Monday, April 13, 2020

15 साल के छात्र ने अपने शयनकक्ष को बनायश पीपीई फैक्ट्री, ३डी प्रिंटर से बना रहा फेस शील्ड

खेल, कार, हार्डवेयर बनाने वाली नामी कंपनियां भी अब अपने मूल उत्पादन को बंदकर मासक, वेंटिलेटर और फेस शील्ड बना रही हैं। इसी से प्रेरित होकर एक 15 साल के किशोर छात्र ने भी अपने शयनकक्ष को पूरी तरह से पीपीई फैक्ट्री में बदल दिया है। वह यहां चिकित्साकर्मियों के लिए कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए ३डी प्रिंटर की मदद से फेस शील्ड बना रहा है। यह ३डी प्रिंटर उनके माता-पिता ने उन्हें चिकित्सा उपकरण डिजायन करने के लिए जन्मदिन पर तोहफे में दिया था।

15 साल के छात्र ने अपने शयनकक्ष को बनायश पीपीई फैक्ट्री, ३डी प्रिंटर से बना रहा फेस शील्ड

सभी के लिए मुफ्त में पीपीई
इंग्लैंड के मिडिलबोरो के रहने वाले स्कूली छात्र हैरी कूपर ने निजी सुरक्षा उपकरण यानी पीपीई बनाने के लिए अपने कमरे को उत्पादन यूनिट में बदल दिया है। उनका कहना हैकि वे इन सुरक्षा उपकरणों को स्वास्थ्यकर्मियों को मुफ्त में सौंपेंगे। वह अपनी 3 डी प्रिंटिंग सामग्री के लिए ऑनलाइन फंडरेजिंग पेज के जरिए लोगों से आर्थिक सहायता करने को कह रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में फेस शील्ड बनाए जा सकें। कूपर का लक्ष्य उन लोगों के लिए चेहरे की ढाल का उत्पादन करना है जिन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की सख्त जरूरत है। उनके पास अभी दुकान के मालिकों, दंत चिकित्सक सहायकों, सामुदायिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य सहायकों से कम से कम 100 ऑर्डर मिल चुके हैं।

15 साल के छात्र ने अपने शयनकक्ष को बनायश पीपीई फैक्ट्री, ३डी प्रिंटर से बना रहा फेस शील्ड

चिकित्सा उपकरणों की कमी को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने नागरिकों से घोषणा की है कि फेस शील्ड, पॉली कार्बोनेट से बने सुरक्षा चश्मे, टोपी, सर्जिकल ग्लव्ज, मास्क या ऐसा कोई सामान जो चिकित्साकर्मियों की मदद कर सके, वे जरुरतमंदों तक पहुंचाएं। अकेले कूपर ही ऐसानहीं कर रहे हैं। डबलिन में 32 वर्षीय कंप्यूटर गेम कंपनी के कर्मचारी डैनियल मूनी भी फेस शील्ड उपकरण बनाने के लिए अपने 3 डी प्रिंटर का उपयोग कर रहे हैं। उनकी टीम प्रत्येक दिन कम से कम 75 फेस शील्ड बना सकती है।

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