Saturday, October 31, 2020

OPPO लाया कमाल का फीचर, आपके शेड्यूल के हिसाब से चार्ज होगी स्मार्टफोन की बैटरी

जब भी कोई यूजर्स स्मार्टफोन खरीदते हैं तो उसमें कैमरे और अन्य फीचर्स के अलावा बैटरी बैकअप भी देखते हैं। इसी वजह से आजकल जो स्मार्टफोन बाजार में आ रहे हैं उनमें दमदार बैटरी दी जाती है। साथ उनकी बैटरी फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है। इसके अलावा कंपनियां स्मार्टफोन्स में नई—नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी कर रही हैं। इसी कड़ी में स्मार्टफोन निर्माता कंपनी एक खास फीचर लाया है। बता दें कि OPPO का ColorOS यूजर्स को बैटरी सेविंग मोड के साथ खास चार्जिंग टेक्नॉलजी भी देता है, जिससे बैटरी का बैकअप तो बढ़ता ही है, साथ ही इसकी लाइफ में भी इजाफा हो जाता है।

बैटरी गार्ड फीचर
कई बार यूजर रात को सोते समय फोन को चार्जिंग पर लगा देते हैं और वह पूरी रात चार्ज होता रहता है। ऐसे में बैटरी के जल्दी खराब होने के चांस रहते हैं। अब ओप्पो का ColorOS 11 बैटरी गार्ड की सुविधा देता है। यह बैटरी गार्ड फीचर चार्जिंग आदतों को सीखने के लिए AI का इस्तेमाल करता है। इस फीचर के तहत अगर यूजर रात को फोन चार्ज पर लगाकर सो गया तो फोन 80% तक चार्ज होने के बाद चार्ज होना बंद हो जाएगा। इसके बाद जब यूजर अपनी दिनचर्या के अनुसार उठने वाला होता है, तो फिर से चार्जिंग शुरू हो जाती है। ऐसे में जब यूजर सुबह उठात है तो से फोन की बैटरी 100% चार्ज मिलती है।

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सुपर पावर मोड
इसके अलावा कलरओएस 11 में और खास फीचर आता है। इसमें यूजर्स को सुपर पावर मोड मिलता है। फोन में बैटरी कम रहने पर इस फीचर को एक्टिवेट किया जा सकता है। इस फीचर को एक्टिवेट करने के बाद यूजर अधिकतम 6 एप्स का ही इस्तेमाल कर पाएंगेे। इससे बैटरी जल्दी खत्म नहीं होगी। ये 6 एप्स यूजर खुद तय कर सकते हैं। सुपर पावर मोड के जरिए व्हॉट्सएप को को 90 मिनट तक इस्तेमाल कर सकते हैं।

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अन्य कंपनियां दे रही ऐसे फीचर्स
ओप्पो के अलावा अन्य कई कंपनियां भी सुपर पॉवर मोड जैसे फीचर्स दे रही हैं। Xiaomi अल्ट्रा बैटरी सेवर मोड फीचर देती है। इसमें स्‍टैंडबाई टाइम 25 गुना तक बढ़ जाता है। वहीं Google पिक्सल स्मार्टफोन में एक्सट्रीम बैटरी सेवर मोड फीचर देती है। सैमसंग में यूजर्स को मैक्सिमम पॉवर सेविंग मोड मिलता है।



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हैकर्स ने रची बड़ी साजिश, 100 हाई प्रोफाइल लोगों पर साइबर अटैक, माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसे किया नाकाम

फिरौती मांगने या जानकारियां हासिल करने के लिए हैकर्स अक्सर किसी व्यक्ति पर साइबर अटैक करते हैं और उनके अकाउंट्स को निशाना बनाते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट (microsoft) ने हाल ही एक ऐसे ही बड़े साइबर अटैक को नाकाम कर दिया। यह साइबर हमला 100 से ज्यादा हाईप्रोफाइल लोगों पर किया गया था। इस हमले का मकसद खुफिया जानकारियां हासिल करना था। इसमें हैकर्स ने पूर्व राजदूतों और वरिष्ठ नीति विशेषज्ञों के अकाउंट्स पर निशाना बनाया था।

इन लोगों को बनाया हैकर्स ने निशाना
ईरानी हमलावर फॉस्फोरस ने सऊदी अरब में होने वाले आगामी म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन और थिंक 20 (टी 20) शिखर सम्मेलन के संभावित प्रतिभागियों को निशाना बनाया था। सुरक्षा के विषय को लेकर म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन राज्य के प्रमुखों और अन्य विश्व नेताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण मीटिंग है और यह लगभग 60 साल से लगातार हो रही है। इसी तरह थिंक 20 भी एक अहम कार्यक्रम है जो जी20 देशों के लिए नीतिगत आइडिया तैयार करती है।

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भेजे गए फर्जी मेल
माइक्रोसॉफ्ट में कस्टर सिक्योरिटी एंड ट्रस्ट के वाइस प्रेसिडेंट ने टॉम बर्ट ने कहा कि वर्तमान विश्लेषण के आधार पर हमें नहीं लगता है कि यह गतिविधि किसी भी तरह से अमेरिकी चुनावों से जुड़ी है। हमलावर ईमेल के जरिए इन कार्यक्रमों में सम्मिलित होने वाले संभावित मेहमानों को फर्जी मेल भेज रहे थे। ये ईमेल अंग्रेजी में थे और इन्हें पूर्व सरकारी अधिकारियों, नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और गैर-सरकारी संगठनों के नेताओं को भेजा गया था।

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इसलिए बनाया निशाना
बर्ट ने एक बयान में कहा कि उनका मानना है कि खुफिया जानकारियां पाने के मकसद से ये हमले हुए। हमले के पीड़ितों में पूर्व राजदूत और अन्य वरिष्ठ नीति विशेषज्ञ शामिल थे जो अपने-अपने देशों में वैश्विक एजेंडा बनाने और विदेश नीतियों को आकार देने में मदद करते हैं। इस गतिविधि को माइक्रोसॉफ्ट के थ्रेट इंटेलिजेंस सेंटर या एमएसटीआईसी द्वारा उजागर किया गया था। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि हमेशा की तरह व्यापार और व्यक्तिगत ईमेल खातों में मल्टी-फैक्टर अथेंटिकेशन लागू करने से ऐसे हमलों को सफलतापूर्वक रोका जाएगा।



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एक बार चार्ज करने के बाद 28 हजार साल चलेगी यह बैटरी, अनोखे तरीके से बनाई गई

जब हम स्मार्टफोन खरीदते हैं तो यह जरूर देखते हैं कि उसका बैटरी बैकअप कितना है। हालांकि स्मार्टफोन ही नहीं अन्य कई गैजेट्स की बैटरी भी कुछ घंटों में ही डिस्चार्ज हो जाती है और हमें फिर से उसे चार्ज करना पड़ता है। लेकिन जरा सोचिए कि आपके स्मार्टफोन या गैजेट में कोई ऐसी बैटरी लगा दी जाए जो एक बार चार्ज करने के बाद पूरी जिंदगी चलती रहे तो। एक कंपनी ने ऐसी ही बैटरी बनाई है, जिसे एक बार चार्ज करने के बाद वह 28 हजार साल तक चलेगी। इससे आपको बैटरी से चलने वाली किसी चीज को बार—बार चार्ज करने की जरूरत नहीं होगी।

चलेगी 28 हजार वर्ष तक
पिछले दिनों कैलिफोर्निया की एक कंपनी ने ऐसी ही बैटरी बनाने का दावा किया है, जिसे एक बार फुल चार्ज करने पर उसे 28 हजार साल तक चार्ज करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। मतलब अगर आप उस बैटरी को अपने स्मार्टफोन या घडी में लगा दें तो बैटरी 28 हजार साल तक डिस्चार्ज नहीं होगी। ये बैटरी NDB कंपनी ने बनाई है। इस बैटरी को एक आर्टिफिशियल डायमंड के छोटे से बॉक्स में कार्बन 14 न्यूक्लियर वेस्ट में फंसाकर बनाया गया है।

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सेल्फ चार्जिंग बैटरी
इस बैटरी को सेल्फ चार्जिंग बैटरी भी कहा जाता है। कंपनी का कहना है कि इस बैटरी से फोन, घड़ी, लैपटॉप, कैमरा, मॉनीटर्स के अलावा कई तरह के इलेक्ट्रिक उपकरण चला सकते हैं। साथ ही कंपनी का दावा है कि यह बैटरी पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके ऊपर रेडियोएक्टिव हीरे से एक लेप लगाया गया है। इस लेप की वजह से यह बैटरी कभी लीक नहीं होगी। इसमें लगे हीरे और कार्बन के रिएक्शन की वजह से बिजली बैटरी के अंदर ही स्टोर होगी।

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बिजली भी मिल सकेगी
कंपनी का कहना है कि 28 हजार साल चलने वाली इस बैटरी से लोगों को काफी फायदा होगा। अगर इस बैटरी को कंप्यूटर चिप्स में लगा दिया जाए तो इससे काफी फायदा होगा। साथ ही कंपनी का दावा है कि इससे लोगों को बिजली भी मिल सकेगी और इस बैटरी के जरिए लोग अपने घरों में बिजली जला सकेंगे।

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मेडिकल जगत में भी इस बैटरी की जरूरत
कंपनी का कहना है कि इस बैटरी की जरूरत मेडिकल जगत में भी है। कंपनी का कहना है कि पेसमेकर और ट्रांसप्लांट जैसे जीवनरक्षक उपकरण बैटरी पर ही चलते है। इन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। अगर इन उपकरणों में यह बैटरी लगा दी जाए तो ऐसा करने की नौबत नहीं पड़ेगी।



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Friday, October 30, 2020

WhatsApp पर रोजाना भेजे जाते हैं 100 अरब मैसेज, जानें ऐसे ही कुछ इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

इंस्टेंट मैसेजिंग एप व्हॉट्सएप (WhatsApp) दुनियाभर में काफी पॉपुलर है। इस प्लेटफॉर्म का पूरी दुनिया में अरबों लोग इस्तेमाल करते हैं। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने इस मैसेजिंग एप WhatsApp को लेकर कुछ खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि WhatsApp के जरिए रोजाना कितने मैसेज भेजे जाते हैं। जुकरबर्ग ने तिमाही रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि दुनिया के करीब 2.5 अरब लोग प्रतिदिन किसी-ना-किसी रूप में फेसबुक के किसी एक या अधिक एप का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और फेसबुक मैसेंजर शामिल हैं।

व्हॉट्सएप पर भेजे जाते हैं प्रतिदिन इतने मैसेज
जुकरबर्ग ने बताया कि WhatsApp पर रोजाना करीब 100 अरब मैसेज भेजे जा रहे हैं। एक दिन में 100 अरब मैसेज का आंकड़ा व्हाट्सएप ने नए साल (2020) की संध्या पर पार किया था। जुकरबर्ग ने बताया कि दुनिया के करीब 2.5 अरब लोग प्रतिदिन व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और फेसबुक मैसेंजर जैसे एप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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1 करोड़ विज्ञापनदाता
बता दें कि व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम को लोग अपने बिजनेस के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। इन सभी प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनदाताओं की संख्या भी 10 मिलियन यानी एक करोड़ हो गई है। बता दें कि व्हॉट्सएप का बिजनेस फीचर छोटे व्यापारियों के बडे काम का है। हालांकि अब उन्हें इस सर्विस के लिए चार्ज देना होगा। हाल ही कंपनी ने इसका ऐलान किया।

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साल दर साल बढ़ रहा मैसेज का आंकडा
नए साल की संध्या पर व्हाट्सएप के जरिए सबसे ज्यादा मैसेज भेजे जाते हैं। इसका आंकडा साल दर साल बढ़ रहा है। वर्ष 2017 में नववर्ष की संध्या पर व्हाट्सएप पर 63 अरब मैसेज भेजे गए थे। 2018 में यह आंकडा बढ़कर 75 अरब हो गया। 2019 में 100 अरब मैसेज भेजे गए। अब हर रोज 100 अरब मैसेज व्हॉट्सएप पर भेजे जा रहे हैं।

सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाला गैर गूगल एप
व्हाट्सएप किसी भी एप के मुकाबले सबसे ज्यादा मैसेज डिलीवर करने वाला इंस्टेंट मल्टीमीडिया मैसेजिंग एप बन गया है। इसके यूजर्स की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। इस वर्ष जनवरी में व्हाट्सएप के एंड्रॉयड यूजर्स की संख्या पांच अरब के आंकड़े को पार कर गई थी। इसी के साथ व्हाट्सएप सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला गैर-गूगल एप बन गया है।

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आलवेज म्यूट फीचर
हाल ही व्हाट्सएप ने आलवेज म्यूट नाम से एक नया फीचर जासरी किया है। इस फीचर के जरिए आप किसी शख्स या ग्रुप को हमेशा के लिए म्यूट कर सकते हैं। पहले अधिकतम एक साल के लिए म्यूट की सुविधा थी।



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मोबाइल स्क्रीन पर लगे स्क्रैच को हटाएं इन अमेजिंग ट्रिक्स से, चमक उठेगी डिस्प्ले

जब हम नया मोबाइल खरीदते हैं तो शुरुआत में उसकी स्टाइल और डिजाइन बहुत अच्छी लगती है। मोबाइल की चमचमाती स्क्रीन सबको अपनी ओर आकर्षित करती है। लेकिन कुछ समय बाद जब स्क्रीन पर स्क्रैच पड़ने लगते हैं तो स्मार्टफोन की खूबसूरती फीकी पड़ जाती है। हम बहुत कोशिश करते हैं कि मोबाइल की स्क्रीन पर एक भी स्क्रैच न आए, लेकिन न चाहते हुए भी कई बार स्क्रैच लग ही जाते हैं। ऐसे में स्क्रीन गंदी लगने लगती है। आज हम आपको कुछ ऐसे आसान तरीके बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप अपने फोन की स्क्रीन पर लगे स्क्रैच हट जाएंगे और आपके मोबाइल की स्क्रीन फिर से नई लगने लगेगी।

1 मैजिक इरेजर
मैजिक इरेजर स्क्रीन के स्क्रैच हटाने का सबसे अच्छा उपाय है। बता दें कि मैजिक इरेजर का उपयोग वैसे तो गंदगी को साफ करने के लिए किया जाता है, लेकिन यह मोबाइल की स्क्रीन पर लगे छोटे—छोटे स्क्रैच को भी साफ कर देता है। हालांकि इसका उपयोग करने में आपको थोड़ी सावधानी बरतनी होगी।

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2 कार वैक्स
कार को चमकाने के लिए कार वैक्स पॅालिश का इस्तेमाल किया जाता है। जब कार पर वैक्स से पॉलिश की जाती है तो उस पर लगे छोटे—छोटे स्क्रैच हट जाते हैंं। इस वैक्स का उपयोग आप मोबाइल की स्क्रीन पर लगे स्क्रैच को हटाने में भी कर सकते हैं। थोड़ी—सी पॉलिश स्क्रीन पर लगाकर उसे कॉटन से घिसे। इसके बाद बाद उसे थोड़ी देर के लिए सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद उसे कॉटन से साफ कर लें। आपके फोन की स्क्रीन चमक उठेगी और स्क्रैच भी गायब हो जाएंगे।

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3 टूथपेस्ट
दांतों को चमकाने वाले टूथपेस्ट से भी मोबाइल स्क्रीन पर लगे स्क्रैच हटा सकते हैं। सबसे पहले कॉटन में थोड़ा सा टूथपेस्ट लें और उसे पूरी स्क्रीन पर अच्छे से लगा दें। हां, स्पीकर को बचाकर रखें। थोड़ी देर बाद साफ कॉटन से उस टूथपेस्ट को साफ कर लें। इससे छोटे—मोटे स्क्रैच हट जाएंगे। या रहे कि जेल वाले टूथपेस्ट का उपयोग न करें, सिर्फ सफेद टूथपेस्ट से यह नुस्खा अपनाएं।

4 बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा से भी आप फोन के स्क्रैच को हटा सकते हैं। इसके लिए आपको बेकिंग सोडा को पानी में मिलाकर उसका पेस्ट बना लें। अब उस पेस्ट को कॉटन में लेकर मोबाइल की स्क्रीन पर लगाएं। पेस्ट को लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। सूख जाने पर उसे कॉटन या कपड़े से साफ कर लें। आपके मोबाइल की स्क्रीन चकमने लगेगी और छोट—मोटे स्क्रैच भी हट जाएंगे।

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5 पैंसिल इरेज़र
पैंसिल इरेजर से भी फोन के स्क्रैच मिटाए जा सकते हैं। स्क्रैच हटाने के लिए पैंसिल इरेजर से धीरे—धीरे और हल्के हाथों से स्क्रीन पर घिसना है। थोड़ी देर में ही स्क्रीन से छोटे—मोटे खरोंच गायब हो जाएंगे। याद रहे कि इरेजर अच्छी क्वॉलिटी का और सॉफ्ट होना चाहिए।



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अब आसानी से चुन पाएंगे बेस्ट एप, Google ला रहा नया फीचर

Google इन दिनों अपनी सर्विेसेज को अपग्रेड कर उन्हें बेहतर बनाने की कोशिश में जुटा है। इस कड़ी में गूगल ने अपने कुछ एप्स बंद कर दिए हैं। वहीं कुछ एप्स में नए फीचर जोड़े हैं। अब गूगल जल्द ही अपने Playstore में एक नया फीचर जोड़ने जा रहा है। इस फीचर की सहायता से यूजर्स दो एप्स के बीच कंपैरिजन कर पाएंगे। बता दें अभी किसी यूजर को जब प्लेस्टोर से कोई एप डाउनलोड करनी होती है तो उन्हें वहां एक जैसे बहुत सारे एप्स मिलते हैं। उनमें वह कई बार कंफ्यूज हो जाते हैं कि कौन—सा एप अच्छा है। अब गूगल ऐसा फीचर ला रहा है कि आप दो एप्स के बीच कंपेयर कर यह जान सकते हैं कि उनके लिए कौन—सा एप बेस्ट रहेगा।

कंपेयर एप्स
गूगल के इस नए फीचर का नाम कंपेयर एप्स होगा। फिलहाल गूगल इस ऐप को टेस्ट कर रहा है। टेस्टिंग के लिए कुछ यूजर्स को यह फीचर वर्जन 22.4.28 प्लेस्टोर ऐप पर उपलब्ध होगा। इस फीचर के तहत एप्स की तुलना के लिए इनमें इस्तेमाल विजुअल क्वॉलिटी, एप सपोर्ट और ऑफलाइन प्लेबैक जैसे फीचर्स देखे जाएंगे। कंपेयर एप्स सेक्शन हर एप के नीचे पेज के बीच में दिखेगा। फिलहाल यह कुछ मशहूर मीडिया प्लेयर्स के लिए उपलब्ध है।

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प्लेस्टोर पर 2 मिलियन एप्स
बता दें कि फिलहाल गूगल प्लेस्टोर पर 2 मिलियन एप्स हैं। ऐसे में यूजर्स को एप्स चुनने में हमेशा ये दिक्कत होती है कि उन्हें कौन सा एप डाउनलोड करना चाहिए और कौन—सा नहीं। अभी कोइ भी एप चुनने के लिए उसके फीडबैक को देखा जाता है, जो यूजर्स द्वारा दिए जाते हैं। वहीं गूगल ने अपने नए फीलचर कंपेयर एप्स को लेकर अभी स्पष्ट नहीं किया है कि यह फीचर कितने यूजर्स के लिए रोलआउट होगा।

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हैमबर्गर मेनू का हटाया
बता दें कि गूगल ने इसी माह प्लेस्टोर से हैमबर्गर मेनू को टेस्ट के दौरान हटाया। इसकी जगह गूगल साइड पैनल में एक फ्लोटिंग विंडो लाएगा, जहां सभी ऑप्शन यूजर्स को आसानी से दिख सकेेंगे। टेस्ट वर्जन में लाइब्रेरी, पेमेंट एंड सब्सक्रिप्शन और सेटिंग्स का शॉर्टकट जैसे विकल्प दिए गए हैं। साथ ही गूगल ने हाल ही जीमेल और दूसरे एप्स का लोगो भी बदले हैं।



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स्मार्टफोन खरीदने का है प्लान तो जरूर ध्यान में रखें इन बातों को, मिलेगा बेस्ट ऑप्शन

फेस्टिव सीजन चल रहा है तो सभी ई—कॉमर्स वेबसाइट्स पर सेल रही है। इस सेल में सभी कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स पर अच्छी डील ऑफर कर रही हैं। साथ ही नए-नए स्मार्टफोन्स भी लॉन्च हो रहे हैं। बहुत सारे यूजर्स इस फेस्टिव सीजन में स्मार्टफोन खरीदने का प्लान भी बना रहे हैं। कई बार वे इतने सारे ऑप्शंस देखकर कंफ्यूज हो जाते हैं कि कौन सा स्मार्टफोन खरीदें। अगर आप भी इस दिवाली नया स्मार्टफोन लेने का प्लान बना रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें और आप अपनी पसंद और जरूरतों के हिसाब से एक अच्छा स्मार्टफोन खरीद पाएंगे।

बजट—
कोई भी नया स्मार्टफोन लेने से पहले आप अपना बजट तय करें।
बाजार में एंट्री लेवल स्मार्टफोन के लेकर फ्लैगशिप डिवाईस तक सभी सेग्मेंट्स में ढ़ेरों ऑप्शन्स मौजूद हैं। इन दिनों कम कीमत में अच्छे फीचर्स वाले स्मार्टफोन बाजार में आ रहे हैं। आपको 11,000 से 19,000 तक के बजट में लेटेस्ट फीचर्स वाले स्मार्टफोन मिल जाएंगे। वहीं 20,000 से 35,000 रुपए के बजट में पॉवरफुल फीचर्स वाले फोन मिल जाएंगे। इससे उपर की रेंज में आप और भी शानदार स्मार्टफोन खरीद सकते हैं। लेकिन सबसे पहले आपको स्मार्टफोन के लिए अपना बजट तय करना होगा। आपका बजट जिस सेगमेंट के अनुसार हो उसी रेंज में अपने लिए ऑप्शन्स ढूंढें।

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जरूरत को पहचानें
मोबाइल पहले की तरह अब सिर्फ कॉलिंग और मैसेजिंग के लिए ही काम नहीं आते। स्मार्टफोन अब व्यक्ति के दैनिक दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। इससे हम नौकरी से संबंधित काम करते हैं और अपना मनोरंजन भी इसी में ढूंढते हैं। तो फोन लेने से पहले आप यह डिसाईड जरूर कर लें कि इसमें आपकी जरूरत के सभी फंक्शन हैं या नहीं। जैसे कि फोटोग्राफी के अच्छा कैमरा, लंबा बैटरी बैकअप, ज्यादा इंटरनल स्टोरेज और बड़ी डिसप्ले आदि।

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फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए
आजकल युवाओं में फोटोग्राफी का काफी क्रेज देखने को मिलता है। वह दिन में कई बार सेल्फी लेते हैं और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते हैं। अगर आप कहीं घूमने जा रहे हैं तो आपके मोबाइल में कैमरा ज्यादा मैगापिक्सल का होना चाहिए। ऐसे में अगर आपको भी फोटोग्राफी का शौक है तो स्मार्टफोन में कैमरा देखकर ही खरीदना चाहिए, जो आपके बजट में हो। फिलहाल बाजार में 6 कैमरा सेंसर्स वाले मोबाइल्स से लेकर 108 मेगापिक्सल की पॉवर वाले स्मार्टफोंस उपलब्ध हैं।

गेम लवर्स के फास्ट प्रोसेसिंग
भारत में मोबाइल गेम लवर्स की संख्या काफी बढ़ती जा रही है। बच्चों से लेकर युवा तक मोबाइल में गेम खेलकर अपना मनोरंजन करते हैं। ऐसे में आपको ऐसा फोन लेना चाहिए जो हैंग की शिकायत के स्मूथली काम करता रहे। बेतहर प्रोसेसिंग के लिए मोबाइल में कौन सी चिपसेट लगी है, प्रोसेसर कौन सा दिया है और रैम व मेमोरी चेक करनी चाहिए। फोन में मौजूद जीपीयू को भी चेक करना होगा।

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बैटरी बैकअप
एक बार फोन चार्च करने के बाद उसे लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए फोन का बैटरी बैकअप अच्छा होना चाहिए। कई बार मोबाइल में बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने की समस्या आती है। ऐसे में पहले यह देख लें के स्मार्टफोन में कितने एमएएच पॉवर की बैटरी दी गई है। वैसे इन दिनों मार्केट में 6,000एमएएच बैटरी वाले कई स्मार्टफोन मिल जाएंगे। वहीं आजकल के ज्यादातर स्मार्टफोन्स में 4,000एमएएच से 5,000एमएएच बैटरी वाले स्मार्टफोन्स मार्केट में आ रहे हैं। साथ ही इन दिनों लॉन्च हो रहे स्मार्टफोन्स की बैटरी फास्ट चार्जिंग सपोर्ट वाली आ रही हैं।

रैम और स्टोरेज—
मोबाइल में व्यक्ति प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों तरह का डेटा रखता है। साथ ही मनोरंजन की सामग्री जैसे तस्वीरें, गाने और फिल्में रखते हैं। आजकल मोबाइल में ही 32जीबी से लेकर 128जीबी स्टोरेज आम हो चुकी है। ऐसे में बड़ी स्टोरेज के साथ ही UFS यानि यूनिवर्सल फ्लैश स्टोरेज पर ध्यान देना भी जरूरी है। यूएफएस उस फोन में फाईल ट्रांसफर की स्पीड को सेट करती है, कि कितनी तेजी से डाटा इर्पोट-एक्पोर्ट होगा।



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मोबाइल में स्लो है वाई-फाई की स्पीड तो इन आसान तरीकों से हो जाएगी फास्ट

भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या बहुत ज्यादा है। कोरोना की वजह से वर्क फ्रॉम होम और स्टडी फ्रॉम होम के चलते इंटरनेट का उपयोग पहले से ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि कई बार हमें इंटरनेट स्पीड की समस्या का सामना करना पड़ता है। बिना रूकावट वीडियो देखने के लिए और अन्य कई एक्टिविटीज के लिए अधिकांश लोग अपने फोन को वाई—फाई से कनेक्ट रखते हैं। बाहर जब हम किसी शॉपिंग मॉल या होटल में जाते हैं तो वहां भी फ्री वाई—फाई होता है। हालांकि कई बार वाई—फाई से कनेक्ट होने के बाद भी फोन में इंटरनेट स्लो चलता है। ऐसे में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आल हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिनकी सहायता से आप अपने फोन में वाई—फाई की स्पीड को तेज कर सकते हैं।

फ्रिक्वेंसी बैंड सेटिंग
किसी भी स्मार्टफोन में वाई—फाई की स्पीड उसके फ्रिक्वेंसी बैंड पर काफी निर्भर करती है। आजकल स्मार्टफोन्स में 5गीगाहर्ट्ज तक की फ्रिक्वेंसी बैंड का सपोर्ट दिया जाता है। आप अपने फ्रिक्वेंसी बैंड को ऑटो मोड पर सेट रखें। इससे वाई-फाई डिवाईस द्वारा आ रही फ्रिक्वेंसी के हिसाब से स्मार्टफोन खुद ही उस पर शिफ्ट हो जाएगा और आपक इंटरनेट बिना रूकावट चलता रहेगा।

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कैशे मैमोरी
हम फोन में कई एप्स खोलकर रखते हैं। कई वेबसाइट्स भी खोलते हैं और सर्च करते हैं। ऐसे में उन वेबसाइट्स के नाम पर सेव हो रही कैशे मैमोरी कई बार ज्यादा स्टोर हो जाती है। ऐसे में आपका ब्राउजर स्लो काम करने लगता है और आपको लगता है कि इंटरनेट स्लो हो गया। ऐसे में आप कैशे मैमोरी को समय—समय पर डिलीट करते रहें। इसको आप ब्राउजर की सेटिंग में जाकर कैशे मैमोरी क्लीन कर सकते हैं। कैशे क्ल्यिर होने के बाद आपका ब्राउजर सही तरीके से और फास्ट काम करने लगेगा।

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मॉडम प्लेसमेंट
कई बार देखने में आता है कि एक कमरे में तो वाई—फाई अच्छे से काम कर रहा है लेकिन दूसरे कमरे में उसकी स्पीड कम हो जाती है। यह समस्या आपके फोन की नहीं बल्कि वाई—फाई मॉडम या राउटर के प्लेसमेंट की है। मॉडम को सही जगह न रखने की वजह से भी ऐसा हो सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि राउटर या मॉडम से निकलने वाली वेव्स दीवार या दरवाजों के वजह से न रूके।

सॉफ्टवेयर अपडेट
कई बार मोबाइल में सॉफ्टवेयर अपडेट न करने की वजह से भी वाई—फाई की स्पीड कम हो जाती है। अगर आपके फोन में कोई नया अपडेट आया है तो उसे अपडेट कर लें। अपडेट करने के बाद आपके फोन को रीस्टार्ट जरूर करें। इसके बाद आपके फोन में वाई—फाई की स्पीड सही हो जाएगी।

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फोन कवर
हम अपने मोबाइल को डैमेज से बचाने के लिए उस पर कवर लगाते हैं। लेकिन कई बार ये कवर भी आपकी इंटरनेट स्पीड को स्लो कर सकते हैं। दरअसल, मेटल कवर या हार्ड प्लास्टिक शैल फोन के एंटिना बैंड्स को ढक लेती है। ऐसे में कई बार वाई-फाई वेव्स भी डिस्ट्रॉट हो जाती है, जिससे इंटरनेट की स्पीड धीमी पड़ जाती है।



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इस हाइब्रिड क्वाडकॉप्टर ने 10 घंटे लगातार उड़कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

ड्रोन आज सिर्फ मनोरंजन का साधन भर नहीं रह गए हैं बल्कि समय बीतने के साथ इसने अपनी उपयोगिता भी साबित की है। यही वजह है कि अब इंजीनियर्स ज्यादा कारगर और लंबे समय तक हवा में उड़ सकने वाले ड्रोन बना रहे हैं। ऐसे ड्रोन जो अपनी क्षमता से अधिक भार उठाने में सक्षम हों और आपातकालीन परिस्थितियों में जरूरी डिलीवरी पहुंचा सकें। लेकिन इन ड्रोंस की बैट्री का ज्यादा लंबे समय तक न टिक पाना एक बड़ी परेशानी है। कुछ अपवादों के साथ, बैट्री-इलेक्ट्रिक मल्टीक्रॉप्टर ड्रोन भी आमतौर पर करीब 30 मिनट से ज्यादा समय तक हवा में नहीं उड़ पाते। लेकिन हाल ही बैट्री-इलेक्ट्रिक मल्टीक्रॉप्टर ड्रोन के एक हाइब्रिड संस्करण ने अब तक के सभी रिकार्ड्स को तोड़ते हुए 10 घंटे लगातार हवा में उड़ान भरकर सबको हैरान कर दिया है।

स्पेनिश स्टार्टअप का कमाल
यह हाइब्रिड मल्टीक्रॉप्टर ड्रोन एक स्पेनिश स्टार्टअप 'क्वांटरनियम' (Spanish start-up Quaternium) का बनाया नया 'हाइब्रिक्स 2.1' (the HYBRiX 2.1 quadcopter) ड्रोन है। इस क्वाडकॉप्टर में एक गैसोलीन बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक हाइब्रिड ड्राइव सिस्टम है जो कथित रूप से इस क्वाडकॉप्टर को फ्यूल भरने पर करीब 4 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम बनाता है। यह क्रोम्ड-आउट विस्टा ड्रोन 360 डिग्री पर 8K क्वालिटी में वीडियो और 40 मेगापिक्सल तक फोटो खींचने में सक्षम है। इतना ही नहीं यह अपने कैमरे से आसपास की जगह के मैप को 360 डिग्री एंगल में 8K वीडियो भी कैप्चर कर सकता है।

इस हाइब्रिड क्वाडकॉप्टर ने 10 घंटे लगातार उड़कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

हर बार बनाया नया रिकॉर्ड
साल 2017 में सबसे पहले इस 'हाइब्रिक्स 2.1' ड्रोन के 2.1 वर्शन ने चार घंटे 40 मिनट की उड़ान भरकर विश्व रिकॉर्ड (World Record) बनाया। इसके बाद इस साल फरवरी में इसके 2.1 मॉडल के एक प्रायोगिक संस्करण (experimental version) ने इस रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया और 8 घंटे 10 मिनट तक हवा में उड़कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया और एक बार फिर से लोगों को चौंका दिया। लेकिन इसी ड्रोन के 'हाइब्रिक्स 2.1' वर्शन ने हाल ही 10 घंटे 14 मिनट की उड़ान भरकर अब तक की सभी उड़ानों को पीछे छोड़ दिया है और फिर से रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

ड्रोन इसलिए है इतना दमदार
यह ड्रोन अपनी कई हाइब्रिड तकनीकों की वजह से इतना दमदार है। जैसे सबसे उल्लेखनीय है इसका 16 लीटर का ईंधन टैंक जो ठीक इसकी बॉडी के नीचे बनाया गया है। साथ ही इस ड्रोन के 2 स्ट्रोक इंजन में ईंधन-इंजेक्शन प्रणाली को भी अपग्रेड किया गया है। स्पेनिश कंपनी लोवेहेइजऱ द्वारा निर्मित यह इस ड्रोन का इलेक्ट्रिक हाइब्रिड ड्राइव सिस्टम कथित रूप से इतना छोटा है कि ड्रोन में इसे लगाने के बाद भी इसके वजन या आकार में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है न ही इसके प्रदर्शन पर असर पड़ा है। इसके ऑफ-द-सेल्फ (off-the-shelf) डिजाइन के कारण 'हाइब्रिक्स 2.1' का वजन लगभग 13 किलोग्राम है। यह 10 किलोग्राम तक कार्गो या सामान ढो सकता है और इसकी 50 किमी (31 मील प्रति घंटे) की जबरदस्त रफ्तार इसे और भी खास बनाती है। इसकी टॉप स्पीड अभी 80 किमी प्रति घंटा (50 मील प्रति घंटा) है।



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Vi के नए एड ऑन प्लान: 32 रु में अनलिमिटेड टॉक टाइम, 200 गेम्स और बहुत कुछ, जानें सभी प्लान्स

टेलिकॉम कंपनियां अपने यूजर्स के लिए समय—समय पर नए और सस्ते रिजार्च प्लान्स लॉन्च करती रहती हैं। इसी कड़ी में वोडफोन आईडिया यानि Vi ने भी एक नया एड ऑन प्लान लॉन्च किया है। 32 रुपए के इस प्लान में यूजर्स को कॉलिंग, स्पोर्ट्स अलर्ट, सेलेब्रिटीज टॉक, कॉलर ट्यून्स और कॉन्टेस्ट पैक जैसे कई फायदे मिलेंगे।

गेम्स के साथ नहीं दिखेंगे विज्ञापन
कंपनी ने नए एड ऑन प्लान पैक की जानकारी वेबसाइट पर दी है। इस एड ऑन प्लान की वैलिडिटी 28 दिन की है। जानकारी के अनुसार, 32 रुपये के Vi एड ऑन पैक में यूजर्स को 200 पॉपुलर गेम्स मिलेंगे। खास बात यह है कि इनमें यूजर्स को कोई विज्ञापन नहीं दिखेंगे। साथ ही इसमें अनलिमिटेड टॉक टाइम भी मिलेगा।

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स्पोर्ट्स सेलिब्रिटी से बात करने का मौका
वहीं 42 रुपए के Vi एड ऑन प्लान में यूजर्स को क्रिकेट मैच के सभी अलर्ट्स के साथ लाइव स्कोर्स के अलर्ट भी मिलेंगे। साथ ही इस प्लान को लेने वाले यूजर्स को स्पोर्ट्स सेलिब्रिटी से बातचीत करने का भी मौक़ा मिल सकता है। इस प्लान के तहत एक महीने में कम से कम पांच इवेंट्स कवर होंगे।

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गोल्ड वाउचर्स जीतने का मौका
Vi के एक और 43 रुपए वाले एड ऑन पैक में यूजर्स को गोल्ड वाउचर्स जीतने का मौका मिलेगा। इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है। Vi 47 रुपए वाले प्लान में यूजर्स को कॉलर ट्यून्स मिलेंगी और अनलिमिटेड गाने चुनने का मौका मिलेगा। साथ में अनलिमिटेड टॉकटाइम दिया जाएगा।

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103 रु तक के एड ऑन प्लान्स
कंपनी के 52 रुपए वाले एड ऑन प्लान में यूजर्स को बॉलीवुड सेलेब्स के साथ लाइव चैट का मौका मिलेगा। साथ ही इस पैक में अनिलिमिटेड टॉकटाइम दिया जाएगा। वोडाफोन आईडिया में यूजर्स को 62 रुपए, 72 रुपए, 73 रुपए, 78 रुपए और 103 रुपए के भी एड ऑन प्लान मिलेंगे।



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Thursday, October 29, 2020

4G मोबाइल नेटवर्क स्पीड में vi नंबर 1 पर, जानें Jio का क्या हाल रहा

4G मोबाइल नेटवर्क स्पीड के मामले में Vodafone-Idea ने Reliance Jio और Airtel को पीछे छोड़ दिया है और भारत की नंबर 1 टेलिकॉम कंपनी बन गई है। नेटवर्क एनालिस्ट और स्पीड टेस्ट फर्म Ookla की ओर से एक रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष सितंबर तिमाही के दौरान वोडफोन आईडिया भारत की सबसे तेज 4G मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराने वाली टेलिकॉम कंपनी बनकर उभरी है।

Jio ने उपलब्ध कराए सबसे ज्यादा 4जी नेटवर्क
वहीं Reliance Jio सबसे ज्यादा 4G नेटवर्क उपलब्ध कराने वाली लीडिंग कंपनी रही। 99.7 फीसदी के साथ Jio भारत में 4G नेटवर्क उपलब्धता के मामले में पहले नंबर पर है। इस मामले में 98.7 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर Bharti Airtel है। जबकि 91.1 फीसदी के साथ 4G नेटवर्क उपलब्धता के मामले में Vodafone-Idea तीसरे पायदान पर है।

4G नेटवर्क स्पीड में VI पहले नंबर पर
4G मोबाइल नेटवर्क स्पीड में Vodafone Idea ने बाजी मारी और पहले नंबर पर रही। दूसरे पायदान पर Airtel है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में Vodafone Idea की औसत डाउनलोडिंग स्पीड 13.54Mbps रही। वहीं अपलोडिंग की औसत स्पीड 6.19 Mbps रही। वहीं Airtel की सितंबर तिमाही में औसत डाउनलोड स्पीड 13.58Mbps रही और औसत अपलोडिंग 4.15Mbps रही।

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Jio तीसरे नंबर पर
4G नेटवर्क उपलब्धता में तो Jio पहले नंबर पर रही, लेकिन नेटवर्क स्पीड के मामले में यह तीसरे पायदान पर है। Reliance Jio की 4G स्पीड सितंबर तिमाही में औसतन डाउनलोडिंग स्पीड 9.71Mbps रही, जबकि इसी तिमाही में औसत अपलोडिंग स्पीड 3.41Mbps रही।

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इंटरनेट स्पीड में हैदराबाद टॉप पर
इंटरनेट स्पीड मामले में टॉप पर रहने वाले शहरों में हैदाराबाद पहले नंबर पर है। हैदराबाद की औसत 4G मोबाइल डाउनलोड स्पीड 14.35Mbps रही। दूसरे नंबर पर मुंबई रहा, जिसकी औसतन डाउनलोडिंग स्पीड 13.55Mbps रही। विशाखापत्नम की औसत डाउनलोडिंग स्पीड 13.40Mbps रही। दिल्ली की बात करें तो यहां औसतन डानलोडिंग स्पीड 13.04Mbps रही।



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क्या आपके एंड्रॉयड स्मार्टफोन में भी आ रहीं हैं ये परेशानियां, खुद कर सकते हैं ठीक, यहां जानें कैसे

जब स्मार्टफोन नया—नया होता है तो ठीक से काम करता है, लेकिन कुछ समय बाद उसमें कुछ परेशानियां आने लग जाती हैं। कभी बैटरी की समयस्या आ जाती है तो कभी कोई एप क्रैश हो जाती है। एंड्रायड स्मार्टफोन्स में कई समस्याएं आती हैं। ऐसे में हम फोन को या तो सर्विस सेंटर लेकर जाते हैं या फिर किसी रिपेयरिंग शॉप से ठीक करवाते हैं। लेकिन एंड्रायॅड फोन की कुछ छोटी—छोटी समस्याएं ऐसी भी हैं, जिन्हें आप खुद ही ठीक कर सकते हैं। आज हम आपको ऐसी ही कुछ समस्याओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप खुद ठीक कर सकते हैं।

बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होना
अक्सर एंड्रॉयड फोन में थोड़े समय बाद बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने की समस्या आने लगती है। अगर आपका फोन एक साल पुराना है और उसकी बैटरी जल्द खत्म होती है तो यह ओएस या सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से भी हो सकती है। ऐसे में समय पर आप फोन को अपडेट जरूर करें। अगर फिर भी बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो रही है तो इसकी जांच करें कि कौन सी एप ज्यादा बैटरी कंज्यूम कर रही है। उस एप को अनइंस्टॉल कर दें। इसके साथ ही बैटरी बचाने के लिए बैकग्राउंड एप्स को भी बंद कर सकते हैं।

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फोन जल्दी गर्म हो जाना
यह भी एंड्रॉयड फोन में आने वाली एक आम समस्या है। अक्सर लंबी बात करते वक्त या फोन पर गेम खेलते वक्त फोन गर्म हो जाता है। अगर आपका फोन भी जल्दी गर्म हो रहा है तो यह सॉफ्टवेयर की समस्या हो सकती है। इसके अलावा इंटरनल मेमोेरी फुल होने पर भी यह समस्या आ सकती है। ऐसे में आप उसकी मेमोरी को क्लियर कर उसे रिस्टार्ट कर लें। साथ ही अपने फोन के सॉफ्टवेयर भी अपडेट कर लें।

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एप डाउनलोड नहीं होना
एंड्रॉयड फोन में एक और आम समस्या है एप डाउनलोड न होना। कई बार हम प्लेस्टोर से एप डाउनलोड करते हैं लेकिन वह डाउनलोड नहीं हो पाते। ऐसे में सबसे पहले आप अपने फोन को अपडेट करें। प्लेस्टोर को भी अपडेट करें। फिर भी समस्या दूर नहीं होती तो प्लेस्टोर से कैशे क्लियर करें।

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कैमरा क्रैश हो जाना
कई बार एंड्राइड फोन में फोटोग्राफी करते वक्त कैमरा क्रैश होने की समस्या भी आती है। अगर आपके फोन में भी यह परेशानी आती है तो फोन को अपडेट कर लें। इसके अलावा फोन की सेटिंग्स में एप मैनेजर में कैमरा एप के कैशे क्लियर पर कर लें। इसके बाद आपको कैमरा ऐप को फोर्स स्टॉप करना होगा। इसके बाद एप को 5 सेकेंड के लिए डिसेबल करने के बाद फिर से इनेबल कर लें।



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Wednesday, October 28, 2020

जानिए Jio के सबसे सस्ते प्रीपेड प्लान्स के बारे में, 129 रु में 2जीबी डेटा, फ्री कॉलिंग और...

टेलिकॉम कंपनी Reliance Jio के भारत में सबसे ज्यादा यूजर्स हैं। Jio अपने यूजर्स के लिए समय—समय पर अच्छे प्लान्स लेकर आती है। इन प्लान्स की कीमत तो कम होती ही है। साथ ही इनमें यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग, हाई स्पीड डेटा और अन्य फायदे भी मिलते हैं। Jio के सस्ते प्रीपेड प्लान्स की वजह से अन्य टेलीकॉम कंपनियों को भी प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए सस्ते प्लान्स उतारने पड़ते हैं। आज हम आपको Jio के कुछ ऐसे ही सस्ते प्रीपेड प्लान्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनमें आपको फ्री कॉलिंग, हाई स्पीड डेटा और एप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन मिलेगा। इन प्लान्स की कीमत 250 रुपए से भी कम है।

129 रुपए वाला प्लान
यह Jio का सबसे सस्ता प्रीपेड प्लान है। इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिन की है। इसमें यूजर्स को ऑन-नेट फ्री कॉलिंग, ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए 1,000 मिनट मिलते हैं। साथ ही 300SMS फ्री कर सकते हैं। डेटा की बात करें तो इसमें 2GB हाई-स्पीड डेटा मिलेगा। यह प्लान लेने पर JioCinema, JioTv जैसे कंपनी के एप्स का फ्री स्ब्सक्रिप्शन भी मिलेगा।

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149 रुपए वाला प्लान
Jio के 149 वाले प्लान में यूजर्स को प्रतिदिन 1 जीबी हाई स्पीड डेटा मिलता है। इस प्लान की वैलिडिटी 24 दिन की रहती है। साथ ही इसमें ऑन-नेट फ्री कॉलिंग मिलती है। ऑफ-नेट कॉलिंग लिए इस प्लान में आपको 300 मिनट मिलेंगे। इसमें आप रोजाना 100SMS फ्री कर सकते हैं। साथ ही जियो एप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन मिलता है।

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199 रुपए वाला प्लान
Jio के 149 वाले प्लान की वैलिडिटी 28 दिन की रहती है। इस प्लान में यूजर्स को प्रतिदिन 1.5GB डेटा मिलता है। वहीं रोजाना 100SMS भी फ्री कर सकते हैं। ऑन-नेट कॉलिंग इसमें फ्री है। ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए 1,000 मिनट मिलेेंगे। इसके अलावा जियो एप्स का फ्री एक्सेस दिया जाता है।

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249 रुपए वाला प्लान
इस प्लान में यूजर्स को 2GB डेटा डेली मिलता है। यह जियो का 2जीबी डेटा वाला सबसे सस्ता प्लान है। इस प्लान की वैलिडिटी भी 28 दिन की है। महीने में आपको 56GB डेटा मिलेगा। इसमें ऑन-नेट कॉलिंग फ्री है। ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए 1,000 मिनट मिलते हैं। रोजाना के 100SMS भी फ्री हैं। इस प्लान में भी जियो एप्स का एक्सेस फ्री मिलता है।



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Zoom में सिक्योरिटी को लेकर आया अब तक का सबसे महत्त्वपूर्ण फीचर, ऐसे करें इनेबल

कोराना काल में वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म Zoom काफी पॉपुलर हुआ है। लॉकडाउन की शुरुआत से ही Zoom ने लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई। वर्क फ्रॉम होम और स्टडी फ्रॉक होम की वजह से इसकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई। यहां तक की Zoom के जरिए ऑफिशियल मीटिंग्स और वर्चुअल इवेंट्स भी हो रहे हैं। इस वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म ने कई दिग्गज और पुराने कॉलिंग सर्विस को पीछे छोड़ दिया है। Zoom ने सिक्योरिटी के लिहाज से अब तक का सबसे महत्त्वपूर्ण फीचर जारी किया है।

सिक्योरिटी को लेकर उठे थे सवाल
बता दें के शुरुआत में Zoom की कमजोर सिक्योरिटी को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि धीरे—धीरे कंपनी ने अपने प्लेटफ़ॉर्म को सिक्योर किया है। सिक्योरिटी पर सवाल उठने के बाद Zoom ने एंड टु एंड एन्क्रिप्शन फीचर देने का ऐलान किया था और कंपनी ने अब इसे पूरा भी कर दिया है। जूम के लिए एंड टु एंड एन्क्रिप्शन फीचर जारी कर दिया है।

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फ्री और पेड दोनों यूजर्स के लिए
Zoom का नया फीचर एंड टु एंड एन्क्रिप्शन फ़्री और पेड दोनों तरह के यूज़र्स के लिए उपलब्ध होगा। डेस्कटॉप क्लाइंट के अलावा यह एंड्रॉयड एप में भी दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि एप्पल iOS यूजर्स के लिए भी जल्द ही एंड टु एंड एन्क्रिप्शन का अपडेट मिलेगा। इस नए फीचर को इनेबल करने के बाद पार्टिसिपेंट्स के अलावा जूम के मीटिंग सर्वर्स के पास भी मीटिंग का एन्क्रिप्शन की होगी। कंपनी अभी इस फीचर को को 30 दिन के टेक्निकल प्रिव्यू के तौर पर दे रही ह। इस दौरान लोगों से इसे लेकर फीडबैक लिया जाएगा। इसे 30 दिन के बाद भी जारी रखा जाएगा।

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डेटा रहेगा सिक्योर
एंड टु एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) सिक्योरिटी से जुड़ा फीचर है। इसे सिक्योर कम्यूनिकेशन का एक मेथड भी कह सकते हैं। इस फीचर को इनेबल करने के बाद कोई भी थर्ड पार्टी आपको डेटा हासिल नहीं कर सकती। मान लिजिए आप किसी से Zoom कॉल पर या चैट में बात कर रहे हैं। ऐसे में इस फीचर को इनेबल करने से आपका कम्यूनिकेशन सिर्फ आप तक और जिससे आप बात कर रहे हैं, उन तक ही रहेगा। यहां तक की कंपनी भी आपकी चैट नहीं पढ़ पाएगी और न ही वीडियो कॉल को इंटरसेप्ट कर सकती हैं।

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ऐसे करें इनेबल
Zoom में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन फीचर को इनेबल करने के लिए आपको सेटिंग्स में जा कर इसे इनेबल करना होगा। इसके लिए आप एप में लॉग इन करने के बाद सेटिंग्स में जाएं। यहां आप मीटिंग टैब पर टैप करें। यहां आपको सिक्योरिटी टैब के अंदर Allow use of end to end encryption का ऑप्शन मिलेगा, उसे इनेबल करें। अगर सेटिंग्स डिसेबल है तो इनेबल टॉगल पर क्लिक कर वेरिफिकेशन डायलॉग को टर्न ऑन करें।



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Sharad Purnima 2020: शरद पूर्णिमा के दिन इस विधि से करें लक्ष्मी जी की पूजा, बन जाएंगे सभी बिगड़े काम

शरद पूर्णिमा की तिथि नजदीक आने वाली है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस साल इसे 30 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन का विशेष महत्व है इसी वजह से इस दिन लोग व्रत...

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Tuesday, October 27, 2020

बार-बार चार्ज करना पड़ता है फोन, ये टिप्स अपनाएं, बढ़ जाएगी बैटरी लाइफ

आजकल स्मार्टफोन सबसे ज्यादा यूज किए जाने वाला डिवाइस है। इससे आप घंटों बातें करते हैं। ऑफिस के बहुत सारे काम स्मार्टफोन से ही हो जाते हैं। मनोरंजन भी इस स्मार्टफोन में ही मिल जाता है। इसमें बहुत सारी एप्स होती हैं, जो आपके काम आती हैं। ऐसे में स्मार्टफोन की बैटरी पर बहुत दबाव पड़ता है। इसलिए बैटरी को बार—बार चार्ज करना पड़ता है। स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ पर भी इसका असर पड़ता है। नए स्मार्टफोन में तो बैटरी सही चलती है लेकिन बाद में फुल चार्ज करने के बाद भी इसकी बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है। हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिनसे आप अपने स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ बढ़ा सकते हैं।

कब चार्ज करें फोन
यूजर्स फोन की चार्जिंग को लेकर कई बार लापरवाही बरतते हैं। जब फोन की बैटरी पूरी तरह से खत्म हो जाती है और फोन बंद हो जाता है तब मोबाइल को चार्जर पर लगाते हैं। ऐसा करने से फोन की बैटरी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे बचने के लिए आपको फोन तब चार्जर पर लगा देना चाहिए जब उसमें 20 फीसदी बैटरी रह जाए। बैटरी को पूरी डाउन हुए बिना चार्ज करने से बैटरी लाइफ बढ़ेगी।

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चार्जर ओरिजनल होना चाहिए
कई बार हम देखते हैं कि हमारे पास जब हमारे स्मार्टफोन का चार्जर नहीं होता तो किसी दूसरे चार्जर से अपने फोन को चार्ज कर लेते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे बैटरी पर खराब असर पड़ता है। अपने फोन को हमेशा ओरिजनल चार्जर से ही चार्ज करना चाहिए। अगर किसी दूसरे या लोकल चार्जर से फोन चार्ज करेंगे तो बैटरी जल्दी खराब हो जाएगी। इसलिए फोन से साथ आने वाले चार्जर का ही उपयोग करें।

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हटा दें फोन कवर
हम स्मार्टफोन के प्रोटेक्शन के लिए कवर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब फोन को चाज करें तो कवर को हटा देना चाहिए। फोन पर कवर लगा हो और उसे चार्जर पर लगाते हैं तो फोन जल्दी गर्म हो जाता है क्योंकी उसकी हीट बाहर नहीं निकल पाती। साथ ही कवर की वजह से कई बार चार्जिंग पिन ठीक से नहीं लग पाती। इसलिए फोन को फुल चार्ज करने के बाद ही वापस कवर लगाएं।

फास्ट चार्जिंग एप्स का इस्तेमाल न करें
आजकल जो स्मार्टफोन्स आ रहे हैं, उनकी बैटरी फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है। वहीं जिनमें यह सुविधा उनमें कई बार यूजर्स फास्ट चार्जिंग एप्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे आपको फोन तो जल्दी चार्ज हो जाएगा लेकिन उसकी बैटरी भी उतनी ही जल्दी खत्म होती है। बैटरी बचाने वाली इन थर्ड पार्टी एप का बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

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रात भर चार्जिंग में लगाकर न छोड़ें
कई बार फोन को रात में सोते वक्त चार्जिंग में लगाते हैं और वह रातभर चार्जिंग में ही लगा रहता है। ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे फोन की बैटरी पर बहुत बुरा असर पड़ता है और फोन की बैटरी जल्दी खराब भी हो सकती है। इसलिए अपने फोन को ज्यादा देर तक चार्जिंग में न लगाएं।



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खुद को किसी भी WhatsApp ग्रुप में जुड़ने से ऐसे बचाएं

दुनिया की सबसे पॉपुलर मैसेजिंग एप WhatsApp में एक फीचर है व्हाट्सएप ग्रुप। आप भी कई ग्रुप्स में एड होंगे। हालांकि कई बार ऐसा होता कि आपको पता ही नहीं होता और आपको व्हाट्सएप ग्रुप में एड कर लिया जाता है। कोई भी व्यक्ति जब व्हाट्एप ग्रुप बनाता है तो अपने फोन कॉन्टैक्ट्स में जाकर किसी को भी ग्रुप में एड कर सकते हैं। हालांकि दूसरे व्यक्ति द्वारा बिना इजाजत ग्रुप में जोड़े जाने से यूजर्स काफी परेशान रहते हैं। हालांकि आप बिना इजाजत दूसरों द्वारा खुद को किसी भी ग्रुप में एड होने से बचा सकते हैं। आपको कुछ स्टेप्स फॉलो करने होंगे और इसके बाद कोई भी आपको बिना आपकी मर्जी के किसी ग्रुप में नहीं जोड़ पाएगा। यह एंड्रॉयड और iPhone दोनों ही यूज़र्स के लिए है।

Group Privacy Settings
आपको अपने फोन में ग्रुप प्राइवेसी सेटिंग्स को इनेबल करना होगा। हालांकि इसके लिए आपके फोन में व्हॉट्सएप का लेटेस्ट वर्जन होना जरूरी है। एंड्रॉयड के लिए वर्जन 2.19.308 और आईफोन के लिए वर्जन 2.19.112 होना जरूरी है। आप प्लेस्टोर पर जाकर इसे अपडेट कर सकते हैं। इसके बाद आपको ग्रुप प्राइवेसी सेटिंग्स में कुछ बदलाव करने होंगे।

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फॉलो करें ये स्टेप्स
आपको व्हाट्सएप की सेटिंग्स में जाकर कुछ बदलाव करने होंगे। इसके लिए एंड्रॉयड यूजर्स अपने मोबाइल पर खोलें। आपको टॉप में राइट साइड पर तीन-डॉट आइकन दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें। इसके बाद Settings में जाएं। वहां Account ऑप्शन में जाकर Privacy में जाएं। इसके बाद आपको ग्रुप पर टैप करना होगा। यहां आपको Everyone, My Contacts और My Contacts Except में से किसी एक विकल्प को चुनना होगा।

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ऐसे चुनें ऑप्शन
अगर आप Everyone ऑप्शन को चुनेंगे तो कोई भी व्हाट्सएप यूज़र आपको ग्रुप में एड कर सकता है। अगर My Contacts पर क्लिक करेंगे तो आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौज़ूद एडमिन ही उस यूज़र को ग्रुप का हिस्सा बना पाएंगे। वहीं My Contacts Except को चुनने पर केवल चुनिंदा यूज़र्स ही आपको व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ पाएंगे। My Contacts Except को चुनने पर जब कोई ग्रुप एडमिन आपको किसी ग्रुप एड करना चाहेगा तो उसे आपको इनविटेशन भेजना होगा। यूजर को इस इनविटेशन पर 72 घंटों पर फैसला करना होगा। अगर आप चाहें तो उस ग्रुप से जुड़ सकते हैं और न चाहें तो एडमिन बिना आपकी मर्जी के आपको उस ग्रुप में नहीं जोड़ पाएगा।

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iPhone यूजर्स ऐसे करें इनेबल
अगर आप iPhone यूजर है तो आप अपने आईफोन में व्हाट्सएप खोलें। इसके बाद आप बॉटम बार में दिए सेटिंग्स विकल्प पर क्लिक करें। यहां Account पर क्लिक कर Privacy में जाएं। इसके बाद Groups पर क्लिक करें। यहां iPhone यूजर्स को Everyone, My Contacts और My Contacts Except ऑप्शन मिलेंगे। इनमें से आप अपनी पंसद का विकल्प चुन सकते हैं।



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Monday, October 26, 2020

फोन से Contact numbers हो गए हैं डिलीट तो घबराएं नहीं, ऐसे करें रीस्टोर

पहले जब मोबाइल ज्यादा चलन में नहीं थे तो लोग फोन डायरी में सभी कॉन्टैक्ट लिखकर रखते थे। अब मोबाइल में कॉन्टैक्ट सेव करते हैं। इतने सारे कॉन्टैक्ट नंबर याद नहीं रहते। ऐसे में जब फोन से कॉन्टैक्ट नंबर्स डिलीट हो जाते हैं तो बड़ी परेशानी होती है। कॉन्टैक्ट नंबर्स कई वजहों से डिलीट हो सकते हैं। उन कॉन्टैक्ट नंबर्स को दोबारा सेव करने में काफी वक्त लगता है। हम आपको बता रहे हैं कि अगर आपके साथ भी ऐसा हो जाए तो आसानी से कैसे सभी नंबर्स को रीस्टोर किया जा सकता है।

गूगल ड्राइव बैकअप
आप गूगल की मदद से अपने कॉन्टैक्ट नंबर्स को रीस्टोर कर सकते हैं। आपको गूगल ड्राइव पर कॉन्टैक्ट्स का बैकअप रखना चाहिए। आप अपने स्मार्टफोन और सिम कार्ड में सेव कॉन्टैक्ट्स का बैकअप गूगल सेव करके रखें। अगर आप कोई नया फोन लेते हैं या आपका फोन खो जाए तो आप आसानी से उस बैकअप से अपने कॉन्टैक्ट्स रीस्टोर कर सकते हैं।

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ऐसे रीस्टोर करें गूगल ड्राइव से
सबसे पहले आप अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन या टैबलेट के कॉन्टैक्ट्स एप पर जाएं। यहां आपको टॉप राइट में मेन्यू पर टैप करना होगा। इसके बाद आप Settings में जाएं। यहां आपको Export का ऑप्शन मिलेगा। आप जैसे ही उसे सिलेक्ट करेंगे तो आपको चुनना होगा कि किस अकाउंट से आप कॉन्टैक्ट्स का बैकअप लेना चाहते हैं। इसके बाद Export to .VCF file पर टैप करें और कॉन्टैक्ट्स का बैकअप बन जाएगा।

ऑन करें ऑटोमैटिक बैकअप
आप अपने फोन में औटोमैटिक बैकअप का ऑप्शन भी ऑन कर सकते हैं। जब नए स्मार्टफोन पर गूगल अकाउंट सेटअप करते हैं तो वह आपसे फोन के डेटा का गूगल ड्राइव पर बैकअप लेने के लिए पूछता है। ऐसे में आपको टॉगल ऑन रखना है। इसके अलावा फोन की सेटिंग्स में जाकर भी आप बैकअप को ऑन कर सकते हैं। इसके लिए सेटिंग्स को ओपन कर System में जाना होगा। इसके बाद Backup पर टैप करना होगा। यहां Back up to Google Drive के सामने दिख रहा टॉगल ऑन कर दें।

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बैकअप से कैसे रीस्टोर करें कॉन्टैक्ट्स
बैकअप से कॉन्टैक्ट्स को रीस्टोर करने के लिए सबसे पहले आपको अपने फोन की सेटिंग्स को ओपन करना होगा। इसके बाद आप Google पर टैप करें। यहां आपको Services का ऑप्शन मिलेगा। जब आप इसे ओपन करेंगे तो यहां आपको Restore Contacts दिखेगा। इस पर टैप कर आप कॉन्टैक्ट्स रीस्टोर कर सकते हैं।



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Truecaller लाया कमाल का फीचर, पता चल जाएगा किस वजह आया है कॉल

जब किसी अनजान (Unknown) नंबर से कॉल आता है तो आपको पता नहीं होता है कि यह कॉल कौन कर रहा है और क्यों कर रहा है। पिछले कुछ समय से स्पैम कॉल्स में भी काफी वृद्धि हो गई है। ऐसे में कॉलर आईडी एप Truecaller भारत में काफी लोकप्रिय हो रही है। इस एप के जरिए पता जल जाता है कि आपको कौन कॉल कर रहा है। साथ ही यह एप Spam नंबर्स को भी डिस्प्ले करती है। स्पैम कॉल्स को आप नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार अनजान नंबर से कुछ जरूरी कॉल्स भी आती हैं, जो आप मिस कर देते हैं। अब Truecaller इस समस्या के लिए समाधान लेकर आया है। दरअसल,Truecaller एक ऐसा फीचर लाया है, जिसके जरिए आपको पता चल जाएगा कि यह पता जाएगा कि कॉलर आपको किस वजह से कॉल कर रहा है।

Call Reason फीचर
Truecaller के इस नए फीचर का नाम Call Reason है। अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को कॉल कर रहें, जिसके पास आपको नंबर सेव नहीं है तो Truecaller के इस नए फीचर के जरिए आप उसमें कॉल करने के कारण बता सकते हैं। ऐसे में जब आप उसे कॉल करेंगे तो उसकी स्क्रीन पर कारण भी जाएगा कि आप उसे क्यों कॉल कर रहे हैं। कॉल करने की वजह जानकर सामने वाला व्यक्ति आपके कॉल को स्पैम न समझकर उसे पिक कर लेगा।

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Android और iOS दोनों यूजर्स के लिए
कॉल रीजन के अलावा शेड्यूल SMS फीचर भी जारी किया गया है। यह फीचर यूजर्स को इवेंट, मीटिंग्स आदि के बारे में रिमाइंड कराएगा। Truecaller के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर रिशीत झुनझुनवाला ने नए फीचर को लॉन्च करते हुए कहा कि वे इस नए शेड्यूल SMS और SMS ट्रांसलेट फीचर को लॉन्च करके काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि Truecaller का यह नया फीचर यूजर्स के लिए इनोवेटिव कम्युनिकेशन्स के आयाम होंगे। Truecaller का यह नया फीचर इसी बुधवार से Android और iOS यूजर्स के लिए रोल आउट हो जाएगा।

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यह स्टेप करना होगा फॉलो
Truecaller के दूसरे नए फीचर ट्रांसलेट SMS फीचर के जरिए यूजर्स किसी भी SMS को ट्रांसलेट कर सकते हैं। खास बात यह है कि ऐसा करने के लिए यूजर को एप से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यूजर को इन फीचर का इस्तेमाल करने के लिए फोन की सेटिंग्स में जाकर Truecaller को डिफॉल्ट कॉलिंग और SMS एप के लिए सिलेक्ट करना होगा। इसके बाद आप Truecaller के इन फीचर्स को यूज कर पाएंगे।



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अब कंप्यूटर पर देर तक काम करने से नहीं होगा आंखों में तनाव, Chrome में आ रहा नया फीचर

कंप्यूटर और लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करने से आंखों में तनाव या दर्द की शिकायत होती है। ऐसे में पॉपुलर ब्राउजर Chrome OS ने कथित तौर पर एक नया फीचर जारी किया है। इस फीचर से लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने पर भी आपकी आंखों में तनाव नहीं होगा। दरअसल, Chrome OS पर डार्क मोड (Dark Mode) की सुविधा दी गई है, जो आंखों के तनाव को कम करने और सामान्य पठनीयता के कारण अधिक मांग में है।

ऐसे किया जा सकता है एक्सेस
गूगल (Google) के एक्सपेरिमेंटल कैनरी चैनल में स्पॉट किए गए एंड्रॉयड सेंट्रल ने बताया कि क्रोम ओएस के कैनरी वर्जन में क्रोम ओएस के डार्क मोड का एक एक्सपेरिमेंटल वर्जन है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिर्फ गूगल के ब्लीडिंग एज ब्राउजर के डेवलपर मोड के जरिए एक्सेस किया जा सकता है, लेकिन ऐसा संकेत मिला है कि इसके जल्द ही व्यापक रोलआउट को लेकर विचार किया जा रहा है।

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अभी चल रही है टेस्टिंग
रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल डार्क मोड सेटिंग के भीतर कुछ बग हैं, जिसे लेकर टेस्टिंग की जा रही है। गूगल ने जीमेल और गूगल कैलेंडर सहित अपनी कई सेवाओं के लिए डार्क मोड को रोल आउट किया है, इसलिए यह क्रोम ओएस के लिए भी इसे रोल आउट करने की तैयारी में है। पिछले कुछ सालों में डार्क मोड किसी भी ओएस के लिए अधिक मांग में रहा है।

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बदल देती है इंटरफेस के कलर को
गूगल ने पिछले सप्ताह नेस्ट हब जैसे अपने सहायक-संचालित स्मार्ट डिस्प्ले के लिए डार्क मोड पेश किया। कंपनी ने कहा कि डार्क थीम इंटरफेस की रंग को बदल देती है और प्रकाश उत्सर्जन को कम कर देती है, इसलिए यह रात में आंखों के लिए सहज होता है।



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Sunday, October 25, 2020

नासा के ऑसिरिस एक्सप्लोरर से क्षुद्रग्रह का सैंपल हो रहा लीक, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

नासा के ओएसआईआरआईएस-आरईएक्स क्षुद्रग्रह एक्सप्लोरर (NASA's OSIRIS-REx spacecraft) द्वारा हाल ही भेजे गए चित्रों ने पुष्टि की है कि अंतरिक्ष यान का यह सैंपल कलेक्टर धीरे-धीरे क्षुद्रग्रह बेन्नू (Aeestroid Bennu) की सतह से इकठ्ठा की गई सामग्री को लीक कर रहा है। गौरतलब है कि एक्सप्लोरर ने 20 अक्टूबर को यह सैंपल क्षुद्रग्रह से कलेक्ट किए थे। नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि जब ऑसिरिस एस्ट्राएड एक्सप्लोरर के टच-एंड-गो सैंपल एक्विजिशन मैकेनिज्म (टीएजीएसएएम या TAGSAM) हेड ने बेन्नू को स्पर्श किया तो इसका एक काम यह भी था कि यह क्षुद्रग्रह की सतह पर मौजूद मिट्टी और छोटी चट्टानों को हिलाने के लिए लगातार नाइट्रोजन गैस का विस्फोट (a blast of nitrogen gas) करता रहे ताकि धूलकणो और चट्टान के टुकड़ों को एकत्र कर सके। इस ऑटोनोमस ऑपरेशन के पूरा होने के बाद यह अंतरिक्ष यान क्षुद्रग्रह से एक सुरक्षित दूरी पर चला गया था। अब नासा के वैज्ञानिक इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह अभ्यास सफल रहा? यह सुनिश्चित करने के लिए वे यान में लगे कैमरों से ऑपरेशन के दौरान लिए गए चित्र देख रहे हैं।

नासा के ऑसिरिस एक्सप्लोरर से क्षुद्रग्रह का सैंपल हो रहा लीक, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

लीक हो रहा है क्षुद्रग्रह का नमूना
लेकिन वैज्ञानिकों को यान से प्राप्त चित्रों की जांच के दौरान अच्छी और बुरी दोनों की खबरें मिलीं। अच्छी खबर यह थी है कि टैगसैम हेड ने क्षुद्रग्रह की सतह के सटीक कोण पर विस्फोट किया और अपने काम को बखूबी अंजाम दिया। यान ने क्षुद्रग्रह की सतह से उड़ी धूल और चट्टानों के टुकड़ों की सामग्री को कई सेंटीमीटर की गहराई तक एकत्रित करने में सफलता पाई। लेकिन इस बीच बुरी खबर यह है कि इस मिशन की सफलता के लिए क्षुद्रग्रह से कम से कम ६० ग्राम जितनी पर्याप्त सामग्री एकत्र करनी थी। लेकिन पता चला है कि यान के कुछ हिस्सों के जाम होने से इसके माइलर फ्लैप खुल गए। जिस वजह से एकत्र किए गए नमूने और मिट्टी धीरे-धीरे बाहर लीक हो रही है।

नासा के ऑसिरिस एक्सप्लोरर से क्षुद्रग्रह का सैंपल हो रहा लीक, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

मिशन में बदलाव की तैयारी
इस सैंपल को बहुत ज्यादा मात्रा में खोने से बचाने के लिए अब मिशन टीम के वैज्ञानिकों ने अपने निर्धारित मिशन की अवधि में परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को सैंपल मास मेजरमेंट गतिविधि और बर्न करेक्शन को अंजाम देने की बजाय टीम अब यान को जल्द से जल्द पृथ्वी पर वापस लाने के लिए सैंपल रिटर्न कैप्सूल (एसआरसी) पर सैंपल को सुरक्षित रखने के लिए स्थानांतरित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हालांकि इस दौरान अच्छी खबर यह भी है कि ऑसिरिस एस्ट्राएड एक्सप्लोरर पूरी तरह से सुरक्षित है और लगातार अपनाप काम कर रहा है।



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Saturday, October 24, 2020

गैजेट फंडा : आखिर कितना सुरक्षित है स्मार्टफोन का फिंगरप्रिंट सेंसर

अपने स्मार्टफोन के फिंगरप्रिंट सेंसर का इस्तेमाल हम दिनभर में न जाने कितनी बार फोन को अनलॉक करने के लिए करते हैं। लेकिन आपने कभी सोचा है कि यह फीचर कितना सुरक्षित है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिंगरप्रिंट सेंसर की बजाय 6 अंकों के पिन का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि टाइपिंग को आप नियंत्रित कर सकते हैं। दरअसल निजी डेटा और गोपनीयता के मुद्दे पर अमरीका में स्मार्टफोन मालिकों का एक भावुक समूह डिवाइस में इंस्टॉल सुरक्षा फीचर का विरोध कर रहा है। इसमें ऐप्पल के फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी, सैमसंग के आईरिस और फेशियल स्कैन जैसी बायोमेट्रिक सुरक्षा सुविधाओं को कटघरे में खड़ा किया गया है। समूह के सदस्य लोगों को ज्यादा से ज्यादा पिन या पासकोड का इस्तेमाल करने के लिए कह रहे हैं।

गैजेट फंडा : आखिर कितना सुरक्षित है स्मार्टफोन का फिंगरप्रिंट सेंसर

बायोमेट्रिक्स का अध्ययन करने वाले कंप्यूटर विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सालों में इस तरह के फीचर्स की बाढ़-सी आ जाएगी। स्मार्टफोन वॉयस कमांड,दिल की धड़कन को पहचानकर काम करेंगे। यहां तक कि ऐसे डिवाइस भी उपलब्ध होंगे जो बता सकते हैं कि आप किस तरह से चलते हैं। लेकिन ये एक्सपर्ट्स अभी दोषपूर्ण फिंगरप्रिंट या फेस-डिटेक्शन टूल के जरिए हमारे स्मार्टफोन में सेंध लगाने वाले 'साइबर चोरों' को लेकर चिंतित हैं। विशेषज्ञों को डर है कि स्मार्टफोन के इन सुरचा फीचर्स का उपयोग कर डेटा चोरी किया जा सकता है। दरअसल, उपयोगकर्ता को यह जानकारी ही नहीं है कि उसकी बायोमेट्रिक जानकारी कहां जाती है और इसे कौन संचालित कर रहा है। हाल ही कुछ बड़े समार्टफोन निर्माता कंपनियों के हाई-प्रोफाइल मामलों में देखा गया कि बायोमेट्रिक स्कैनर को चकमा देना आसान है।

गैजेट फंडा : आखिर कितना सुरक्षित है स्मार्टफोन का फिंगरप्रिंट सेंसर

पिनकोड या पासवर्ड ज़्यादा कारगर
हाल ही गूगल ने भी स्वीकार किया है कि उसका नए पिक्सल-4 स्मार्टफोन का फेस-डिटेक्शन फीचरयूजर की आंखें बंद होने पर भी फोन को अनलॉक कर देता था। यानी उनके सोने या मृत्यु हो जाने पर कोई भी यूजर के फोन का उपयोग कर सकता है। ऐसे ही सैमसंग के गैलेक्सी एस 10 अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर को एक सुरक्षात्मक थर्ड-पार्टी सिलिकॉन स्क्रीन कवर से चकमा दिया जा सकता है, जिसके बाद किसी की भी उंगली से फोन को अनलॉक किया जा सकता है।
पिनकोड या पासवर्ड इसलिए ज्यादा सुरक्षित हैं क्योंकि चार से 6 अंकों के पासकोड का अनुमान लगाने की संभावना 10 हजार प्रयासों में सिर्फ 1 बार है। हालांकि ऐपल कंपनी का कहना है कि किसी व्यक्ति के फोन को अनलॉक करने के लिए किसी के पास समान फिंगरप्रिंट होने की संभावना 50 हजार में से 1 है और एक जैसी शक्ल की फेस ट्रिकिंग फेस आइडी की संभावना भी 10 लाख में से सिर्फ 1 बार है।

गैजेट फंडा : आखिर कितना सुरक्षित है स्मार्टफोन का फिंगरप्रिंट सेंसर

बॉयोमीट्रिक्स से चिंतित लोगों का पूरेे तकनीकी उद्योग से विश्वास उठ गया है। 2018 में हुए प्यू सर्वे के अनुसार अकेले अमरीका में ही केवल 25 प्रतिशत वयस्क ही टेक कंपनियों पर अपने उत्पाद की खामियों को दूर करने के मामले में भरोसा करते हैं। जबकि 14 प्रतिशत ऐसे भी हैं जिन्होंने इस मामले में शायद ही उन पर भरोसा किया। दुनिया में पासकोड-पिन का उपयोग करने वाले कितने लोग हैं इसका आंकड़ा तो मौजूद नहीं है लेकिन 2016 में ऐप्पल ने कहा था कि आइफोन उपयोग करने वाले 89 प्रतिशत लोग अपने डिवाइस को अनलॉक करने के लिए फिंगरप्रिंट का उपयोग कर रहे थे। वहीं आईबीएम के ४ हजार वयस्कों पर किए गए एक 2018 के सर्वेक्षण में सामने आया कि केवल 67 प्रतिशत लोगों ने ही यह स्व्ीकारा कि वे बायोमेट्रिक्स के साथ सहज थे। जबकि 87 प्रतिशत ने कहा कि वे फिलहाल इसका उपयोग नहीं करते।



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रॉॅबिनहुड हैकर्स: चुराया हुआ पैसा गरीबों में बांट देते हैं ताकि दुनिया से अमीर-गरीब की खाई मिट जाए

अभी तक आपने ऐसे साइबर चोरों और हैकर्स के बारे सुना होगा जो हमारे बैंक खातों में सेंध लगाकर हमें कंगाल बना देते हैं, तो कुछ हमारे कम्प्यूटर सिस्टम और सोशल मीडिया अकाउंट्स में घुसकर हमारी गोपनीय जानकारी चुराकर उन्हें डार्क वेब और इंटरनेट पर वायरल कर देते हैं। बुलीइंग और ठगी करने वाने नाइजीरियाई गिरोह से पूरी दुनिया वाकिफ है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे हैकर गु्रप के बारे में बताने जा रहे हैं जो साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं के बीच 'रॉॅबिन हुड हैकर्स' के नाम से पहचाने जाते हैं। इन्हें यह नाम क्यों दिया गया है यह भी जान लीजिए। दरअसल, यह साइबरहैकिंग ग्रुप बड़ी कंपनियों और नामी अमीरों का करोड़ों डॉॅलर लूटकर जरूरतमंद लोगों में बांट देते हैं। हैकर्स के इस समूह से जब साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने पूछा कि वे ऐसा क्यों करते हैं तो उनका जवाब था कि वे दुनिया को एक बेहतर जगह बनाना चाहते हैं इसलिए वे गरीब-अमीर की इस खाई को पाटने के लिए इन दो चिर-समूहों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए ऐसा करते हैं। उनके इस व्यवहार से साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं भी हैरान हैं।

रॉॅबिनहुड हैकर्स: चुराया हुआ पैसा गरीबों में बांट देते हैं ताकि दुनिया से अमीर-गरीब की खाई मिट जाए

बिटकॉइन में 10 हजार डॉॅलर दान किए
याहू न्यूज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डार्क वेब पर पोस्ट किए गए इस रहस्यमयी गिरोह ने बिटकॉइन के रूप में करीब 10 हजार डॉलर की रसीद दो चैरिटी को दी, जिसमें एक चिल्ड्रन इंटरनेशनल संस्था भी शामिल है। हालांकि, यह एक बड़ी धनराशि थी, लेकिन चिल्ड्रन इंटरनेशनल संस्था ने इस दान को स्वीकार करने से यह कहकर मना कर दिया कि वह चुराए हुए धन से संस्थाा नहीं चलाएंगे। सुरक्षा शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि ये हैकर अब भी कंपनियों से चुराए गए धन का उपयोग लोगों और सामाजिक संस्थाओं की मदद करने में कर रहे हैं।

रॉॅबिनहुड हैकर्स: चुराया हुआ पैसा गरीबों में बांट देते हैं ताकि दुनिया से अमीर-गरीब की खाई मिट जाए

धनवान कंपनियों को ही बनाते निशाना
रॉबिन हुड हैकर्स केवल बड़ी कंपनियों को ही अपना निशाना बनाते हैं। बीबीसी न्यूज ने बताया कि ये डार्कसाइड हैकर्स, संगठनों के आईटी सिस्टम को हैक कर लेते हैं ताकि प्रबंधन को फिरौती देने के लिए मजबूर किया जा सके। हालांकि, हैकर्स ने 13 अक्टूबर को एक ब्लॉग पोस्ट भी बनाया है, जिसमें दावा किया गया है कि वे केवल बड़ी लाभदायक कंपनियों पर ही हमला करते हैं। ब्लॉग पोस्ट में उन्होंने लिखा कि 'चलो अच्छा है, इसी बहाने इन कंपनियों का कुछ पैसा चैरिटी में काम आएंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि 'आप हमारे काम को कितना भी बुरा क्यों न समझें, हमें इस बात की बेहद खुशी है कि हम किसी की बदहाली दूर कर उसकी जिंदगी में खुशियां लाने का कारण बन रहे हैं।'

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चुराए पैसे से दो संस्थाओं को दिया दान
इन रहस्यमयी हैकरों ने अपना चुराया हुआ पैसा चिल्ड्रन इंटरनेशनल और द वाटर प्रोजेक्ट को दान कर दिया। हालांकि, चिल्ड्रन इंटरनेशनल ने कहा कि अगर यह दान किसी हैकर का दिया हुआ है तो संगठन का इसे रखने का कोई इरादा नहीं है। दूसरी ओर, द वाटर प्रोजेक्ट ने अभी तक प्राप्त धन के संबंध में कोई बयान नहीं दिया है। यह चैरिटी हैकर समूह उप-सहारा अफ्रीकी देशों में स्वच्छता को बेहतर बनाने और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए चुराया हुआ पैसा दान कर रहा है। साइबर-सुरक्षा कंपनी एम्सिसॉफ्ट के विश्लेषक ब्रेट कॉलो ने कहा कि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि साइबर अपराधी दान क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शायद वे ऐसा करके अपने अपराधबोध को कम करना चाहते हों।

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