Sunday, February 28, 2021

भारत में 5G टेस्ट बेड अक्टूबर तक तैयार होने की उम्मीद, शुरआती दो चरण पूरे

5जी की तैनाती में आगे रहने के उद्देश्य से स्वदेशी 5जी टेस्ट बेड स्थापित करने के लिए भारत की चल रही परियोजना इस साल अक्टूबर तक तैयार होने की उम्मीद है। इससे टेलीकॉम प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय क्षमता बढ़ेगी और भारतीय दूरसंचार निर्माताओं को प्रोतसाहन मिलेगा। साल 2018 के मार्च में 224.01 करोड़ रुपये की लागत से चार साल पहले शुरू किया गया स्वदेशी 5जी टेस्ट बेड (एक खुला 5जी परीक्षण बिस्तर) भारतीय शिक्षा और उद्योग जगत को अपने उत्पादों, प्रोटोटाइप और एल्गोरिदम को मान्य करने व विभिन्न सेवाएं प्रदर्शित करने में सक्षम कर सकता है।

नेटवर्क 5जी टेस्ट बेड के अन्य प्रमुख लक्ष्यों में से
आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मानकीकरण की क्षमता रखने वाली नई अवधारणाओं या विचारों पर काम करने के लिए अनुसंधान टीमों के लिए पूरी पहुंच के साथ परीक्षण बिस्तर उपलब्ध कराना और सुरक्षा पहलुओं के साथ-साथ 5जी प्रौद्योगिकियों के काम को समझने और उनके भविष्य की योजना बनाने के लिए भारतीय ऑपरेटरों के लिए एक परीक्षण बिस्तर उपलब्ध कराना। नेटवर्क 5जी टेस्ट बेड के अन्य प्रमुख लक्ष्यों में से है। इसके अलावा, इस परियोजना का उद्देश्य 5जी नेटवर्क का उपयोग करना और अनुप्रयोगों का प्रदर्शन करना या भारतीय समाज में महत्व के मामलों का उपयोग करना, देश में आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित प्रणालियों और सेवाओं को लागू करना और प्रदर्शित करना है।

वित्तीय अनुदान को मंजूरी
आईएएनएस के पास उपलब्ध संचार मंत्रालय के दस्तावेज के मुताबिक, भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए और 5जी की तैनाती में अगुवाई करने के मकसद से दूरसंचार विभाग ने इंडीजीनस 5जी टेस्ट बेड स्थापित करने के लिए बहु-संस्थान सहयोगी परियोजना के लिए वित्तीय अनुदान को मंजूरी दे दी (बिल्डिंग एंड-टू-एंड ग्राउंड 5जी टेस्ट भारत में बेड) मार्च 2018 में परीक्षण बिस्तर अक्टूबर 2021 तक तैयार होने की उम्मीद है। परीक्षण बिस्तर के जरिए दूरसंचार प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय क्षमता को बढ़ाने, स्वदेशी बौद्धिक संपदा (आईपी) को विकसित करने और भारतीय दूरसंचार निर्माताओं को प्रोत्साहित किए जाने की संभावना है।

इन देशों की श्रेणी में आ जाएगा भारत
मंत्रालय ने कहा कि 5जी परीक्षण बेड के शुभारंभ के साथ भारत अमरीका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, स्वीडन, फिनलैंड, थाईलैंड, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की श्रेणी में आ जाएगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)- मद्रास आईआईटी-दिल्ली, आईआईटी-हैदराबाद, आईआईटी-बॉम्बे, आईआईटी-कानपुर, आईआईएससी-बेंगलोर, सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (एसएएमईआरई), और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन वायरलेस टेक्नोलॉजी (सीईडब्ल्यूआईटीटी) इस परियोजना में सहयोग करने वाले आठ संस्थानो में से एक है।

शुरुआती दो चरण पूरे
मंत्रालय ने आगे कहा कि परीक्षण बिस्तर को चार संस्करणों – संस्करण 0 (वी0) से लेकर संस्करण 3 (वी3) तक के चरणों में साकार करने की योजना है। शुरुआती दो चरण पूरे हो गए हैं। अगले संस्करण (वी2) का डिजाइन शुरू हो गया है। सिस्टम हार्डवेयर और एल्गोरिथम डिजाइन में संस्थानों द्वारा महत्वपूर्ण प्रगति की गई है। अनुमान है कि तीसरा संस्करण (संस्करण 2) पूरा हो जाएगा। मार्च 2021 और अंतिम संस्करण (संस्करण 3) अक्टूबर 2021 तक पूरा होगा।

45 करोड़ रुपये आवंटित किए
मंत्रालय ने कहा कि 2020-21 के दौरान, 45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 3.1855 करोड़ रुपये का वितरण और उपयोग किया गया है। उम्मीद है कि शेष निधि का उपयोग निर्धारित समय के भीतर किया जाएगा। कोविड-19 महामारी और बाद के लॉकडाउन और शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने के कारण, मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को सूचित किया कि हार्डवेयर डिजाइन, निर्माण और परीक्षण का काम प्रतिकूल रूप से प्रभावित था। मंत्रालय के अनुसार, सॉफ्टवेयर विकास ट्रैक पर है और अक्टूबर तक हार्डवेयर के साथ सॉफ्टवेयर के परीक्षण और एकीकरण की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।



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Google के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से मिलेगी भारतीय महिलाओं को मदद, जानिए कैसे करेगा काम

Google Research और IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक AI तकनीक तैयार की है, जो उन महिलाओं के बारे में संकेत दे सकती है, जिन्हें स्वास्थ्य सूचना कार्यक्रम से बाहर निकलने का जोखिम है। प्रौद्योगिकी ने गैर-लाभकारी संगठन अरमान (एआरएमएमएएन) को स्वास्थ्य कार्यक्रमों में महिलाओं को बनाए रखने और मातृ स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करने में मदद की है। Google ने घोषणा की है कि परीक्षण के परिणामों से पता चला है कि एआई तकनीक के उपयोग ने ड्रॉप-ऑफ के जोखिम को 32 प्रतिशत तक कम किया।

300,000 से अधिक महिलाओं को करेगा शामिल
अरमान एममित्र चलाता है, जो एक मुफ्त मोबाइल वॉयस कॉल सेवा है। यह गर्भवती और नई माताओं को समय पर और लक्षित निवारक देखभाल जानकारी भेजता है। गूगल ने कहा कि ऐसे सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का पालन करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन लोगों को बनाए रखने के लिए समय पर हस्तक्षेप करना मातृ स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करने के लिए फायदेमंद है। टीम इस समय एममित्र में 300,000 से अधिक महिलाओं को शामिल करने की दिशा में काम कर रही है।

गूगल एआई कर रहा ये काम
गूगल ने एक बयान में कहा कि हम अरमान का समर्थन जारी रखने के लिए उत्साहित हैं, क्योंकि प्रोजेक्ट टीम का 2021 में 10 लाख से अधिक माताओं और बच्चों तक इस तकनीक की पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य है। गूगल एआई भारतीय गैर-लाभकारी संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को सार्वजनिक स्वास्थ्य, संरक्षण, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद कर रहा है। कंपनी ने 2019 में बेंगलुरु में गूगल रिसर्च इंडिया, एआई लैब की घोषणा की थी। 2020 में गूगल ने एआई फॉर सोशल गुड की घोषणा की।

गुगल अनुसंधान और सिंगापुर प्रबंधन विश्वविद्यालय से तकनीकी और वैज्ञानिक योगदान के साथ, वन्यजीव संरक्षण ट्रस्ट ने एआई मॉडल तैयार किए जो महाराष्ट्र के तडोबा में ब्रम्हपुरी वन प्रभाग में मानव-वन्यजीव संघर्ष की भविष्यवाणी करने में मदद करते हैं। ये एआई तकनीक ब्रम्हपुरी वन प्रभाग में मानव-वन्यजीव संघर्ष की भविष्यवाणी करने में 80 प्रतिशत से अधिक सटीकता प्रदान करते हैं। यह काम वर्तमान में मध्य प्रदेश के चंद्रपुर जिले में सुरक्षित रूप से तैनाती सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।



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अब आपका स्मार्टफोन दिलाएगा मोतियाबिंद के अंधेपन से राहत, जानिए कैसे करेगा मदद

Smartphone को अक्सर आंखों की तमाम समस्याओं के लिए दोषी ठहराया जाता है, लेकिन अब ये आपके लिए मददगार भी साबित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने इजात किया है कि इन डिवाइसों की मदद से आंखों में ग्लूकोमा के शुरुआती लक्षणों को पहले भांप लिया जा सकता है, जिससे कि अंधेपन और आंखों की अन्य गंभीर समस्याओं को होने से रोकने में मदद मिल सकती है। बता दें कि ग्लूकोमा ऑप्टिक सिस्टम की एक बीमारी है, जिससे कि दुनियाभर में 7.96 करोड़ लोग प्रभावित हैं।

सही इलाज न होने पर हो सकते हैं गंभीर नुकसान
अगर ग्लूकोमा का सही से इसका इलाज न करवाया जाए, तो इसके और भी कई गंभीर नुकसान हैं। ग्लूकोमा के अधिकतर मामलों में सही इलाज व नियंत्रण से अंधेपन को रोका जा सकता है। ग्लूकोमा इंट्राओकुलर प्रेशर (आईओपी) के उच्च स्तर से संबंधित है। ऐसे में अगर एक लंबे समय तक की अवधि में किसी इंसान की आईओपी पर सटीकता से गौर फरमाया जाए, तो काफी हद तक उनके देखने की शक्ति को बरकरार रखने में मदद मिल सकती है।

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साउंडवेव्स कर सकते हैं मदद
मोबाइल मेजरमेंट मेथड के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले साउंडवेव्स आईओपी की बढ़ती मात्रा का पता लगाने में मददगार है, जिससे रोग के होने का पता जल्दी लग जाएगा और इस हिसाब से इसका उपचार भी जल्दी शुरू होगा। इंजीनियरिंग रिपोर्ट्स में प्रकाशित इस अध्ययन में दिखाया गया है कि ब्रिटेन के बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने साउंडवेव्स और एक आई मॉडल का इस्तेमाल कर अपने प्रयोग को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

ऐसे मदद करेगा स्मार्टफोन
विश्वविद्यालय में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप के निदेशक खामिस एससा ने कहा कि हमने किसी वस्तु के आंतरिक दबाव और उसके ध्वनिक प्रतिबिंब गुणांक के बीच संबंध की खोज की है। आंखों की बनावट और साउंडवेव्स के प्रति इनकी प्रतिक्रिया का अधिक अध्ययन करने पर हमने पाया कि घर में बैठे आईओपी का निर्धारण करने के लिए संभावित रूप से स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया जा सकता है।



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Saturday, February 27, 2021

दुनिया के दूसरे सबसे अमीर आदमी को आईफोन ही पसंद नहीं

आईफोन रखना आज स्टेटस सिंबल मन जाता है। किसी की हैसियत को बताने के लिए आईफोन एक ज़रूरी आइकन है। लेकिन आपको हैरानी होगी की दुनिया के दूसरे सबसे अमीर इंसान बिल गेट्स को आईफोन पसंद नहीं है। उन्होंने 65 की उम्र तक भी आज तक आईफोन का उपयोग नहीं किया है। वे माइक्रोसॉफ्ट सॉफ्टवेयर वाले एंड्राइड फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं। बिल गेट्स की कुल संपत्ति 72.12 ख़रब यानी करीब 98 बिलियन डॉलर है। 13 जनवरी 2021 तक यह बढ़कर $133 billion हो गयी है।

दुनिया के दूसरे सबसे अमीर आदमी को आईफोन ही पसंद नहीं

माइक्रोसॉफ्ट फाउंडर बिल गेट्स (Microsoft Founder Bill Gates) को आइफोन (iPhone) नहीं बल्कि एन्ड्रॉएड फोन पसंद है। एक ऑनलाइन इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि वे आइफोन का उपयोग क्यों नहीं करते तो बिल ने इसकी वजह बताई। आइफोन यूजर्स के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहे 'क्लबहाउस' ऐप (Clubhouse App) के संबंध में जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अब आइफोन का उपयोग शुरू करेंगे तो उन्होंने मना कर दिया। हालांकि इस ऐप का एक एन्ड्रॉएड वर्जन भी जल्द ही लॉन्च होने वाला है। बिल गेट्स ने कहा, 'मेरे बहुत से दोस्त आइफोन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मुझे अब भी एन्ड्रॉएड फोन ही पसंद हैं।

दुनिया के दूसरे सबसे अमीर आदमी को आईफोन ही पसंद नहीं

इसलिए पसंद ऐंड्रॉएड
क्योंकि एन्ड्रॉएड निर्माता अपने डिवाइस में माइक्रोसॉफ्ट सॉफ्टवेयर का जिस तरह से उपयोग करते हैं उससे मुझे चीजों को ट्रैक करने में आसानी होती है। एन्ड्रॉएड फोन को चलाना बहुत आसान है और ये लगभग सभी तरह की ऐप्स और टेक्नोलॉजी को आसानी से एडॉप्ट कर लेते हैं। इसका सॉफ्टवेयर ऑॅपरेटिंग सिस्टम के साथ आसानी से कनेक्ट होता है। इसलिए मुझे आइफोन की बजाय एन्ड्रॉएड पसंद है।'

दुनिया के दूसरे सबसे अमीर आदमी को आईफोन ही पसंद नहीं

पुराने प्रतिद्वंदी हैं गेट्स और जॉब्स
हालांकि, कुछ लोगों को बिल गेट्स के ये तर्क थोड़े अजीब लगे क्योंकि आज यूजर्स किसी भी आइफोन स्टोर से माइक्रोसॉफ्ट ऐप्स डानलोड कर उसे अपने आइफोन में आइओएस 14 के साथ एक डिफॉल्ट ब्राउजऱ और ईमेल ऐप के रूप में समायोजित कर सकते हैं। ये सभी जानते हैं कि बीते सालों में एंड्रॉइड और ऐप्पल ने कभी एक-दूसरे का रास्ता नहीं काटा। बिल गेट्स और दिवंगत स्टीव जॉब्स एक दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी थे। लेकिन दोनों एक दुसरे का बहुत सम्मान भी करते थे। इसका उदाहरण है एक इंटरव्यू में बिल गेट्स की जॉब्स के प्रति कही एक बात जो साबित करती है की दोनों में स्वस्थ प्रत्स्पर्धा थी। दरअसल, एक इंटरव्यू में जब गेट्स से पूछा गया की क्या एलोन मस्क स्टीव जॉब्स से बेहतर इन्नोवेटर हैं तो बिल गेट्स का जवाब था नहीं, वे ऐसा नहीं मानते, स्टीव जॉब्स की जगह कोई नहीं ले सकता। दिवंगत स्टीव जॉब्स ने एक बार स्वीकार किया था कि उनके जीवन का मिशन एंड्रॉइड को 'नष्ट' करना था, क्योंकि वे इसे चोरी का उत्पाद मानते हैं।



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Friday, February 26, 2021

अब 15 राज्यों के उपभोक्ता कर सकते हैं सरकार के E- Daakhil पोर्टल पर शिकायत, मिलेंगी ये सुविधाएं

केंद्र सरकार ने बताया कि उपभोक्ता शिकायत के ऑनलाइन समाधान के लिए शुरू किया गया ई-दाखिल पोर्टल (E Daakhil Portal) अब 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुका है। जिन राज्यों में पोर्टल चालू हो गया वहां उपभोक्ता अब अपनी शिकायतें इस पर कर सकते हैं। उपभोक्ता मामले विभाग बाकी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी ई-पोर्टल शुरू करने की दिशा में प्रयासरत है। बता दें कि पिछले साल 20 जुलाई से लागू उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता आयोगों में ई-फाइलिंग और शिकायत दर्ज करने के लिए ऑनलाइन भुगतान का प्रावधान किया गया है।

कई सुविधाएं उपलब्ध
उपभोक्ता शिकायतों को ऑनलाइन माध्यम से दर्ज कराने के लिए एनआईसी द्वारा एक पोर्टल विकसित किया गया है। डिजिटल माध्यम से उपलब्ध इस मंच पर कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिसमें ई-नोटिस, मामले से जुड़े दस्तावेजों को डाउनलोड करने के लिए लिंक, वीडियो कोन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के लिए वीसी लिंक, विपरीत पक्ष द्वारा लिखित जवाब दाखिल करने की सुविधा और एसएमएस/ई-मेल अलर्ट की सुविधा इत्यादि शामिल हैं।

उपभोक्ता आयोगों के लिए भी सहायक
ई-दाखिल पोर्टल उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने से लेकर शिकायत समाधान के लिए निर्धारित शुल्क कहीं से भी अदा करने की सुविधा उपलब्ध कराकर उपभोक्ताओं और उनके अधिवक्ताओं को सशक्त बनाता है। यह उपभोक्ता आयोगों के लिए भी सहायक है, क्योंकि इसकी मदद से उपभोक्ता आयोग आसानी से ऑनलाइन शिकायतों को स्वीकार करने या अस्वीकार करने संबंधी निर्णय कर सकते हैं और संबंधित आयोग के पास आगे की कार्रवाई के लिए अग्रेषित कर सकते हैं।

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ग्रामीण ले सकते हैं सीएससी की सेवाएं
ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को भी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यह निर्णय किया गया कि सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) को ई-दाखिल के साथ एकीकृत किया जाए। ग्राम पंचायत स्तर पर कई उपभोक्ता ऐसे हो सकते हैं जिनके पास इलेक्ट्रोनिक संसाधन उपलब्ध ना हों या उन्हें पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने में असुविधा हो, ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ता अपनी शिकायत उपभोक्ता आयोग तक पहुंचाने के लिए सीएससी की सेवाएं ले सकते हैं। इस पोर्टल के साथ सीएससी को एकीकृत करने के लिए कार्य प्रगति पर है।

इन राज्यों ने की शुरुआत
शिकायतों की ई-फाइलिंग की सुविधा राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) द्वारा सात सितंबर, 2020 को शुरू की गई थी। दिल्ली इसको क्रियान्वित करने वाला पहला राज्य बना था, जहां आठ सितंबर, 2020 से इसे शुरू किया गया। बाद में महाराष्ट्र, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, चंडीगढ़, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक और हरियाणा ने भी अपने-अपने राज्यों में शिकायतों की ई-फाइलिंग की सुविधा की शुरुआत की।



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सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले जान लिजिए नए नियम, हो सकती है 5 साल की जेल

केन्द सरकार ने फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स व ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं, जिससे की इनका दुरुपयोग रोका जा सके। नई गाइडलाइन के अनुसार, सरकार द्वारा चिह्नित की गई सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाना होगा। इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि मैसेज किसने किया और कहां से किया। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म्स को देश की संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ राष्ट्रविरोधी संदेशों के मूल स्रोतों की पहचान करनी होगी। इसके साथ ही इस तरह का कंटेंट डालने वाले पर अपराध सिद्ध होने पर 5 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

हर माह देनी होगी रिपोर्ट
सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन में डिजिटल और ऑनलाइन मीडिया को भी कानून के दायरे में लाया गया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को हर महीने शिकायतों और उन पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी देनी होगी। विवादित पोस्ट डालने पर सरकार उसे हटाने के निर्देश देगी और उस कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाना होगा। साथ ही कंपनियों को यह भी बताना होगा कि वह कंटेंट किसने पोस्ट किया।

हो सकती है जेल
नई गाइडलाइंस के अनुसार सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट लिखने पर पांच साल की जेल हो सकती है। इसके साथ ही माता—पिता उस कंटेंट को ब्लॉक कर सकेंगे जो बच्चों के लिए ठीक नहीं है। ओटीटी और डिजिटल न्यूज के लिए तीन चरणों की प्रणाली बनेगी। इन्हें अपनी कंपनी की जानकारियां देनी होंगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को पैरेंटल लॉक की व्यवस्था करनी होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निगरानी के लिए एक सरकारी समिति बनेगी।

विवादित कंटेंट के बारे में देनी होगी जानकारी
नई गाइडलाइन में सरकार ने जो दिशा—निर्देश जारी किए हैं, उनके अनुसार सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट को 24 घंटे में हटाना होगा। साथ ही यह जानकारी देनी होगी कि यह पोस्ट सबसे पहले किसने डाली। सोशल मीडिया कंपनी को किसी आपत्तिजनक, शरारती पोस्ट या संदेश को सबसे पहले किसने लिखा इसकी जानकारी मांगने पर देनी होगी। ये व्यवस्था भारत की अखंडता, एकता और सुरक्षा, दुष्कर्म जैसे मामलों में लागू होगी। साथ ही शिकायतों के निपटारे के लिए कंपनियों को व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए एक भारतीय अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। इस अधिकारी को 24 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज करनी होगी और इसका निपटारा 15 दिन में करना होगा।

यूजर को भी रखना होगा ध्यान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के अलावा यूजर्स को भी कंटेंट पोस्ट करते समय सावधानी रखनी होगी। किसी भी तरह की पोस्ट करने से पहले यूजर को यह देखना होगा कि उसमें कुछ आपत्तिजनक तो नहीं है। आपत्तिजनक पोस्ट डालने पर गिरफ्तारी भी हो सकती है। अपराध सिद्ध होने पर 5 वर्ष तक की सजा भी हो सकती है।



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Thursday, February 25, 2021

पिछले वर्ष भारत में हुए साइबर हमलों पर आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, कोरोना वैक्सीन के बहाने की ठगी

भारत 2020 में एशिया पैसिफिक में जापान के बाद दूसरा ऐसा देश रहा है, जहां सबसे अधिक साइबर हमले (Cyber Attack) हुए हैं। वर्ष 2020 में क्षेत्र में हुए कुल साइबर हमलों में से भारत में सात प्रतिशत हमले दर्ज किए गए। आईबीएम की एक नई रिपोर्ट में यह बात कही गई। आईबीएम सिक्योरिटी की ओर से जारी 2021 एक्स-फोर्स थ्रेट इंटेलिजेंस इंडेक्स के अनुसार, वित्त एवं बीमा क्षेत्र में भारत में शीर्ष हमले दर्ज किए गए हैं, जबकि इसके बाद विनिर्माण और पेशेवर सेवाओं में साइबर हमलों की सबसे अधिक घटनाएं सामने आई हैं।

कोरोना वैक्सीन के बहाने ठगों ने बनाया शिकार
साइबर हमलों के प्रकार की बात करें तो रैनसमवेयर शीर्ष पर रहा, जिससे लगभग 40 प्रतिशत हमले हुए। इसके अलावा, डिजिटल करंसी माइनिंग और सर्वर एक्सेस हमलों ने पिछले साल भारतीय कंपनियों को प्रभावित किया। आईबीएम टेक्नोलॉजी सेल्स, भारत/दक्षिणी एशिया में सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर टेक्निकल सेल्स लीडर सुदीप दास ने कहा कि हमने साइबर अपराधियों को राहत के प्रयासों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं का उपयोग करते हुए देखा है, क्योंकि वैक्सीन आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण घटकों पर लक्षित हमलों सहित स्पैम की भी सूचना दी गई है।

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क्लाउड वातावरण को सख्त करने की आवश्यकता
उन्होंने कहा, इसलिए, संगठनों को अपनी सुरक्षा रणनीति के लिए एक शून्य-विश्वास दृष्टिकोण (जीरो-ट्रस्ट अप्रोच) के साथ अपने क्लाउड वातावरण को सख्त करने की आवश्यकता है। एक्स-फोर्स थ्रेट इंटेलिजेंस इंडेक्स 130 से अधिक देशों में प्रतिदिन 150 अरब से अधिक सुरक्षा घटनाओं (सिक्योरिटी इवेंट्स) की निगरानी और टिप्पणियों पर आधारित है।

सबसे ज्यादा रैंसमवेयर अटैक
रिपोर्ट में पता चला है कि यूरोप ने 2020 में किसी भी अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक साइबर हमलों का अनुभव किया, जिसमें रैंसमवेयर तरीका शीर्ष पर रहा है। इसके अलावा, यूरोप ने किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में अधिक अंदरूनी खतरे के हमलों को भी देखा है। यहां उत्तरी अमरीका और एशिया के मुकाबले दोगुने साइबर हमले दर्ज किए गए हैं।



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Facebook ने बताई ऑस्ट्रेलिया में अवरूद्ध समाचार कंटेंट के पीछे की सच्ची कहानी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook ने पहले ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स और प्रकाशकों के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर समाचारों तक पहुंच को अवरुद्ध करने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में फेसबुक ने फिर अपने निर्णय को वापस ले लिया था, उसने अब वास्तव में जो हुआ, उसके पीछे की वास्तविक कहानी बताई है। सोशल नेटवर्किंग साइट ने कहा कि हाल के दिनों में इस तरह के दावे बार-बार किए जा रहे थे कि फेसबुक चोरी करता है या अपने फायदे के लिए मूल पत्रकारिता करता है, जो कि सरासर गलत है।

चर्चा के बाद निकला हल
पिछले हफ्ते, फेसबुक ने घोषणा की थी कि वह ऑस्ट्रेलिया में अपनी सर्विस के दौरान समाचार साझा करना बंद कर रहा है। फेसबुक में ग्लोबल अफेयर्स मामलों के उपाध्यक्ष निक क्लेग ने बुधवार की देर रात एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, यह अब ऑस्ट्रेलियाई सरकार के साथ चर्चा के बाद हल हो गया है – हम प्रकाशकों के साथ नए सौदों के लिए सहमत होने और एक बार फिर समाचार लिंक साझा करने के लिए ऑस्ट्रेलिया को सक्षम करने के लिए तत्पर हैं।

गलतफहमी पर दी सफाई
यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर फेसबुक के विचार में फेसबुक और समाचार प्रकाशकों के बीच संबंधों में महज एक बुनियादी गलतफहमी है।
क्लेग ने तर्क देते हुए कहा, वह खुद प्रकाशक ही हैं, जो सोशल मीडिया पर अपनी स्टोरी को साझा करने का विकल्प चुनते हैं या उन्हें दूसरों द्वारा साझा करने के लिए उपलब्ध कराते हैं। क्योंकि उन्हें ऐसा करने से वैल्यू मिलती है। यही कारण है कि उनकी साइटों पर बटन दिए गए हैं, जो पाठकों को उन्हें साझा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

मीडिया बार्गिनिंग कोड का जवाब
उन्होंने कहा, हम न तो उस कंटेंट (सामग्री) की मांग करते हैं, जिसके लिए हमें अत्यधिक कीमत चुकाने के लिए कहा जा रहा है। वास्तव में समाचार लिंक फेसबुक पर उपयोगकर्ताओं के अनुभव का एक छोटा सा हिस्सा है। फेसबुक का यह प्रतिबंध नए मीडिया बार्गिनिंग कोड के जवाब में था। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में गूगल और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म को समाचार के लिए भुगतान करने के लिए मजबूर करने वाला कानून के प्रभावी होने की तैयारी को लेकर यह बवाल हुआ। हालांकि अब हालिया बयान से स्पष्ट हो गया है कि फेसबुक का ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुद्दे का हल निकल गया है और अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म देश में समाचार संबंधी कंटेंट साझा करेगा।



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Wednesday, February 24, 2021

डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते वक्त भूलकर भी न करें ये गलतियां, नहीं तो बैंक अकाउंट हो सकता है साफ

आजकल ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर क्राइम की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई बार खबरें आती हैं कि हैकर्स या साइबर क्रिमिनल्स लोगों के अकाउंट में सेंध लगा देते हैं। वे लोगों के डेबिट कार्ड की जानकारी हासिल कर लेते हैं और उनके अकाउंट को साफ कर देते हैं। वैसे भी कोरोना की वजह से डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ गया है। ऐसे में डेबिट कार्ड के डेटा को सुरक्षित रखना जरूरी हो गया है। कई बार हम डेबिट कार्ड को यूज करते वक्त ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिनका फायदा हैकर्स उठा लेते हैं। हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं, जिनसे आप अपने डेबिट कार्ड को सुरक्षित रख सकते हैं और ऑनलाइन फ्रॉड से बच सकते हैं।

डेबिट कार्ड की जानकारी ऑटोफिल न करें
कई बार हम ऑनलाइन कुछ ऑर्डर करने के लिए अपने डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में हम उस वेबसाइट पर जब अपने डेबिट कार्ड की जानकारी डालते हैं तो उसे ऑटोफिल न करके रखें। ध्यान रखें कि ट्रांजेक्शन की जल्दबाजी में अपने कार्ड की जानकारी वेबसाइट या ऐप्स पर सेव न करें। कई बार इनको एक्सेस करने के लिए हैकर को सिर्फ ओटीपी की जरूरत होती है और इसके चलते आपका कार्ड काफी अनसेफ हो जाता है

फ्री वाई—फाई के इस्तेमाल में रखें ध्यान
पब्लिक या फ्री वाई—फाई का इस्तेमाल करते समय ध्यान रखें। फ्री वाई—फाई का इस्तेमाल करते समय किसी लेन—देन के लिए अपने डेबिट कार्ड का इस्तेमाल न करें। इसके साथ ही अपने कार्ड की फोटो को सोशल मीडिया पर भूलकर भी पोस्ट न करें। हैकर्स या क्रिमिनल्स आपके कार्ड की फोटो के जरिए आसानी से डिटेल्स हासिल कर सकते हैं।

ब्राउजर की कैशे मेमोरी को डिलीट कर दें
ध्यान रहे कि सिर्फ सुरक्षित और विश्वसनीय वेबसाइट पर ही अपने कार्ड के जरिए ट्रांजेक्शन करें। साथ ही इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि हर बार ट्रांजेक्शन करने के बाद ब्राउजर की कैशे मेमोरी को डिलीट कर दें।

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पिन कोड बदलते रहें
अपने डेबिट कार्ड का पिन नंबर समय—समय पर बदलते रहना चाहिए। इसके अलावा जब भी आप ऑनलाइन बैंकिग, नेट बैंकिग, मोबाइल बैंकिंग काम में लें तो काम हो जाने पर हमेशा लॉगआउट करें। विंडो को डायरेक्ट बंद न करें क्योंकी कई बार विंडो डायरेक्ट बंद करने पर वह हिस्ट्री में चलता रहता है।

डिटेल्स शेयर न करें
बैंक अपने यूजर्स को समय—समय पर आगाह करते रहते हैं कि अपने कार्ड की डिटेल्स किसी के भी साथ शेयर नहीं करनी चाहिए। ऐसे में किसी को भी अपने कार्ड की संख्या, सीवीवी, एक्सपायरी और ओटीपी की जानकारी न दें। कई बार फ्रॉडस्टर बैंक के कर्मचारी बनकर बात करते हैं और लोगों को झांसे में लेकर उनके कार्ड की डिटेल्स हासिल कर उनके बैंक अकाउंट को साफ कर देते हैं।



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Google जल्द लाने वाला है दो कमाल के नए फीचर्स, पहले से ज्यादा स्मार्ट हो जाएगा आपका फोन

टेक जाएंट Google जल्द ही एंड्रॉयड यूजर्स के लिए दो बेहतरीन फीचर्स रोलआउट करने जा रहा है। ये फीचस जारी होने के बाद एंड्रॉयड मोबाइल और भी स्मार्ट हो जाएगा। ये दोनों फीचर्स ही यूजर्स के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन दोनों फीचर्स के बारे में गूगल ने अपने ऑफिशियल ब्लॉग में जानकारी दी है। इनमें से एक फीचर के तहत यूजर्स अपने SMS को शेड्यूल कर सकेंगे। इसके अलावा कंपनी Google Assistant से जुड़ा एक और फीचर लाने वाली है।

मैसेज कर सकेंगे शेड्यूल
Google का नया फीचर उन लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होगा, जो मैसेज करते हैं। इस नए फीचर की मदद से यूजर्स अब अपने मैसेज शेड्यूल कर पाएंगे। गूगल ने अपने ऑफिशियल ब्लॉग जानकारी देते हुए बताया है कि अब आप किसी भी SMS को शेड्यूल कर पाएंगे। इसमें यूजर अपने टाइम और डेट सेट करके मैसेज भेज सकते हैं। मैसेज शेड्यूल किए गए समय पर सेंड हो जाएगा। कई बार हमें किसी व्यक्ति, दोस्त या रिश्तेदार को विश करने के लिए मैसेज करना होता है, लेकिन कई बार हम भूल जाते हैं। ऐसे में शेड्यूल मैसेज का फीचर उपयोगी साबित होगा।

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लॉक फोन में भी कर सकेंगे Google Assistant का यूज
शेड्यूल मैसेज के अलावा गूगल जो दूसरा फीचर लाने वाला है, वह गूगल असिस्टेंट से जुड़ा है। जब हमें गूगल असिस्टेंट का यूज करना होता है तो मोबाइल का लॉक खोलना पड़ता है। अब गूगल के नए फीचर की मदद से लॉक स्मार्टफोन में भी गूगल असिस्टेंट का उपयोग कर सकेंगे। इतना ही नहीं लॉक स्मार्टफोन में ही अलार्म सेट कर पाएंगे, मनपसंद गानों का लुफ्त उठा सकेंगे और किसी को वॉयस कमांड के जरिए कॉल भी लगा पाएंगे।

इन स्मार्टफोन्स में आएगा अपडेट
Google के ये दोनों नए फीचर्स ऑपरेटिंग सिस्टम Android 7 और उससे ऊपर के सभी ऑपरेटिंग सिस्टम में रोलआउट होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी जल्द ही ये दोनों अपडेट यूजर्स के लिए जारी कर सकती है। कंपनी ने इसके लिए सभी तैयारियां कर ली है। आने वाले दिनों में ये अपडेट्स एंड्रॉयड फोन यूजर्स को मिल जाएगा।



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मात्र 19 रुपए के रिचार्ज में अनलिमिटेड कॉलिंग और डेटा भी, जानिए इस प्लान के बेनिफिट्स

यूजर्स को लुभाने के लिए टेलीकॉम कंपनियां समय—समय पर सस्ते और कई तरह के बेनिफिट्स वाले रिचार्ज प्लान पेश करती रहती हैं। अब टेलीकॉम कंपनी Airtel ने अपने प्रीपेड यूजर्स के लिए ऐसा ही एक सस्ता प्रीपेड रिचार्ज प्लान पेश किया है। इस प्लान की कीमत 20 रुपए से भी कम है और इसमें यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग जैसे बेनिफिट भी दिए जा रहे हैं। हाल ही Airtel ने 19 रुपए का प्रीपेड प्लान पेश किया है, जो कि कई बेनिफिट्स के साथ आता है।

वेबसाइट पर हुआ लिस्ट
अगर आप भी Airtel के प्रीपेड यूजर हैं तो आप भी इस 19 रुपए वाले रिचार्ज प्लान का लाभ उठा सकते हैं। यह रिचार्ज प्ला कंपनी की वेबसाइट पर लिस्ट हो गया है। इसके साथ ही वेबसाइट पर इस रिचार्ज प्लान के साथ मिलने वाले बेनिफिट्स की डिटेल भी दी गई है।

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19 रुपए में अनलिमिटेड कॉलिंग और डेटा भी
बात करें Airtel के 19 रुपए वाले प्लान में मिलने वाले बेनिफ्टिस की तो इसमें यूजर्स को अनलिमिटेड काॅलिंग का लाभ मिलेगा। कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्लान में यूजर्स को 200MB डेटा भी मिलेगा। एयरटेल के इस 19 रुपए वाले रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी दो दिन की है। इसमें यूजर्स दो दिन तक अनलिमिटेड कॉलिंग और 200MB डेटा का लाभ उठा सकते हैं। इस प्लान को कंपनी ने अपनी 'Truly Unlimited' कैटेगरी के तहत पेश किया है।

लगातार 5वीं बार जियो को पछाड़ा
बता दें कि नए सब्सक्राइबर्स जोड़ने के मामले में एयरटेल ने दिसबंर 2020 में एक बार फिर रिलायंस जियो को पछाड़ दिया। हाल ही आई ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार, एयरटेल ने दिसंबर 2020 में सबसे ज्यादा सब्सकाइबर्स जोड़े। जियो इस मामले में दूसरे नंबर पर रही। बता दें कि एयरटेल ने नए सब्सक्राइबर्स जोड़ने के मामले में जियो को लगातार 5वीं बार पटखनी दी है। हालांकि कुल सब्सक्राइबर्स के मामले में जियो अभी भी नंबर 1 पर है।



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Tuesday, February 23, 2021

300 करोड़ से अधिक ईमेल और पासवर्ड हुए लीक, ऐसे चेक करें कहीं आप भी तो नहीं हो गए हैकिंग का शिकार

साइबर क्रिमिनल्स आजकल हैकिंग या डेटा लीक के नए—नए तरीके खोज रहे हैं। डेटा लीक अब एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। अब अक्सर डेटा लीक की खबरें सामने आने लगी हैं। ऐसे में यूजर्स का पर्सनल डेटा बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। वहीं एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि करोड़ों यूजर्स का पर्सनल डेटा लीक हो गया है। इसे इंटरनेट यूजर्स के अकाउंट्स में अब तक की सबसे बड़ी सेंध बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर के करीब 300 करोड़ आईडी-पासवर्ड लीक हुए हैं। इनमें Gmail के अलावा Netflix और Linkedin प्रोफाइल भी शामिल हैं।

सबसे बड़ी सिक्योरिटी ब्रीच
एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के लगभग 300 करोड़ लोगों की आईड और पासवर्ड लीक हो गए हैं। इसे अब तक का सबसे बड़ा सिक्योरिटी ब्रीच माना जा रहा है। लीक हुए डेटा में Gmail, Netflix और Linkedin के लॉगिन आईडी और पासवर्ड शामिल हैं। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली बार डेटा लीक में लोगों के Netflix और Linkedin के प्रोफाइल भी शामिल किए गए हैं।

1500 करोड़ अकाउंट्स में लगाई सेंध
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1500 करोड़ अकाउंट् में सेंध लगाई गई है। इनमें से 300 करोड़ से अधिक लोगों के ईमेल आईडी और पासवर्ड हैक कर लिए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि लीक हुए डेटा में 11.7 करोड़ लोगों के Linkedin और Netflix अकाउंट्स हैक हुए हैं। बताया जा रहा है कि यूजर्स के इस डेटे को इंटरनेट पर अपलोड कर दिया गया है। साथ ही कहा जा रहा है कि हैकर्स इस डेटा का इस्तेमाल दूसरे अकाउंट्स को हैक करने में कर सकते हैं।

कैसे चेक करें अपना अकाउंट
ऐसे में आप भी चेक कर लिजिए कि कहीं हैकर्स ने आपके अकाउंट में भी तो सेंध नहीं लगा दी है। इसे चेक करने लिए आपको https://ift.tt/36NFtIm पर क्लिक करना होगा। इस साइट पर आप अपना ईमेल आईडी डालकर लीक होने की जानकारी चेक कर सकते हैं। इसके लिए साइट को ओपन कर दिया गया है।



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Airtel ने Jio को फिर दी पटखनी, दिसंबर में जोड़े इतने लाख नए सब्सक्राइबर्स,Vi ने गंवाए 56 लाख यूजर्स

नए यूजर्स जोड़ने के मामले में टेलीकॉम कंपनी Airtel ने एक बार फिर से Reliance Jio को मात दे दी है। इस मामले में Vodafone-Idea (Vi) और bsnl भी पीछे है। TRAI की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, एयरटेल ने नए दिसंबर 2020 में कुल 45 लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़े। वहीं जियो इस मामले में दूसरे नंबर पर रही। बता दें कि नए सब्सक्राइबर्स जोड़ने के मामले में एयरटेल लगातार 5 महीने से टॉप पर बनी हुई है। वहीं जियो दूसरे नंबर पर रही।

33.87 करोड़ हुए एयरटेल के यूजर्स
TRAI की रिपोर्ट के मुताबिक, Airtel ने दिसंबर 2020 में 45 लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़े। अब एयरटेल के कुल यूजर्स की संख्या 338.70 मिलियन (33.87 करोड़) हो गई है। इसी के साथ एयरटेल का मार्केट शेयर बढ़कर 29.36 प्रतिशत हो गया है। वहीं Jio ने दिसंबर 2020 में मात्र 4.78 लाख नए सब्सक्राइबर्स ही जोड़े। अब Jio के कुल सब्सक्राइबर्स की संख्या 408.77 मिलियन (40.87 करोड़) यूजर्स हो गई है। हालांकि यूजर्स के मामले में जियो अब भी देश की नंबर 1 टेलीकॉम कंपनी बनी हुई है। जियो का मार्केट शेयर 35.43 प्रतिशत है।

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Vi को हुआ 56 लाख यूजर्स का नुकसान
वहीं दूसरी टेलीकॉम कंपनियों की बात करें तो Vodafone Idea (Vi) ने दिसंबर 2020 में लाखों सब्सक्राइबर्स गंवा दिए। रिपोर्ट के अनुसार, वोडफोन आइडिया को दिसंबर में 56 लाख से ज्यादा यूजर्स का नुकसान हुआ है। Vi के यूजर्स की संख्या घटकर 284.25 मिलियन (28.42 करोड़) रह गई है। वहीं सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL को भी दिसंबर 2020 में नुकसान उठाना पड़ा। दिसंबर में बीएसएनएल ने 2.25 लाख सब्सक्राइबर्स गंवाए।

Jio का दबदबा
TRAI की रिपोर्ट के अनुसार, देश में वायरलेस सब्सक्राइबर्स की संख्या घटकर 115.37 करोड़ रह गई है। वहीं वायरलेस और लैंडलाइन सब्सक्राइबर्स के मामले मेें अब भी Jio नंबर 1 पर है। जियो का मार्केट शेयर 54.97 प्रतिशत है। वहीं, Airtel 23.95 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ दूसरे नंबर पर है।



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Saturday, February 20, 2021

स्मार्टफोन चोरी हो गया या खो गया तो घबराएं नहीं, इन आसान ट्रिक्स से मिल सकता है वापस

स्मार्टफोन चोरी हो जाने या खो जाने पर लोग काफी परेशान हो जाते हैं। बता दें कि स्मार्टफोन अब सिर्फ कॉलिंग के काम ही नहीं आता बल्कि इसमें यूजर्स अपना पर्सनल डेटा भी रखते हैं। ये पर्सनल डेटा अगर किसी के हाथ लग जाए तो उसका दुरुपयोग भी किया जा सकता है। ऐसे में अगर आपका एंड्रॉयड स्मार्टफोन खो गया है या चोरी हो गया है तो आप अपने स्मार्टफोन को ढूंढ सकते हैं। गूगल के एक ऐप की मदद से आप अपने स्मार्टफोन को ढूंढ सकते हैं। हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपने खोए हुए या चोरी हुए एंड्रॉयड डिवाइस का पता लगा सकते हैं।

ऐप से लॉक कर सकते हैं अपने डिवाइस को
अपने खोए हुए या चोरी हुए स्मार्टफोन को आप Google के Find My Device ऐप की सहायता से ढूंढ सकते हैं। इतना ही नहीं आप इस ऐप की मदद से अपने एंड्रॉयड डिवाइस को लॉक भी कर सकते हैं। अगर आपको डर है कि डिवाइस में मौजूद आपके डेटा का कोई गलत इस्तेमाल कर सकता है तो आप इस एप की सहायता से सारा डेटा डिलीट भी कर सकते हैं। इस ऐप का इस्तेमाल करने के लिए आपको सबसे पहले अपने Google Account में साइन इन करना होगा।

साउंड प्ले से डिवाइस कर सकते हैं लोकेट
गूगल अकाउंट में साइन इन करने के बाद आपको अपना रजिस्टर्ड डिवाइस दिखेगा। अगर आपने एक ही ईमेल एड्रेस पर कई अपने कई एड्रॉयड डिवाइस रजिस्टर्ड किए हुए हैं तो आपको मेन्यू में जाकर खोए हुए डिवाइस को सलेक्ट करना होगा। इसके बाद आप उस डिवाइस को लोकेट करने के लिए एक साउंड प्ले कर सकते हैं। इसके अलावा आप इस ऐप से स्क्रीन पर मैसेज भी डिस्प्ले कर सकते हैं।

पर्सनल डेटा कर सकते हैं डिलीट
हालांकि डिवाइस को लोकेट करने या पर्सनल डेटा इरेज करने के लिए आपका एंड्रॉयड डिवाइस आपके गूगल अकाउंट से कनेक्ट होना जरूरी है। इसके अलावा आपका डिवाइस ऑन होना चाहिए और इंटरनेट से कनेक्ट भी होना चाहिए। तभी आप अपने खोए हुए डिवाइस को लोकेट कर पाएंगे।

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where is my phone
बता दें कि पिछले दिनों गूगल ने अपने सर्च रिजल्ट पेज में कुछ नए फीचर्स जारी किए। इसमें यूजर अपने गूगल अकाउंट के जरिए सर्च फ्रेज 'where is my phone?' का इस्तेमाल करके भी अपने डिवाइस की लोकेशन का पता लगा सकते हैं। लोकेशन मिलने के बाद आप 'Ring'ऑप्शन को सिलेक्ट कर सकते हैं।

दूसरे फोन से भी कर सकते हैं ये काम
अगर आपके पास अपना खोया हुआ फोन लोकेट करने के लिए कोई दूसरा फोन या लैपटॉप नहीं है तो आप किसी अन्य के फोन से भी अपने डिवाइस को ढूंढ सकते हैं। आप गेस्ट मोड और गूगल अकाउंट यूजरनेम-पासवर्ड का इस्तेमाल कर साइनइन कर सकते हैं। ऐसा करने से आप अपने खोए हुए डिवाइस को ट्रैक करने, रिंग करने, डेटा वाइप करने जैसे काम कर सकते हैं।



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Android 12 अपडेट में मिलेंगे कमाल के फीचर्स, चेहरे के हिसाब से अपने आप रोटेट होगी स्क्रीन, जानिए अन्य फीचर्स

Google जल्द ही एंड्रॉयड यूजर्स के लिए Android 12 अपडेट जारी कर सकता है। बताया जा रहा है कि मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम Android 12 इस साल के अंत तक जारी किया जा सकता है। हालांकि इसके फीचर्स को लेकर जानकारियां अभी से सामने लगी हैं। बताया जा रहा है कि एंड्रॉयड 12 में एक खास फीचर आने वाला है। इस फीचर में यूजर्स के मोबाइल की स्क्रीन उनके चेहरे के मुताबिक रोटेट होगी। इसमें यूजर्स को स्क्रीन रोटेट करने के लिए टैप करने या किसी बटन की जरूरत नहीं होगी। मोबाइल की स्क्रीन यूजर के चेहरे के हिसाब से रोटेट होगी।

Google Pixel स्मार्टफोन में होगा रोलआउट
रिपोर्ट के अनुसार, गूगल अपने Pixel स्मार्टफोन में इस नए फीचर को रोलआउट करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो रोटेट फीचर Pixel स्मार्टफोन के फ्रंट कैमरे के जरिए काम करेगा। इस फीचर के तहत जब यूजर फोन की स्क्रीन की तरफ देखेगा तो फोन को यूजर के सिर की दिशा का पता चल जाएगा। इसके बाद फोन की स्क्रीन उसी अनुसार रोटेट होगी।

कब मिलेगा एंड्रॉयड 12 अपडेट
फिलहाल गूगल इस ऑटो रोटेट फीचर को सिर्फ Pixel स्मार्टफोन में ही देने जा रहा है, लेकिन जल्द ही एंड्रॉयड 12 अपडेट अन्य स्मार्टफोन्स में भी मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, एंड्रॉयड 12 के डेवलपर्स प्रीव्यू को इसी महीने रिलीज किया जा सकता है। वहीं एंड्रॉयड 12 अपडेट को इस साल सितंबर तक सभी के लिए रोल आउट किया जा सकता है।

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ये फीचर्स भी मिलेंगे एंड्रॉयड 12 में
ऑटो रोटेट फीचर के अलावा एंड्रॉयड 12 में कई अन्य शानदार फीचर्स भी यूजर्स को मिलेंगे। गूगल पिक्सल स्मार्टफोन यूजर के लिए डबल टैप फीचर को इसी अपडेट में देगा। इस फीचर में यूजर को गूगल असिस्टेंट का सपोर्ट मिलेगा, जो कि यूजर के अलॉर्म को बंद करने में मददगार साबित होगा। इसके अलावा यूजर्स जेस्चर फीचर के जरिए स्क्रीनशॉट भी ले सकेंगे।

लीक हुए स्क्रीन शॉट
दरअसल, एंड्रॉयड 12 से संबंधित यह जानकारी गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम के बीटा वर्जन रिलीज किए जाने से पहले पार्टनर्स को शेयर किए जाने वाले डॉक्यूमेंट्स के जरिए लीक हुई है। इस डॉक्यूमेंट में Andoid 12 के स्क्रीन शॉट भी है, जिनसे यूआई और अपकमिंग फीचर्स के बारे में बताया गया है।



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आइंस्टीन और बिल गेट्स से भी ज्यादा है 6 साल के ऋषि का IQ

बैंगलूरु के 6 साल के ऋषि शिवा प्रसन्ना का नाम हाल ही दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित 'मेन्सा हाई आईक्यू सोसायटी' में दर्ज किया गया है। ऋषि का आइक्यू लेवल 180 है जो अल्बर्ट आइंस्टीन और बिल गेट्स के आइक्यू (160) आइक्यू से भी ज्यादा है। जिस उम्र में बच्चे ठीक से कम्प्यूटर नहीं चला पाते, ऋषि की बनाईं तीन उपयोगी ऐप बच्चों के लिए (आईक्यू टेस्ट ऐप), (कंट्रीज़ ऑफ द वर्ल्ड ) एवं सीएचबी (जो बैंगलोर वासियों के कोविड सहायता है) गूगल प्ले स्टोर में सूचीबद्ध हैं। देश के सबसे युवा सर्टिफाइड एन्ड्रॉयड एप्लीकेशन डेवलपर्स में उनका भी नाम शामिल है।

पृथ्वी को बचाना चाहते हैं
विटामिंस के बारे में जानकारी देने के लिए शिवा ने हैरी पॉटर के पात्रों के आधार पर एक किताब भी लिखी है। ऋषि को 'यंग जीनियस' में सम्मानित किया जाएगा। यह शो विलक्षण प्रतिभा वाले बच्चों को सम्मानित करता है। ऋषि ने 3 साल की उम्र में ही सौर तंत्र, ब्रह्मांड, ग्रहों, आकृतियों एवं संख्याओं के बारे में बताना शुरू कर दिया था। 5 साल की उम्र में सन 2019 में अपने आईक्यू के लिए इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स की ओर से प्रशस्ति पत्र मिल चुका है। 5 साल की उम्र में वे कोउिंग में माहिर हो गए थे। शिव वैज्ञानिक बनकर पृथ्वी को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाना चाहते हैं।

ऋषि शिव प्रसन्ना में अद्भुत प्रतिभा है। उसे अब यंग जीनियस में सम्मानित किया जाएगा। यह शो विलक्षण प्रतिभा वाले बच्चों को सम्मानित करता है। ऋषि पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी, पद्म श्री विजेता सरदार सिंह से मिले और उन्हें अपने ज्ञान से बहुत प्रभावित किया। सरदार सिंह 350 से ज्यादा बार भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले हैं और उन्हें सबसे कम उम्र का हॉकी कप्तान बनने का गौरव प्राप्त है। जब वो ऋषि से मिले, तो चकित रह गए।

ऋषि ने काफी छोटी उम्र में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करना शुरू कर दिया था। ऋषि की मां, रचेश्वरी एस. ने बताया, ‘‘3 साल की उम्र में ऋषि ने सौर तंत्र, ब्रह्मांड, गृहों, आकृतियों एवं संख्याओं के बारे में बताना शुरू कर दिया था। उसका ज्ञान देखकर हम अचंभित रह जाते थे’’। उसे 5 साल की उम्र में सन 2019 में अपने आईक्यू के लिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से सर्टिफिकेट ऑफ एप्रिसिएशन (प्रशस्ति पत्र) मिल चुका है। 4 साल की उम्र में ऋषि की रुचि अंतरिक्ष, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर साईंस में हो गई। ऋषि शिव प्रसन्ना ने बताया, ‘‘5 साल की उम्र में मैंने कोडिंग सीखी और अब मैं कई यूज़र-फ्रेंडली ऐप बना चुका हूँ। मैं वैज्ञानिक बनकर धरती माँ की रक्षा करने में मदद करना चाहता हूँ।’’ बायजू यंग जीनियस के छठवें एपिसोड में ऋषि शिव पी को सरदार सिंह के साथ एक दिलचस्प वार्ता में देखिए 20 फरवरी, 2021 (शनिवार) को और इसका रिपीट टेलीकास्ट 21 फरवरी को न्यूज़18 नेटवर्क पर प्रसारित होगा।



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यूज़र्स के लिए नया फीचर, व्हाट्सएप अकाउंट डिलीट किए बिना कर सकेंंगे लॉगआउट

नई पॉलिसी को लेकर आलोचनाओंं का शिकार हो रहे व्हॉट्सऐप ने यूजर्स की नाराजगी दूर करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इन्हीं में से एक है नया 'साइन आउट' फीचर जो बहुत जल्द लॉन्च होने जा रहा है। व्हाट्सऐप के अनुसार, यह उन उपयोगकर्ताओं के लिए नया फीचर है जो कुछ दिनों के लिए इस ऐप से दूर रहना चाहते हैं लेकिन अपना अकाउंट डिलीट नहीं करना चाहते। यानी अब यूजर बिना व्हाट्सऐप अकाउंट को डिलीट किए साइन आउट कर सकेंगे। यह नया फीचर जल्द ही व्हाट्सऐप मैसेंजर और इसके बिजनेस वर्जन पर आएगा। इसे अपउेट करने के बाद आप जब चाहें साइन-आउट और साइन-इन कर सकेंगे।

यूज़र्स के लिए नया फीचर, व्हाट्सएप अकाउंट डिलीट किए बिना कर सकेंंगे लॉगआउट

अब चुनाव यूजर के हाथ में
यह फीचर यूजर को जब चाहे व्हॉट्सऐप का उपयोग बंद करने और फिर से शुरू करने की सुविधा देगी, यानी अब चुनाव पूरी तरह से उपयोगकर्ता की पसंद पर निर्भर होगा। इससे पहले ऐसा करने की सुविधा नहीं थी और यूजर को ऐप अनइंस्टॉल करनी पड़ती थी। नई सुविधा उन लोगों के लिए बहुत मददगार होगी जो व्हॉट्सऐप से मुक्त होना चाहते हैं। इसके अलावा, नई 'लॉग आउट' सुविधा आपके सोशल मीडिया उपयोग और दिए जाने वाले समय की भी निगरानी प्रणाली के रूप में भी काम करेगा। में आपकी खपत के लिए एक निगरानी प्रणाली भी लागू करेगी।

यूज़र्स के लिए नया फीचर, व्हाट्सएप अकाउंट डिलीट किए बिना कर सकेंंगे लॉगआउट

मल्टी डिवाइस फीचर की तैयारी
दरअसल, व्हॉट्सऐप एक मल्टी-डिवाइस फीचर पर काम कर रहा है, जिसमें एक ही बार में आपके ऐप अकाउंट को विभिन्न उपकरणों पर उपयोग किया जा सकता है। संभवत: कंपनी अब दो प्रकार के मल्टी-डिवाइस फीचर बनाने पर काम कर रही है। अभी यूजर व्हाट्सएप वेब के साथ एक मल्टी-डिवाइस के रूप में स्मार्टफोन के बिना वेब का उपयोग कर सकते हैं। अगला मल्टी-डिवाइस वर्जन अन्य उपकरणों के साथ इसका जुड़ाव होगा। यह सुविधा आपको अपने व्हाट्सएप खाते से जुड़े अधिकतम चार उपकरणों तक कनेक्शन जुड़ऩे में मदद करेगी। इसका उपयोग करने के लिए इंटरनेट से कनेक्ट होने की आवश्यकता नहीं होगी। कंपनी ने एक डेमो वीडियो जारी किया है जहां यूजर को एक डिवाइस से लिंक होने पर अपने व्हाट्सएप खाते को लॉग आउट करने का बेहतर तरीका बताया गया है।

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मिलेगा लॉगआउट का विकल्प
इस फीचर के बाद डिलीट अकाउंट' की जगह 'लॉग आउट' विकल्प ले लेगा। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि क्या व्हाट्सऐप पहले से 'लिंक्ड डिवाइस' के लिए भी ये सुविधा देगा। इस नए फीचर ने व्हॉट्स ऐप मैसेंजर और बिजनेस वर्जन पर बिना किसी परेशानी के काम किया। पिछले भाग में विकल्प को कॉपी करेगा। इतना ही यह फीचर एन्ड्रॉएड मोबाइल पर भी आएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा डिवाइसेज को अपडेट किया जा सके। अभी तक लॉन्च की कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है।

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Friday, February 19, 2021

Google ने आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस की एथिक्स रिसर्चर को नौकरी से निकाला, वजह चौंका देगी

टेक जाएंट Google ने कॉरपोरेट ईमेल के उपयोग की जांच के बाद आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस (Ai) की एथिक्स रिसर्चर मार्गरेट मिशेल को नौकरी से निकाल दिया है। मिशेल एथिकल Ai टीम की सह-प्रमुख थीं।
एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने मिशेल को इसलिए निकाल दिया क्योंकि उन्होंने अपने सहकर्मी तिमनीत गेब्रु के खिलाफ भेदभाव का सबूत खोजने के लिए कॉर्पोरेट ईमेल के उपयोग से स्वचालित स्क्रिप्ट का इस्तेमाल किया था। गेब्रू को गूगल ने पहले ही नौकरी से निकाल दिया है।

मिशेल ने किया था ऐसा ट्वीट
रिपोर्ट में शुक्रवार को कहा गया है कि मिशेल ने गूगल के गेब्रू से निपटने और सीईओ सुंदर पिचाई एवं ब्लैक कॉलेज व विश्वविद्यालय के नेताओं के बीच एक बैठक की आलोचना करते हुए एक ट्वीट पोस्ट किया। गूगल ने एक बयान में कहा कि मिशेल के आचरण की समीक्षा करने के बाद हमने पुष्टि की कि हमारी आचार संहिता के साथ-साथ हमारी सुरक्षा नीतियों का कई बार उल्लंघन किया गया, जिसमें गोपनीय व्यवसाय संबंधी संवेदनशील दस्तावेजों और अन्य कर्मचारियों के निजी डेटा शामिल हैं।

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मैरियन क्रोक को किया नियुक्त
गौरतलब है कि गूगल ने एक दिन पहले ही गूगल रिसर्च के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए जाने-माने ब्लैक एक्जिक्यूटिव मैरियन क्रोक को नियुक्त किया था। इसके बाद ही मिशेल को निकाल दिया गया। यह नियुक्ति एक अन्य ब्लैक एक्जिक्यूटिव गेब्रू को विवादास्पद ढंग से निकाले जाने के मद्देनजर हुई। गेब्रू गूगल की एथिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टीम के तकनीकी सह-नेतृत्व थीं।

ईमेल के आधार पर निकाल दिया गया
गेब्रू ने दिसंबर में कहा था कि उन्हें एक ऐसे ईमेल के आधार पर निकाल दिया गया था, जिसमें उन्होंने गूगल की प्रतिबद्धता के समावेश और विविधता के बारे में अपनी शंकाएं व्यक्त की थीं।



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Wednesday, February 17, 2021

1 अप्रेल से मोबाइल पर बात करना हो जाएगा महंगा, डेटा भी देने पड़ेंगे ज्यादा पैसे

मोबाइल पर बात करना और इंटरनेट यूज करना जल्द ही महंगा होने वाला है। दरअसल, टेलीकॉम कंपनियां अपने टैरिफ प्लान में बढ़ोतरी कर सकती है। इसकी वजह से अब यूजर्स को रिचार्ज प्लान पहले की अपेक्षा महंगे पड़ेंगे। इसके साथ ही डेटा पैक भी महंगे हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियां 1 अप्रेल से दरों में वृद्धि करने की तैयारी में हैं। इन्वेस्टमेंट इनफार्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (ICRA) की रिपोर्ट में कहा गया है कि रेवेन्यू बढ़ाने के लिए टेलीकॉम कंपनियां 1 अप्रेल से शुरू होने जा रहे आगामी वित्त वर्ष 2021—22 से अपने टैरिफ प्लान की दरों में वृद्धि कर सकती हैं। बता दें कि इससे पहले साल कंपनियों ने टैरिफ बढ़ाए थे।

रेवेन्यू बढ़ेगा
हालांकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि टेलीकॉम कंपनियां अपने टैरिफ प्लान की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी करेगी। वहीं ICRA ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि टैरिफ में बढ़ोतरी और ग्राहकों का 2G से 4G में अपग्रेडेशन से टेलीकॉम कंपनियों के एवरेज रेवेन्यू में सुधार होगा। रिपोर्ट के अनुसार, प्रति यूजर साल के बीच तक यह करीब 220 रुपए हो सकता है। वहीं अगले 2 साल में इंडस्ट्री का रेवेन्यू 11 प्रतिशत से 13 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2022 में आपरेटिंग मार्जिन करीब 38 प्रतिशत बढ़ेगा।

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कोरोनाकाल में बढ़ा डेटा का उपभोग
बता दें कि कोरोनाकाल में डेटा का उपभोग ज्यादा बढ़ गया है। कोरोना महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान वर्क फ्रॉम होम और स्टडी फ्रॉम होम की वजह से इंटरनेट का उपभोग बढ़ गया। लॉकडाउन में डेटा यूजेज और टैरिफ में बढ़ोतरी के कारण स्थिति में सुधार हुआ।

टेलीकॉम कंपनियों पर 1.6 लाख करोड़ रुपए बकाया
रिपोर्ट के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों पर कुल एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) का 1.69 लाख करोड़ रुपए बकाया है। इसमें से अभी तक 15 टेलीकॉम कंपनियों ने सिर्फ 30,254 करोड़ रुपए ही चुकाए हैं। बकाया रकम की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार, एयरटेल पर करीब 25,976 करोड़ रुपए, वोडाफोन आइडिया पर 50399 करोड़ और टाटा टेलीसर्विसेज पर करीब 16,798 करोड़ रुपए अभी भी बकाया है।



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Tuesday, February 16, 2021

रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक जितनी मर्जी उतना डेटा फ्री में करें यूज, यहां जानिए कैसे

टेलीकॉम कंपनियां अपने यूजर्स के लिए समय—समय पर नए—नए ऑफर्स लाती रहती हैं। अब इसी कड़ी में Vodafone Idea (Vi) अपने प्रीेपेड यूजर्स के लिए खास ऑफर लेकर आई है। इस ऑफर में Vodafone Idea ने अपने यूजर्स को 6 घंटे के लिए फ्री में हाई स्पीड डेटा देने का ऐलान किया है। दरअसल, यह वोडाफोन आइडिया का नाइट ऑफर है। इसे कंपनी ने बिंज ऑल नाइट ऑफर (Binge all night offer) नाम दिया है। इस ऑफर के तहत यूजर्स रात में जितनी मर्जी चाहें उतना डेटा फ्री में यूज कर सकते हैं।

रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक
इस ऑफर के तहत Vodafone Idea के प्रीपेड यूजर्स रात 12 बजे से लेकर सुबह 6 बजे के बीच जितनी मर्जी चाहें उतना डेटा फ्री में यूज कर सकते हैं। इसके लिए यूजर्स को किसी भी तरह का फेयर यूसेज पॉलिसी चार्ज नहीं देना होगा। वोडाफोन आइडिया का यह ऑफर कुछ रिचार्ज प्लान्स को छोड़कर ज्यादातर प्रीपेड प्लान में मिल रहा है।

Vodafone Idea

इन रिचार्ज प्लान्स में मिलेगा यह ऑफर
वोडाफोन-आइडिया के अनुसार, बिंज ऑल नाइट ऑफर का लाभ 249 रुपए, 299 रुपए, 398 रुपए, 399 रुपए, 449 रुपए, 499 रुपए, 555 रुपए, 595 रुपए, 598 रुपए, 599 रुपए, 795 रुपए, 819 रुपए, 1197 रुपए, 2,399 रुपए और 2595 रुपए वाले प्रीपेड रिचार्ज प्लान पर मिलेगा। इसके अलावा यूजर्स को किसी भी तरह का कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। साथ ही डेटा पर कोई पाबंदी नहीं होगी। रात 12 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक यूजर्स जितनी मर्जी चाहें उतना डेटा खर्च कर सकते हैं। इसके साथ ही यूजर्स को वीकेंड डेटा रोलओवर की भी सुविधा मिलेगी।

डबल डेटा और डेटा वीकेंड रोलओवर ऑफर
बिंज ऑल नाइट ऑफर के अलावा वोडाफोन आइडिया अपने प्रीपेड यूजर्स को दो और खास ऑफर दे रही है। कंपनी अपने कुछ रिचार्ज प्लान्स में यूजर्स को डबल डेटा बेनिफिट दे रही है। चुनिंदा रिचार्ज प्लान्स में यूजर्स को हर दिन डबल डेटा मिल रहा है। इसके अलावा कंपनी अपने यूजर्स को वीकेंड डेटा रोलओवर की सुविधा भी दे रही है। इस ऑफर में यूजर्स वीकडेज में इस्तेमाल न किए गए डेटा को वीकेंड पर यूज कर सकते हैं।



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फर्जी कॉल और मैसेज के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार ने बनाया यह खास प्लान

टेक्नोलॉजी के साथ साइबर क्राइम (Cyber Crime) भी बढ़ गया है। ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले बढ़ गए हैं। साइबर क्रिमिनल्स फर्जी कॉल (Fake Call) और मैसेज के जरिए लोगों से ऑनलाइन धोखाधड़ी करते हैं। अब सरकार ऑनलाइन फर्जीवाड़े पर सख्ती के मूड में है। ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर क्राइम की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सरकार डिजिटल इंटेलीजेंस यूनिट (digital intelligence unit) लाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। इस डिजिटल इंटेलीजेंस यूनिट की सहायता से साइबर क्राइम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे कसा जाएगा जालसाजों पर शिकंजा
केन्द्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने ऑनलाइन फर्जीवाडे और साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं और शिकायतों के चलते एक बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने बताया कि सरकार किस तरह इन जालसाजों पर शिकंजा कसेगी। उन्होंने कहा कि ये जालसाज लोगों को फर्जी कॉल और मैसेज के जरिए उनकी बैंक डिटेल्स मांगकर ठगी करते हैं। ऐसे में डिजिटल इंटेलीजेंस यूनिट, लोकल पुलिस, बैंक और सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के साथ मिलकर फर्जीवाडा करने वाले इन जालसाजों पर शिकंजा कसेगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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ऐसे काम करेगा डिजिटल इंटेलीजेंस यूनिट
सरकार की यह डिजिटल इंटेलीजेंसी यूनिट एक नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगी। यह यूनिट पुलिस, साइबर सेल, बैंक, ऑनलाइन पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगी। ये आपस में मिलकर जालसाजों पर शिकंजा कसेंगे। बता दें कि पुलिस और दूसरी एजेंसियों के बीच तालमेल और सामंजस्य की कमी के चलते ये जालसाज कार्रवाई से बच जाते थे। लेकिन अब ये सभी एजेंसिया मिलकर इन जालसाजों को पकड़ेगी।

ऑनलाइन फर्जीवाड़े में जमताड़ा और मेवात नंबर 1
बता दें कि देश में फर्जी कॉल और मैसेज के जरिए किए जाने वाले ऑनलाइन फर्जीवाड़े के हरियाणा के मेवात और झारखंड के जमताड़ा जिले के गिरोह सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। जमताड़ा पर तो एक वेब सीरीज भी बन चुकी है। यहां के गिरोह लोगों को फर्जी कॉल कर या मैसेज के जरिए उनके बैंक डिटेल्स और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लेते है और उनके साथ फर्जीवाडा करते हैं।



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Airtel अपने यूजर्स को फ्री दे रहा 6GB डेटा, जानिए कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ

टेलीकॉम कंपनियां अपने यूजर्स के लिए समय—समय पर ऑफर्स लाती रहती हैं। अब एयरटेल ने भी अपने यूजर्स के लिए एक खास ऑफर का ऐलान किया है। इसमें कंपनी अपने यूजर्स को 6 जीबी तक का डेटा फ्री में दे रही है। यह डेटा यूजर्स को 6 कूपन के रूप में मिलेगा। इसके जरिए यूजर्स अपना मनोरंजन और जरूरी काम कर सकेंगे। एयरटेल के ये Free Data Coupons कुछ रिचार्ज प्लान्स पर लागू हैं। यूजर्स 219 रुपए के शुरुआती प्रीपेड रिचार्ज के साथ ही फ्री कूपन पा सकते हैं। हम आपको बताएंगे कि इन फ्री डेटा कूपन को आप किस तरह से पा सकते हैं और इन्हें रिडीम कैसे किया जाए।

इन प्रीपेड रिचार्ज प्लान्स पर मिलगा लाभ
एयरटेल अपने प्रीपेड रिचार्ज प्लान्स पर यूजर्स को ये फ्री डेटा कूपन दे रहा है। इसमें अगर यूजर एयरटेल का 219, 249, 279, 289, 298, 349, 398 और 448 रुपये का प्रीपेड रिचार्ज करवाते हैं तो एक-एक जीबी के दो डेटा कूपन फ्री मिलेंगे। बता दें कि ये सभी रिचार्ज प्लान 28 दिनों की वैलिडिटी केे साथ आते हैं।

इसके अलावा अगर यूजर 56 दिनों की वैलिडिटी वाले प्लान 399, 449, 558 और 599 रुपए से अपना अकाउंट रिचार्ज करते हैं तो उन्हें एक-एक जीबी के 4 डेटा कूपन फ्री मिलेंगे। 56 दिनों की वैलिडिटी वाले प्लान्स में यूजर्स को 4 जीबी डेटा एक्स्ट्रा मिलेगा।

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वहीं अगर एयरटेल यूजर्स 598 और 698 रुपए वाले प्रीपेड रिचार्ज प्लान से रिचार्ज करते हैं तो उन्हें एक-एक जीबी के 6 डेटा कूपन फ्री मिलेंगे। बता दें कि को इन दोनों प्लान्स की वैलिडिटी 84 दिनों की है।

ऐसे रिडीम करें फ्री डेटा कूपन
बता दें कि एयरटेल के इस ऑफर का लाभ वही यूजर्स उठा पाएंगे, जो Airtel Thanks मोबाइल ऐप से प्रीपेड रिचार्ज करेंगे। इसके लिए एयरटेल यूजर्स को Airtel Thanks ऐप डाउनलोड करनी होगी। रिचार्ज करने के बाद इस ऐप के My Coupons सेक्शन में जाकर डेटा कूपन को रिडीम कर सकते हैं। इसमें उन्हें कूपन की वैलिडिटी के बारे में भी पता चल जाता है।



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Sunday, February 14, 2021

Airtel ने यूजर्स को किया आगाह, अगर करेंगे यह गलती तो बैंक अकाउंट हो जाएगा खाली

हाल ही टेलीकॉम कंपनी Airtel के यूजर्स के डेटा लीक की खबर आई थी। अब कंपनी ने अपने मोबाइल यूजर्स और डीटीएच यूजर्स को फ्रॉड के बारे में आगाह किया है। बता दें कि एयरटेल कंपनी के नाम पर फ्रॉड हो रहा है ।ऐसे में कंपनी अपने यूजर्स को टेक्स्ट मैसेज भेजकर इस फ्रॉड के बारे में आगाह कर रही है। एयरटेल ने टेक्स्ट मैसेज में लिखा है कि हमारी कंपनी आपसे KYC डिटेल्स और आधार से जुड़ी कोई भी जानकारी नहीं मांगती है। ऐसे में एयरटेल ने यूजर्स को साइबर ठगों और फ्रॉड से सावधान रहने को कहा है।

ऐप डाउनलोड न करें
एयरटेल ने अपने डीटीच यूजर्स को भी इस फ्रॉड के बारे में आगाह किया है। एयटेल ने कहा है कि कंपनी अपने Airtel Digital TV के लिए यूजर्स से ना ही किसी ऐप को डाउनलोड करने की बात कहती है और ना नंबर वेरिफिकेशन के लिए कोई कॉल करने को कहती है। Airtel ने यूजर्स को आगाह करते हुए कहा है कि अगर किसी SMS या फोन कॉल के जरिए आपसे ऐसी कोई जानकारी मांगी जाए तो उसे आप जानकारी ना दें नहीं तो आप फाइनेंशियल फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं।

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26 लाख यूजर्स के डेटा लीक की खबर
बता दें कि हाल ही Airtel यूजर्स के डेटा लीक को लेकर खबर आई थी कि Airtel के जम्मू कश्मीर के 26 लाख यूजर्स का डेटा लीक हो गया है। डेटा लीक करने वाले हैकर ग्रुप की पहचान पाकिस्तानी हैकर्स के रूप में की गई थी। पाकिस्तानी हैकर्स ने सार्वजनिक मंच पर डेटा डालने और 3500 डॉलर में बिटकॉइन बेचने के लिए नए खाते बनाए। यह दावा एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने किया था। हैकिंग समूह की पहचान ‘टीमलाइट्स’ के रूप में की गई।

एयरटेल ने दी थी सफाई
इस मामले में एयरटेल के प्रवक्ता ने कहा था कि इस समूह द्वारा दावा किए गए किसी भी एयरटेल सिस्टम का कोई हैक या उल्लंघन नहीं था। प्रवक्ता ने बताया था कि समूह 15 महीने से हमारी सुरक्षा टीम के संपर्क में है और उसने एक विशिष्ट क्षेत्र से गलत डेटा पोस्ट करने के अलावा अलग-अलग दावे किए हैं। इससे पहले एक बयान में, एयरटेल ने कहा था कि इस विशिष्ट मामले में उनकी ओर से डेटा का उल्लंघन नहीं था। कंपनी ने कहा कि उसने इस मामले को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा दिया है।



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स्मार्ट रोबोट्स के दम पर शेयर मार्केट पर हमला है नई युद्ध नीति

आधुनिक विनाशकारी हथियारों में परमाणु बम, घातक वायरस और जानलेवा मशीनें दुश्मन के सफाए के नए साधन हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौड़ में इतिहास का सबसे घातक हथियार शामिल नहीं है। सालों से एक-दूसरे को युद्ध क्षेत्र में मात देने के लिए विकसित राष्ट्र अपने संसाधनों और वैज्ञानिक शोधों का उपयोग संहारक हथियार बनाने में कर रहे हैं। लेकिन युद्ध के जानकारों और तकनीक के दिग्गजों का मानना है कि सीखने की क्षमता से लैस कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले रोबोट्स इंसान के सबसे घातक हथियार हो सकते हैंं। वैज्ञानिकों का ऐसा सोचना गलत नहीं हैं। क्योंकि अब निवेशक भी इन मशीनों में ही पैसा लगाने को अक्लमंदी मान रहे हैं। यानि इन्वेस्टमेंट के लिहाज से इनके निर्माण के लिए अब पहले से ज्यादा पैसा जुटाया जा रहा है। वे दिन दूर नहीं जब ये रोबोट्स स्टॉक एक्सचेंज और अर्थ व्यवस्था को भी अपने मुताबिक नियंत्रित करने लगेंगे। बड़ी टेक कंपनियों के अलावा नामी अंतरराष्ट्रीय फर्म भी 'समझदार रोबोट्स' के निर्माण में धन लगाने को मुनाफे का सौदा मान रही हैं।

स्मार्ट रोबोट्स के दम पर शेयर मार्केट पर हमला है नई युद्ध नीति

रोबोट बना रहे शेयर मार्केट रणनीति
आपको जानकर हैरानी होगी की अब स्मार्ट मशीनों के रूप में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस से लैस रोबोट्स शेयर मार्किट की रणनीति भी बनाने लगे हैं। लिंक्स एसेट मैनेजमेंट ने एक ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिद्म विकसित की है जो बाजार के जोखिमों, शेयर मार्केट के आंकड़ों और अपने प्रशिक्षण के दम पर ऐसी रणनीतियां तैयार करती है जो प्रतिद्वंद्वी को धूल चटा देती हैं। कंपनी के सीईओ एलन एलेक्स ने ब्लूमबर्ग से बातचीत में कहा कि यह हथियार बनाने की दौड़ में अगला चरण है। अब लड़ाई जमीन पर आमने-सामने नहीं बल्कि शेयर मार्केट के जरिए मशीनी बुद्धिमत्ता और इंसान के हुनर के बीच है।

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ट्रेड वॉर को मिलेगी नई ऊंचाई
लगातार सीखने वाले ये रोबो ट्रेड एनालिस्ट आने वाले समय में क्वांट इन्वेस्टमेंट (बाजार के उतार-चढ़ाव का लेखा-जोखा रखने वाले बाजार विश्लेषक या क्वांटिटेटिव एनालिस्ट) को अगले स्तर पर ले जाएंगे। क्योंकि ये समझदार रोबोट बिना इंसानी मदद या मानव निर्देशों केसमय के साथ उपलब्ध आकंड़ों के आधार पर स्वत: ही अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाने के लिए ही प्रोग्राम किए गए हैं। यह तकनीक-प्रेमी, डेटा-चालित क्वांट इन्वेस्टमेंट में इंसानों को भी चुनौती देने लगा है। तकनीक की उपलब्धता और सबसे आगे रहने की होड़ में आज यह रोबो ट्रेड एनालिस्ट सस्ते और सुलभ होते जा रहे हैं। आने वाले सालों में इनसे बाजार पर अपना नियंत्रण करने की कोशिश में ट्रेड वॉर और भी ज्यादा व्यापक स्तर पर शुरू होने की आशंका है।

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अर्थव्यवस्था पर हमला है नया हथियार
चीन और अमरीका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर ने एक बार फिर इस बात को साबित कर दिया है कि सामरिक शक्ति में आज ज्यादातर बड़े राष्ट्र एक-दूसरे के बराबर ही हैं। ऐसे में जमीनी लड़ाई के जरिए वे देश को युद्ध के भयावह नतीजों में नहीं डाल सकते। यही कारण है कि एक-दूसरे पर राजनीतिक और सामरिक दबदबा बनाए रखने के लिए अब बड़े राष्ट्रों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अर्थव्यवस्था पर चोट करने की नीति अपनाई है। छोटे राष्ट्र और विकसित देश जहां अभी इस लड़ाई में नहीं कूदे हैं वहीं रूस, अमरीका, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन जैसे देशों ने इस ओर अपनी चासलें चलने शुरू कर दी हैं। आने वाले सालों में युद्ध मैदान में नहीं घर के अंदर तकनीक के सहारे ही लड़े जाएंगे, जिसमें शह और मात का सालों तक अंदाजा लगा पाना संभव नहीं हो पाएगा। क्योंकि आर्थिक संकट भी शनै: शनै: सामने आते हैं।

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