Friday, September 25, 2020

घर में मंदिर है और पूजा करते हैं तो ये आपको पता होना चाहिए

वैदिक साहित्य में बताया गया है कि घर के अंदर मंदिर नहीं होना चाहिए। ग्राम, नगर, मोहल्ला अथवा समाज के लिए उस क्षेत्र में मंदिर निर्माण श्रेष्ठ होता है, किंतु बीते कुछ दशकों से अपने-अपने घरों में...

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Sunday, September 20, 2020

कोरोनाकाल में व्हाट्ऐप और फेसबुक का कितना हुआ प्रयोग, जानकर रह जाएंगे दंग

जयपुर. कोरोनाकाल के दौरान ऑनलाइन प्रणाली में तेजी आई है। जीवन के हर क्षेत्र में इसका प्रयोग और उपयोगिता बढ़ गई। शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और लेने-देन जैसी सभी गतिविधियों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निर्भरता पहले से कई गुना अधिक बढ़ गई। अमरीका की आर्थिक डेटा प्रोवाइडर कंपनी डोमो द्वारा अप्रेल 2020 में जुटाए आंकड़ों के अनुसार 4.57 अरब यानी दुनिया की 59 फीसदी आबादी तक आज इंटरनेट पहुंच चुका है, जिनसे इतना बड़ा तकनीकी बदलाव नजर आया।

इस वर्ष अप्रेल में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का प्रति मिनट इस्तेमाल
1. जूम
208333 लोग मीटिंग से जुड़े विश्व में हर मिनट
2. नेटफ्लिक्स
404444 घंटे के वीडियो देखे गए
3. यूट्यूब
500 घंटे के वीडियो अपलोड किए गए
4. इंस्टाग्राम
347222 स्टोरी पोस्ट की गई
5. ट्विटर
319 नए यूजर जुड़े
6. फेसबुक
1.50 लाख संदेश पोस्ट किए और 1.47 लाख फोटो अपलोड
7. व्हाट्सऐप
41.66 करोड़ मैसेज शेयर किए गए
8. वेनमो
239,196 डॉलर का लेनदेन हुआ वेनमो पर
9. माइक्रोसॉफ्ट
52083 यूजर्स से संपर्क किया
10. स्पोटीफाई
28 म्यूजिक टै्रक लाइब्रेरी में जोड़े

कुछ खास बातें
10 लाख डॉलर ऑनलाइन खर्च किए यूजर्स ने प्रति मिनट
13,88889 वीडियो/वॉइस कॉल किए गए प्रति मिनट
69444 बार जॉब्स के लिए अप्लाई किया गया लिंकडिन पर
2704 बार इंस्टाल किया गया टिकटॉक ऐप (अब भारत में बैन)

आगे क्या ?
ऑनलाइन प्लेटफॉम/सोशल मीडिया पर लोगों की सक्रियता से अर्थव्यवस्था को गति भी मिलेगी। हालांकि इसके नुकसान भी हैं, जैसे स्क्रीनटाइम बढऩा दिमाग और शरीर के लिए हानिकारक है। वैसे ही बाजार की अवधारणा भी प्रभावित होगी। आने वाले दिनों में बड़े उद्यमी ऑनलाइन बाजार का रुख करेंगे और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।



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Thursday, September 17, 2020

Alert: बिना Request भेजे ही Facebook Friend बन रही ये महिला, नहीं हो पा रही Unfriend

दुनिया भर के फेसबुक यूज़र्स से मिली रिपोर्ट के मुताबिक Lopez नाम की ये महिला फेसबुक पर कई लोगों की फ्रेंड लिस्ट में खुद ब खुद जुड़ गई है, और हैरानी वाली बात ये है कि इसे unfriend भी नहीं किया जा सकता है। इससे पहले हफ्ते में मार्क ज़करबर्ग के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म फेसबुक यूज़र्स ने एक अजीब घटना को नोटिस किया। उन सभी की प्रोफाइल में 'सेलेन डेलगाडो लोपेज़' नाम की एक महिला फ्रेंड के रूप में दिखी। इस फेसबुक अकाउंट की प्रोफाइल फोटो में एक मुसकुराती हुई महिला दिखाई दे रही है, जिसने ऑरेंज कलर का स्वेटर पहना हुआ है। उसकी प्रोफाइल फोटो पर लिखा है कि वह मेक्सिको के लियोन शहर की रहने वाली है। इसके अलावा उसकी प्रोफाइल पर ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है।

Alert: बिना Request भेजे ही Facebook Friend बन रही ये महिला, नहीं हो पा रही Unfriend

कंफ्यूज़ यूज़र्स लोपेज़ के बारे में Reddit, Facebook और Twitter जैसे प्लेटफॉर्म पर जानने की कोशिश कर रहे हैं और कुछ यूज़र्स इस अनजान ‘दोस्त’ को unfriend करने का तरीका भी खोज रहे हैं। Forbes की एक रिपोर्ट में बताया गया कि ये एक तरह का ‘फ्रॉड’ है, और यही वजह है उसे कोई अनफ्रेंड नही कर पा रहा है। सब की फ्रेंड लिस्ट में होने के कई दावों के बाद यूज़र्स अपनी FB फ्रेंड लिस्ट पर इस महिला को सर्च करने लगे, ताकि जाना जा सके कि क्या सच में ये उनकी फ्रेंड लिस्ट में मौजूद है। ऐसा करने पर यूज़र्स को उसके अकाउंट पर ‘Add Friend’ का ऑप्शन नहीं दिखा। हालांकि ये भी देखा गया कि ये किसी तरह का ‘Page’ नहीं, बल्कि किसी शख्स का ही अकाउंट है, जिसपर ‘Add Friend’ के बजाए ‘send message’ का ऑप्शन दिख रहा है।

Alert: बिना Request भेजे ही Facebook Friend बन रही ये महिला, नहीं हो पा रही Unfriend

इस मामले में हुई कुछ रिसर्च से पता चला है कि लोपेज़ के हर किसी के फ्रेंड लिस्ट में होने की संभावना बहुत कम है। फेसबुक पर लाखों यूज़र्स को देखते हुए प्लेटफॉर्म एक व्यक्ति को एक अकाउंट में सिर्फ 5,000 फ्रेंड ऐड करने की अनुमति देता है। कुछ फेसबुक यूज़र्स अपनी प्रोफाइल को एडिट करके ‘Add Friend’ के ऑप्शन को friends of friends के लिए सीमित कर सकते हैं। ऐसे में अगर आप किसी के कॉमन फ्रेंड नहीं और आपक किसी ऐसी प्रोफाइल को फ्रंड रिक्वेस्ट भेजना चाहते हैं, तो आपको ‘Add friend’ के बजाए ‘Send Message’ का ऑप्शन मिलता है। इसके बाद अगर आप उस शख्स को फ्रंड बनाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको पर्सनल मैसेज करना होगा।

Alert: बिना Request भेजे ही Facebook Friend बन रही ये महिला, नहीं हो पा रही Unfriend

जब से ये फ्रॉड वायरल हुआ है, अब तक लोपेज़ के नाम से कई अकाउंट मौजूद हैं। हालांकि इस होक्स (धोखेबाज़ी) को अभी खतरनाक नहीं माना जा रहा है, लेकिन कहा गया है कि इतने कम समय में वायरल होने की क्षमता साइबर सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती है। वैसे तो लोपेज़ के अकाउंट में फिलहाल कोई गड़बड़ी नहीं दिखाई दे रही है, लेकिन वे जल्द ही गलत सूचना फैलाना शुरू कर सकता है या अकाउंट में ऐसे लिंक शामिल कर सकते हैं जो यूज़र्स को इंटरनेट स्कैम के ज़रिए परेशान कर सकता है। इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि अगर ये आपके प्रोफाइल में मौजूद है तो मुमकिन है कि इसके ज़रिए किसी तरह की जासूसी की जा रही हो।

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Thursday, September 10, 2020

वैज्ञानिक बना रहे ऐसा 'स्मार्ट ट्राउजर' जिसे पहनकर दिव्यांग बिना व्हीलचेयर के चल फिर सकेंगे

जो लोग व्हीलचेयर पर होते हैं उनके लिए यही इनकी दुनिया बन जाती है। लेकिन अब ऐसे लोगों के भी दिन बदलने वाले हैं। ऐसे लोगों को व्हीलचेयर पर बैठे रहने को विवश नहीं होना पड़ेगा। दरअसल, इंग्लैंड के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एक 'स्मार्ट पैंट-ट्राउजर' विकसित कर रहे हैं जो लोगों को खड़े होने, सीढिय़ां चढऩे और व्हीलचेयर के बिना चलने-फिरने में मदद कर सकती है।

वैज्ञानिक बना रहे ऐसा 'स्मार्ट ट्राउजर' जिसे पहनकर दिव्यांग बिना व्हीलचेयर के चल फिर सकेंगे

बेहतर हो सकेगी जिंदगी
ब्रिटिश विज्ञान मेले में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के रोबोटिक्स प्रयोगशाला के प्रोफेसर जोनाथन रॉसिटर ने प्रतिभागियों को बताया कि इस पैंट को बनाने के पीछे टीम का उद्देश्य शारीरिक रूप से चल-फिर पाने में अक्षम लोगों को नई उम्मीद देने था। ताकि वे अपने शयनकक्ष से बाहर निकलें और दुनिया देख सकें। अगर ये पैंट्स काम कर जाती हैं तो ये ऐसे लोगों की कार्यक्षमता और आप उनकी कार्यात्मक क्षमता को बढ़ाएगा साथ ही उसकी लोगों पर निर्भरता को कम करेगा। इतना ही नहीं इससे इलाज, देखभाल और खर्च में भी कमी आएगी। जोनाथन ने कहा कि हमारा सपना इन उपकरणों को सर्वव्यापी बनाना है ताकि आने वाले छह या सात सालों में हर कोई इनका उपयोग कर अपनी ऊर्जा का सही इस्तेमाल कर सके। जोनाथन को उम्मीद है कि इस पैंट से क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।

वैज्ञानिक बना रहे ऐसा 'स्मार्ट ट्राउजर' जिसे पहनकर दिव्यांग बिना व्हीलचेयर के चल फिर सकेंगे

कैसे करेगी ये स्मार्ट पैंट काम
यह रोबोटिक पैंट हमारे शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों को गतिशील बनाने वाली आंतरिक तकनीकों की नकल कर सकती है। यह मुलायम ग्रेफीन नामक तत्त्व से बनी हुई है जो घुटनों और टखनों को सहारा देने के लिए गर्मी के संपर्क में आने पर सख्त हो जाती है। इसमें प्लास्टिक के छोटे बुलबुलों जैसी संरचना होती हैै जिसे कृत्रिम मांसपेशियों के रूप में इस्तेमाल करने के लिए फुलाया जा सकता है। पहनने और उतारने में आसान यह पैंट उपयोगकर्ता के स्वास्थ्य और गतिविधियों से संबंधी आंकड़ों का भी संचय करती है। जिसे उपयोगकर्ता और चिकित्सक अपने कम्प्यूटर पर देख सकते हैं।

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Wednesday, September 9, 2020

Jivitputrika Vrat 2020: इस शुभ मुहूर्त में करें जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजा, जान लें पूजा विधि और पारण का समय

हर साल अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत को जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जानते हैं। जिस तरह से पति की कुशलता के लिए तीज का व्रत रखा जाता है, ठीक उसी...

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Monday, September 7, 2020

मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान इन बातों का जरूर रखें ध्यान, वरना रूक सकती है तरक्की

हर इंसान की तमन्ना होती है कि उस पर मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहे। हालांकि कई बार मां लक्ष्मी के प्रसन्न न होने के कारण व्यक्ति को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मां लक्ष्मी को धन और संपत्ति...

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फ्यूचर तकनीक: क्वांटम कम्प्यूटिंग जिसके आगे बच्चे हैं आज के सबसे पावरफुल सुपर कप्यूटर्स भी

भविष्य के कम्प्यूटर्स (Future Computers) क्या आज की ही तरह होंगे या तकनीक इन्हें भी बदल देगी? कम्प्यूटर वैज्ञानिक (Computer Scientists) और क्वांटम फिजिक्स (Quantum Physics) के जानकार क्वांटम कम्प्यूटर (Quantum Computers) को इस सवाल का जवाब मानते हैं। लेकिन क्या है ये तकनीक और ये सामान्य Computers से कैसे अलग हैं? आाइए जानते हैं।

दुनिया बदलने वाली तकनीक
क्वांटम कम्प्यूटिंग दुनिया का नक्शा बदल सकती है। दवाओं और चिकित्सा के क्षेत्र से लेकर, संचार के तौैर-तरीकों औैा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को पूरी तरह से बदलकर रख देगी। वर्तमान में आईबीएम (IBM), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और गूगल (Google Inc.) जैसी बड़ी आर्ईटी कंपनियां इसे बनाने का प्रयास कर रही हैं। जबकि अमरीका (America) औेर चीन (China) ने इस तकनीक को सबसे पहले हासिल करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया हुआ है। बीते साल गूगल के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि उन्होंने क्वांटम सुप्रीमेसी (Quantum Supremacy) तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल कर ली है। करीब 35 सालों से इस तकनीक पर काम कर रहे गूगल ने तो यहां तक घोषणा कर दी थी कि उसने इस क्वांटम चिप की मदद से सामान्य कम्प्यूटर से होने वाले 10 हजार साल का काम 200 सेकंड्स में ही पूरा कर लिया था। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम ने गूगल के इस दावे को झूठा करार दिया था।

फ्यूचर तकनीक: क्वांटम कम्प्यूटिंग जिसके आगे बच्चे हैं आज के सबसे पावरफुल सुपर कप्यूटर्स भी

क्या है क्वांटम कंप्यूटर
एक साधारण कंप्यूटर चिप बिट्स (Bits) का उपयोग करता है। ये छोटे स्विच की तरह होते हैं जिन्हें शून्य से दर्शाया जाता है। प्रत्येक ऐप जो हम उपयोग करते हैं, हर वो वेबसाइट जिसे हम खोलते हैं और हर फोटो जो हम कैमरे या मोबाइल से खींचते हैं वे सभी ऐसे ही लाखों-करोड़ों बिट्स औैर 1 व शून्य के संयोजन से बनती है। लेकिन यह तकनीक हमें आज तक यह नहीं बता पाई कि वास्तव में ब्रह्मांड किस तरह काम करता है। यहां तक कि मानव द्वारा बनाए गए सबसे बेहतरीन सुपर कंप्यूटर भी आज तक इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए। पिछली शताब्दी में भौतिकविज्ञानियों ने पता लगाया था कि अगर हम इतने छोंटे हो जाएं कि माइक्रोस्कोप से भी नज़र न आएं तब हमारे शरीर पर गुरुत्वाकर्षण औैर ब्रह्मांड बिल्कुल अलग तरह का प्रभाव डालता है। इन्हीं प्रभावों के बारे में क्वांटम तकनीक इस्तेमाल की जाती है। यह दरअसल हमारे फिजिक्स (Bace of Physics) की नींव है जो रसायन विज्ञान (Chemistry) से भी जुड़ी हुई है जिसका सीधा संबंध जीव विज्ञान (Biology) से है। इसलिए वैज्ञानिकों को फिजिक्स, केमिस्ट्रिी और बॉयोलॉॅजी की सटीक गणना के लिए ज्यादा बेहतर कम्प्यूटर तकनीक की जरुरत है जो तीनों में मौजूद किसी भी अनिश्चितता (Uncertainity) को संभाल सकती हो। ये काम क्वांटम कम्प्यूटर ही कर सकता है।

फ्यूचर तकनीक: क्वांटम कम्प्यूटिंग जिसके आगे बच्चे हैं आज के सबसे पावरफुल सुपर कप्यूटर्स भी

कैसे काम करती है यह तकनीक
बिट्स के बजाय क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स (Qbits) का उपयोग करते हैं। यानी बिट्स की तरह ऑन या ऑफ होने की बजाय ये क्यूबिट्स उस स्थिति में भी हो सकते हैं जिसे 'सुपरपोजिशन' (Super Position) कहा जाता है, जहां वे एक ही समय में ऑन या ऑफ अथवा दोनों के बीच की स्थिति (Spectrum) में भी हो सकते हैं। क्यूबिट्स की सुपरपोजिशन ही क्वांटम तकनीक को इतना शक्तिशाली बनाती है। इसे ऐसे समझें कि अगर हम एक साधारण कम्प्यूटर को भूलभुलैया से बाहर निकलने का रास्ता बताने के लिए कहें तो वह हर संभव रास्ते को बारी-बारी से आजमाएगा जब तक कि सही रास्ता न मिल जाए जबकि एक क्वांटम कंप्यूटर एक ही बार में भूलभुलैया से बाहर निकलने वाले हर रास्ते को दिखा सकता है। यह दो संभावित सिरों के बीच मौजूद अनिश्चितता को पकड़ लेता है जो साधारण कम्प्यूटर्स के बस की बात नहीं है। भौतिक विज्ञानी अभी भी पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं कि यह कैसे या क्यों काम करता है। लेकिन क्वांटम कंप्यूटिंग की मदद से हम उन जटिल सवालों के जवाब भी पा सकते हैं जिन्हें हल करने में हमारे सुपर कम्प्यूटर्स को लाखों साल लगेंगे।

फ्यूचर तकनीक: क्वांटम कम्प्यूटिंग जिसके आगे बच्चे हैं आज के सबसे पावरफुल सुपर कप्यूटर्स भी

क्या कर सकते हैं क्वांटम कम्प्यूटर्स
क्वांटम कंप्यूटर तेजी से या अधिक कुशलता (Lightning Speed and Accurecy) से काम करने तक सीमित नहीं है। इससे हम ऐसे काम भी कर सकेंगे जिनके बारे में हमने कभी कल्पना तक नहीं की है। इनकी मदद से हम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को तेजी से विकसित कर सकेंगे। गूगल पहले से ही सेल्फ ड्राइविंग कारों (Self Driving Cars) के सॉफ्टवेयर में सुधार करने के लिए उनका उपयोग कर रहा है। हमारे सुपर कंप्यूटर केवल बुनियादी अणुओं (Molecules) का ही विश्लेषण कर सकते हैं लेकिन क्वांटम कंप्यूटर उन्हीं बुनियादी अणुओं का उपयोग उन्हें समझने की कोशिश के दौरान ही कर सकता है। इसका मतलब है ज्यादा कुशल और आधुनिक उत्पाद, बेहतर चिकित्सा ततकनीक, सस्ती दवाएं और बड़े पैमाने पर बेहतर सौर पैनलों का निर्माण जो इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी का नया विकल्प बन सकती हैं। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि क्वांटम तकनीक अल्जाइमर का कारगर इलाज खोजने में मदद कर सकती है। इसके अलावा शेयर बाजार और मौसम का सटीक पूर्वानुमान, वहीं क्रिप्टोग्राफी में सुधार कर एन्क्रिप्शन सिस्टम को सपुरफास्ट और सरल बनाना जैसे काम चुटकियों में कर सकता है। इतना ही नहीं दुनिया भर में खुफिया एजेंसियोंं के पास बड़ी मात्रा में एन्क्रिप्टेड डेटा को ट्रैक करने में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। क्वांटम एन्क्रिप्शन को कॉपी या हैक नहीं किया जा सकता है। वे पूरी तरह से सेंधमारी से मुक्त होंगे।



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Saturday, September 5, 2020

वायरल: कहीं आपकी फेसबुक फ्रेंडलिस्ट में भी तो नहीं है 'सेलीन लोपेज'?

बीते कुछ सालों से गोपनीयता और डेटा चुराए जाने के विवाद से जूझ रहे फेसबुक (Facebook) को अब एक नए विवाद का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, इन दिनों सेलीन डेलगाडो लोपेज़' (Weird Facebook Friend Selene Delgado Lopez) नाम की एक महिला फेसबुक के सभी users की friendlist में नजर आ रही है जबकि इसे किसी ने भी अपनी friendlist में नहीं जोड़ा है। सोशल मीडिया (Social Media) पर आए दिन ऐसे फ्रॉड (Fraud or Hoax) सामने आते रहते हैं और हाल ही कुछ फेसबुक उपयोगकर्ताओं (Facebook Users) ने इस नए 'धोखे' (Social Media Hoax) की ओर लोगों का ध्यान दिलाया है। इन यूजर्स ने लोगों को एक ऐसी अजीब महिला की प्रोफाइल के बारे में बताया है जो हर किसी की friendlist में दिखाई देती है। यहां तक कि फेसबुक पर इस महिला को जिसने friend request नहीं भेजी है यह उसकी friendlist में भी नजर आती है वह भी बिना उसकी जानकारी में आए।

वायरल: कहीं आपकी फेसबुक फ्रेंडलिस्ट में भी तो नहीं है 'सेलीन लोपेज'?

देखने में सामान्य प्रोफाइल
हालांकि सेलीन डेलगाडो लोपेज़ नाम की इस महिला का फेसबुक प्रोफाइल बिल्कुल सामान्य है और पहली नजर में इससे कोई खतरा नजर नहीं आता। लेकिन जानकारों का मानना है कि यह हैकर्स और गोपनीय डेटा चुराने वालों की नई साजिश भी हो सकती है। इस वक्त यह महिला इंटरनेट पर वायरल ट्रेंडिंग सर्च (Viral Trending Search) है जिसके बारे में हर कोई जानना चाहता है। लेकिन अधिकतर लोगों का कहना है कि यह फेसबुक अकाउंट एक धोखा है जो सोशल मीडिया यूजर्स की जासूसी (Spying on Users) करता है।

वायरल: कहीं आपकी फेसबुक फ्रेंडलिस्ट में भी तो नहीं है 'सेलीन लोपेज'?

कौन है सेलीन डेलगाडो लोपेज
मैशेबल नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म (Mashable) ने इसके बारे में सबसे पहले चेतावनी दी थी। उसने फेसबुक पर लोगों को चेताते हुए बताया कि इस महिला की प्रोफाइल की केवल मुट्ठीभर लोगों ने पुष्टि की है इसलिए अगर यह आपकी फे्रंडलिस्ट में है तो होशियार हो जाएं, हो सकता है आपकी जासूसी हो रही हो। लोपेज की प्रोफाइल ने काफी हद तक लोगों को डरा दिया है। क्योंकि यह उन लोगों की फे्रंडलिस्ट में भी दिखाई दे रही है जिन्होंने फे्रंड रिक्वेस्ट भेजने और स्वीकारने की सेटिंग्स को अपने हिसाब से सेट किया हुआ है जिसे केवल यूजर ही जोड़ सकता है।

वायरल: कहीं आपकी फेसबुक फ्रेंडलिस्ट में भी तो नहीं है 'सेलीन लोपेज'?

आज ही वेरिफाई करें अपनी लिस्ट
जब भी किसी की फेसबुक प्रोफाइल देखें तो पहले यह देखें कि उसकी प्रोफाइल फोटो और नाम के नीचे एक बड़े नीले टैब में 'मैसेज' (Message) बटन दिखाई देता है, तो यह आमतौर पर उपयोगकर्ता का मित्र (User's Friend) होता है। लेकिन सेलीन डेलगाडो लोपेज़ की प्रोफाइल में 'Add Friend' ऑप्शन के नीचे ग्रे बटन गायब हो जाता है और इसकी जगह नीले टैब में 'मैसेज' बटन ले लेता है। इसी बात से यूजर्स सबसे ज्यादा भयभीत हैं। इसससे लोगो उसे अपने दोस्तों की common friend समझकर रिक्वेस्ट स्वीकार लेते हैं और धोखे (spyware और spam account) का शिकार हो जाते हैं। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप ऐसे संदिग्ध अकाउंट्स के friendlist की जांच करें। ऐसा करने के लिए आप उसकी प्रोफाइल पर जाकर friend's ऑप्शन को सिलेक्ट करें।

वायरल: कहीं आपकी फेसबुक फ्रेंडलिस्ट में भी तो नहीं है 'सेलीन लोपेज'?

इसलिए संदिग्ध है सेलीन का प्रोफाइल
लोपेज का प्रोफाइल निजी है जो केवल लोगों को फे्रंड रिक्वेस्ट भेजने के लिए सेट किया हुआ है। इसके अलावा लोपेज़ की प्रोफाइल से इस साल 27 अप्रेल के बाद कोई पोस्ट अपडेट नहीं हुआ है। प्रोफाइल चेक करने पर लोगों को पता चला कि उसके अकाउंट पर केवल दो पोस्ट और तीन फोटो से अधिक कुछ नहीं है। इससे सबकी facebook friendlist में बिना जोड़े भी नजर आने वाली सेलीन लोपेज पर शक गहरा जाता है।



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13 साल की नाम्या से उनके शिक्षक भी पढ़ते हैं, सत्य नडेला कर चुके तारीफ

भारतीय युवाओं की प्रतिभा की दुनिया कायल है। ऐसी ही एक प्रतिभा है 13 साल की नाम्या जोशी। नाम्या ने कम्प्यूटर गेम का उपयोग कर कक्षा में सीखने की प्रक्रिया को इतना आसान बना दिया है कि अब उनके अध्यापक भी उनसे पढ़ते हैं। इस साल दिल्ली में आयोजित 'यंग इनोवेटर्स सम्मिट' में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला (Microsoft CEO Satya Nadela) ने भी उनकी इस बेहतरीन लर्निंग तकनीक की तारीफ की। लुधियाना की आठवीं कक्षा में पढऩे वाली नाम्या को माइनक्राफ्ट कम्प्यूटर गेम में महारथ हासिल है। इस गेम में किसी भी चीज को वर्र्चुअल ब्लॉक से बाहर कर सकते हैं। उन्होंने इसी का उपयोग कर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सैकड़ों शिक्षकों को पढ़ाने के लिए इस गेम की तकनीक का उपयोग करना सिखाया है।

13 साल की नाम्या से उनके शिक्षक भी पढ़ते हैं, सत्य नडेला कर चुके तारीफ

अपने होमवर्क तैयार किए
नाम्या ने इस गेम की तकनीक का इस्तेमाल कर सबसे पहले अपने स्कूल के ही होमवर्क और कुछ खास विषय तैयार किए। मिस्र की सभ्यता पर बनाया उनका प्रोग्राम इतना आकर्षक और सरल था कि उनके अध्यापकोंं ने पूरी कक्षा को पढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने नाम्या को स्कूल के अन्य 104 छात्रों को पढ़ाने के लिए ऐसे ही दिलचस्प प्रोग्राम बनाने को कहा।

13 साल की नाम्या से उनके शिक्षक भी पढ़ते हैं, सत्य नडेला कर चुके तारीफ

ऐसे मिली प्रेरणा
नाम्या ने बताया कि छठी कक्षा के दौरान उन्होंने देखा कुछ साथी छात्रों को पढऩे और समझने में परेशानी हो रही थी और वे दूसरे बच्चों की तरह तेजी से न सीख पाने के कारण निराश रहने लगे थे। तब मैंने माइनक्रॉफ्ट का पढ़ाई में उपयोग कर चीजों को इनोवेटिव तरीके से समझाने के लिए कुछ विषय तैयार किए। उनके बनाए ये प्रोग्राम छात्रों को आसानी से समझ आने लगे। इससे उन्हें और काम करने की प्रेरणा मिली। नाम्या ने इस गेम की तकनीक का इस्तेमाल कर सबसे पहले अपने स्कूल के ही होमवर्क और कुछ खास विषय तैयार किए।

13 साल की नाम्या से उनके शिक्षक भी पढ़ते हैं, सत्य नडेला कर चुके तारीफ

नाम्या का सफर एक नजर में
-100 से ज्यादा अध्यापकों को सिखा चुकी हैं नाम्या अब तक दुनियाभर में
-माइनक्रॉफ्ट के एज्यूकेशन एडिशन फीचर का इस्तेमाल कर बनाती हैं लैसंस
-#एमएस एज्यूचैैट पर वे छात्रों की एम्बैसेडर भी हैं
-यहां वे अध्यापकों, अआईटटी निदेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों से सीखती औैर सिखाती हैं
-वे केईओएस2019-फिनलैंड में आयोजित वैश्विक शैैक्षणिक सम्मेलन में वक्ता के तौर पर शामिल हो चुकी हैं
-2018 में उन्होंने नेशनल माइनक्रॉफ्ट प्रतियोगिता भी जीती है
-वे एसडीजी में भारत की छात्र एम्बैसेडर भी हैं

13 साल की नाम्या से उनके शिक्षक भी पढ़ते हैं, सत्य नडेला कर चुके तारीफ

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भारतीय छात्रों का बनाया ये रोबोट पेड़ों पर चढ़ सकता है

दक्षिण भारत में नारियल के पेड़ों की खेती बहुतायत में की जाती है। लेकिन तकनीकी विकास के बावजूद आज भी नारियल के पेड़ों से नारियल तोडऩे के लिए परंपरागत तरीकों का ही उपयोग किया जाता है। किसानों की इस परेशानी को देखकर स्थानीय विश्वविद्यालय के छात्रों ने पेड़ों पर चढ़ सकने वाला ऐसा रोबोट बनाया है जो नारियल के ऊंचे पेड़ों पर सरपट चढऩे के साथ ही नारियल भी तोड़ता है। कोयम्बटूर स्थित अमृता विश्व विद्यापीठम विश्वविद्यालय के छात्रों का बनाया यह अमारैन नाम का रोबोट सहायक प्रोफेसर राजेश कन्नन मेगालिंगम और उनकी टीम ने बनाया है। तीन साल के दौरान यह अब तक छह अलग-अलग डिजायनों से गुजर चुका है।

भारतीय छात्रों का बनाया ये रोबोट पेड़ों पर चढ़ सकता है

ऐसे करता है काम
बड़े छल्ले के आकार के इस रोबोट को नारियल के पेड़ के सबसे नीचे वाले हिस्से के चारों ओर सेट कर दिया जाता है। इसके बाद इसमें अंदर की ओर रबर से बने आठ पहिए लगे हुए हैं जो इसे नीचे से ऊपर की ओर चढऩे और उतरने में मदद करते हैं। इसे एक वायरलैस कंट्रोल पैनल से नियंत्रित किया जाता है। इस तने के चारों ओर हरकत में लाने के लिए एक जॉयस्टिक यूनिट और स्मार्टफोन ऐप भी बनाई गई है। ऊपर पहंचने पर इसके रोबोटिक्स हाथों में लगे धारदार ब्लेड की मदद से यह नारियल के गुच्छों को काटकर नीचे गिरा देता है।

भारतीय छात्रों का बनाया ये रोबोट पेड़ों पर चढ़ सकता है

अमारैन के बारे में खास-खास
-50 फीट की ऊंचाई तक चढ़ सकता है रोबोट
-30 डिग्री के एंगल जितने मोटे तने पर फिट हो सकता है
-15 मिनट का समय लगता है चढ़ने में



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Friday, September 4, 2020

इस 8 उपायों से बरसेगी आप पर मां लक्ष्मी की कृपा, धन-संपदा में दिन-रात होगी बरकत

हर व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। सुख के बाद दुख और दुख के बाद सुख यह प्रकृति का सिद्धांत है। हालांकि कई बार लोगों को भाग्य का साथ न मिल पाने के कारण उनके जीवन में केवल दुख ही दुख आते हैं।...

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Tuesday, September 1, 2020

स्पेस तकनीक: ब्रहस्पति ग्रह के मॉडल से प्रेरित यह घड़ी चुंबक से चलने वाले मनकों से बताती है समय

सौरमंडल (Solar System) के सबसे बड़े और खूबसूरत ग्रह ब्रहस्पति (Jupitor) की डिजायन को अब कलाई घड़ी (Wrist watch) के रूप में ढाला गया है। ब्रहस्पति के अंग्रेजी नाम ज्यूपिटर की तर्ज पर ही इस घड़ी का नाम भी ज़ीइरो (Ziiro) रखा गया है। इस घड़ी में समय देखने के लिए अंकों, बिंदुओं और हाथों से चाबी भरने की भी जरुरत नहीं है। पारंपरिक घडिय़ों में घंटे और मिनट को दो अलग-अलग कांटो से प्रदर्शित किया जाता है जो बिना खास गियर-मैकेनिज्म के काम ही नहीं करते। लेकिन जर्मनी और हांगकांग के इंजीनियर्स की बनाई इस खास घड़ी में समय दिखाने के लिए कांटो की जगह छोटी स्टील की बॉल (Magnetic Stainless Steel Balls) का इस्तेमाल किया गया है जो एक खास हाइड्रोलिकली सिस्टम द्वारा दबाव दिए जाने पर घड़ी के कांटों की तरह चलते हैं।

स्पेस तकनीक: ब्रहस्पति ग्रह के मॉडल से प्रेरित यह घड़ी चुंबक से चलने वाले मनकों से बताती है समय

घड़ी के डायल को भी खास क्रिस्टल से बनाया गया है जो 41 मिमी स्टेनलैस स्टील से बना है। यह घड़ी पानी में 30 मीटर (करीब 100 फीट) गहराई तक पानी में सुरक्षित रहेगी। कंपनी का कहना है कि घड़ी के डायल में बाहर की ओर बनी स्टील की बॉल घंटे को और अंदर की ओर लगी छोटी स्टील बॉल मिनट को दर्शाती है। यह दोनों बॉल रेनाटा 371SR 920 SW बैट्री से चलती हैं। यह घड़ी चार अलग-अलग रंगों में उपलब्ध है जिसकी शुरुआती कीमत करीब 15 हजार (199 डॉलर) है।

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वोकल फॉर लोकल: स्मार्ट गमला जो घर बनाए स्वच्छ, नारियल के पत्तों से बनाए स्ट्रा

प्रकृति को ध्यान में रखकर देश में युवाओं ने ऐसे उत्पाद बनाए हैं जो इको फ्रेंडली और पर्यावरण प्रदूषण से लडऩे में कारगर हैं। दिल्ली में हर साल जहरीली हवा में सांस लेने से सैकड़ों लोग फेफड़ों के रोग से जूझ रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए आइआइटी कानपुर के युवा उद्यमी संजय मौर्या ने अपने स्टार्ट-अप के तहत ऐसे 'स्मार्ट गमले' बनाए हैं जो मात्र 20 मिनट में कमरे में मौजूद हानिकारक धूलकणों को सोखकर हवा को स्वच्छ कर देते हैं। इन गमलों में पौधे लगाने पर ये स्मार्ट फ्लावरपॉट पौधों में मौजूद प्राकृतिक वायु शोधन प्रक्रिया (Natural Air Purification) को बढ़ा देता है जिससे वे ज्यादा तेजी से काम करने लगते हैं। Delhi जैसे सघन आबादी वाले शहरों में घरों में किचन गार्डन (Kitchen Garden) बनाना आसान नहीं है। ऐसे में ये गमले घर में स्वच्छ हवा का स्रोत बन सकते हैं।

वोकल फॉर लोकल: स्मार्ट गमला जो घर बनाए स्वच्छ, नारियल के पत्तों से बनाए स्ट्रा

ऐसे काम करता है स्मार्ट पॉट
संजय ने बताया कि ये स्मार्ट बायो-फिल्टर गमले पौधों की जड़ों में हवा को अवशोषित कर प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को शुद्ध करते हैं। यह गमला पौधों की इसी क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। इसके बाद शुद्ध हवा को गमला वापस कमरे में छोड़ देता है। इस प्रक्रिया में करीब 20 मिनट का समय लगता है। 10 गमले मिलकर एक छोटे घर को पूरी तरह स्वच्छ हवा दे सकते हैं। एक गमला 15 मिनट में करीब 200 वर्ग फीट तक हवा को स्वच्छ बनाने के लिए काफी है।

वोकल फॉर लोकल: स्मार्ट गमला जो घर बनाए स्वच्छ, नारियल के पत्तों से बनाए स्ट्रा

प्लास्टिक प्रदूषण रोकेगा नारियल स्ट्रा
भारत में हर साल करीब 25 हजार टन से भी ज्यादा प्लास्टिक कचरा निकलता है लेककिन इसमें से केवल 9 फीसदी ही रिसाइकिल हो पाता है। इस परेशानी को समझते हुए बेंगलुरू के 51 वर्षीय प्रोफेसर साजी वर्गीस ने पारियल के पत्तों से स्ट्रा बनाए हैं, ताकि प्लास्टिक के उपयोग कम किया जा सके। दक्षिण भारत के अलावा भारत के अन्य हिस्सों में भी नारियल के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इनका कई तरह से उपयोग किया जाता है। दो साल की मेहत के बाद साजी ने नारियल के इन पत्तों से सस्ते और इको फे्रंडली स्ट्रा बनाए हैं। 3 रुपए में 10 स्ट्रा की कीमत के चलते जल्द ही उन्हें ऑर्डर भी मिलने लगे। हाल ही उन्हें 10 देशों से करीब 2 करोड़ स्ट्रा बनाने का ऑर्डर भी मिला है।



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अब गूगल स्नैपशॉट आपको याद दिलाएगा दिन भर की जरूरी बातें

ऐसे करें गूगल स्नैपशॉट उपयोग
इस सेवा का उपयोग करने के लिए गूगल ने एक नया वॉयस कमांड (New Voice Command) बनाया है। बस आपको अपने मोबाइल में गूगल असिस्टेंट शुरू कर कहना होगा 'Google show me my day'। हालांकि यह सुविधा अभी उन्हीं मोबाइल पर उपलब्ध है जो मोबाइल उपयोग में अंग्रेजी भाषा का उपयोग अपनी डिफॉल्ट भाषा (Default Language) के रूप में करते हैं। आने वाले महीनों में इस कमांड को अन्य भाषाओं में भी विकसित किया जाएगा। स्नैपशॉट का उपयोग करने के लिए नीचे बाएं कोने पर आइकन पर टैप करना होगा। इसकी सहायता से आप अपने आगामी दिनों के कार्यक्रम, लोगों के जन्मदिन, छुट्टियां और जरूरी मीटिंग्स के लिए गूगल को याद दिलाने के लिए सेट कर सकते हैं। इतना ही नहीं आप इसके जरिए जन्मदिन की शुभकामनाओं का संदेश और गाना भी भेज सकते हैं। इतना ही नहीं यह आपके रुचि के रेस्तरां, शॉपिंग मॉल और हैडलाइंस-वीडियोज भी दिखाएगा। कोरोना वायरस (Corona Virus Covid-19) से बचाव के लिए एलर्ट फीचर भी उपलब्ध है।



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