादा करे। यह भी कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान, अमेजन ट्रिलियन-डॉलर कॉर्पोरेशन बन गया है, जिसमें इसके सीईओ जेफ बेजोस व्यक्तिगत धन के तौर पर 200 अरब डॉलर जमा करने वाले इतिहास के पहले व्यक्ति बन गए हैं।

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अमेजन की प्रवक्ता ने दिया यह बयान
2019 में कंपनी ने द क्लाइमेट प्लेज की सह-स्थापना की है, जो कि 2040 तक अपने कारोबार में शून्य कार्बन उत्सर्जन लाने की प्रतिबद्धता जताई है। एक मीडिया रिपोर्ट में अमेजन की प्रवक्ता लिसा लेवांडोव्स्की के हवाले से कहा गया है कि हम अपने कुल वेतन और लाभों के तथ्यों की तुलना करने में रुचि रखने वालों को प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही साथ इस संकट के समय में हमारी गति को प्रबंधित करने में देशभर के अन्य खुदरा विक्रेताओं और प्रमुख नियोक्ताओं को भी प्रोत्साहित करते हैं।



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Friday, November 27, 2020

Amazon पर 7 दिनों का प्रतिबंध लगाए जाने की हो रही मांग, जानिए क्या है मामला

कोरोना की वजह से ऑनलाइन शॉपिंग में काफी इजाफा हुआ है। लोग बाजार में जाकर शॉपिंग करने के बजाय ई—कॉमर्स कंपनियों से ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं। इस बार दिवाली के फेस्टिव सीजन में तो ई—कॉमर्स वेबसाइट्स पर बिक्री के रिकॉर्ड टूट गए। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन ई—कॉमर्स कंपनियों के कई सेलर्स तो दो—तीन दिन में ही करोड़पति बन गए। लेकिन इन कंपनियों पर व्यापार करने के लिए बनाए गए नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है।

लगाया 25 हजार का जुर्माना
व्यापार के नियमों का उल्लंघन करने के मामले में उपभोक्ता मामलोंं के मंत्रालय ने 25 हजार रुपए का मामूली जुर्माना भी लगाया है। यह जुर्माना इसलिए लगाया गया है कि ई-कॉमर्स कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म में बेच रहे उत्पादों का निर्माण देश यानी कंट्री ऑफ ऑरिजिन (Country of Origin) का ब्यौरा नहीं दिया था। वहीं व्यापारिक संगठन कैट (Confederation of All India Traders) ने ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन (Amazon) पर 7 दिनों की पाबंदी लगाने की मांग की है।

जुर्माना नुकसान के हिसाब से लगे
व्यापारिक संगठन कैट का कहना है कि इन कंपनियों पर लगाया गया जुर्माना बहुत कम है। जुर्माना अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान के हिसाब से लगाया जाना चाहिए। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इतना मामूली जुर्माना लगाया जाना न्यायिक और प्रशासन का मजाक उड़ाना भर है। ऐसे में कैट ने अमेजन पर 7 दिन का प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है।

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सरकार तय प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाए
कैट ने मांग की है कि पहली गलती किए जाने पर 7 दिन और दूसरी बार गलती किए जाने पर 15 दिन का प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। साथ ही संगठन का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने पर इन कंपनियों के खिलाफ केन्द्र सरकार को तय प्रावधानों के हिसाब से जुर्माना लगाना चाहिए।

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जुर्माने की राशि बहुत कम
कैट का कहना है कि 25 हजार रुपए की जुर्माना राशि इन ई—कॉमर्स कंपनियों के लिए बहुत कम है। यह इन कंपनियों के साथ समझौता करने जैसा है। कैट का कहना है कि अगर जुर्माने की राशि या सजा का प्रावधान सख्त होगा तभी ये कंपनियां नियमों का उल्लंघन करने से पहले कई बार सोचेंगी।



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तीसरी तिमाही में ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में रहा Samsung का दबदबा, वेस्टर्न यूरोप में बेचे इतने करोड़ मोबाइल

स्मार्टफोन मार्केट में दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung) का दबदबा रहा। सैमसंग ने तीसरी तिमाही में मुनाफे के मामले में आईफोन निर्माता कंपनी एप्पल के साथ अपने अंतर को काफी कम कर दिया है। वैश्विक स्मार्टफोन के बाजार में कंपनी के शेयरों में 30 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है। इसका खुलासा एक नई रिपोर्ट में हुआ है।

मार्केट रिसर्चर स्ट्रैटेजी एनालिटिक्स के मुताबिक, दक्षिण कोरिया की इस दिग्गज तकनीकी कंपनी ने तीसरी तिमाही में स्मार्टफोन की श्रेणी में दुनियाभर में 32.6 फीसदी तक प्रॉफिट शेयर हासिल किया है, जो पिछले साल के 18.8 शेयर से अधिक है।

2014 में रहा था 37.9 फीसदी प्रॉफिट
यह हालिया आंकड़ा साल 2014 की दूसरी तिमाही के बाद से सैमसंग के लिए सबसे अधिक रहा है। उस दौरान वैश्विक तौर पर सैमसंग का प्रॉफिट 37.9 फीसदी रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन के बाजार में मुनाफे के मामले में एप्पल ने पहला स्थान हासिल किया। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट शेयर 60.5 फीसदी तक रहा। हालांकि यह पिछले साल से कम है क्योंकि उस दौरान कंपनी के मुनाफे में 66.9 फीसदी तक का इजाफा हुआ था।

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वेस्टर्न यूरोप में नंबर 1 पर
पश्चिमी यूरोप के स्मार्टफोन बाजार में साल की तीसरी तिमाही में भी सैमसंग ने सूची में अपने लिए शीर्ष स्थान को बरकरार रखा है और यह क्रम सेल में गिरावट होने के बाद भी कंपनी ने जारी रखा हुआ है। इंडस्ट्री रिसर्चर इंटरनेशनल डेटा कॉर्प (आईडीसी) के मुताबिक, 35.6 फीसदी बाजार में हिस्सेदारी के साथ जुलाई से सितंबर तक की अवधि में दक्षिण कोरिया की इस दिग्गज तकनीकि कंपनी ने वेस्टर्न यूरोप के मार्केट में 1.03 करोड़ स्मार्टफोन की शिपिंग की है।

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एप्पल दूसरे नंबर पर
रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि पिछले साल के मुकाबले यह आंकड़े कुछ कम हैं, क्योंकि उस दौरान कंपनी ने 35.8 फीसदी मार्केट शेयर के साथ 1.1 करोड़ स्मार्टफोन की शिपिंग की थी। सैमसंग के बाद दूसरे पायदान पर एप्पल और तीसरे में शाओमी का नाम शुमार है।



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Thursday, November 26, 2020

अब मोबाइल फोन पर कॉ़ल करने के लिए नंबर से पहले लगाना होगा शून्य

नई दिल्ली । अगले साल 2021 में 15 जनवरी से लैंडलाइन फोन से मोबाइल पर फोन करने के लिए नंबर से पहले 'जीरो' लगाना जरूरी होगा। ऐसा इस लिए किया जा रहा है क्यों कि फिक्स्ड लाइन और मोबाइल के लिए भविष्य में और अधिक नंबर वितरित किए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ट्राई की सिफरिशों को दूरसंचार विभाग ने मंजूर किया है। इसी के चलते यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

15 जनवरी से लागू होगी व्यवस्था -
संचार एवं सूचना प्रौद्यौगिकी मंत्रालय की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, सभी फिक्स्ड लाइन से मोबाइल पर फोन करने के लिए 15 जनवरी, 2021 से नंबर से पहले जीरो लगाना अनिवार्य होगा। लैंडलाइन से लैंडलाइन, मोबाइल से लैंडलाइन और मोबाइल से मोबाइल पर फोन करने में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके लिए उपयुक्त घोषणा की जाएगी। यह घोषणा जब कोई उपयोगकर्ता लैंडलाइन से मोबाइल पर बिना जीरो लगाए नंबर मिलाएगा तब उसे सुनाई देगी। सभी लैंडलाइन उपयोगकर्ताओं को जीरो डायल करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इस व्यवस्था से मिलेंगे नए नबंर -
इससे भविष्य में अधिक संख्या में नए नंबरों की मांग पूरी की जा सकेगी। नए नंबरों के लिए पर्याप्त स्थान सृजित होने पर आने वाले समय में नए नंबर जुड़ने से मोबाइल उपभोक्ताओं को व्यापक रूप में लाभ होगा। इस नए बदलाव के लिए यह ध्यान रखा गया है कि उपयोगकर्ताओं को किसी तरह की समस्या ना हो और नए नंबरों के लिए पर्याप्त स्थान सृजित किया जा सके।



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भारतीय यूजर्स के लिए फ्री रहेगा Google Pay, पैसे ट्रांसफर पर नहीं देना पड़ेगा कोई चार्ज

डिजिटल पेमेंट एप Google Pay को लेकर खबरें वायरल हो रही हैं कि अब इस एप से पैसे ट्रांसफर करने पर चार्ज देना पड़ेगा। खबरों में बताया जा रहा था नए वर्ष से Google Pay के जरिए फ्री में पैसे ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे। इन खबरों से भारतीय यूजर्स काफी परेशान हो गए। अब गूगल ने इन खबरों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि भारतीय यूजर्स से कोई चार्ज नहीं वसूला जाएगा। यह शुल्क अमरीकी यूजर्स के लिए है।

भारतीय यूजर्स से नहीं लिया जाएगा चार्ज
गूगल के प्रवक्ता ने एक बयान मे कहा कि ये शुल्क खासतौर से अमरीका के लिए है और यह भारत में गूगल पे या गूगल पे फॉर बिजनेस एप पर लागू नहीं होता। बता दें कि भारत में गूगल पे के सितंबर 2019 तक कुल 6.7 करोड़ उपयोगकर्ता थे और इसके जरिए वार्षिक आधार पर कुल 110 अरब अमरीकी डॉलर का भुगतान हुआ।

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पीयर टू मीट की जगह इंस्टेंट मनी ट्रांसफर
बता दें कि Google Pay नए साल यानि जनवरी 2021 से पीयर-टू-पीयर पेमेंट सुविधा को बंद कर रहा है। इसकी जगह अब इंस्टेंट मनी ट्रांसफर पेमेंट सिस्टम जोड़ा जाएगा। इंस्टेंट मनी ट्रांसफर के लिए गूगल नया एप भी लॉन्च करेगा, जिसकी टेस्टिंग अमरीका में हो रही है।

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भारत में गूगल पे में डेबिट कार्ड नहीं होता इस्तेमाल
बता दें कि गूगल ने अपने सपोर्ट पेज पर नए नियम को लेकर कहा है कि डेबिट कार्ड से पैसा ट्रांसफर करने पर 1.5 फीसदी या 0.31 डॉलर (जो भी अधिक हो) शुल्क लगता है। भारत में गूगल पे में डेबिट कार्ड का इस्तेमाल ही नहीं होता। इसलिए नए नियम से भारत के यूजर्स प्रभावित नहीं होंगे। गूगल ने स्पष्ट कर दिया है कि शुल्क वाला नियम अमरीका के लिए है, भारत के लिए नहीं।



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अब Google के इस एप पर नहीं कर पाएंगे ग्रुप वीडियो कॉलिंग, यहां जानें पूरी डिटेल

Google इन दिनों अपनी सर्विसेज को अपग्रेड करने में जुटा है। इस कड़ी में गूगल ने अपनी कई एप्स में नए फीचर्स जोड़े हैं। वही कुछ एप्स को बंद भी कर रह है। अब गूगल ने अपने यूजर्स को बड़ा झटका दिया है। दरअसल, गूगल ने अपने मल्टीमीडिया मैसेजिंग एप हैंगआउट से ग्रुप वीडियो कॉल का फीचर हटा दिया है। अब आप Google Hangouts से ग्रुप वीडियो कॉलिंग नहीं कर पाएंगे। यह फीचर बंद होने के बाद गूगल अपने हैंगआउट यूजर्स को अपने दूसरे वीडियो कॉलिंग एप Google Meet पर री-डायरेक्ट कर रहा है।

वर्ष 2013 में लॉन्च किया था एप
दरअसल, गूगल अब वीडियो कॉल के लिए गूगल मीट को प्रमोट कर रहा है। यह नया अपडेट भी उसी का हिस्सा है। बता दें कि गूगल मीट में एक साथ 10 लोग फ्री में वीडियो कॉलिंग कर सकते हैं। वहीं पेड सर्विस के तहत 25 लोग वीडियो कॉलिंग में शामिल हो सकते हैं। बात करें हैंगआउट की तो गूगल ने साल 2013 में Hangouts को क्रॉस-प्लेटफॉर्म मैसेजिंग एप को लॉन्च किया था।

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यूजर्स को मिल रहा ये मैसेज
गूगल अब गूगल हैंगआउट को गूगल मीट से रिप्लेस करने की तैयारी में है। अब यूजर जब हैंगआउट एप के 36.0.340725045 वर्जन को ओपन करते हैं तो उन्हें एक मैसेज दिखाई देता है। इस मैसेज में लिखा है Video calls in Hangouts now use Google Meet. That gives you live captions, screen sharing, and more। हालांकि अभी जिन लोगों ने अभी एप को अपडेट नहीं किया है, वे अभी भी ग्रुप वीडियो कॉल कर पा रहे हैं।

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इस एप पर 300 यूजर्स कर सकते हैं एक साथ कॉलिंग
बता दें कि माइक्रोसॉफ्ट ने गूगल को टक्कर देने के लिए हाल ही Teams यूजर्स के लिए वीडियो कॉलिंग फ्री कर दी है। इसमें यूजर्स दिन भर फ्री में कॉलिंग कर सकते हैं। साथ ही इसमें नई सुविधा के तहत Teams में 300 यूजर्स एक साथ 24 घंटे मीटिंग कर सकते हैं।



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Wednesday, November 25, 2020

जानिए कब लॉन्च होगा PUBG Mobile India, यूजर्स के लिए आई बड़ी खुशखबरी!

PUBG Mobile India का यूजर्स बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि भारत में इस गेम के दोबारा लॉन्च होने की खबर से भारतीय गेमर्स काफी खुश हैं। इस गेम का भारत में बड़ा यूजर बेस है। बता दें कि 2 सितंबर, 2020 को भारत सरकार ने PUBG Mobile को बैन कर दिया था। बैन की घोषणा के बाद से ही इस गेम की भारत में वापसी की खबरें आ रही थीं।

इसके बाद पिछले दिनों PUBG Corporation ने वापसी की खबरों को कंफर्म कर दिया था। साथ ही खबरें आ रही थीं कि इस गेम को नवंबर के आखिरी सप्ताह में लॉन्च किया जा सकता है। अब खबर आ रही है कि इसे दिसंबर के पहले सप्ताह में लॉन्च किया जाएगा।

अप्रूवल मिलने का इंतजार था
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गेम डेवलपर्स भारत सरकार से अप्रूवल मिलने का इंतजार कर रहे थे। बताया जा रहा है कि पिछले मंगलवार को भारत सरकार से इसे अप्रूवल मिल गया है। भारत में इसे PUBG Mobile India Private Ltd. के नाम से रजिस्टर किया गया है। इसे केन्द्र सरकार के कॉर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट पर CIN के साथ रजिस्टर किया गया है।

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तारीख नहीं बताई
बता दें कि गेमर्स इस गेम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लॉन्च की घोषणा के बाद से ही इस गेम की लॉन्चिंग डेट को लेकर गेमस PUBG Mobile India की वेबसाइट व सोशल मीडिया हैंडल को लगातार चेक कर रहे हैं। अब खबरें आ रही हैं कि यह गेम दिसंबर के पहले सप्ताह में लॉन्च किया जा सकता है। हालांकि लॉन्च की तारीख के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

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गेम में मिलेंगे बदलाव
बता दें कि इस बार PUBG Mobile India गेम में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे। इस गेम को इंडियन प्लेयर्स के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है। साथ ही इसमें यूजर्स की डाटा सिक्योरिटी को प्रॉयोरिटी में रखा जाएगा। यूजर्स के डाटा को भारत में ही स्टोर किया जाएगा। साथ ही इसकी मॉनिटरिंग के लिए स्पेशल टीम बनाई जाएगी। इसमें टाइम लिमिट भी सेट की जाएगी ताकि युवा इसे लगातार न खेल सके।



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अगर यूज कर रहे हैं पुराना वाई-फाई राउटर तो हो जाएं सतर्क, वायरस अलर्ट जारी, तुरंत करें यह काम

कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम और स्टडी फ्रॉम होम के चलते इंटरनेट का उपभोग बढ़ गया है। ऐसे में बहुत से यूजर्स ने घर में नए ब्राडबैंड कनेक्शन लगवाए हैं। वहीं कई लोगों के पास पहले से यह सुविधा मौजूद है। लेकिन अगर आप इंटरनेट से कनेक्ट रहने के लिए पुराने वाई—फाई राउटर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। इसमें वायरस का खतरा हो सकता है। ऐसे में या तो आप अपने फर्मवेयर को अपडेट करें या फिर नया वाई—फाई राउटर खरीद लें।

नए मैलवेयर को लेकर एडवाइजरी जारी
दरअसल, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने Mozi नाम के एक नए मैलवेयर को लेकर एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी के अनुसार, यह Mozi नाम का मैलवेयर दुनियाभर में IoT डिवाइसेज को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में CERT-In ने Netgear, Huawei, D-Link सहित कई अन्य ब्रैंड के राउटर्स के लिए 'वायरस अलर्ट' जारी किया है।

ये डिवाइसेज हो रहे प्रभावित
एडवाइजरी में कहा गया है कि Mozi मैलवेयर खासतौर पर घरो में राउटर्स और डीवीआर को अपना निशाना बना रहा है। इस मैलवेयर में Gafgyt, Mirai और IoT Reaper का सोर्स कोड मौजूद है। यह मैलवेयर फैमिली है, जो IoT डिवाइसेज को टारगेट कर रहे हैं। इस वायरस से Eir D1000 Router, Vacron NVR devices, devices using the Realtek SDK, Netgear R7000 and R6400, DGN1000 Netgear routers, MVPower DVR, Huawei Router HG532, D-Link devices, GPON और अन्य कुछ राउटर्स प्रभावित हो रहे हैं।

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डिवाइसेज अपडेट करने की सलाह
CERT-In ने इस वायरस से बचने के लिए अपनी एडवाइजरी में यूजर्स को पैचेज के साथ डिवाइसेज अपडेट करने की सलाह दी है। साथ ही कंपनी ने राउटर निर्माताओं को भी रिलीज के समय अपडेट करने को कहा है। साथ ही कंपनी ने सुझाव दिया है कि अगर आपका डिवाइस इन्फेक्ट हो गया है तो इसे फर्मवेयर को रीसेट करें या ट्रस्टेड बैकअप से इसे रीस्टोर करें।

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करें यह काम
सरकारी एजेंसी ने सुझाव दिया है कि डिवाइस से UDP ट्रैफिक को मॉनिटर या ब्लॉक कर Bit Torrent DHT बूटस्ट्रैप नोड्स पर ले जाएं। डेस्टिनेशन पोर्ट्स 22, 23, 2323, 80, 81, 5555, 7574, 8080, 8443, 37215, 49152 और 52869 के साथ आउटगोइंग टीसीपी ट्रैफिक को ब्लॉक करें।



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फेक मैसेज के मामले में टेलिकॉम कंपनियों पर लगाया करोड़ों रुपए का जुर्माना, यहां जानें पूरा मामला

यूजर्स को फेक एसएमएस भेजने के मामले में टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टेलिकॉम कंपनियों पर संयुक्त रूप से 35 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जिन टेलिकॉम कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया है, उनमें बीएसएनएल, एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन-आइडिया, एमटीएनएल, विडियोकॉन, टाटा टेलिसर्विसेस और क्वॉर्डरंट टेलिसर्विस शामिल हैं। इन टेलिकॉम कंपनियों पर साइबर क्रिमिनल्स को डिजिटल पेमेंट यूजर्स को फेक एसएमएस भेजने की इजाजत देने का आरोप है।

सबसे ज्यादा जुर्माना बीएसएनएल पर
फेक एसएमएस के मामले में TRAI ने सबसे ज्यादा जुर्माना टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल पर लगाया है। ट्राई ने बीएसएनएल पर 30.1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। बीएसएनएल ने परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग रिपोर्ट भी नहीं दिखाई। ट्राई के इस कदम का फायदा पेटीएम जैसी डिजिटल पेमेंट कंपनियों को होगा।

अन्य कंपनियों पर लगा इतना जुर्माना
बीएसएनएल के बाद सबसे ज्यादा जुर्माना वोडाफोन-आइडिया पर लगाया गया है। वोडाफोन—आइडिया पर 1.82 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा है। वहीं क्वॉर्डरंट टेलिसर्विस पर 1.41 करोड़ रुपए और 1.33 करोड़ रुपए का जुर्माना एयरटेल पर लगाया गया है। अन्य टेलिकॉम कंपनियों पर भी जुर्माना किया गया है।

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मैसेज ठीक तरीके से मॉनिटर नहीं किए गए
ट्राई का मानना है कि इन टेलिकॉम कंपनियों ने अपने नेटवर्क से जा रहे तरह-तरह के मैसेज को ठीक तरीके से मॉनिटर नहीं किया। इसी वजह से यूजर्स को फेक मैसेजेज और कॉल्स जाते रहे और यूजर्स को परेशानी हुई। साथ ही उनका कहना है कि फेक मैसेज चलाने वाले ऑपरेटर लाखों ग्राहकों को ठग रहे हैं।

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वहीं पेटीएम ने एडवोकेट करुणा नंदी के जरिए जो याचिका दाखिल की थी, उसमें कहा गया था कि मोबाइल नेटवर्क पर उसके लाखों ग्राहकों को ठगा जा रहा है। इसे रोकने में टेलीकॉम कंपनियों की नाकामी के कारण उसे वित्तीय और साख नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों से 100 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की है।



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बदलने जा रहा है लैंडलाइन से कॉल करने का तरीका, जानिए क्या बदलाव होने जा रहा है नए वर्ष से

नए साल से लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने का तरीका बदलने जा रहे हैं। अब 1 जनवरी से लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने के लिए मोबाइल नंबर से पहले शून्य लगाना जरूरी होगा। बताया जा रहा है कि दूरसंचार विभाग ने कॉलिंग से जुड़ा यह नियम बदलने का निर्णय तेज़ी से खत्म हो रही मोबाइल नंबर सीरीज को देखते हुए लिया है। बता दें कि ट्राई ने इसी वर्ष मोबाइल नंबर से पहले शून्य लगाने का प्रस्ताव दिया था,जिसे दूरसंचार विभाग ने स्वीकार कर लिया है।

बता दें कि मोबाइल नंबर से पहले शून्य लगाने की सुविधा फिलहाल अपने क्षेत्र से बाहर के कॉल करने के लिए उपलब्ध है। लेकिन अब नए नियम के अनुसार, नए साल से पडोस के मोबाइल पर भी कॉल करने के लिए नंबर से पहले शून्य लगाना जरूरी होगा।

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ट्राई ने की थी सिफारिश
बता दें कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 29 मई 2020 को मोबाइल पर कॉल करने के लिए नंबर से पहले ‘शून्य’ लगाने की सिफारिश की थी। अब दूरसंचार विभाग ने इसे स्वीकार कर लिया है। इस नए नियम से टेलीकॉम कंपनियों को अधिक नंबर बनाने की सुविधा मिलेगी।

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टेलिकॉम कंपनियों को दिया जनवरी तक का समय
दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों इस नई व्यवस्था को अपनाने के लिए एक जनवरी तक का समय दिया है। लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने के तरीके में बदलाव के चलते दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल सेवाओं के लिए 254.4 करोड़ अतिरिक्त नंबर सृजित करने की सुविधा मिलेगी।



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इंडियन शॉर्ट वीडियो एप ShareChat को खरीद सकता है गूगल, इतने अरब डॉलर में तय हो सकता है सौदा

चाइनीज एप TIKTok और Helo के बैन होने के बाद इंडियन शॉर्ट वीडियो शेयरिंग एप्स पॉपुलर हो रही हैं। इनमें शेयर चैट (ShareChat) का भी नाम शामिल है। ShareChat एक शॉर्ट वीडियो शेयरिंग एप है और इन दिनों इसकी लोकप्रियता में काफी इजाफा हो रहा है। अब इस इंडियन एप को लेकर सौदेबाजी की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि Google इस एप को खरीद सकता है। हालांकि बताया जा रहा है कि अभी डील को लेकर बातचीत शुरआती दौर में है। फाइनल डिसिजन नहीं लिया गया है। हालांकि इस सौदे के बारे में गूगल या शेयर चैट की तरफ से अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

इतने में हो सकता है सौदा
खबरों के अनुसार, शुरुआत में ट्विटर से फंड हासिल करने वाला स्टार्ट-अप शेयर चैट का सौदा 1.03 अरब डॉलर में हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल इस बारे में ड्यू डिलिजेंस करा चुका है और यह भी खबरें आ रही हैं कि नॉन बाइडिंग प्रपोजल पर भी हस्ताक्षर हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि शेयर चैट के फाउंडरों के पास इस सौदे के दौरान एक छोटी सी हिस्सेदारी रह सकती है।

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सितंबर में निवेशकों से जुटाए थे चार करोड़ डॉलर
रिपोर्ट के अनुसार, अगर शेयर चैट और गूगल के बीच यह डील हो जाती है तो इसके सभी पांच मौजूदा निवेशक इससे बाहर निकल जाएंगे। बता दें कि शेयर चैट ने सितंबर माह में ही निवेशकों से चार करोड़ डॉलर जुटाए थे। इसके बाद शेयर चैट का फंड बढ़कर 26 करोड़ 40 लाख डॉलर से भी ऊपर पहुंच गया था।

यह भी पढ़ें—अब Google Pay से पैसे ट्रांसफर करने पर लगेगा चार्ज, यहां जानें पूरी डिटेल

15 भाषाओं में कंटेंट और 16 करोड़ यूजर्स
बता दें कि शेयर चैट 15 भाषाओं में कंटेंट उपलब्ध करता है। टिकटॉक पर बैन के बाद इसका यूजर बेस भी बढ़ा है। फिलहाल इसके यूजर्स की संख्या बढ़कर 16 करोड़ हो गई है। वहीं चीनी शॉर्ट वीडियो एप्स पर प्रतिबंध के बाद गूगल के लिए इस तरह के बाजार में अपना असर बढ़ाने में यह सौदा अच्छा साबित हो सकता है। बता दें कि टिक-टॉक पर बैन के बाद भारत में कई तरह के शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म लॉन्च हो चुके हैं।



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Tuesday, November 24, 2020

अब Google Pay से पैसे ट्रांसफर करने पर लगेगा चार्ज, यहां जानें पूरी डिटेल

पिछले कुछ समय में डिजिटल पेमेंट में बढोतरी देखने को मिली है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म एप्स काफी पॉपुलर हो रही हैं। डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म Google Pay भी पॉपुलर डिजिटल पेमेंट एप है। हालांकि अब इसमें पैसे ट्रांसफर करने के लिए यूजर्स को चार्ज देना होगा। दरअसल, Google Pay अगले साल जनवरी से अपनी पीयर-टू-पीयर पेमेंट सुविधा को बंद करने जा रही है। इस सर्विस की जगह गूगल पे इंस्टेंट मनी ट्रांसफर पेमेंट सिस्टम जोड़ेगी। इसके लिए यूजर्स को चार्ज देना होगा हालांकि चार्ज कितना लगेगा इस बारे में कंपनी की तरफ से काई जानकारी नहीं दी गई है।

वसूला जाएगा इंस्टेंट मनी ट्रांसफर पर चार्ज
बता दें कि जब कोई यूजर बैंक अकाउंट में में पैसे ट्रांसफर करते हैं, तो पैसा ट्रांसफर होने में तीन दिन तक का वक्त लग जाता है। वहीं डेबिट कार्ड से पैसे ट्रांसफर करने पर तुरंत पैसा ट्रांसफर हो जाता है। गूगल पे ने सपोर्ट पेज के जरिए जानकारी देते हुए कहा कि डेबिट कार्ड से पैसा ट्रांसफर करने पर 1.5% या 0.31 डॉलर (जो भी अधिक हो) चार्ज लगता है। ऐसे में Google की तरफ से भी इंस्टेंट मनी ट्रांसफर पर चार्ज वसूला जा सकता है।

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Web एप को बंद करने का ऐलान
रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल Google Pay या pay.google.com से मुफ्त में पैसे भेजने और रिसीव करने की सुविधा है। हालांकि अब Google ने Web एप को बंद करने का ऐलान किया है। इस वजह से यूजर्स अगले वर्ष से Pay.google एप के जरिए पैसे ट्रांसफर नही कर पाएंगे। इसके लिए यूजर को Google Pay का इस्तेमाल करना होगा। वहीं Google Pay के सपोर्ट पेज को भी अगले साल जनवरी से बंद कर दिया जाएगा।

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रिडिजाइन किया जा रहा गूगल पे
बता दें कि Google Pay को रिडिजाइन किया है। इसमें कुछ नए फीचर्स जोड़े गए हैं, जिनकी मदद से यूजर्स अपने फालतू के खर्च पर लगाम सकते हैं और मनी सेविंग कर सकते हैं। यह नए फीचर एंड्रॉयड और iOS दोनों यूजर्स के लिए रोल आउट किए गए हैं। हालांकि अभी Google Pay में नए बदलाव फिलहाल अमरीकी यूजर्स के लिए ही उपलब्ध हैं। बताया जा रहा है कि जल्द ही भारत समेत बाकी देशो में भी यूजर्स को Google Pay के नए अपडेट मिलेंगे।



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अपने स्मार्ट होम डिवाइसेज के लिए सिर्फ एक भाषा इस्तेमाल करना चाहती हैं तीनो दिग्गज टेक कंपनियां

वॉयस असिस्टेंट (voice assitant) के जरिए घर-घर में मौजूद दुनिया की तीन दिग्गज प्रतिद्वंद्वी स्मार्ट-होम सेवा (smart home services) प्रदाता कंपनियां पहली बार एक साथ एक खास 'जिगबी एलायंस' पर काम कर रहे हैं। यह उन्हें एक ऐसा प्रोटोकॉल प्रदान करेगा जो इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (iOT) के लिए मानकों को और एडवांस कर देगा। इन तीनों के अलावा इस एलायंस में अन्य कंपनियां भी शामिल हैं। सभी एक ऐसा स्टैंडर्ड सिस्टम बनाने पर राजी हैं जो उनके उत्पादों को एक-दूसरे के साथ काम करने की सुविधा देंगे।

गूगल (google) के नेस्ट यूनिट के इंजीनियर निक साठे का कहना है कि घरों में स्मार्ट-स्पीकर (smart speakers) और होम ऐप के लिए व्यापक कनेक्टिविटी स्टैंडर्ड की कमी लोगों को भ्रमित करती है। लोग अलग-अलग कंपनियों को अलग-अलग कमांड से ऑपरेट करने में परेशान होते रहते हैं। क्योंकि हर स्मार्ट उपकरण घर के इको-सिस्टम के हिसाब से नहीं चलते।

स्मार्ट होम डिवाइसेज के लिए सिर्फ एक भाषा इस्तेमाल करना चाहती हैं टेक कंपनियां

2021 तक होगा तैयार
एपल (apple) का कहना है कि परियोजना एक साझा कोशिश है ताकि स्मार्ट होम डिवाइस सुरक्षित और विश्वसनीय हों। हालांकि यह कदम गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी सवाल भी उठाता है। यह गठबंधन 2021 के अंत तक नया संयुक्त प्रोटोकॉल तैयार करने का लक्ष्य बना रहा है। हालांकि यह कदम गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी सवाल भी उठाता है। सालों से अमेजन (amazon) और गूगल अपने स्मार्ट डिवरइसों की मदद से यूजर डेटा एकत्र करते आ रहे हैं। इसलिए एक ही घर में अलग-अलग कंपनियों के एक से अधिक स्मार्ट उपकरणों का एक साथ उपयोग व्यक्तिगत डेटा को ज्यादा से ज्यादा कंपनियों के साथ शेयर किए जाने की आशंका को भी बढ़ा देता है। अमेजन और गूगल से पिछडऩे के बाद अब एपल भी अपने स्मार्ट होम प्रयासों को रिबूट कर रहा है। कंपनी की एक नई टीम हाल ही विकसित एक नए सॉफ्टवेयर की मदद से नए डिवाइस विकसित कर रहा है

स्मार्ट होम डिवाइसेज के लिए सिर्फ एक भाषा इस्तेमाल करना चाहती हैं टेक कंपनियां

आज घरों में ऐसे स्मार्ट-स्पीकर और होम ऐप की भरमार हैं जिन्हें केवल अपनी आवाज या रिमोट यहां तक की अपने स्मार्टफोन से भी कंट्रोल किया जा सकता है। इनमें थर्मोस्टेट्स, एसी, लाइट्स, रेफ्रिजरेटर तक शामिल हैं। लेकिन व्यापक कनेक्टिविटी स्टैंडर्ड की कमी लोगों को भ्रमित करती है। लोग अलग-अलग कंपनियों को अलग-अलग कमांड से ऑपरेट करने में परेशान होते रहते हैं। क्योंकि हर स्मार्ट उपकरण घर के इको-सिस्टम के हिसाब से नहीं चलते। यह इनके निर्माताओं पर भी ग्राहक की अपेक्षाओं का दबाव बढ़ाता है कि वे इस बात को सुनिश्चित करें कि सभी डिवाइस एक-दूसरे संग बेहतर संयोजन के साथ काम करें। अमेजन और गूगल इस संबंध में पहले ही अपने सिस्टम को अपडेट कर चुके हैं जिससे उनके डिवाइस थर्ड-पार्टी उपकरण को स्मार्ट-स्पीकर्स से कनेक्ट करने में सक्षम हैं।

स्मार्ट होम डिवाइसेज के लिए सिर्फ एक भाषा इस्तेमाल करना चाहती हैं टेक कंपनियां

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PUBG Mobile India में 6 करोड़ रुपए तक के इनाम जीतने का मौका मिलने का दावा, यहां जानें सच्चाई

PUBG Corporation इन दिनों अपने लोकप्रिय गेम को भारत में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इसकी लॉन्चिंग हो सकती है। हालांकि इस बार यूजर्स को इस गेम में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे। PUBG Mobile India गेम को इंडियन प्लेयर्स के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है। PUBG Mobile के भारतीय वर्जन में नया गेम-प्ले और मैप देखने को मिल सकता है। बता दें कि भारत में इस गेम को होस्ट करने के लिए कंपनी ने Microsoft Azure के साथ हाथ मिलाया है।

6 करोड़ रुपए तक के इनाम की घोषणा
PUBG Corporation भारत में इस गेम की लॉन्चिंग को ग्रैंड बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। बताया जा रहा है कि इसके लिए कंपनी ने 6 करोड़ रुपए तक के इनाम की घोषणा की है। एक टिप्स्टर के मुताबिक, PUBG Mobile India वर्जन के लिए 6 करोड़ रुपए तक का प्राइज पूल रखा जाएगा।

बताया जा रहा है कि ये इनाम 40,000 रुपए से लेकर 2 लाख रुपये के बीच का होगा जो कि टीयर 1 टीम के लिए निर्धारित की गई है। इस बात की जानकारी टिप्स्टर ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए दी है। हालांकि PUBG Corporation की तरफ से इनाम के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी या बयान सामने नहीं आया है। वहीं कंपनी ने अभी तक इन खबरों का खंडन भी नहीं किया है।

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दिखा डाउनलोड लिंक
बता दें कि हाल ही PUBG Mobile India का डाउनलोड लिंक साइट पर नजर आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिशल वेबसाइट पर कुछ यूजर्स ने PUBG Mobile India APK डाउनलोड लिंक को स्पॉट किया था। कई यूजर्स ने PUBG Mobile India की वेबसाइट पर एपीके डाउनलोड लिंक देखे जाने की बात कही थी। एपीके डाउनलोड लिंक के साथ यूजर्स ने गूगल प्ले स्टोर का बटन भी देखने की बात कही थी। हालांकि उन लिंक से गेम डाउनलोड नहीं हो रहा था।

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डाटा सिक्योरिटी का विशेष ध्यान
बता दें कि कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि गेम में यूजर्स की डाटा सिक्योरिटी टॉप प्रॉयोरिटी पर रहेगी। इसके अलावा गेम को इंडियन प्लेयर्स के हिसाब से कस्टमाइज्ड किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बार गेम में इन-गेम आइट्म्स जैसे कैरेक्टर्स, क्लॉदिंग आदि को इंडियन प्लेयर्स के हिसाब से डिजाइन किया जा सकता है।



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बच्चों को भविष्य की चिंता, महासागरीय कचरे की सफाई के लिए बनाया रोबोट

हमारे शहर सालाना 80 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा महासागरों में बहा रहे हैं। यह मात्रा लगभग 90 विमान वाहकों के बराबर है। इस वैश्विक समस्या से निपटने के लिए अमरीकी स्कूल के छात्रों ने एक प्रतियोगिता के तहत ऐसे रोबोटिक्स डिज़ाइन बनाए जो इस कचरे को तेजी से निकालने में सक्षम हों। महासागर में सालाना बहाए जाने वाले प्लास्टिक कचरे को निकालने के लिए बच्चों ने रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (आरओवी) के डिजायन को तैयार किया है।

बच्चों को भविष्य की चिंता, महासागरीय कचरे सफाई बनाया रोबोट

वर्जीनिया के एक स्विमिंग पूल में छठी कक्षा के बच्चों के बनाए ऐसे 9 आरओवी का परीक्षण किया गया। एलेक्जेंड्रिया कंट्री डे स्कूल की विज्ञान की शिक्षिका एलिसन मैकडॉनल्ड ने बताया कि यह परियोजना पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर स्कूली छात्रों को जागरूक करने के मकसद से आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को महासागरीय कचरा कम करने के वैज्ञानिक प्रयासों के बारे में सीखने को मिला।

बच्चों को भविष्य की चिंता, महासागरीय कचरे सफाई बनाया रोबोट

नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के ओशन प्लास्टिक्स गाइड के अनुसार वैज्ञानिकों का अनुमान है कि महासागरों में प्लास्टिक कचरे के कारण हर साल लाखों समुद्री जीव खत्म हो रहे हैं। समुद्र के मलबे से निपटने के लिए बनाए जाने वाले आरओवी के लिए छात्रों ने सीपर्च संगठन से परामर्श लिया। बच्चों की अलग-अलग टीमें ने आरओवी डिजाइन करने के लिए ड्रिल, पाइप कटर और वायर कटर का इस्तेमाल किया। वहीं प्लास्टिक कचरे को एकत्र करने के लिए 12 इंच के क्यूब के आकार के आरओवी बनाए। छात्रों ने पीवीसीह पाइप्स का इस्तेमाल कर फ्रेम, जाल और कचरा निकालने का टूल भी बनाया। साथ ही व्हीकल में लगने वाली मोटर भी बच्चों ने ही बनाईं। इन सभी आरओवी को बच्चों ने अपनी कक्षाओं में बनाया था। इसलिए वहां इनका परीक्षण नहीं किया जा सका था।

बच्चों को भविष्य की चिंता, महासागरीय कचरे सफाई बनाया रोबोट

छात्रों ने इन डिजायन को ऐसे तैयार किया था कि ये पानी में न डूब जाएं। साथ ही ये एक जगह रुके रहने की बजाय लगातार आगे-पीछे मुड़ सकते थे। जाल को इस तरह डिजायन किया था कि वह पानी में तैरते छोटे से छोटे प्लास्टिक कचरे को भी पकड़ सके। इतना ही नहीं जरुरत पडऩे पर दो आरओवी को आपस में जोड़कर ज्यादा बड़े क्षेत्र को भी कवर किया जा सकता है। परीक्षण में सभी आरओवी ने अच्छज्ञ काम किया और कुछ ने तो एक बार में ही 30 से 40 प्लास्टिक बत्तखों को एकत्र किया जिन्हें पूल में प्लास्टिक कचरे के रूप में उपयोग किया गया था।



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इस रेस्तरां में वर्चुअल रियलिटी हेडगियर पहनकर खाना पड़ता है खाना

तकनीक अब हमारे खान-पान के तरीकों को भी प्रभावित कर रही है। अमरीका के मैनहट्टन स्थित जेम्स बियर्ड हाउस में लोग ऐसे खाने का आनंद ले रहे हैं जो दरअसल उनके सामने मौजूद ही नहीं है। अब यह जगह भविष्य के फूड डेस्टिनेशन के रूप में उभर रही है। जेम्स बियर्ड हाउस वर्चुअल रियलिटी एक्सपीरिएंस प्रोग्राम 'एयरोबैंक्वेट्स आरएमएक्स' की मेजबानी कर रहा है। इसमें खाने के साथ तकनीक भी परोसी जा रही है। इस प्रोग्राम में लोगों को डिनर हेडगियर दिया जाता है जो टेबल-कुर्सी पर बैठे-बैठे खूबसूरत नजारे और आभासी खाने का अहसास कराता है। तकनीक की मदद भोजन के बारे में मौलिक समझ को भी बढ़ाता है। यह जादुई दुनिया में होने का अहसास देता है। यह प्रयोग इतालवी कलाकार मटिया कैसलेग्नो, रेस्तरां राइटर रोनी मजूमदार और न्यूयॉर्क के शेफ चिंतन पंड्या की साझेदारी का परिणाम है। तीनों इस प्रयोग के जरिए यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या यही हमारे खाने के तौर-तरीकों का भविष्य है जो आने वाले सालों में हमारे सामने आने वाला है।

इस रेस्तरां में वर्चुअल रियलिटी हेडगियर पहनकर खाना पड़ता है

कैसे होता है हैडगियर से खाना
इसमें डाइनर्स को हैडगियर्स देकर अंधेरे कमरे में घूमने वाली टेबल पर बिठाते हैं। डाइनर्स अपनी उंगलियों को खाने के बर्तनों में लगे सेंसर पर ले जाते हैं। हैडगियर से देखने पर हाथ किसी रोबोट के जैसे दिखते हैं आभास देते हैं कि आप उनका इस्तेमाल कर खाना खा रहे हैं। बर्तन और विभिन्न डिश उड़ते हुए नजर आते हैं।

इस रेस्तरां में वर्चुअल रियलिटी हेडगियर पहनकर खाना पड़ता है

बदलाव है इसकी थीम
इस प्रोग्राम की कोई खास थीम नहीं है। लेकिन यहां के शेफ इसे भविष्य के लिए हमारे आज के खाने-पीने के विकल्पों में बदलाव के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। प्रयोग इस बात से भी प्रेरित है कि तकनीक ने हमसे मौसम के अनुसार खाने की आदत को छीन लिया है। स्पेन, कोपेनहेगन और वाशिंगटन में ऐसे रेस्तरां भी हैं जो विज्ञान और वर्चुअल रियलिटी के जरिए मौलीक्यूलर गैस्ट्रोनॉमी फोम, लिक्विड-नाइट्रोजन से बनाए पाचन योग्य डिश भी परोस रहे हैं। इसमें नाइट विजन तकनीक, ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक से बने ड्रिंक्स भी शामिल हैं जिसकी इंद्रधनुषी आभा को मोबाइल ऐप से देख सकते हैं।

इस रेस्तरां में वर्चुअल रियलिटी हेडगियर पहनकर खाना पड़ता है

ऐसे खिलाते हैं खाना
टेबल पर बैठने के बाद डाइनर्स अपनी उंगलियों को वहां रखे खाने के बर्तनों में लगे सेंसर पर ले जाते हैं और अपनी गर्दन को पीछे टिकाते हैं और सात अलग-अलग तरह की डिश जिन्हें एक बार में खाना होता है, पेश की जाती हैं। यहां यह नहीं बताया जाता कि ये सात तरह के खाने कौन-से होंगे। आपके हाथ हैडगियर से देखने पर किसी रोबोट के जैसे दिखते हैं आभास देते हैं कि आप उनका इस्तेमाल कर खाना खा रहे हैं। नीचे देखने पर शरीर का नीचे का हिस्सा गायब हो जाता है। प्लेटें और चम्मच सिर के चारों ओर उड़ते हुए नजर आते हैं लेकिन जैसे ही उन्हें छूने की कोशिश करते हैं वे गायब हो जाते हैं।



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