कम्प्यूटर और इंटरनेट हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। लेकिन इंसान की मौत भी अब एक तकनीकी समस्या बन गई है। किसी व्यक्ति के गुजर जाने के बाद यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि उसके सोशल मीडिया अकाउंट, गूगल स्टोरेज, आई क्लाउड और ऑनलाइन डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रखी निजी जानकारियां हमेशा सुरक्षित रहेंगी? इस दुनिया से चले जाने पर क्या हमारा सोशल मीडिया अकाउंट बंद हो जाता है? सोशल नेटवर्किंग कंपनियां हमारे निजी डेटा और गुप्त जानकारियों का क्या करती हैं? कोई ऐसा उपाय है जिससे हमारी ये निजी बातें गलत हाथों में न जाएं? आइए जानें कैसे।
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इन समस्याओं से बचने के लिए आप अपनी डिजिटल संपत्ति या दस्तावेजों के लिए ई-स्टेट प्लानर और वकील से इस बारे में सलाह ले सकते हैं। ऐसे ही कुछ टेक कंपनियां खाताधारक को ऑनलाइन संपत्तियों का वारिस चुनने का भी विकल्प देती हैं। गूगल इसे 'निष्क्रिय खाता प्रबंधक' और फेसबुक 'लीगेसी कॉन्टेक्ट' कहता है। कुछ पासवर्ड मैनेजर टूल ऑनलाइन वारिस की सुविधा को सेवा के रूप में पेश करते हैं। साथ ही आपातकालीन संपर्क भी इसमें जोड़ सकते हैं।
एफबी पर हजारों खाते
आज फेसबुक पर दुनियाभर में 2 अरब से ज्यादा लोग सक्रिय हैं जो फोटो, पसंद-नापसंद और वर्तमान घटनाओं पर उनकी प्रतिक्रियाओं के रूप में डिजिटल दस्तावेजीकरण करते हैं। आज ऐसे हजारों फेसबुक अकाउंट हैं जिनके उपयोगकर्ता इस दुनिया में नहीं है लेकिन वे अपने पीछे ऐसी डिजिटल यादें छोड़ गए हैं जो उन्हें हमेशा प्रासांगिक बनाए रखेंगी। साल 2100 तक यह संख्या 500 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंच सकती है। हालांकि दिवंगत हुए कुछ यूजर्स के ये फेसबकु अकाउंट उनके परिजन या जानकार भी संचालित करते हैं।
बंद नहीं होते अकाउंट
सबसे बड़ी समस्या है डिजिटल चीजों को लेकर अलग-अलग देशों में अलग-अलग कानून। सामान्यत: टेक कंपनियां डेटा को आपकी सहमति के बिना नहीं छेड़ सकतीं। ऑनलाइन संग्रहीत आपका निजी डेटा आपके न होने की स्थिति में तुरंत डिलीट नहीं होता। गूगल उपयोगकर्ता के ऑनलाइन स्टोरेज एवं डिजिटल अकाउंट से सामग्री नहीं हटाता। इसी तरह एपल यह नहीं बताता कि वह भुगतान न करने की स्थिति में कब तक डेटा को संभालकर रखता है।
क्या कहना है एक्सपर्ट का
किसी यूजर की मृत्यु होने पर उसका सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने के लिए संबंधित कंपनी को आवेदन करना चाहिए। ऐसे यूजर के अकाउंट पर फिर 'रिमेम्बरिंग' लिखा आता है जो इस बात को दर्शाता है कि अकाउंट होल्डर अब इस दुनिया में नहीं है। तमाम साइट्स पर 'रिकवरी ईमेल' नाम का विकल्प भी होता है। आयुष भारद्वाज, साइबर एक्सपर्ट, jaipur

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