अफ्रीकी महाद्वीप में स्थित देशों में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से जोड़े रखने के लिए स्कूलों की कमी को अब तकनीक से पूरा किया जा रहा है। जून के आखिरी सप्ताह में अफ्रीकी देश मलावी में संसाधनों की कमी से जूझ रहे इस देश के बच्चों के लिए दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड स्कूल शुरू किया गया है। कम लागत वाले भवनों का निर्माण करने वाली अफ्रीकी कंपनी 14ट्रीज ने यूके के सीडीसी ग्रुप के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को शुरू किया है।
सीडीसी ग्रुप का दावा है कि इस तकनीक से स्कूल भवन बनाने में लागत तो कम आएगी ही समय भी बचेगा। इतना ही नहीं, नए भवनों के निर्माण से होने वाले कार्बन फुटप्रिंट्स (CARBON FOOTPRINTS) में भी 50 फीसदी की कमी आएगी। इस स्कूल की दीवारों को 3D प्रिंट की मदद से महज 12 घंटे में पूरा कर लिया जाता है। इसके बाद कारीगर इसमें खिड़की, दरवाजे, छत और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की फिटिंग कर देते हैं।
70 साल का काम 10 साल में
आवास की कमी से जूझ रहे मालावी में स्कूलों की संख्या छात्रों के अनुपात में बहुत कम है। यूनिसेफ (UNICEF) के मुताबिक देश में 36 हजार कक्षाओं की जरुरत है, जिसे बनाने में करीब 70 वर्ष का समय लगेगा। हालांकि 14ट्रीज का कहना है कि 3D तकनीक की मदद से वे इतने स्कूज महज 10 सालों में तैयार कर देंगे। कंपनी अब केन्या, जिम्बाबवे और मैडागास्कर में भी ऐसे स्कूल बनाने जा रही है।
स्कूल के बारे में खास-खास
-21 जून से पढ़ाई शुरू हुई इस 3D स्कूल में
-12 स्कूल थे मलावी के सलीमा जिले में इससे पहले
-18 घंटे में तैयार हुआ है यह स्कूल
-36 हजार क्लास रूम्स की जरुरत है मलावी में

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