जटिल टेक्नो सिस्टम के कारण लोग हो रहे परेशान
-जेडी पॉवर के एक वार्षिक सर्वे में सामने आया कि उन्नत चालक सहायता प्रणालियां अधिक व्यापक हो गई हैं लेकिन इससे कार के मालिकों के लिए परेशानी बढ़ रही है। जे डी पावर ने कार खरीदने वालों के 90 दिनों के अनुभव के आधार पर यह सर्वे किया था। सर्वेक्षण में फर्म ने पाया कि नई कार के मालिक खुद को विभिन्न प्रणालियों और तकनीक के बीच खुद को फंसा हुआ महसूस करते हैं। स्वत: लेन परिवर्तन की चेतावनी, सड़कों पर गड्ढों और खतरों का पता लगाना, दूसरे वाहने से टकराव होने से बचाने वाली सुरक्षा प्रणाली और अन्य सुरक्षा-प्रौद्योगिकी इसमें शामिल हैं।
स्वचालित कार से क्यों डरते 71 फीसदी अमरीकी
-सर्वे में सामने आया कि अधिकतर लोगों को पूरी तरह ड्राइवरलैस तकनीक पर निर्भरता पसंद नहीं
सर्वे में सामने आया कि तीन चौथाई अमरीकी सेल्फ ड्राइविंग वाहनों में सफर करने से डरते हैं। प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि इस तकनीक को सामान्य जीवन में उपयोग में अभी 10 साल और लगेंगे। केवल19 फीसदी ने कहा कि वे पूरी तरह से इस तकनीक से लैस कार में ड्राइव पर जाना पसंद करेंगे। जबकि 71 फीसदी लोग ऐसे थे जिन्हें स्वचालित वाहनों में बैठने से बेहद डर लगता था।
शेयर्ड मोबिलिटी होगा नया ट्रेंड
-नए दशक में भविष्य के ट्रांसपोर्ट सिस्टम के साथ ही शेयर्ड मोबिलिटी का ट्रेंड भी बढ़ेगा यानी निजी वाहनों की जरुरत सीमति होती जाएगी। अब भी कार-शेयरिंग, राइड-हेलिंग, ऑटोनॉमस टैक्सियों और अन्य मोबिलिटी-एज-ए-सर्विस व्यवसायों के रूप में यह ट्रेंड हमारे सामने है। विशेषज्ञों का मानना है कि उबर और लिफ्ट जैसे मोबिलिटी शेयर सेवा प्रदाता कंपनियों के कारण खरबों डॉलर की ऑटो इंडस्ट्री पर खतरा भी मंडरा रहा है। सेल्फ-ड्राइविंग कार, जीरो-कार्बन उत्सर्जन, कनेक्टिविटी और नैनोटेक्नोलॉजी नए जमाने की मोबिलिटी के नए विकल्प होंगे।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3n0PtmR
No comments:
Post a Comment