जलवायु परिवर्तन (climate change) के विरुद्ध सरकारों को घेरने वाली स्वीडन की ग्रेटा थुनबर्ग (Greta Thunberg) ने 2018 में आवाज बुलंद की तो यह दुनियाभर के युवाओं को इस मुहिम से जुडऩे और ग्लोबल वार्मिंग (global warming) एवं इसके परिणामों से लडऩे के लिए प्रेरित किया। सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल से इनकार करने से लेकर झीलों की सफाई और रिसाइकिल करने योग्य उत्पादों का उपयोग करने के लिए देशभर में कई बच्चों ने अपने-अपने स्तर पर प्रयास शुरू किए हैं। इन सभी का मानना है कि आज हमारे प्राकृतिक संसाधन तेजी से कम हो रहे हैं, लेकिन भारत के कई युवा इको-इनोवेटर्स और पर्यावरणविद बदलाव लाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे ही एक युवा भारतीय हैं हाजि़क काजी़।
समुद्रों की सफाई के लिए बनाया डिवाइस
अपने इनोवेशन 'एर्विस' के लिए मशहूर 14 वर्षीय हाजिक काजी उन युवा किशोरों में शामिल हैं जिन्होंने हमारे समुद्रों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए तकनीक का उपयोग किया है। उनका इन्वेंट किया हुआ 'एर्विस' नाम का उपकरण महासागरों की सफाई में काम आता है। यह मुख्य रूप से प्लास्टिक हटाने का काम करता है। पुणे निवासी हाजिक के इस उपकरण को 2017 में न्यूयॉर्क में टेड-एड वीकेंड में भी प्रस्तुत किया जा चुका है। इस युवा इनोवेटर के मुताबिक एर्विस एक विशाल जहाज की तरह है जो हाइड्रोजन और रिन्यूएबल प्राकृतिक गैस द्वारा चलता है।
ये काम करता है एर्विस
इस जहाज के तीन मुख्य उद्देश्य हैं। पहला यह महासागरों में जमे कचरे को साफ करता है, दूसरा यह उनमें मौजूद प्रमुख प्रदूषकों की पहचान करता है और तीसरा इस प्रदूषक को इसके मुख्य स्रोत से काट देता है ताकि यह और अधिक विकसित न हो सके। उन्होंने एर्विस को एक बाथटब में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था। लेकिन आज उनका यह उपकरण हमारे महासागरों को साफ करने के लिए उपयोग किया जाता है।
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