Sunday, January 31, 2021

चीन का बड़ा एक्शन, बंद की 18,489 वेबसाइट, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की आड़ में हो रहे थे ऐसे काम

चीन ने पिछले वर्ष यानि 2020 में अवैध वेबसाइट्स पर एक्शन लिया और बड़ी कार्यवाही की। इसमें चीन ने हजारों वेबसाइटों को बंद कर दिया। रिपोर्ट के अनसार, साल 2020 में चीन में 18,489 अवैध वेबसाइटों को बंद कर दिया। इसके अलावा 4,551 अन्य लोगों को चेतावनी नोटिस भी जारी किया है। चीन के साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना (सीएसी) ने शनिवार को यह खुलासा किया। सीएसी ने खुलासा करते हुए बताया कि साल 2020 में 18,489 अवैध वेबसाइटों को बंद कर दिया गया है।

इस वजह से लिया गया एक्शन
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने सीएसी के हवाले से बताया कि कुछ वेबसाइटें ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की आड़ में ऑनलाइन गेम को बढ़ावा या डेटिंग की जानकारी देने लगी थीं। इसलिए बंद कर दी गईं, जबकि अन्य को अवैध सामग्री फैलाने के लिए दंडित किया गया।

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कई अभियान चलाए गए
साल 2020 में साइबरस्पेस प्रशासन विभागों ने अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने, समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालने और किशोरियों के लिए हानिकारक जानकारी से युक्त प्लेटफार्मो के साइबरस्पेस को शुद्ध करने के लिए कई अभियान चलाए। सीएसी अवैध वेबसाइटों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से निपटने के लिए प्रांतीय स्तर के साइबरस्पेस प्रशासन विभागों को निर्देशित किया गया। आलोचकों का आरोप है कि सरकार ने यह कदम आलोचनात्मक सामग्री की वजह से उठाया है जिसे वह पसंद नहीं करती।



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Saturday, January 30, 2021

Airtel ने फिर पछड़ा Jio को, जोड़े इतने लाख नए सब्सक्राइबर्स, BSNL और VI ने गंवाए ग्राहक

नए सब्सक्राइबर जोड़ने के मामले में टेलिकॉम कंपनी एयरटेल (Airtel) ने फिर से बाजी मार ली है। टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2020 में Airtel ने 43 लाख नए मोबाइल ग्राहक बनाए हैं। इस मामले में एयरटेल ने रिलायंस जियो (Reliance Jio) को पीछे छोड़ दिया है। वहीं वोडफोन आइडिया (VI) और बीएसएनएल (BSNL) ने नवंबर माह में अपने सब्सक्राइबर्स गंवाए। वहीं नए सब्सक्राइबर्स के मामले में एयरटेल लगातार चौथी बार नंबर 1 पर है। बता दें हाल ही एयरटेल ने एक और उपलब्धि हासिल की हैै। एयरटेल ने 5जी का सफल परीक्षण किया।

एयरटेल के कुल सब्सक्राइबर्स हुए 334.65 मिलियन
ट्राई द्वारा जारी 30 नवंबर, 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, एयरटेल नेे नवंबर 2020 में करीब 43 लाख नए मोबाइल सब्सक्राइबर जोड़े। अब एयरटेल के कुल सब्सक्राइबर्स की संख्या 334.65 मिलियन हो गई है। इसके साथ ही एयरटेल की मार्केट में 28.97 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने अक्टूबर 2020 के मुकाबले 1.3 फीसदी की ग्रोथ हासिल की है।

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जियो ने जोड़े इतने लाख सब्सक्राइबर्स
वहीं बात करें रिलायंस जियो की तो ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार, जियो ने नवबंर 2020 में करीब 13 लाख नए मोबाइल सब्सक्राइबर्स जोड़े। अब जियो के कुल वायरलेस सब्सक्राइबर्स की संख्या 408.29 मिलियन हो गई है। हालांकि वायरलेस सब्सक्राइबर्स के मामले में जियो अभी भीद नंबर 1 पर है। कंपनी का मार्केट शेयर 35.34 फीसदी है।

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बीएसएनएल और वोडाफोन आइडिया ने गंवाए सब्सक्राइबर्स
वहीं बात करें सरकारी टेलिकॉम कंवपनी बीएसएनएल की तो नवंबर 2020 में बीएसएनएल ने 18,357 सब्सक्राइबर्स गंवाए। जबकि वोडाफोन आइडिया नेे नवंबर 2020 में 2.89 मिलियन (करीब 28 लाख) सब्सक्राइबर्स गंवाए। रिपोर्ट के अनुसार, 30 नवंबर, 2020 तक बीएसएनएल के पास 118.86 मिलियन ग्राहक थे और कंपनी का मार्केट शेयर 10.3 फीसदी रहा। वहीं वोडाफोन आइडिया के पास 25.1 फीसदी मार्केट शेयर के साथ 289.94 मिलियन सब्सक्राइबर्स थे। ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर के बाद से नवंबर 2020 के आखिर तक भारत में 1,151.81 मिलियन वायरलेस सब्सक्राइबर्स बढ़े।



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एक महिला की शिकायत के बाद Myntra को बदलना पड़ रहा Logo, यहां जानिए पूरा मामला

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मिंत्रा (Myntra) अब अपना लोगो (Myntra Logo) बदल सकता है। कंपनी का लोगो महिलाओं के लिए अपमानजनक और आपत्तिजनक बताया जा रहा है। इस मामले में मुंबई साइबर क्राइम पुलिस के समक्ष एक मामला भी दर्ज कराया गया है, जिसके बाद कंपनी ने लोगो में बदलाव करने का फैसला लिया है। दरअसल दिसंबर 2020 में अवेस्ता फाउंडेशन नामक एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की सामाजिक कार्यकर्ता नाज पटेल ने ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल मिंत्रा के लोगो को महिलाओं के प्रति अपमानजनक और आपत्तिजनक बताते हुए इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

की थी लोगो बदलने की मांग
विभिन्न मंचों और सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाने के साथ, पटेल ने आरोप लगाया कि यह लोगो एक नग्न महिला से मिलता जुलता है। नाज ने ई-कॉमर्स कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने और इसका लोगो बदलने की मांग की थी। शिकायत को स्वीकार करते हुए, मुंबई पुलिस के साइबर क्राइम विभाग की डीएसपी रश्मि करंदीकर ने बताया कि जांच के दौरान हमने मिंत्रा का लोगो महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक पाया है।

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वेबसाइट पर नया लोगो, ऐप में पुराना
डीएसपी रश्मि ने कहा, शिकायत के बाद हमने ईमेल के माध्यम से मिंत्रा से संपर्क किया, जिसके बाद कंपनी के अधिकारी आए और हमसे मिले। अधिकारियों ने कहा है कि वे एक महीने में लोगो बदल देंगे। नए लोगो को मिंत्रा डॉट कॉम पर देखा जा सकता है। हालांकि ऐप में अभी भी पुराना लोगो है और इसे हर प्लेटफॉर्म पर अपडेट करने में कुछ और समय लग सकता है।

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24 घंटों के भीतर बेचे थे 30 लाख आइटम
फ्लिपकार्ट के स्वामित्व वाली कंपनी मिंत्रा भारत में परिधान और सामान के लिए सबसे बड़े ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं में से एक है और कंपनी ने हाल ही में अपने एंड ऑफ रीजन सेल के लिए सुर्खियां बटोरी थीं। कंपनी ने 20 दिसंबर को प्लेटफॉर्म पर अपने शुरूआती दिन रिकॉर्ड तोड़ 1.5 विजिटर्स की मौजूदगी दर्ज की थी। मिंत्रा ने इस मेगा सेल के दौरान पहले 24 घंटों के भीतर 30 लाख आइटम बेचे थे। इस दौरान टियर 2 और टियर 3 शहरों में नए ग्राहकों में 55 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी, जिनमें जम्मू, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, काकीनाडा, देहरादून और इंफाल आदि शामिल थे।



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Friday, January 29, 2021

ये 5 टिप्स अपनाकर अपने स्मार्टफोन और डाटा को रखें हैकर्स से सुरक्षित

टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ साइबर क्राइम भी बढ़ता जा रहा है। साइबर क्रिमिनल्स कई बार लोगों के स्मार्टफोन हैक कर लेते हैं और उनका डाटा चुरा लेते हैं। कई बार तो हैकर्स मोबाइल के जरिए लोगों के बैंक अकाउंट तक में सेंध लगा देेते हैं। हालांकि आजकल मार्केट में जो स्मार्टफोन आ रहे हैं, उनमें सिक्योरिटी के लिए फेस लॉक और फिंगरप्रिंट सेंसर जैसे फीचर्स दिए जाते हैं। इसके अलावा भी बहुत सारे फीचर्स ऐसे होते हैं, जिनसे आप अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन को और ज्यादा सिक्योर बना सकते हैं। इंटरनेट की वजह से स्मार्टफोन्स में मालवेयर और स्पायवेयर का खतरा बना रहता है। कई बार हैकर्स इन डिवाइसेज को आसानी से निशाना बना लेते हैं। ऐसे में हम आपको अपने डाटा और फोन को हैकर्स से सिक्योर रखने के लिए कुछ टिप्स बता रहे हैं।

1- थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करने से बचें
एंड्रॉयड यूजर्स को गूगल प्ले स्टोर से ही नई एप्लीकेशन डाउनलोड करनी चाहिए। थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करने से आपके फोन में वायरस का खतरा बढ़ जाता है। इससे कई बार लोग ठगी का शिकार भी हो चुके हैं। यूजर्स अपने मोबाइल पर नई-नई एप्लीकेशन डाउनलोड करने के चक्कर में अविश्सनीय साइटों से एप्लीकेशन डाउनलोड कर लेते हैं। जिनमें मालवेयर और स्पायवेयर का खतरा बना रहता है।

2- काम की ऐप्स ही करें डाउनलोड
अपने फोन में जरूरत के हिसाब से ही एप्लीकेशन डाउनलोड करनी चाहिए। इससे आपके फोन में स्पेस भी रहेगा और सिक्योर भी रहेगा। बहुत से यूजर्स अनावश्यक रूप से अपने फोन में एप्लीकेशन डाउनलोड कर लेते हैं, जिससे एक तो फोन की स्पीड काफी कम हो जाती है और दूसरा वायरस का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में सिर्फ काम की जरूरी एप्लीकेशन ही डाउनलोड करें।

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3- पासवर्ड लॉक/पिन लॉक का प्रयोग करें
ज्यादातर यूजर्स अपने स्मार्टफोन में साधारण लॉक का प्रयोग करते हैं। ऐसे में अगर आपका फोन गुम हो जाए या किसी और के हाथ लग जाए तो वह लॉक खोल सकता है और आपके डाटा के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। ऐसे में अपने फोन में पासवर्ड लॉक या पिन लॉक लगाकर रखें।

4- हर समय ऑन न रखें ब्लूटूथ
ज्यादातर लोगों के मोबाइल में ब्लूटूथ हमेशा ऑन रहता है। ब्लूटूथ ऑन रहने पर आपके फोन को हैक किया जाना ज्यादा आसान हो जाता है। ऐसे में जरूरत पडने पर ही अपने फोन का ब्लूटूथ ऑन करें। काम न आने पर उसे ऑफ रखें।

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5- ऑन रखें रिमोट कन्ट्रोल फंक्शन
ज्यादातर एंड्रॉयड फोन में रिमोट कंट्रोल का फंक्शन होता है। इसे हमेशा ऑन रखें। फोन खो जाने पर रिमोट कन्ट्रोल फंक्शन द्वारा आप अपने फोन को आसानी से खोज सकते हो। यह आपके फोन का जीपीएस का प्रयोग करके उसकी लोकेशन बताने में मदद करता है। साथ ही आप अपने डाटा को भी सुरक्षित रख सकते हो।



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Wednesday, January 27, 2021

इन आसान टिप्स से Youtube के वीडियोज को मोबाइल में कर सकते हैं डाउनलोड

स्मार्टफोन अब सिर्फ कॉलिंग के काम ही नहीं आता बल्कि मनोरंजन का भी बड़ा साधन बन गया है। आजकल स्मार्टफोन्स में ऐसी कई ऐप्स आती हैं, जिनसे यूजर्स अपना मनोरंजन करते हैं। इसमें वीडियो प्लेटफॉर्म Youtube भी शामिल है। लोग दुनिया के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म Youtube पर अपनी पसंद के वीडियो देखते हैं। इसमें सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि पढ़ाई और अन्य जानकारियों से जुड़े वीडियो भी हैं। हालांकि Youtub पर लगातार वीडियो देखने से मोबाइल का डाटा जल्दी खत्म होता है। ऐसे में अगर यूजर्स उन वीडियो को डाउनलोड कर लें तो वे उन्हें बाद में भी देख सकते हैं।

थर्ड पार्टी टूल्स से कर सकते हैं वीडियो डाउनलोड
आप यूट्यूब के वीडियो अपने मोबाइल, डेस्कटॉप और लैपटॉप में डाउनलोड कर सकते हैं। इससे आपका डाटा भर बचेगा और आप उन वीडियो को बाद में कभी भी और कितनी बार भी देख सकते हैं। Youtube से वीडियो डाउनलोड करने के लिए थर्ड पार्टी टूल्स का यूज कर सकते हैं। जानते हैं कैसे आप यूट्यूब के वीडियोज को अपने मोबाइल और लैपटॉप पर डाउनलोड कर सकते हैं।

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मोबाइल में ऐसे करें डाउनलोड
अगर आप यूट्यूब के वीडियोज को अपने मोबाइल में डानलोड करना चाहते हैं तो यह आप आसानी से कर सकते हैं। बिना कोई दूसरी ऐप यूज किए आप वाई2मैट डॉट कॉम की मदद से यूट्यूब के वीडियो आसानी से अपने मोबाइल में डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए आप जो वीडियो डानलोड करना चाहते हैं, उसकास यूआरएल वाई2मैट डॉट कॉम में पेस्ट करना होगा। इसके बाद आप वीडियो को जिस फॉर्मेट में डाउनलोड करना चाहते हैं, उसे चूज करें। इसमें आप फाइल की साइज को सैट भी कर सकते है। इसके बाद आपका वीडियो मोबाइल में डाउनलोड हो जाएगा।

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लैपटॉप में कैसे डाउनलोड करें वीडियो
अगर आप यूट्यूब के वीडियो अपने लैपटॉप या डेस्कटॉप में डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप एक बार में पूरी प्ले लिस्ट भी डानलोड कर सकते हैं। इसके लिए आप अपने डिवाइस में 4k वीडियो डाउनलोड सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं। यह एक फ्री सॉफ्टवेयर है और इसकी मदद से आप पूरी प्लेलिस्ट एक बार में डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा इस सॉफ्टवेयर में 360 डिग्री और 3डी वीडियो भी डाउनलोड करने के ऑप्शंस मिलते हैं। वीडियो डाउनलोड करने के लिए आप यूट्यूब के वीडियो का लिंक एड्रेस बार से कॉपी कर लें। फिर 4K वीडियो डाउनलोडर पर यूआरएल को पेस्ट कर दें। आपका वीडियो डाउनलोड हो जाएगा।



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20 करोड़ से अधिक स्टूडेंट्स और शिक्षकों को Microsoft के प्रोडेक्ट्स पर भरोसा: नडेला

विश्व की प्रमुख सॉफ्टवेयर कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सत्या नडेला ने कहा है कि दुनियाभर में 20 करोड़ से भी अधिक विद्यार्थी एवं शिक्षक रिमोट लर्निग के लिए फिलहाल माइक्रोसॉफ्ट एजुकेशन प्रोडक्ट्स पर ही भरोसा करते हैं। कम्पनी की दूसरी तिमाही (2021) के सिलसिले में आयोजित बैठक में विश्लेषकों से विचार-विमर्श के दौरान नडेला ने कहा कि आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में कम्पनी सबसे बेहतरीन उपकरण, फ्रेमवर्क और इन्फ्रास्ट्रक्चर मुहैया करवाती है।

योजनाओं पर होती है चर्चा
नडेला ने कहा कि हम ऐसी टीम बनाते हैं जिसमें बहुमुखी क्षमताओं का समावेश होता है। इसमें आपस में बातचीत होती है, बैठकें होती हैं, कारोबार आगे बढ़ाने के लिए करार सम्बंधी योजनाओं पर चर्चा होती है। और, यह सब एक ही छत के नीचे होती है। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ ने कहा कि एसएपी, सर्विसनाउ और सेल्सफोर्स जैसे महत्वपूर्ण ऐप बहुत तेजी से हमारी टीमों का हिस्सा बन रहे हैं ताकि टीमों की पूरी क्षमता एकीकृत हो जाए और इसके अहम सकारात्मक नतीजे सामने आएं।

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11.5 करोड़ से भी ज्यादा डेली यूजर्स तक पहुंच
उन्होंने कहा कि Covid महामारी के दौरान हमने देखा है कि सही तकनीकों ने किस तरह दुनिया भर में लगभग दो अरब फ्रंटलाइन वर्कर्स को सशक्त किया है। इसमें हमारी टीमों ने अग्रणी भूमिका निभाई है। वर्ष 2020 के अंत तक माइक्रोसॉफ्ट टीमों की पहुंच 11.5 करोड़ से भी ज्यादा डेली यूजर्स तक हो गई थी। नडेला ने हाल ही में कहा था कि ये टीमें इंटरनेट ब्राउजर्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स के रूप में भी जल्द ही अहम भूमिका निभाने में सक्षम साबित होंगी।

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डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की आवश्यकता बढ़ी
पिछले सप्ताह इंटरप्राइज एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर – एसएपी और माइक्रोसाफ्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंस और कोलाबोरेशन प्लेटफॉर्म टीमों को एसएपी इंटेलिजेंट सूट ऑफ सॉल्युशन्स को इंटिग्रेट करने का ऐलान किया था। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की आवश्यकता पहले के मुकाबले अब और बढ़ गई है।



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Sunday, January 24, 2021

App aleart : ऐप डाउनलोड करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग से ऐप्स का कारोबार तेजी से बढ़ा है। कई बार यूजर जल्दबाजी में ऐसे ऐप इंस्टाल कर लेते हैं, जिनसे उनकी गोपनीय जानकारी चोरी हो जाती है। ऐसे में फर्जी ऐप्स की पहचान करना जरूरी है।

डवलपर : ऐप इंस्टाल करने से पहले एडिटर चॉइस और टॉप डवलपर्स देखें। ऐप की वेबसाइट पर जाकर भी जानकारी हासिल कर सकते हैं।

संख्या : ऐप डाउनलोड करने से पहले देखना चाहिए कि इसे कितनी बार डाउनलोड किया जा चुका है। यदि कम डाउनलोड है तो इंस्टाल न करें। क्योंकि इसे ज्यादातर लोगों ने सुरक्षित नहीं माना।

आइकन : गूगल प्ले स्टोर पर ढेरों मोबाइल ऐप्स होते हैं। यदि आइकन या स्पेलिंग में गड़बड़ी नजर आती है तो इसे डाउनलोड न करें। क्योंकि कई बार मिलते जुलते आइकन से फर्जी ऐप्स तैयार कर लिए जाते हैं।

रिव्यू : रिव्यू किसी भी ऐप या प्रॉडक्ट के लिए उपयोगी जानकारी होती है। यदि ऐप के निगेटिव कमेंट हैं तो भूलकर भी डाउनलोड न करें।



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Friday, January 22, 2021

Google Chrome में जुड़ा नया फीचर, कमजोर पासवर्ड की पहचान कर बचाएगा साइबर अटैक से, यहां जानें कैसे करें अपडेट

Google अपनी सर्विसेज में नए फीचर्स अपडेट कर रहा है। अब गूगल ने अपने Chrome Browser में एक नया फीचर जोड़ा है, जो यूजर्स को साइबर अटैक से बचाने में मदद करेगा। दरअसल, गूगल ने क्रोम ब्राउजर में एक नया प्राइवेसी फीचर जोड़ा है। यह एक पासवर्ड प्रोटेक्शन फीचर है। इस फीचर को गूगल क्रोम के लेटेस्ट वर्जन V88 के साथ रोल आउट किया गया है। अगर आपके द्वारा सेव किया गया पासवर्ड कमजोर होगा तो गूगल क्रोम का यह नया फीचर उसे आइडेंटिफाई करेगा और उसे आपको उसे बदलने के लिए कहेगा।

बच सकते हैं साइबर अटैक से
गूगल क्रोम के इस नए फीचर की मदद से आप अपने सेव किए गए पासवर्ड को चेक कर सकते हैं। साथ ही कमजोर पासवर्ड का पता लगाकर उसे बदल सकते हैं। ऐसा करके आप साइबर क्रिमिनल्स और साइबर अटैक से बच सकते हैं। बता दें कि कमजोर पासवर्ड को आसानी से हैक किया जा सकता है। सेव किए गए पासवर्ड को चेक करने के लिए आपको ब्राउजर के एड्रेस बार में जाकर chrome://settings/passwords टाइप करना होगा। इसके बाद आपको सेव किए हुए सभी पासवर्ड एनक्रिप्टेड फॉर्म में दिखेंगे। इसके बाद आपको चेक नाउ पर क्लिक करना होगा। ऐसा करने पर अगर आपका कोई पासवर्ड कमजोर होगा तो गूगल क्रोम का यह नया फीचर आपको उस पासवर्ड को बदलने केे लिए कहेगा। ऐसे में आप उस कमजोर पासवर्ड को बदलकर साइबर अटैक से बच सकते हैं।

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कमजोर पासवर्ड पर साइबर अटैक का खतरा ज्यादा
गूगल ने अपने इस नए फीचर के बारे में अपने ब्लॉग पोस्ट में जानकारी देते हुए कहा है कि कई बार ऐसा होता है कि कई बार जब हम कोई नया लॉग-इन सेट-अप कर रहे होते हैं तो जल्दबाजी में आसान सा पासवर्ड सिलेक्ट कर लेते हैं। ऐसे में कमजोर पासवर्ड की वजह से साइबर अटैक का खतरा काफी ज्यादा होता है। जिसकी वजह से क्रोम 88 में ऐसे कमजोर पासवर्ड को चेक करना यूजर के लिए काफी आसान हो जाएगा। नए अपडेट के जरिए यूजर्स मल्टीपल यूजरनेम और पासवर्ड को एक साथ चेक कर सकेंगे। हालांकि गूगल ने फिलहाल यह नया फीचर क्रोम के डेस्कटॉप और आईओएस पर्जन के लिए ही जारी किया है। एंड्रॉयड यूजर्स के लिए इस फीचर को अभी रोल आउट नहीं किया गया है।

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ऐसे अपडेट करें नया फीचर
गूगल क्रोम के इस नए पासवर्ड प्रोटेक्शन फीचर को डेस्कटॉप में अपडेट करने के लिए यूजस को ब्राउजर ओपन करने के बाद राइट साइड में एड्रेस बार के पास दिए गए तीन डॉट्स पर क्लिक करना होगा। इसके बाद नीचे की तरफ सेटिंग्स के ऑप्शन को क्लिक करें। यहां आपको कई तरह के विकल्प नजर आएंगे। इनमें आपको सेफ्टी चेक का विकल्प भी नजर आएगा, उस पर टैप करें। इस पर क्लिक करने के बाद आपको चेक नाउ का बटन दिखाई देगा। इस बटन पर टैप करते ही क्रोम ब्राउजर लेटेस्ट अपडेट को चेक करेगा। अगर आपके ब्राउजर में लेटेस्ट अपडेट नहीं है तो यह आपको अपडेट करने के लिए कहेगा। आप अपडेट पर टैप या क्लिक करके इसके लेटेस्ट अपडेट को डाउनलोड कर सकते हैं। इस तरह से आपका ब्राउजर वी88 वर्जन के साथ अपडेट हो जाएगा।



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Friday, January 15, 2021

आज से बदल गया लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने का तरीका, अब करना होगा यह काम

आज से लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने के नियम बदल गए हैं। अब अगर आप लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करेंगे तो आपको मोबाइल नंबर से पहले शून्य यानी 0 का बटन दबाना होगा। हालांकि लैंडलाइन से लैंडलाइन या मोबाइल से लैंडलाइन या मोबाइल से मोबाइल पर फोन करने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। यह नियम सिर्फ लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने के लिए ही लागू हुआ है। इस नए नियम से अवगत कराने के लिए टेलिकॉम कंपनियों ने अपने यूजर्स को मैसेज भी भेज रही हैं।

बता दें कि मोबाइल नंबर से पहले शून्य लगाने की सुविधा फिलहाल अपने क्षेत्र से बाहर के कॉल करने के लिए उपलब्ध थी। अब नए नियम के अनुसार, 15 जनवरी से पडोस के मोबाइल पर भी कॉल करने के लिए नंबर से पहले शून्य लगाना जरूरी होगा।

टेलिकॉम कंपनियों ने भेजे मैसेज
टेलीकॉम कंपनियों ने अपने यूजर्स को मैसेज भेजकर टेलीकॉम विभाग के नवंबर माह में जारी आदेश की याद दिलाई है। बीएसएनएल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक पीके पुरवार ने कहा कि निर्देशों के पालन के लिए आवश्यक उपभोक्ता जागरूकता संपर्क शुरू कर दिया गया है। वहीं एयरटेल ने अपने यूजर्स को संदेश में कहा है कि 15 जनवरी से प्रभावी हो रहे डॉट के निर्देशों के हिसाब से लैंडलाइन से मोबाइल पर फोन करते समय नंबर से पहले 0 डायल करना अनिवार्य कर दिया गया है। रिलायंस जियो ने भी अपने यूजर्स को इसी तरह का संदेश भेजा है।

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ट्राई ने की थी सिफारिश
पिछले साल नवंबर माह में संचार मंत्रालय ने लैंडलाइन से मोबाइल पर फोन करने के लिए 0 डायल करना अनिवार्य करने की जानकारी दी थी। मंत्रालय ने कहा था कि इससे करीब 253 करोड़ नंबरिंग सीरीज उपलब्ध होने की संभावना है। बता दें कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 29 मई 2020 को मोबाइल पर कॉल करने के लिए नंबर से पहले ‘शून्य’ लगाने की सिफारिश की थी। अब दूरसंचार विभाग ने इसे स्वीकार कर लिया है। इस नए नियम से टेलीकॉम कंपनियों को अधिक नंबर बनाने की सुविधा मिलेगी।

टेलिकॉम कंपनियों को दिया था जनवरी तक का समय
दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों इस नई व्यवस्था को अपनाने के लिए जनवरी तक का समय दिया था। अब आज यानि 15 जनवरी से लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने का यह नया नियम लागू हो गया है। लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने के तरीके में बदलाव के चलते दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल सेवाओं के लिए 254.4 करोड़ अतिरिक्त नंबर सृजित करने की सुविधा मिलेगी।



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2 डेवलपर्स कर रहे थे यूजर्स का डाटा स्क्रैप, Facebook ने उठाया बड़ा कदम

फेसबुक (Facebook) ने अपनी वेबसाइट से यूजर्स के प्रोफाइल और अन्य डेटा को स्क्रैप करने के चलते पुर्तगाल के दो डेवलपर्स के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। व्यापारिक नाम ओइंक एंड स्टफ का इस्तेमाल करते हुए इन अभियुक्तों द्वारा एक ब्राउजर एक्सटेंशन का निर्माण किया गया और इन्हें क्रोम स्टोर पर उपलब्ध कराया गया।

फेसबुक में प्लेटफॉर्म इंफोर्समेंट एंड लिटिगेशन की निदेशक जेसिका रोमेरो ने कहा कि एक गोपनीयता नीति के साथ एक्सटेंशन को इंस्टॉल कर इन्होंने यूजर्स को गुमराह किया है। इस गोपनीयता नीति या प्राइवेसी पॉलिसी में यह दावा किया गया था कि वे किसी भी व्यक्तिगत जानकारियों का संग्रह नहीं करते हैं।

स्पाईवेयर की तरह करते हैं काम
वेब फॉर इंस्टाग्राम प्लस डीएम, ब्लू मैसेंजर, ईमोजी की-बोर्ड और ग्रीन मैसेंजर जैसे इनके चार एक्सटेंशन दुर्भावनापूर्ण रहे हैं। ये छिपे हुए कंप्यूटर कोड से लैस रहे हैं, जो स्पाईवेयर की तरह से काम करता है। लोग जब अपने ब्राउजर्स पर इन एक्सटेंशंस को इंस्टॉल करेंगे, तो वे छिपे हुए कोड को इंस्टॉल कर रहे होंगे, जिन्हें यूजर्स के फेसबुक वेबसाइट से जानकारियों को स्क्रैप करने के लिए डिजाइन किया गया है।

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स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग
साथ ही इनके द्वारा उन ब्राउजर्स से भी आंकड़े ले लिए जाएंगे, जो फेसबुक से संबंधित नहीं है और यह सब कुछ यूजर्स की जानकारी के बगैर होगा। रोमेरो ने कहा कि इन जानकारियों में यूजर्स के नाम, उनकी आईडी, रिलेशनशिप स्टेटस, आयु सहित और भी कई जानकारियां होंगी। रोमेरो आखिर में कहती हैं, हम अभियुक्तों पर स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग कर रहे हैं और चाह रहे हैं कि वे अपने पास से फेसबुक के सभी डेटा को डिलीट कर दें।

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व्हाट्सएप की नई पॉलिसी का विरोध
बता दें कि इन दिनों फेसबुक के स्वामित्व वाली इंस्टेंट मैसेजिंग एप व्हाट्सप इन दिनों अपनी नई पॉलिसी को लेकर विरोध का सामना कर रही है। नई पॉलिसी के तहत यूजर्स का डाटा फेसबुक व उसके स्वामित्व वाली अन्य कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा। इसी वजह से लाखों यूजर्स व्हाट्सएप छोड़कर दूसरी मैसेजिंग एप्स पर अपना अकाउंट बना रहे हैं। बता दें कि व्हाट्सएप ने साफ कहा है कि जो यूजर उनकी नई पॉलिसी को एक्सेप्ट नहीं करेंगे वे 8 फरवरी के बाद अपना व्हाट्सएप अकाउंट नहीं चला पाएंगे।



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Tuesday, January 12, 2021

कोरोना काल में छोटे शहरों के लोगों ने अपनाया डिजिटल पेमेंट का तरीका, 80 फीसदी का हुआ इजाफा

साल 2020 में महामारी की वजह से लगाए गए लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते साल 2019 के मुकाबले ऑनलाइन लेनदेन में 80 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिला है। खासकर छोटे शहरों में यह बदलाव अधिक देखा गया है, जहां व्यवसायियों से लेकर खरीददारों तक सभी ने उल्लेखनीय रूप से डिजिटल पेमेंट को अपनाया है। मंगलवार को जारी एक नई रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई।

टियर-2 और 3 शहरों में 92 फीसदी तक इजाफा
फिनटेक यूनिकॉर्न रेजरपे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टियर-2 और 3 शहरों में लोगों द्वारा ऑनलाइन लेनदेन को अधिक अपनाए जाने के मद्देनजर इसमें 92 फीसदी तक इजाफा हुआ। बिल वगैरह भरने के लिए लोगों ने पैसे के लेनदेन की जगह डिजिटल पेमेंट को अधिक उपयोगी समझा, जिसके चलते यूटिलिटी पेमेंट और ऑनलाइन बिल पेमेंट में 357 फीसदी का उछाल देखा गया।

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यूपीआई के जरिए हुए अधिक लेनदेन
रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया कि इस दौरान क्रेडिट/डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग और वॉलेट पेमेंट के मुकाबले यूपीआई के जरिए अधिक लेनदेन हुए। साल 2019 के मुकाबले साल 2020 में यूपीआई ट्रांजैक्शन को लोगों ने पेमेंट का अधिक बेहतर जरिया माना और इसी के चलते महज एक ही साल में इसमें 120 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला। ऐसा खासकर टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में हुआ।

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अंतिम छमाही में 73 फीसदी की बढ़ोतरी
रेजरपे के सह-संस्थापक और सीईओ हर्षिल माथुर ने कहा, साल 2019 के मुकाबले 2020 में टोटल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में उछाल जरूर देखने को मिला, लेकिन मेरे लिए सबसे अधिक उत्साहजक बात यह रही कि साल की अंतिम छमाही में अकेले इसमें 73 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के ऑनलाइन लेनदेन में लगभग 92 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। देश के इन हिस्सों से ऑनलाइन पेमेंट के क्षेत्र में इस कदर इजाफा हमें पहली दफा देखने को मिला है।



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Sunday, January 10, 2021

CES 2021 में वर्चुअल ह्यूमन को स्पीकर के तौर पर पेश करेगा LG, जानें डिटेल

जल्द ही कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो (CES) 2021 आयोजित होने वाला है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (LG)ने कहा कि अगले हफ्ते आयोजित होने वाले कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो (सीईएस) में उनके द्वारा स्पीकर के रूप में एक वर्चुअल ह्यूमन (Virtual Human) को पेश किया जाएगा और ऐसा करने का मकसद दुनिया को उनकी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) से रूबरू कराना है।

तीन मिनट का होगा प्रेजेंटेशन
दक्षिण कोरिया की इस दिग्गज तकनीकि कंपनी ने कहा है कि इस आर्टिफिशियल ह्यूमन का नाम रिएह कीम है, जिसके द्वारा सोमवार को डिजिटली आयोजित हो रहे सीईएस के दौरान कंपनी के प्रेस इवेंट में तीन मिनट के एक प्रेजेंटेशन को प्रस्तुत किया जाएगा। एलजी ने इस वर्चुअल इंसान को एक 23 वर्षीय महिला म्यूजिशियन के तौर पर डिजाइन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर इसके अभी से ही 5,000 से अधिक फॉलोअर्स हो गए हैं।

भविष्य का बच्चा
एलजी ने कहा है कि वर्चुअल ह्यूमन के रिएह नाम का मतलब भविष्य का बच्चा है। हालांकि एलजी ने अभी भी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इवेंट में रिएह कुछ कहेगी भी या नहीं और कंपनी किस तरह से अपने अत्याधुनिक एआई सिस्टम का इस्तेमाल करेगी, लेकिन इस बात की जानकारी मिली है कि रिएह कीम इवेंट में लोगों के साथ कोई बात नहीं करेगी।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रिसर्च हब
बता दें कि पिछले दिनों एलजी ग्रुप ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रिसर्च हब का निर्माण किया, ताकि आने वाले समय में विकास के विभिन्न अवसरों का पता लगाया जा सके। एलजी एआई रिसर्च को एलजी समूह के 16 सहयोगी कंपनियों में शामिल किया गया है, जिनमें एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, एलजी केम शामिल है। इसका मकसद इन्हें एआई सॉल्यूशंस के बारे में जानकारी देना है।

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एलजी समूह द्वारा अगले तीन सालों में सेंटर के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आर एंड डी) प्रोजेक्ट्स और वैश्विक प्रतिभाओं की नियुक्ति के लिए 18.4 करोड़ डॉलर का निवेश किया जाएगा। एलजी समूह के प्रमुख कू क्वॉन्ग-मो ने कहा कि एलजी के एआई का मकसद इंसान के जीवन को तकनीकि से परे अधिक मूल्यवान बनाना है। हम इसे अपना समर्थन देंगे ताकि यह ग्लोबल इकोसिस्टम के केंद्र के रूप में कार्य कर सकें।



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यह है 2020 का सबसे लोकप्रिय मोबाइल गेम, पबजी को भी छोड़ा पीछे

स्मार्टफोन अब सिर्फ कॉलिंग के काम ही नहीं आता बल्कि यह अब मनोरंजन का भी बड़ा साधन बन गया है। स्मार्टफोन में लोग अपना मनोरंजन भी करते हैं। मोबाइल गेम भी लोगों के मनोरंजन का जरिया है। ऐसे में कई गेम्स ऐसे हैं, जो काफी पॉपुलर हैं। अब एक रिपोर्ट जारी हुई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020 में कौन सा गेम सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्ट्री-पार्टी-एक्शन गेम Among Us एक ऐसा मोबाइल गेम है, जिसे साल 2020 में एंड्रॉयड और आईओएस एप स्टोर दोनों में ही सबसे अधिक डाउनलोड किया गया। इस गेम ने पबजी मोबाइल और रोबलोक्स जैसे गेम्स को भी पछाड़ दिया है।

26.4 करोड़ लोगों ने किया डाउनलोड
एपटोपिया द्वारा जारी किए गए आंकड़े के मुताबिक, Among Us को दुनियाभर में 26.4 करोड़ लोगों ने डाउनलोड किया है, जबकि America में इसे 4.1 करोड़ यूजर्स द्वारा डाउनलोड किया गया है। 17.5 करोड़ डाउनलोड के साथ पबजी (भारत में प्रतिबंधित) चौथे स्थान पर विराजमान है, जबकि 22.7 करोड़ डाउनलोड के साथ सबवे सरफेस दूसरे और 21.8 करोड़ डाउनलोड के साथ गरेना फ्री फायर साल के शीर्ष दस गेमों में तीसरे स्थान पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है।

ऐसा है Among us गेम
रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन गेमों में Among Us खेलने वालों की संख्या एक से अधिक है। इसमें स्पेशशिप में क्रू मेंबर्स साथ में मिलकर अपने टास्क को पूरा करते हैं और खुद को अच्छा दिखाने वाले ढोंगियों की पहचान कर उन्हें मार गिराते हैं। इस गेम ने पबजी को भी पीछे छोड़ दिया है। बता दे कि पिछले साल पबजी को भारत में बैन कर दिया गया था, लेकिन यह जल्द ही फिर से भारत में लॉन्च होने वाला है।

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पबजी के दूसरे ट्रेलर की तारीख लीक
लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, 15 जनवरी से लेकर 19 जनवरी के बीच हमें पबजी मोबाइल इंडिया का नया टीज़र देखने को मिल सकता है। वहीं पबजी मोबाइल का भारतीय विकल्प फौजी गेम 26 जनवरी को लॉन्च किया जाएगा। वहीं पबजी की लॉन्च्ंिाग डेट को लेकर फिलहाल कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि यह मार्च 2021 में रिलीज़ हो सकता है।

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पबजी का एक ट्रेलर हो चुका है जारी
इन्साइड स्पोर्ट की रिपोर्ट में एक यूट्यूबर का हवाला देते हुए बताया गया है कि पबजी का दूसरा ट्रेलर 15 जनवरी से लकर 19 जनवरी के बीच रिलीज किया जा सकता है। हालांकि गेम डेवलपर की तरफ से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। बता दें कि इससे पहले, गेम की घोषणा के समय पबजी कॉर्पाेरेशन ने पबजी मोबाइल इंडिया का पहला गेम ट्रेलर रिलीज़ किया था।



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Saturday, January 9, 2021

BSNL के इस सस्ते प्लान में अनलिमिटेड डाटा और फ्री कॉलिंग, महीनेभर तक कोई लिमिट नहीं

टेलीकॉम कंपनियां कई अवसरों पर अपने यूजर्स के लिए नए-नए प्लान लॉन्च करती रहती हैं। इनमें कंपनियां यूजर्स को अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग (Unlimites Voice Calling) और हाई स्पीड डाटा (High Speed Data) ऑफर करती हैं। अब सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल (BSNL) ने एक ऐसा ही सस्ता प्रीपेड प्लान यूजर्स के लिए लॉन्च किया है। इस प्लान में यूजर्स महीने भर तक अनमिलिटेड वॉइस कॉल और अनमिलिटेड डाटा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस प्लान की कीमत 398 रुपए है।

BSNL के इस प्लान में किसी भी प्रकार की एफयूपी (फेयर यूसेज पॉलिसी) लिमिट नहीं दी गई है। यानी ग्राहक जितना चाहें उतना इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं, साथ ही भारत में कहीं भी जितनी मर्जी वॉइस कॉलिंग कर पाएंगे।

अनलिमिटेड डाटा और वॉइस कॉलिंग
बता दें कि वोडाफोन आइडिया, एयरटेल और जियो जैसी टेलीकॉम कंपनियां भी यूजर्स को अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग और डाटा ऑफर करती है। हालांकि इनके ज्यादातर प्लान में यूजर्स प्रतिदिन 250 मिनट की कॉलिंग फ्री कर सकते हैं। वहीं डेटा के लिए भी अलग-अलग प्लान के हिसाब से लिमिट दी जाती है। लेकिन बीएसएनएल के इस 398 रुपए वाले प्लान में कोई लिमिट नहीं रखी गई है। यूजर्स जितनी मर्जी चाहे उतनी देर किसी भी नेटवर्क पर फ्री कॉल कर सकते हैं। साथ ही इंटरनेट डाटा भी जितना चाहें उतना उपयोग में ले सकते हैं।

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वैलिडिटी
रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसएनएल के इस 398 रुपए वाले प्लान की वैलिडिटी 30 दिनों की है। इन 30 दिनों में यूजर्स अनलिमिटेड डाटा और वॉइस कॉलिंग कर सकते हैं। 30 दिन तक यूजर्स बिना किसी लिमिट के डाटा का इस्तेमाल कर सकेंगे। वॉइस कॉलिंग और डाटा के अलावा इस प्लान में रोज 100 एसएमएस भी दिए जा रहे हैं।

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सभी सर्किल्स में लागू होगा प्लान
रिपोर्ट के अनुसार, 398 रुपये वाला बीएसएनएल प्लान 10 जनवरी, 2021 से उपलब्ध होगा। रोमिंग के दौरान भी यूजर्स अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग और डाटा का इस्तेमाल कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि यह प्लान कंपनी के सभी सर्किल्स में लागू किया जा सकता है।



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Thursday, January 7, 2021

कई श्रेणियों में अपने फ्लैगषिप प्रोडक्ट्स लॉन्च करेगी Itel

स्मार्टफोन निर्माता कंपनी आईटेल के भारत में 7 करोड़ उपभोक्ता हो गए हैं। आईटेल इस बात का जष्न मना रही है। अपनी इस सफलता का जश्न मनाने के लिए आईटेल जल्द ही कई श्रेणियों में अपने फ्लैगशिप उत्पादों को लॉन्च करने की तैयारी में है। बता दें कि पिछले दिनों आईटेल ने अपनी ए सीरीज के तहत आईटेल ए25 स्मार्टफोन लॉन्च किया था। अब आईटेल 2021 में और भी कई प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की तैयारी में है। रिपोर्ट के अनुसार आईटेल जल्द ही अन्य स्मार्टफोन कंपनियों की तरह वॉटरड्रॉप नॉच वाला स्मार्टफोन भी लॉन्च करेगी।

प्रीमियम लुक वाला एक्स्ट्रा लार्ज स्क्रीन
रिपोर्ट के अनुसार, आईटेल यूजर्स के लिए हाई-परफॉर्मेंस स्मार्टफोन लॉन्च करने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, आईटेल का यह स्मार्टफोन एक्स्ट्रा-लार्ज स्क्रीन वाला होगा। कंपनी का कहना है कि यह स्मार्टफोन यूजर्स को शानदार अनुभव देगी और इसकी बैटरी क्षमता भी खासी ज्यादा होगी। इसके अलावा आईटेल के इस स्मार्टफोन का लुक प्रीमियम होगा। बताया जा रहा है कि इसका लुक एप्पल के आईफोन की तरह हो सकता है।

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आईटेल को पांच साल पूरे
बता दें कि आईटेल को भारत में आए हुए पांच साल हो गए है। ट्रांसन इंडिया के सीईओ अरिजीत तलपत्रा ने अपने एक बयान में कहा कि पिछले पांच सालों में आईटेल के प्रदर्शन में काफी इजाफा देखने को मिला है और अपने सेगमेंट में टॉप के तीन इंडस्ट्री लीडर्स के बीच सफलतापूर्वक अपनी जगह बनाने में भी यह कामयाब रहा है। आने वाले सालों में और भी कई भारतीय संचार के इस साधन संग जुड़ेंगे, जिसमें आईटेल की कोशिश यही रहेगी कि वह सहजता और बेहतर सुविधा देते हुए मनोरंजन, शिक्षा, वित्तीय लेनदेन और बिजनेस को लेकर ग्राहकों की आवश्यकताओं का बखूबी ख्याल रखते हुए डिजिटलकरण का भरपूर लाभ उठाएं।

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स्थानीय स्तर पर विपणन संचार
आईटेल ने इस दौरान उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है, बेहतर सर्विस सपोर्ट के साथ अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत बनाया है, स्थानीय स्तर पर विपणन संचार के दृष्टिकोण को अपनाया है और इन्हीं के दम पर ब्रांड सफलता की राह पर आगे बढ़ा है। अरिजीत ने आगे कहा, हमारा नया ब्रांड विजन है रू आईटेल है, लाइफ सही है, जो ग्राहकों को बेहतर सेवा देने की हमारी प्रतिबद्धताओं को दशार्ता है। किफायती कीमत और नए जमाने की तकनीकियों के साथ हर भारतीय घरों में अपनी पहचान बढ़ाने के लिए हम रोमांचित हैं ताकि आईटेल के जादुई एहसास का अनुभव हर कोई कर सके और इसके फोन के माध्यम से अपनी जीवनशैली को बेहतर बना सके।



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अगर आपके बच्चे को लग गई है स्मार्टफोन पर गेम की लत तो ऐसे छुडाएं, हर एक्टिविटी पर रख सकेंगे नजर

आजकल स्मार्टफोन हमारी जरूरत ही नहीं बल्कि हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। स्मार्टफोन हर वक्त हमारे पास रहता है। यह मनोरंजन का भी बड़ा साधन गया है। इसके अलावा इसमें सोषल मीडिया एप्स और गेम्स के जरिए भी लोग अपना मनोरंजन करते हैं। आजकल स्मार्टफोन्स में एक से बढ़कर एक रोचक गेम्स आ गए हैं। भारत में गेमिंग के लिए बड़ों से लेकर बच्चों तक में काफी क्रेज देखने को मिलता है। हालांकि कई बार गेम्स की लत भी लग जाती है। बच्चे अपनी पढाई से ज्यादा गेम्स में ध्यान देने लगते हैं, ऐसे में उनकी स्टडी पर इफेक्ट पड़ता है। पिछले दिनोें खबर आई थी कि एक बच्चे ने ऑनलाइन गेम खरीदने के चक्कर में अपनी मां के लाखों रुपए खर्च कर दिए।

स्मार्टफोन एक्टिविटी पर रखनी होगी नजर
इंटरनेट पर कई ऐसे गेम्स हैं, जिनकी लत बच्चों को लग जाती है। जैसे ही बच्चों के हाथ में मोबाइल आता है तो बस वे गेम खेलने में लग जाते हैं। कई घंटों तक वे गेम ही खेलते रहते हैं। इसके अलावा भी बच्चें नेट पर कई बार ऐसी चीजों तक पहुंच जाते हैं, जो कि उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में माता-पिता को अपने बच्चों की स्मार्टफोन एक्टिविटी पर नजर रखनी चाहिए। इसके लिए वे पैरेंटल कंट्रोल टूल्स की मदद ले सकते हैं।

पैरेंटल कंट्रोल टूल्स
पैरेंट्स को पता होना चाहिए कि उनका बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है। वह कोई ऐेसी चीज तो नहीं देख रहा, जो उसके लिए सही नहीं है। माता-पिता हर वक्त बच्चे के साथ नहीं रह सकते। हालांकि वे अपने बच्चे के मोबाइल स्क्रीन पर नजर रख सकते हैं। इस काम में वे पैरेंटल कंट्रोल टूल्स की मदद से बच्चों पर निगरानी रख सकते हैं। इससे पैरेेंट्स को पता रहेगा कि उनका बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है। इसके अलावा वे बच्चों की स्क्रीन टाइम को भी मैनेज कर सकते हैं।

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एप्स को ब्लॉक भी कर सकते हैं
पैरेंटल कंट्रोल टूल, गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद हैं। यह टूल एंड्रॉयड और आइओएस दोनों डिवाइसेज के लिए उपलब्ध हैं। इन टूल की मदद से पैरेेंट्स अपने बच्चों के मोबाइल स्क्रीन टाइम को मैनेज कर सकते हैं। साथ ही वे ये भी देख सकते हैं कि उनका बच्चा सोशल मीडिया पर क्या देख रहा है। इसके अलावा पैरेंटल कंट्रोल टूल की सहायता से वेब फिल्टरिंग, लोकेशन ट्रैकिंग, यूट्यूब वीडियो वॉच टाइम पर भी निगरानी की जा सकती है। साथ ही पैरेंट्स उन एप्स को भी ब्लॉक कर सकते हैं, जो उनके बच्चे के लिए सही नहीं है। इसके अलावा स्क्रीन टाइम की लिमिट भी सेट कर सकते है।

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पता चलेगी बच्चे की एक्टिविटी
पैरेंटल कंट्रोल टूल की मदद से आप अपने बच्चे की एक्टिविटी पर नजर रख सकते हैं कि वह मोबाइल पर कौन सी चीज सबसे ज्यादा देखता है। अगर वह किसी खास साइट, एप या गेम में अपना ज्यादा वक्त बिताता है तो आप इस टूल की मदद से पता कर बच्चे की लत को छुडा सकते हैं।



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Wednesday, January 6, 2021

iphone निर्माता कंपनी Apple ने यूके में बंद किए अपने सभी स्टोर, जानिए क्या है वजह

कोरोना महामारी (Corona Virus) की वजह से पूरी दुनिया परेशान है। इस महामारी की वजह से पूरी दुनिया के देशों में व्यापार पर भी असर पड़ रहा है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई देषों में रिटेल स्टोर्स बंद हैं। आईफोन निर्माता कंपनी एप्पल ने भी युनाइटेड किंगडम (यूके) में Covid-19 महामारी में वृद्धि के बाद सभी रिटेल स्टोर को अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। इसके अलावा एप्पल ने कैलिफोर्निया, मैक्सिको, ब्राजील में भी स्टोर बंद कर दिया है। London में करीब एक दर्जन से अधिक स्टोर को बंद किया गया है।

यूके में एप्पल के 38 स्टोर
टेक दिग्गज ने अब इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में नए दौर के कठिन Lockdown के बाद यूके में अपने शेष 18 रिटेल स्टोर अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। एप्पल के माइकल स्टीबर ने एक ट्वीट करते हुए बताया कि यूके के सभी 18 एप्पल स्टोर 5 जनवरी से बंद हो जाएंगे, जिसमें स्कॉटलैंड के स्टोर भी शामिल हैं। एप्पल यूके में 38 स्टोर संचालित करता है, जिनमें से 20 स्टोर पिछले साल दिसंबर के महीने में ही बंद हो गए थे।

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सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर
रिपोर्ट में कहा गया है, दिसंबर में घोषित टीयर-4 Covid प्रतिबंधों के बाद सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर लिए जा रहे हैं। Britain के Prime Minister Boris Johnson ने घोषणा की कि कोरोना वायरस महामारी में वृद्धि के बाद इंग्लैंड एक और Lockdown में प्रवेश करेगा। उन्होंने देश भर के लोगों से घर पर रहने का आग्रह किया है।

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कुल 2,721,622 मामले और 75,547 मौतें
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नवीनतम अपडेट में Britain में एक दिन में 58,784 लोग इस वायरस से संक्रमित पाए गए, जो महामारी की शुरूआत के बाद से उच्चतम दैनिक आंकड़ा है। देश में अब कुल 2,721,622 मामले और 75,547 मौतें हुई हैं।



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2020 में इंटरनेट बंद होने से भारत को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान, आंकडे देखकर चौंक जाएंगे

आज के समय में इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका हैै। बिना इंटरनेट के बहुत सारे काम रुक जाते हैं। इंटरनेट न हो तो हम डिजिटल ट्रांजेक्शन नहीं कर सकते। साथ ही सभी प्रकार की ऑनलाइन गतिविधियां भी रुक जाती हैं। इंटरनेट बंद होने से काफी नुकसान होता है। पिछले साल इंटरनेट बंद होने से दुनियाभर में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान भारत को हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल यानि 2020 में इंटरनेट बंद होने से दुनियाभर में करीब 4 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। वहीं अकेले भारत को 2.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ जो दुनिया में सबसे अधिक है।

2019 की तुलना में दोगुना
ब्रिटेन के डिजिटल प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी रिसर्च ग्रुप टॉप10वीपीएन ने इस संबंध में एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2020 में इंटरनेट बंद होने से 2019 की तुलना में दोगुना ज्यादा नुकसान हुआ। शोधकर्ताओं ने इसमें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का सहारा लिया। इस वजह से इस स्टडी में चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों को शामिल नहीं किया गया। वहीं स्टडी के मुताबिक, भारत उन 21 देशों में टॉप पर रहा, जिन्होंने इंटरनेट पर पाबंदी लगाई। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने 2019 में इंटरनेट पर जो पाबंदियां लगाई थी, वह 2020 में भी जारी रही।

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भारत में 8927 घंटे तक इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबंदी
सल 2020 में भारत में कई जगहों पर कई बार इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई। इंटरनेट पर पाबंदी कई वजहों से लगाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 8927 घंटे तक इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई जो दुनिया में सबसे अधिक है। इंटरनेट शटडाउन की कई वजहें रहीं, लेकिन इससे नुकसान काफी हुआ है।

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बता दें कि इंटरनेट शटडाउन की ज्यादा वजह से इस बार कश्मीर में इंटरनेट शटडाउन भी रहा है। सरकार ने कश्मीर में लगभग 7 महीने तक इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई थी। आर्टिकल 370 हटाने के बाद कश्मीर में फिर से इंटरनेट चालू किया गया। इंटरनेट बंद होने के मामले में भात के बाद बेलारूस, यमन, म्यांमार और अजरबेजान जैसे देष रहे।



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Microsoft बंद करने जा रहा ये गेम, इस दिन के बाद नहीं कर पाएंगे डाउनलोड

माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) अपने माइनक्राफ्ट अर्थ (Minecraft Earth) मोबाइल गेम (Mobile Game) को 30 जून को बंद कर देगा। यह गेम फ्री मूवमेंट और गेम के लिए तैयार किया गया था और ये दो ऐसी चीजें हैं, जो वर्तमान कोविड-19 महामारी में असंभव हो गई थी। माइनक्राफ्ट टीम ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि हमने अपने संसाधनों को अन्य क्षेत्रों में फिर से आवंटित करने का कठिन निर्णय लिया है, जो कि माइनक्राफ्ट समुदाय को महत्व प्रदान करते हैं और जून 2021 में माइनक्राफ्ट अर्थ के लिए सपोर्ट को खत्म करते हैं।

30 जून के बाद नहीं कर पाएंगे डाउनलोड
उन्होंने आगे कहा, 30 जून को हम खेल के लिए सभी सामग्री और सेवा समर्थन को बंद कर देंगे। इस तारीख के बाद खिलाड़ी माइनक्राफ्ट अर्थ को डाउनलोड नहीं कर पाएंगे, न ही खेल पाएंगे। माइक्रोसोफ्ट ने पहली बार मई 2019 में माइनक्राफ्ट अर्थ का अनावरण किया था।

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रूबी बैलेंस वाले खिलाड़ियों मिलेंगे माइनकोइंस
टीम ने बताया, रूबी बैलेंस वाले सभी खिलाड़ियों को माइनकोइंस प्रदान किए जाएंगे, जिनका उपयोग आप माइनक्राफ्ट मार्केटप्लेस पर स्कीन और टेक्सचर पैक, नक्शे और यहां तक कि मिनीगैम खरीदने के लिए कर सकते हैं। वहीं गूगल के गेम स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म स्टेडिया में स्टेडिया प्रो के एक हिस्से के रूप में इसके कलेक्शन में पांच पए गेम शामिल किए गए हैं।

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इन गेम्स को किया शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक, इन नए गेम्स में ऐरी एंड सीक्रेट ऑफ सीजन्स, फिगमेंट, एफ1 2020 और हॉटलाइन मियामी शामिल हैं, जिन्हें स्टेडिया प्रो के सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। ईएल हिजो को भी उपलब्ध कराए जाने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इसे पहले शामिल किए जाने की बात नहीं की गई है। इस बीच, जोतून एंड लारा क्रॉफ्ट रू टेम्पल ऑफ ओसिरिस की घोषणा को रद्द कर दिया गया।



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Tuesday, January 5, 2021

BSNL लाई सबसे सस्ता प्रीपेड प्लान, सिर्फ 1 रुपए प्रतिदिन में 2 जीबी डाटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और....

टेलिकॉम कंपनियां अपने यूजर्स के लिए समय-समय पर सस्ते रिचार्ज प्लान लाती रहती है। इन प्लान्स में यूजर्स को अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग, हाईस्पीड इंटरनेट डाटा और फ्री एसएमएस जैसे ऑफर्स मिलते हैं। अब इसी कड़ी में सरकारी टेलिकॉम कंपनी bsnl ने अपना अब तक का सबसे सस्ता प्रीपेड प्लान लॉन्च किया है। इस प्लान में भी यूजर्स को हाई स्पीड डाटा और वॉयस कॉलिंग जैसी सुविधाएं दी जा रही है। बीएसएनएल के इस सस्ते प्लान की कीमत 365 रुपए है। साथ ही बीएसएनएल के इस रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी 365 दिन की है। अगर औसतन इसका खर्च लगाया जाए तो यह मात्र 1 रुपए प्रतिदिन होता है।

फ्री कॉलिंग और ज्यादा डाटा
बीएसएनएल के प्लान की सुविधाओं की बात करें तो इसमें यूजर्स को अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा मिलेगी। शुरुआती 60 दिनों में रोजाना 250 मिनट की बातचीत फ्री होगी। वहीं 250 मिनट की लिमिट खत्म होने के बाद यूजर्स को बेस प्लान के अनुसार टैरिफ देना होगा। वहीं डाटा की बात करें तो बीएसएनएल के इस सस्ते प्लान में यूजर्स को रोजाना 2जीबी डाटा मिलेगा। इसके अलावा यूजर्स रोजाना के 100 एसएमएस भी फ्री कर सकते हैं।

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इन सर्किल के यूजर्स उठा पाएंगे लाभ
बता दें कि बीएसएनएल के इस 365 रुपए वाले रिचार्ज प्लान का लाभ आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, झारखंड, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, कोलकाता, वेस्ट बंगाल, नार्थ ईस्ट, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओड़िसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, चेन्नई, यूपी ईस्ट और यूपी वेस्ट के यूजर्स उठा पाएंगे।

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घर वापसी पोस्टपेड प्लान
ब्ता दें कि 365 रुपए वाले प्रीपेड रिचार्ज प्लान के अलावा बीएसएनएल ने हाल ही अपने पोस्टपेड यूजर्स के लिए भी एक प्लान लॉन्च किया है। इस प्लान का नाम है घर वापसी प्लान। बीएसएनएल के इस घर वापसी पोस्टपेड प्लान की कीमत 399 रुपए है। इस प्लान में यूजर्स को हर महीने 70जीबी डेटा मिलेगा। इसके अलावा इस प्लान में बीएसएनएल डाटा रोलअवर की सुविधा भी दे रही है।

इसमें यूजर्स को रोलओवर सुविधा के तहत 210जीबी डेटा मिल सकता है। घर वापसी प्लान के अलावा बीएसएनएल पोस्टपेड यूजर्स के लिए एक और ऑफर लाई है। इसमें 525 रुपए वाले पोस्टपेड प्लान के तहत यूजर्स कोे 85जीबी डेटा मिलेगा।



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करोड़ों लोगों के बैंक अकाउंट खतरे में, लीक हुई डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का डाटा

टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ ऑनलाइन ठगी और साइबर क्राइम भी बढ़ गया है। ऑनलाइन डाटा लीक होने की कई बार खबरें सामने आती रहती हैं। साइबर क्रिमिनल्स इन निजी जानकारियों से लोगों के बैंक अकाउंट में सेंध लगा देते हैं और उनका अकाउंट खाली कर देते हैं। अब कुछ ऐसी ही खबर आ रही है। डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड यूज करने वाले करोड़ों लोगों के बैंक अकाउंट्स पर खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 10 करोड़ डेबिट और क्रेडिट कार्ड यूजर्स का डाटा लीक हो गया है। ऐसे में इन लोगों के बैंक खाते मुश्किल में हो सकते हैं।

डार्क वेब पर बेची जा रहीं ये निजी जानकारियां
रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि लीक हुई जानकारियों में खाताधारकों के नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी जैसी निजी जानकारियां हैं। इसके अलावा करोड़ों लोगों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड के शुरुआती चार अंक और आखिरी चार अंक, कार्ड की एक्सपायरी डेट भी लीक हो गई है। बताया जा रहा है कि लोगों की इन निजी जानकारियों को डार्क वेब पर बेचा जा रहा है।

ऐसे लीक हुआ डाटा
रिपोर्ट्स के अनुसार, करोडों लोगों का जो निजी डाटा लीक हुआ है, वह एक पेमेंट गेटवे से लीक हुआ है। इनका नाम जसपे है। बता दें कि जसपे अमेजन, ऑनलाइन फूड बुकिंग प्लेटफॉर्म स्वीगी और मेकमायट्रिप के बुकिंग पेमेंट को प्रोसेस करता है। बताया जा रहा है कि इसी के जरिए करोड़ों लोगों की निजी जानकारियां लीक हो गई हैं। अब इन लोगों के बैंक अकाउंट्स पर खतरा मंडरा रहा हैै।

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अगस्त 2020 में लीक हुआ था डाटा
रिपोर्ट के अनुसार करोड़ों लोगों का यह निजी डाटा पिछले साल यानि अगस्त 2020 में लीक हुआ था। साथ ही रिपोर्ट मेंयह भी बताया जा रहा है कि जो डाटा डार्क वेब में बेचा गया उसमें यूजर्स की मार्च 2017 से लेकर अगस्त 2020 तक की जानकारी शामिल हैं।

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दिसंबर में भी लीक हुआ था डाटा
बता दें कि इससे पहले पिछले साल दिसंबर माह में भी खबर आई थी कि 70 लाख भारतीयों का डेबिट कार्ड डाटा लीक हुआ। इंडीपेंडेंट भारतीय साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर राजारिया का कहना है कि डाटा को डार्क वेब फोरम पर डाला गया, जहां से उसके ग्राहकों तक पहुंचाया गया।



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LG Display के ओएलईडी पैनल को मिला आई प्रोटेक्शन सर्टिफिकेशन

दुनिया में बड़े आकार के ओएलईडी पैनलों का निर्माण करने वाली प्रमुख कंपनी एलजी डिस्प्ले ने मंगलवार को कहा कि इसके ऑर्गेनिक लाइट-एमिटिंग डायोड (ओएलईडी) टीवी पैनल को नीली रोशनी का उत्सर्जन कम मात्रा में करने के लिए आई प्रोटेक्शन सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है। एलजी डिस्प्ले के मुताबिक, कंपनी द्वारा निर्मित ओएलईडी डिस्प्ले इंडस्ट्री का पहला ऐसा टीवी पैनल है, जिसने आईसेफ की तरफ से यह मान्यता हासिल की है। आईसेफ एम अमरीकी नेत्र सुरक्षा प्रमाणन एजेंसी है।

करता है ब्लू लाइट को मापने का काम
एक जर्मन तकनीकी परीक्षण सेवा और प्रमाणन संगठन टीयूवी रीनलैंड एलजी के सहयोग से आईसेफ आंखों की सुरक्षा के मद्देनजर मानकों का निर्धारण करता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह ब्लू लाइट को मापने का काम करता है, जिसके संपर्क में अधिक मात्रा में आने पर लोगों को आंखों से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें आंखों में जलन, आंखों में सूजन, नींद से संबंधित विकार इत्यादि शामिल हैं।

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34 फीसदी नीली रोशनी के उत्सर्जन
एजेंसी द्वारा इस बात पर गौर फरमाया जाता है कि किसी प्रोडक्ट से उत्सर्जित या निकलने वाली नीली रोशनी की मात्रा कुल नीली रोशनी के उत्सर्जन के अनुपात में 50 फीसदी कम हो। एलजी डिस्प्ले ने कहा कि उनका 65 इंच का ओएलईडी टीवी पैनल 34 फीसदी नीली रोशनी के उत्सर्जन के साथ इस मानक पर खड़ा उतरता है, जो अन्य सभी टीवी पैनलों में सबसे कम है और एलसीडी के मुकाबले तो यह करीब-करीब आधा है।

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बैकलाइट यूनिट की जरूरत नहीं
एलसीडी की तरह ओएलईडी को बैकलाइट यूनिट की जरूरत ही नहीं पड़ती, क्योंकि यह स्वयं-प्रकाश पिक्सेल तकनीक का लाभ उठाता है। एलजी डिस्प्ले ने कहा है कि उनकी योजना अगले हफ्ते ऑनलाइन आयोजित होने वाले इस साल के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो (सीईएस) में अपने ओएलईडी डिस्प्ले सॉल्यूशंस को पेश करना है, जो उपभोक्ताओं की आंखों और उनकी सेहत का बखूबी ख्याल रखता है।



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अनमिमिटेड फ्री कॉलिंग का तोहफा देने के बाद Jio ने दिया झटका, बंद किया यह ऑफर

रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने नए साल में यूजर्स को जियो से अन्य नेटवर्क पर अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग का तोहफा दिया। बता दें कि 1 जनवरी, 2021 से जियो से अन्य नेटवर्क पर अब कॉलिंग अनलिमिटेड फ्री है। अब जियो ने यूजर्स को एक झटका भी दिया है। दरअसल जियो ने अपने टॉक टाइम प्लान के साथ ऑफर किए जाने वाले फ्री डेटा बेनिफिट को बंद कर दिया है। अब जियो के इन सस्ते वाउचर्स में यूजर्स को वॉयस कॉलिंग का बेनिफिट नहीं मिलेगा। जियो के इन वाउचर्स में अब यूजर्स को सिर्फ डेटा की सुविधा मिलेगी।

2020 की शुरुआत में लॉन्च किए थे सस्ते वाउचर्स
ब्ता दें कि अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा बंद होने के बाद रिलायंस जियो ने साल 2020 की शुरुआत में सस्ते वाउचर्स जारी किए थे। इनमें यूजर्स को दूसरे नेटवर्क पर कॉल करने के लिए कुछ फ्री मिनट मिलते थे और डाटा भी मिलता था। इसमें जियो ने टॉक टाइम प्लान के साथ 100जीबी तक फ्री डेटा वाउचर और 4जी डेटा वाउचर्स के साथ नॉन-जियो नेटवर्क पर 1000 तक कॉलिंग मिनट्स देने का ऐलान किया था।

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मिलता था फ्री डेटा
बता दें कि इन सस्ते वाउचर्स में रिलायंस जियो यूजर्स को ऑफ-नेट कॉल पर 10 रुपए के रिचार्ज पर 1 जीबी डेटा ऑफर करती थी। एक हजार रुपये टॉक टाइम प्लान के साथ यूजर्स को 100 जीबी फ्री डेटा दिया जाता था। अब कंपनी ने सभी नेटवर्क पर कॉलिंग फ्री कर दी है तो इन वाउचर्स में यूजर्स को वॉयस कॉलिंग का बेनिफिट नहीं मिलेगा। बता दें कि रिलायंस जियो ने ऐलान किया है कि जियो ग्राहक अब हर नेटवर्क पर फ्री वॉइस कॉल कर पाएंगे।

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वाउचर्स को किया रिवाइज
कंपनी ने 11 रुपये, 21 रुपये, 51 रुपये और 401 रुपये वाले जियो 4जी डाटा वाउचर्स को रिवाइज कर दिया है। बता दें कि 11 रुपए वाले 4जी डाटा वाउचर में यूजर्स को नॉन-जियो नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए 75 मिनट मिलते थे। वहीं 101 रुपये वाले पैक में 1 हजार मिनट्स मिलते थे। वॉयस कॉलिंग के अलावा इन वाउचर्स में यूजर्स को डबल डेटा बेनिफिट भी मिलता था। पहले 11 रुपये वाला 4जी डेटा वाउचर 400एमबी डाटा मिलता था। अब इसमें 800एमबी डाटा मिलता है।



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Sunday, January 3, 2021

इस भारतीय की तकनीक मिली सेकण्ड्स में पकड़ लेती है फेक न्यूज

अमरीका के टेक्सास स्थित राइस यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के शोधकर्ता अंशुमाली श्रीवास्तव ने फेक न्यूज से लड़ने के लिए एक नया सॉफ्टवेयर विकसित किया है। मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग कर कम्प्यूटर वैज्ञानिक अंशुमाली ने ऐसा तरीका विकसित किया है जिससे सोशल मीडिया कंपनी अपने प्लेटफॉर्म से फेक न्यूज के ऑनलाइन प्रसार को रोक सकेंगी। श्रीवास्तव ने ब्लूम फिल्टर उपकरण के प्रदर्शन में सुधार कर स्मार्ट मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म बनाई है। गौरतलब है कि फर्जी समाचारों, सूचनाओं, किस्से-कहानियों और कम्प्यूटर वायरस के परीक्षण डेटाबेस के रूप में ब्लूम फिल्टर उपकरण को 50 सालों से इस्तेमाल किया जा रहा है। अंशुमाली श्रीवास्तव ने सांख्यिकी में स्नातक छात्र जेनवेई डाई के साथ मिलकर अपने एडाप्टिव लर्नड ब्लूम फिल्टर बनाया है। इस नए संस्करण में 50 प्रतिशत से भी कम मेमोरी की आवश्यकता होती है।

उन्होंने एडप्टिड लर्नड ब्लूम फिल्टर्ड (एडीए-बीएफ) नाम का एक नया फिल्टर बनाया है। उनका यह फिल्टर मिलि सेकंड्स में बता सकता है कि कोई ट्वीट फेक या गलत सूचनाएं लिए हुए है या नहीं। श्रीवास्तव ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के समय वे लगभग 10 हजार ट्वीट प्रति सेकंड की गति से कर रहे थे। उन्होंने फेक न्यूज को पकडऩे वाले ब्लूम फिल्टर की दक्षता में सुधार कर एडाप्टिव लर्नड ब्लूम फिल्टर बनाया है। यह लगभग छह ट्वीट प्रति मिली सेकंड की दर से फेक पोस्ट पकड़ लेता है।

श्रीवास्तव का कहना है कि यदि आपकी फाल्स-पॉजिटिव रेट 0.1 फीसदी के बराबर है, तब भी आप गलती से 10 ट्वीट प्रति सेकंड या 8 लाख से अधिक ट्वीट प्रतिदिन फ्लैग कर रहे हैं। यही वजह है कि परंपरागत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित फिल्टर फर्जी खबरों को रोक पाने में सफल नहीं होते। ट्विटर कभी इस बात का खुलासा नहीं करेगा कि उसने 1970 में बने एक कम मेमोरी तकनीक को ऐसे महत्वपूर्ण काम पर क्यों रखा है। न ही वह यह बता सकता है कि यह कितना सटीक है। फेक न्यूज और इन्फॉर्मेशन को रोकने के लिए श्रीवास्तव और डाई ने एक नए सॉफ्टवेयर को न्यूरल इन्फॉर्मेशन प्रोसेसिंग सिस्टम (न्यूरल पीएस2020) पर ऑनलाइन-ओनली 2020 सम्मेलन में प्रस्तुत किया था।

श्रीवास्तव का कहना है कि ट्विटर ट्वीट्स को फिल्टर करने के लिए संभवत: ब्लूम फिल्टर का इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि इस 1970 में विकसित तकनीक के कारण आज के त्वरित सोशल मीडिया कन्टेंट को फिल्टर करने में परेशानी आ रही है। यह तकनीक हमेशा सटीक परिणाम नहीं देती। वह अपने डेटाबेस से मेल न खाने वाले किसी भी फेक ट्वीट या पोस्ट को सही बताकर ऑनलाइन कर सकता है। पिछले तीन वर्षों के भीतर, शोधकर्ताओं ने ब्लूम फिल्टर को की दक्षता में सुधार करने के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग करने के लिए विभिन्न योजनाओं की पेशकश की है। जब लोग मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग करते हैं, तो वे बहुत उपयोगी जानकारी बर्बाद करते हैं जो मशीन लर्निंग मॉडल से आ रही है।



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कृत्रिम सूरज: कोरियाई वैज्ञानिकों ने लैब में पैदा किया सूरज जितना तापमान

परमाणु ऊर्जा यानी फ्यूजन एनर्जी (Fusion Energy) एक ऐसी तकनीक है जिसे अभी तक पूरी तरह से नियंत्रित नहीं किया जा सका है। लेकिन दक्षिण कोरियाई (South Korea) वैज्ञानिकों ने हाल ही कोरिया सुपरकंडक्टिंग टोकामक एडवांस्ड रिसर्च (केएसटीआर) फ्यूज़न रिएक्टर को 20 सेकंड्स तक चलाकर नया विश्व कीर्तिमान बनाया है। यह उपलब्धि इसलिए भी एक मील का पत्थर है क्योंकि आज तक किसी भी देश के वैज्ञानिक इस असीमित ऊर्जा के भंडार को नियंत्रित नहीं कर सके हैं। यह परमाणु संलयन ऊर्जा की प्रौद्योगिकी की प्रगति और अनुसंधान में एक बड़ा सुधार है। यह भविष्य की अगली पीढ़ी की तकनीक है जो अभी तक केवल विज्ञान कथा फिल्मों में ही दिखाई देती थी। लेकिन वास्तविक जीवन में, यह तकनीक अभी तक व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। अंतरराष्ट्रीय फिजिक्स ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, कोरिया ने अपने 'कृत्रिम सूर्य' से करीब 18 करोड़ डिग्री फार्नहाइट (180 million Degrees Fahrenheit आयन टेम्प्रेचर) जितनी ऊर्जा उत्पादित की। यह परीक्षण बीते महीनों में किया गया था जिसे कोरियाई वैज्ञानिकों ने 24 नवंबर को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

कृत्रिम सूरज: कोरियाई वैज्ञानिकों ने लैब में पैदा किया सूरज जितना तापमान

एक साल में दोगुना किया समय
दक्षिण कोरिया की सिओल नेशनल यूनिवर्सिटी (Seol National University) और कोलंबिया यूनिवर्सिटी (Columbia Uuniversity) के वैज्ञानिकों के इस साझे प्रयास से यह फ्यूजन रिएक्टर निरंतर संचालित हो रहा है। इसे शोधकर्ता 'आर्टिफिशियल सन' (Artificial Sun) यानी 'कृत्रिम सूरज' को केएसटीआर प्लाज्मा कैम्पेन-2020 (KSTAR Plazma Campaign) अभियान के तहत १८ करोड़ डिग्री (180 मिलियन) फार्नहाइट से अधिक डिग्री का उत्पादन करने का काम सौंपा गया था। 2018-2019 में भी शोधकर्ता इसे केवल 8 सेकंड्स तक ही चला सके थे। लेकिन एक साल में ही उन्होंने इस समय को दोगुना करने में सफलता हासिल कर ली। संलयन प्रतिक्रियाएं (फ्यूजन रिएक्शन) ठीक वैसी ही प्रक्रिया है जैसी सूरज की ऊष्मा पृथ्वी की ओर आती है और ओजेान परत और करोड़ों किमी की दूरी के कारण घातक नहीं हो पाती।

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आखिर क्यों है महत्वपूर्ण फ्यूजन रिएक्शन
सेंटर फॉर न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (CNST) के अनुसारए संलयन प्रतिक्रिया एक ऐसी प्रक्रिया है जो दो परमाणुओं को एक साथ मिलाती है और बदले में, यह ऊर्जा का निर्माण या उत्पादन करती है। मूल रूप से यह उसी प्रक्रिया पर आधारित कि कैसे अंतरिक्ष में सूर्य और अन्य तारे पृथ्वी सहित ग्रहों के बीच ऊर्जा उत्पन्न और साझा करते हैं। आधुनिक विज्ञान में प्रक्रियाओं को बनाए रखने के लिए अल्ट्रा-हाइ-टेम्परेचर प्लाज्मा ऑपरेशन सबसे कठिन प्रक्रिया है। कोरिया की यह तकनीक, विशेष रूप से आंतरिक परिवहन बोर्ड (ITB) ने यह उपलब्धि हासिल की है। वर्तमान में, यह दुनिया की एकमात्र ऐसी तकनीक है जो 10 सेकंड से अधिक समय तक 10 करोड़ (100 मिलियन) डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्मी बनाए रख सकती है।

कृत्रिम सूरज: कोरियाई वैज्ञानिकों ने लैब में पैदा किया सूरज जितना तापमान

भविष्य की ऊर्जा का आधार है
टीम ने दावा किया कि यह प्रौद्योगिकी जल्द ही परमाणु संलयन के समग्र सुधार में योगदान करेगी, जो मानव विकास में अहम भूमिका निभाएगी। इस तरह की शक्ति जल्द ही नई ऊर्जा के स्रोत के रूप में उपयोग में लाई जा सकती है। विशेष रूप से, अक्षय ऊर्जा के रूप में या कृत्रिम रूप से सूरज की गर्मी पृथ्वी पर ही उत्पन्न करने के लिए। कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूजन एनर्जी (KIFE) के केस्टार रिसर्च सेंटर के निदेशक और परमाणु भौतिक विज्ञानी सी-वू-यून का कहना है कि यह एक महत्वपूर्ण सफलता है, जो भविष्य में कॉमर्शियल परमाणु संलयन रिएक्टर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। 2025 तक, केस्टार में इंजीनियर्स 20 सेकंड्स की अवधि को बढ़ाकर 300 सेकंड की अवधि तक 10 करोड़ (100 मिलियन) डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्मी उत्पन्न करने के निशान को पार करना चाहते हैं। इतनी लंबी अवधि के लिए कुशल कोर प्लाज्मा हीटिंग को सक्षम करके हासिल किया है, जो सुपरकंडक्टिंग केस्टार डिवाइस की अद्वितीय क्षमता का प्रदर्शन करता है। प्रयोग से प्राप्त निष्कर्षों को 2021 आइएईए फ्यूजन एनर्जी कांफ्रेंस में शोध पत्र प्रस्तुत किया जाएगा।

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Saturday, January 2, 2021

फेस रिकिग्नशन तकनीक ने गलत पहचान की, निर्दोष ने 10 दिन बिताये जेल में

विदेशों में चेहरा पहचानने वाली तकनीक का उपयोग दिनों-दिन बए़ रहा है। लेकिन कई बार तकनीक की गलती से निर्दोष व्यक्ति को परेशान भी होना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया न्यू जर्सी में। यहां 33 वर्षीय अश्वेत नीजीर पाक्र्स को सिर्फ इसलिए 10 दिनों तक जेल की हवा खानी पड़ गई क्योंकि फेस रिकिग्नशन तकनीक ने उसकी पहचान एक अपराधी के रूप में की थी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।

यह था पूरा मामला
पाक्र्स को एक तड़ीपार अपराधी से शक्ल मिलने के आधार पर बिना पुष्टि किए पुलिस ने हिरासत में रखा था। उक्त अपराधी पर 2019 में वुडब्रिज में दुकान लूटने का आरोप था, लेकिन वह पुलिस के हाथों से बच निकला था। पीडि़त नीजीर के वकील डैनियल सेक्स्टन ने शहर और वुडब्रिज में अधिकारियों के खिलाफ एक सिविल मुकदमा दायर किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने संदिग्ध चेहरे की पहचान सॉफ्टवेयर से कर पाक्र्स के नागरिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। नीजीर के अश्वेत होने के कारण यह मामला अब और तूल पकड़ता जा रहा है। पाक्र्स अभी एक सुपरमार्केट में क्लर्क के रूप में काम कर रहे थे और अपने मंगेतर से शादी करने के लिए बचत कर रहे थे।

गलत गिरफ्तारी, पुलिस के उड़े होश
चोरी और लूट की यह घटना वुडब्रिज में 26 जनवरी, 2019 को हैम्पटन इन में हुई थी। एक दुकानदार ने अपने सहां लूट की सयूचना दी। चोर ने बहुत ही मामूली चीजें जैसे गिफ्ट, कैंडी और चॉकलेट्स चुराए थे। चोर एक होटल के बाथरूम में घुस गया। जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने टेनेसी के एक ड्राइवर का लाइसेंस सौंप दिया जिसकी पहचान 25 वर्षीय जमाल ओवेन्स के रूप में हुई। मौका पाकर वह पिछले दरवाजे से बाहर भाग गया। पुलिस ने उस संदिग्ध लाइसेंस का मैच फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर से किया जो नीजीर से मिलता था। लेकिन गलत गिरफ्तारी ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। जेल से छूटने के बाद नीजीर ने पुलिस औरा संबंधित फेस-रिकग्निशन तकनीक सेवा प्रदाता कंपनी पर मानहानी का दावा ठोक दिया है।



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Google पर गलत सर्च के चलते लगी 80 हजार रुपए की चपत, आप न करें ये गलती, ऐसे बचें

हमें इंटरनेट पर कोई भी चीज सर्च करनी होती है या कोई जानकारी चाहिए होती है तो हम गूगल (Google) की सहायता लेते हैं। लेकिन कई बार गूगल की सहायता लेना भारी भी पड़ सकता है। ऐसे कई केस सामने आए हैं, जिनमें गूगल पर गलत सर्च (Google search) के कारण लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। गूगल पर गलत सर्च के कारण बैंक अकाउंट खाली हो सकता है। ऐसा ही कुछ दिल्ली में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ हुआ। गूगल पर गलत सर्च के कारण साइबर क्रिमिनल्स ने उस व्यक्ति के बैंक अकाउंट में सेंध लगा दी और हजारों रुपए उड़ा लिए।

सर्च किए थे DTDC क कस्टमर केयर नंबर
दरअसल, दिल्ली निवासी इस व्यक्ति ने गूगल से कूरियर कंपनी DTDC के कस्टमर केयर नंबर सर्च किए थे, जिसकी वजह से वह ठगी का शिकार हो गया और 80 हजार रुपए गवां दिए। पीडित ने गूगल से कस्टमर केयर के जो नंबर सर्च किए और उन पर कॉल लगाया। जब व्यक्ति ने उन नंबर पर फोन किया तो ठगों ने पहले व्यक्ति की सारी जानकारी एक गूगल सीट पर भरवाई। इसके बाद व्यक्ति को बेहतर सपोर्ट का झांसा देकर उसके फोन पर Team Viewer Quick Support का एक लिंक भेजा।

ठगों ने व्यक्ति से गूगल डॉक्स पर उसका एड्रेस प्रूफ जैसी जानकारियां मांगी। इसके बाद साइबर क्रिमिनल्स ने व्यक्ति से बैंक वेरिफिकेशन के नाम पर दो रुपये का ट्रांजेक्शन करने के लिए कहा। ठगों ने उस व्यक्ति से कहा कि उसका कूरियर तब तक डिलिवर नहीं किया जा सकता जब तक बुकिंग अमाउंट पे नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि कूरियर डिलिवर होने के बाद वह अमाउंट उसे वापस कर दिया जाएगा। ऐसे ठगों ने व्यक्ति को झांसे में लेकर उस व्यक्ति के डेबिट कार्ड की डिटेल्स ले ली और उसके अकाउंट से 80 हजार रुपए उड़ा लिए।

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न करें ये गलती
बता दें कि Team Viewer एक रिमोट कंट्रोल की तरह होता है। इससे कोई भी आपके सिस्टम या मोबाइल को अपने कंट्रोल में ले सकता है या उसमें तांका-झांकी कर सकता है। ठग टीम वीवर की मदद से उस व्यक्ति के मोबाइल की डिस्प्ले देख रहे थे। जैसे ही व्यक्ति के पास ट्रांसजेक्शन के लिए ओटीपी आया तो ठगों ने उस व्यक्ति के अकाउंट से दो बार में 80 हजार रुपए साफ कर दिए।

बता दें कि इस तरह कई यूजर्स स्विगी, जुमैटो और दूसरी ई-कॉमर्स कंपनियों के कस्टमर केयर का नंबर गूगल पर सर्च करते हैं और ऑनलाइन ठगी का शिकार होते हैं। ऐसे में आप यह गलती न करें। हो सके तो वेबसाइट पर जाकर ही उस कंपनी के कस्टमर केयर नंबर देखें। साथ ही अगर आपसेे कॉल के दौरान कोई निजी जानकारी मांगी जाए तो कभी न दें।

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गूगल सर्च के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
गूगल पर किसी भी कंपनी के कस्टमर केयर नंबर सर्च करते समय ध्यान रखना चाहिए कि सर्च पेज पर दिख रहे नंबर पर कभी भी कॉल नहीं करनी चाहिए। कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ही हमें कस्टमर केयर का नंबर सर्च करना चाहिए। कॉल के दौरान बैंकिंग से जुड़ी डिटेल्स किसी से भी शेयर नहीं करनी चाहिए।



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2021- गुज़रा दशक- वर्जिन हाइपरलूप ने दुनिया की पहली पैसेंजर सवारी का परीक्षण

-नेवाडा में वर्जिन हाइपरलूप ने दुनिया की पहली पैसेंजर सवारी का परीक्षण किया। अपने हाइपरलूप पॉड में जोश गीगेल और सारा लूशियन दुनिया के पहले हाइपरलूप सवारी करने वाले बन गए। लास वेगास में, 1640 फीट लंबे वर्जिन डेवलूप टनल में यह परीक्षण किया गया। इस दौरान पॉड की अधिकतम गति 172किमी प्रतिघंटा थी। वहीं भविष्य में इसके अपग्रेड मॉडल की टॉप स्पीड 966 किमी प्रतिघंटा तक हो सकती है। यह आज के सबसे तेज कॉमर्शियल प्लेन से भी कई गुना तेज है।

2021- गुज़रा दशक- वर्जिन हाइपरलूप ने दुनिया की पहली पैसेंजर सवारी का परीक्षण

-अमरीका 2023-24 तक तीन चरणों में ऑटोनोमस- मालवाहक नेटवर्क बनाएगा। यह दुनिया का पहला ऑटोनोमस फ्राइट नेटवर्क (एएफएन) होगा। इसमें स्वाचालित मालवाहक ट्रक, डिजिटल मैप आधारित रूट और विशेष रूप से तैयार टर्मिनल होंगे जो स्वायत्त संचालन निगरानी प्रणाली से जुड़े होंगे।

2021- गुज़रा दशक- वर्जिन हाइपरलूप ने दुनिया की पहली पैसेंजर सवारी का परीक्षण

-वर्जिन गैलेक्टिक ने हाल ही अपने दो सीटर स्पेस शिप के केबिन इंटीरियर को पेश किया। इसके निजी सीट बैक में फ्लाइट से जुड़ा डेटा और 16 कैमरों से अंतरिक्ष का नजारा लेने के लिए एचडी फुटेज सीट डिस्प्ले पर नजर आएगी। केबिन विंडो को इस तरह बनाया है कि गुरुत्वाकर्षण न होने पर हवा में तैरते हुए भी लोग सुरक्षित रहें। इसमें सीट के साथ ही अत्याधुनिक संचार व्यवस्था है। वर्जिन गैलेक्टिक के इस स्पेस शिप में स्पेस में ट्रैवल करने के लिए एक सीट बुक करने का खर्चा करीब 2.50 लाख डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं। कंपनी 2021 तक ऐसे दो स्पेसशिप बनाने का लक्ष्य रखा है जिसे 2023 तक 5 स्पेसशिप में बदला जाएगा। अब तक 9 हजार लोग अपनी सीट बुक करवा चुके हैं। स्विस इन्वेस्टमेंट बैंक यूबीएस का अनुमान है कि साल 2030 तक स्पेस ट्रैवल का बाजार करीब ३ अरब डॉलर का होगा।

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-वर्जिन गैलेक्टिक ने हाल ही अपने माक-३ एयरक्राफ्ट का डिजाइन भी प्रस्तुत किया है। कंपनी का दावा है कि अभी अपने पहले चरण में पहुंचा यह जहाज अधिकतम 3700 किमी प्रतिघंटा (माक-3) की रफ्तार से उडऩे में सक्षम होगा। यह ब्रिटेन-फ्रांस के बनाए और ध्वनि की गति से भी दोगुना तेज कॉनकॉर्ड सपुरसॉॅनिक जेट से भी 50 फीसदी ज्यादा तेज होगा।

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-ऑस्ट्रेलिया में एआइ कैमरा का इस्तेमाल ऐसे लोगों को पकडऩे के लिए किया जा रहा है जो ड्राइव करते समय मोबाइल पर बात करते हैं। अकेले 2019 में ही इस तकनीक से 1 लाख से ज्यादा लोगों का मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाने के चलते चालान किया गया था। ऐसा करने वाला ऑस्ट्रेलिया दुनिया पहला देश भी है।

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-जैगुआर लैंड रोवर कार में जल्द ही ऐसी एआइ तकनीक उपयोग की जाने लगेगी जो ड्राइवर और पैसेंजर के चेहरे के हावा-भाव को पहचानने का काम करेगी। और उनके मूड और मिजाज के अनुसार कार की सेटिंग्स को बदल देगी। इसमें लाइट सिस्टम, संगीत, एसी और ऐसे ही दूसरे फीचर शामिल होंगे।

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-चीन में शंघाई इवोल्यूशन कंपनी ने ऐसी रोबोटिक तकनीक विकसित की है जो किसी भी बिल्डिंग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा सकती है। इसे वहां वॉकिंग बिल्डिंग्स भी कहा जा रहा है। 200 के करीब रोबोटिक उपकरणों को बिल्डिंग के नीचे लगा दिया जाता है जो इसके पांव की तरह काम करते हैं। इसके बाद 7600 टन वजनी बिल्डिंग को भी आसानी से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकता है। इस तकनीक की मदद से वे 18दिनों में अब तक 21 डिग्री के एंगल पर एक स्कूल की बिल्डिंग को करीब 203 फीट या 62 मीटर तक सरका चुके हैं।

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-पहिए में फिट हो जाने वाला एक नया उपकरण 'टायर डस्ट' सड़क पर पहियों के घर्षण से उत्पन्न बेहद बारीक माइक्रो प्लास्टिक कार्बन को एकत्र करता है। पीएम 2.5 से भी सूक्ष्म इन कणों को एकत्र कर यह डिवाइस इसे हमारे फेफड़ों और श्वांस नली में जाने से रोकता है।

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