दुनिया में जब भी जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने की चुनौती से निपटने की बात आती है तो कार्बनिक प्रक्रियाओं (Carbonic Process) के अंतर्गत शैवालों की कार्बनडाइऑक्साइड (Reef Carbondioxide) को अवशोषित करने की क्षमता सबसे शक्तिशाली विकल्प नजर आता है। वर्षों से वैज्ञानिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Emission of Green House Gases) से निपटने और पर्यावरण के अनुकूल जैव ईंधन (Bio Fuel) के उत्पादन की उम्मीद में इस प्राकृतिक घटना का अध्ययन कर रहे हैं। हाल ही अमरीकी कंपनी हाइपरजेंट इंडस्ट्रीज ने शैवालों की हवा में मौजूद कार्बन सोखने की प्राकृतिक तकनीक को एक बॉक्सनुमा बायोरिएक्टर उपकरण (Bio Reactor Device) में ढाल लिया है। यह पेड़-पौधों की तुलना में 400 गुना ज्यादा तेजी से कार्बन अवशोषित कर सकती है। यह एक एकड़ में फैले पेड़ों द्वारा सोखी गई कार्बन जितनी है।
बेहद कारगर है तकनीक
ईओएस नाम का यह बायोरिएक्टर 3 फीट चौड़ा और 7 फीट ऊंचा है। इसे खास तौर से शहर में लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कंपनी का दावा है कि मशीन, डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर का उपयोग करती है जो अधिकतम उत्पादन के लिए प्रकाश, तापमान और पीएच स्तर का उपयोग करता है। इस बायोरिएक्टर के भीतर शैवाल डिवाइस के ट्यूब सिस्टम और पानी की टंकी के अंदर से हवा, कृत्रिम प्रकाश के संपर्क में रिएक्टरए क्लोरेला वल्गेरिस एक विशिष्ट प्रक्रिया का उपयोग करता है जो अधिक कार्बन सोखता है।

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