Monday, May 31, 2021

फर्जी सगाई ऑनलाइन दिखा कमाए 70 करोड़, स्ट्रीमर पर 630 साल का बैन

चीन. सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर (social media influesncer) अपनी फैन फॉलोइंग के बूते न केवल दुनियाभर में पहचाने जाते हैं, बल्कि ऑनलाइन विज्ञापन के जरिए अच्छी खासी रकम भी कमाते हैं। चीन के झेजियांग प्रांत में रहने वाले 22 वर्षीय सोशल मीडिया स्ट्रीमर यिन शिहैंग के social media ट्विटर के चीनी वर्ज़न कुआइशु पर 87 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं। लेकिन अपनी 21 वर्षीय गर्लफ्रेंड ताओ लुलु के साथ फर्जी सगाई करने और उसकी लाइव स्ट्रीमिंग से लोगों को धोखा देकर 70 लाख रुपए से ज्यादा कमाने पर उन्हें सोशल मीडिया ऐप पर 2,30,000 दिनों यानी करीब 630 सालों के लिए बैन कर दिया गया है।

फर्जी सगाई ऑनलाइन दिखा कमाए 70 करोड़, स्ट्रीमर पर 630 साल का बैन

2.30 लाख से ज़्यादा शिकायतें आई
यिन ने 5 घंटे की फर्जी सगाई की लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान, 17 लाख फॉलोवर्स को ऑनलाइन 50 हजार परफ्यूम, 20 फर्जी रॉलेक्स घडिय़ां, 21 हजार स्मार्टफोन के अलावा इस इवेंट से 5.68 करोड़ रुपए से ज्यादा सिर्फ टिप के रूप में कमाए। जबकि इवेंट के लिए उसे 52 करोड़ से ज्यादा रुपए कमाएं। वीडियो ऐप कंपनी ने बोगस सगाई और धोखा देकर पैसे कमाने पर यिन को बैन किया है।

फर्जी सगाई ऑनलाइन दिखा कमाए 70 करोड़, स्ट्रीमर पर 630 साल का बैन

इसलिए किया गया बैन
कुआइशु ऐप ने यिन पर "अश्लील" प्रदर्शन करने और वाणिज्यिक उत्पादों को बेचने के लिए "झूठा प्रचार" करने का आरोप लगाया। Kuaishou ने झूठे विज्ञापन की ओर भी इशारा किया, जिसके खिलाफ कथित तौर पर 230,000 शिकायतें मिलीं। ऐप कंपनी का आरोप है की यिन शीहैंग ने इस फ़र्ज़ी "सगाई पार्टी" को बढ़ावा देकर इस आयोजन में रुचि पैदा की। उन्होंने अपने फॉलोवर्स को ताओ लुलु के साथ सगाई के बारे में नियमित रूप से बताया।

फर्जी सगाई ऑनलाइन दिखा कमाए 70 करोड़, स्ट्रीमर पर 630 साल का बैन

सनसनी पैदा कर कमाए करोड़ों
प्रमोशन क्लिप में, उन्होंने पूछा, "लुलु, क्या तुम मुझसे शादी करोगी" जिसके बाद "हम कल पता लगा लेंगे" के सवाल के साथ फॉलोवर्स मेर्रिन बेचैनी बढ़ाई। यिन कथित तौर पर अपने से 2-3 साल ही बड़े दिख रहे व्यक्ति के साथ टट्टू की पीठ पर पार्टी में पहुंचे, और यह प्रचारित किया की वह शख्श उनसे पिता हैं। इस पूरे घटनाक्रम को एक गेम शो की तरह रचा गया था, और यिन की पूर्व प्रेमिका, साथ ही साथ एक तीसरी महिला भी वहाँ घूंघट में मौजूद थे।

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Sunday, May 30, 2021

30 साल की युवती ने एपल सीईओ टिम कुक से मांगा मुआवजा

जून में 30 साल की होने वाली अमरीका की सीरी हैफ्सो ने हाल ही दिग्गज टेक कंपनी एपल सीईओ टिम कुक (apple ceo tim cook) को एक खुला पत्र लिखकर हर्जाने की मांग की है। दरअसल, कंपनी के वॉयस असिस्टेंट 'सीरी' (apple's virtual assistant siri) की वजह से उनका खूब मजाक उड़ाया जाता है, सोशल मीडिया पर उनके नाम से मीम्स और जोक शेयर किए जाते हैं।

30 साल की युवती ने एपल सीईओ टिम कुक से मांगा मुआवजा

अपने खत में सीरी ने टिम कुक से इस मानसिक प्रताड़ना के एवज में एपल के मैकबुक की मांग की है। सीरी ने लिखा है, '2011 तक मैं सुकून से थी। लेकिन अब लोग मुझसे मेरे नाम का मतलब पूछते हैं, बताने पर मजाक उड़ाते हैं। इसलिए, अगर मुझे ऐपल का लैपटॉप मिल जाएगा तो वह भी खुशी से बता सकेगी हां, मेरा नाम सीरी है क्योंकि मेरे पास भी एपल प्रोडक्ट है।' सीरी ने अपना लंबा पत्र एक वीडियो के साथ टिकटॉक पर पोस्ट किया और लोगों से अनुरोध भी किया कि वे उसकी मांग पर कमेंट और शेयर करें, ताकि टिम कुक तक उनकी यह मांग पहुंच सके।

30 साल की युवती ने एपल सीईओ टिम कुक से मांगा मुआवजा

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भारतीय नासा इंजीनियर ने बनाई दुनिया की पहली 'न्यूज कम्पेरिजन ऐप'

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (American Space Agency NASA)) की पूर्व इंजीनियर हरलीन कौर ने दुनिया की पहली न्यूज कम्पेरिजन ऐप 'ग्राउंड न्यूज' (Ground News) बनाई है। यह ऐप विभिन्न समाचार पत्रों की खबरों की तुलनात्मक व्याख्या कर यूजर को खबरों में मौजूद पूर्वाग्रह से बचाता है। हरलीन ऐसी तकनीक बनाना चाहती थीं जो लोगों को जोड़े। ग्राउंड न्यूज पाठकों को खबर के हर पहलू और विभिन्न दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है।

भारतीय मूल की नासा इंजीनियर ने बनाई दुनिया की पहली 'न्यूज कम्पेरिजन ऐप'

खास है ब्लाइंडस्पॉट फीचर
दुनियाभर के 50 हजार से ज्यादा पब्लिकेशन इस ऐप की वेबसाइट पर मौजूद हैं। ऐप खबर में मौजूद सनसनीखेज और पूर्वाग्रह को इंगित कर देता है। जैसे ब्रेकिंग स्टोरी पर क्लिक करके हम अगल-बगल के अन्य पब्लिकेशन और स्रोत से तुलना कर यह पता लगा सकते हैं कि वास्तव में अन्य स्रोत इसे कैसे कवर कर रहे हैं। इतना ही नहीं ऐप के 'ब्लाइंडस्पॉट फीचर' का इस्तेमाल कर हम यह भी देख सकते हैं कि यह भी देख सकते हैं कि किसी राजनीतिक घटनाक्रम के चारों ओर मौजूद किन महत्त्वपूर्ण मुद्दों को विभिन्न समाचार पत्र नजरअंदाज कर रहे हैं। इको चैंबर के युग में, यह सुविधा 'सनसनीखेज पत्रकारिता' की पहचान करने और उन खबरों की ओर देखने में मदद करती है, जो पूर्वाग्रह या प्रभावित करने की होड़ में दिखाई ही नहीं जाती हैं।

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गूगल मैसेज ऐप पर पिन और टॉप लिस्ट फीचर भी

गूगल उन यूजर्स के लिए जल्द ही अपने मैसेंजर प्लेटफॉर्म (Messages app) पर दो नए फीचर की सुविधा देने जा रहा है, जो इसके बीटा वर्जन (Beta Version) का उपयोग कर रहे हैं। अन्य मैसेजिंग ऐप्स की तरह हाल ही गूगल ने भी अपने मैसेजिंग ऐप पर शेड्यूल मैसेज की सुविधा शुरू की है। यूजर से मिली सकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बाद अब कंपनी जल्द ही यूजर को तीन मैसेज थ्रेड्स (सॉफ्टवेयर द्वारा ईमेल, चैट रूम्स, न्यूजग्रुप्स आदि से संग्रहीत किए गए मैसेज) और कन्वर्सेशन को पिन करने की सुविधा देगी। इससे यूजर को सभी मैसेजेज को बार-बार स्क्रॉल नहीं करना पड़ेगा और पिन की गई चैट को जल्दी ओपन कर सकेंगे।

गूगल मैसेज ऐप पर पिन और टॉप लिस्ट फीचर भी

'स्टार' कर सकेंगे चैट
वॉट्सऐप और टेलीग्राम की तर्ज पर कन्वर्सेशन को 'स्टार' करने की सुविधा भी देगा। यह फीचर, खास संदेशों को बुकमार्क करने की सुविधा देगा ताकि जरुरत पर या बाद में पढ़ सकें। गूगल जल्द कन्वर्सेशन फिल्टर, जिफ, इमोजी और एनिमेटेड फीचर्स की बड़ी रेंज लेकर आने वाला है। एन्ड्राएड बीटा वर्जन उपयोग कर रहे यूजर इन फीचर्स का उपयोग कर सकते हैं।

गूगल मैसेज ऐप पर पिन और टॉप लिस्ट फीचर भी

गूगल एआइ टूल से बनें त्वचा विशेषज्ञ
कंपनी ने एक नया एआइ हैल्थ टूल भी बनाया है। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस पर आधारित यह टूल हमारे स्मार्टफोन को एक ऐसे स्कैनर में बदल देगा जिसकी मदद से डर्मीटोलॉजिस्ट यानी नाख़ून, बाल और त्वचा रोग विशेषज्ञ रोगों का पता लगाते हैं। गूगल का यह नया एआइ हैल्थ टूल इतना जबरदस्त है कि स्मर्टफ़ोने को स्कैन मोड पर डालकर हम इसकी मदद से त्वचा विशेषज्ञों की तरह रोगी की फोटो स्कैन कर 288 तरह की त्वचा का रंग और प्रकृति तक पहचान सकते हैं साथ ही इसकी मदद से त्वचा रोग विशेषज्ञ त्वचा के रोग, नाखून और बालों की परेशानी तक बता सकते हैं।

गूगल मैसेज ऐप पर पिन और टॉप लिस्ट फीचर भी

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Friday, May 28, 2021

घर से काम करने के लिए ऐसे खरीदें डेस्कटॉप सिस्टम

-बेसिक एलसीडी मॉनिटर ही लें, क्योंकि गेम या प्रोग्रामिंग नहीं करनी है।
-बजट का इश्यू है तो सेकंड हैंड पीसी भी चलेगा। मॉनिटर मल्टीटास्किंग फीचर या रीडिंगमोड वाला लें।
-की-बोर्ड और माउस अपनी जरुरत और वर्किंग स्टाइल के हिसाब से लें। अगर ज्यादा टाइपिंग और कीबोर्ड शॉर्टकर्ट वर्क है तो मैकेनिकल की-बोर्ड लें, नहीं तो सामान्य कीबोर्ड से भी काम चल सकता है।

-ज्यादा महंगे या ब्रांडेड के चक्कर में न पड़ें। माउस भी अपने हथेलियों के अनुसार लें जो चलाने में आरामदायक हों। वायरलैस माउस अच्छा विकल्प है।

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-ग्राफिक्स से जुड़े काम के लिए 8जीबी रैम वाले डेस्कटॉप काफी हैं, लेकिन अगर वीडियो एटिडिंग और ग्राफिक्स से जुड़ा हैवी काम करते हैं तो १६जीबी रैम तक का सिस्टम ले सकते हैं। किसी पेशेवर से भी पुराना सिस्टम खरीद सकते हैं।
-सीपीयू की जगह एपीयू प्रोसेसर खरीदें। एपीयूप्रोसेसर आमतौर पर 'जी' लैटर पर खत्म होते हैं और इनमें ग्राफिक्स साथ आते हैं। यानी अलग से ग्राफिक्स कार्ड खरीदने का झंझट नहीं।
-मदरबोर्ड ऐसा लें जिसका सॉकेट आपके प्रोसेसर से आसानी से अटैच हो सके।

घर से काम करने के लिए ऐसे खरीदें डेस्कटॉप सिस्टम

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महिलाओं की 'डिस्कवरी टीम', 10 करोड़ साल पुराने जीवाश्म ढूंढे

अक्सर महिलाओं को पुरातात्विक खोजों में पुरुषों से कमतर आंका जाता है। लेकिन इसी महीने मेघालय स्थित जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया की टीम ने केवल 10 करोड़ साल जीवाश्मखोजा है बल्कि उनकी इस खोज ने मेघालय को भी देश के ख़ास राज्यों की सूची में शामिल कर दिया है। जानिये कैसे।

इसी महीने शिलांग निवासी भूविज्ञानी बशीशा इएंगराई की टीम ने मेघालय के पश्चिमी खासी हिल्स क्षेत्र में करीब 10 करोड़ साल पुराने टाइटेनोसॉरियन मूल के सॉरोपोड डायनासोर की हड्डियों के जीवाश्म की पहचान की। शोध की खास बात यह थी कि यह जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआइ) की पहली महिला टीम थी।

महिलाओं की 'डिस्कवरी टीम', 10 करोड़ साल पुराने जीवाश्म ढूंढे

बशीशा के अनुसार, मेघालय क्षेत्र में खोजे गए यह सॉरोपोड्स का पहला रिकॉर्ड है। शोध टीम की सदस्य बशीशा इएंगराई का कहना है कि इस खोज ने मेघालय को देश का पांचवा ऐसा राज्य बना दिया है जहां डायनोसोर्स के जीवाश्म मिले हैं।

महिलाओं की 'डिस्कवरी टीम', 10 करोड़ साल पुराने जीवाश्म ढूंढे

इससे पहले गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में भी डायनोसोर के जीवाश्म मिल चुके हैं। बशीशा का कहना है कि हमाारी टीम की खोज के कारण दुनियाभर का ध्यान खासी पहाड़ी क्षेत्र की ओर खिंचा, जो हमारे लिए गर्व की बात है।



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Tuesday, May 25, 2021

Fake News पर लगेगी लगाम, गूगल का ये नया फीचर आपको करेगा अलर्ट

नई दिल्ली। यदि आपको किसी भी सवाल का जवाब नहीं पता हो तो फौरन गूगल करते हैं और पलक झपकते ही उससे संबंधित उत्तर आपको पास होता है। लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण हर दिन हमारे पास सैंकड़ों की संख्या में खबरें व सूचनाएं आती हैं, उसमें से बहुत सारे फर्जी या गलत सूचनाएं होती हैं या फिर अफवाह फैलाने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया होता है। ऐसे में फेक सूचनाओं से सावधान रहना बहुत जरूरी है।

फेक न्यूज या अफवाह या फिर गलत सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाने के लिए तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नई-नई तकनीक का सहारा लेते रहते हैं और अपने स्तर पर कार्रवाई भी करते हैं। अब इसी कड़ी में दुनिया की सबसे बड़ी सर्ज इंजन गूगल एक बेहतरीन फीचर लॉंच करने जा रही है। इस फीचर के माध्यम से फेक न्यूज का पता लगाया जा सकता है और उसको आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

यह भी पढ़ें :- Google assistant के जरिए कर सकते हैं whatsapp video call, जानिए सही तरीका

दरअसल, गूगल के लिए फेक न्यूज सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। खासकर फेसबुक, ट्विटर या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए धड़ल्ले से शेयर कर फैलाई जाती है। ऐसे में गूगगल का ये नया फीचर फेक न्यूज को फैलने से रोकने में बहुत ही कारगर साबित हो सकता है।

क्या है गूगल का नया फीचर

जानकारी के मुताबिक, गूगल ने अपने प्लेटफार्म पर फेक न्यूज को रोकने के लिए हर सर्च पोस्ट को 'About this Result' से जोड़ने का फैसला किया है। गूगल के इस नए फीचर से पता चल सकेगा कि किसी भी यूजर का सर्च रिजल्ट कितने हद तक सही है और उसे पढ़ा गया है या नहीं।

गूगल से पहले फेक खबरें या अफवाहों को रोकने के लिए ट्विटर और फेसबुक ने अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर नए फीचर जोड़े हैं। जहां एक ओर ट्विटर ने अपने प्लेटफॉर्म पर 'मैनिपुलेटेड मीडिया' नाम का एक ट्वीट लेबल शुरू किया है, तो वहीं फेसबुक भी कई सारे टूल्स का इस्तेमाल करता है। हालांकि इसके बावजूद भी फेक न्यूज पर लगाम नहीं लगाया जा पा रहा है।

इस तरह से काम करेगा गूगल का फीचर

बता दें कि गूगल ने अपने इस नए फीचर के बारे में I/O 2021 इवेंट में बताया था। गूगल के अनुसार, यूजर्स के पास इस फीचर के जरिए सर्च रिजल्ट के और भी सोर्स के ऑप्शन होंगे। हालांकि, अधिक से अधिक सटिकता हासिल करने के लिए गूगल विकिपीडिया के साथ मिलकर इस पर काम कर रहा है।

यह भी पढ़ें:- फेक न्यूज से बचने के लिए ट्विटर कर रहा तैयारी, नई पहल के जरिए दूर होगी परेशानी

इस नए फीचर के आने के बाद सर्च में जो भी सामने आएगा, उसकी तुरंत जांच की जा सकेगी। साथ ही यूजर्स ये भी देख पाएंगे कि एक वेबसाइट खुद को कैसे डिस्क्राइब करती है। वहीं, वेबसाइट के साथ एक विकिपीडिया पेज भी जुड़ा होगा।

जानकारी के अनुसार, इस फीचर को गूगल ने थर्ड पार्टी सेवाओं में प्रयोग करने के लिए फैसला लिया है। खासकर, पोलाइटीफैक्ट और स्नोप जोकि फैक्ट चेकिंग का काम करते हैं। जानकारी के मुताबिक, अब विकिपीडिया पर किसी भी वेबसाइट की पूरी जानकारी ताजा अपडेट्स के साथ आपको मिल जाएगी।



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Sunday, May 23, 2021

तीसरी शताब्दी से हो रहा है मीम्स का इस्तेमाल

आपको 'पारी हो रही है'(hamari pawri ho rahi hai), '2020 कैलेंडर मीम' या 'ब्लिकिंग गाय मीम' याद हैं? दरअसल, ये सभी मीम्स (memes) हैं जो बीते कुछ समय से इंटरनेट पर छाए रहे हैं। मीम आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं और सोशल मीडिया तो इनके बिना अधूरा ही है। अखबार, टीवी चैनलों से लेकर हमारे घर और समाज हर जगह मीम्स ने अपनी पैठ बना ली है। इन मीम्स की शुरुआत मूल रूप से विचारों के रूप में हुई थी जो बाद में तब तक प्रसारित होते रहे जब तक कि जब तक वे एक निश्चित देश या संस्कृति के माध्यम से पूरी दुनिया में चर्चित नहीं हो गए। आइएजानते हैं मीम्स के इतिहास और 2021 तक के सफर के बारे में-

तीसरी शताब्दी से हो रहा है मीम्स का इस्तेमाल

मीम्स का इतिहास
पीबीएस डॉट ओआरजी (PBS.org) के अनुसार, विकासवादी विचारधारा के जीवविज्ञानी रिचर्ड डॉकिन्स का कहना है कि मीम्स वास्तव में सूचनाओं के आदान-प्रदान की हल्की-फुल्की हास्यात्मक व्यंग्य शैली है। रिचर्ड ने इन्हें मीम्स कहा जो कि यूनानी भाषा के शब्द 'मिमेमे' से आया था, जिसका ग्रीक भाषा में शाब्दिक अर्थ 'जीन' होता है। रिचर्ड ने मीम्स को 'सांस्कृतिक जीन' भी कहा है। रिचर्ड का कहना है कि, कोई आइडिया, आइडियल, कल्चर यहां तक कि रीति-रिवाज भी किसी वायरस की तरह खुद को दोहराते हैं। वे नकल के माध्यम से, शेयर करने और बार-बार दोहराव के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति और एक देश से दूसरे देश तक प्रसारित होते हैं। हालांकि, प्रत्येक मीम एक विचार है, लेकिन सभी विचार तकनीकी रूप से मीम नहीं बनते।

तीसरी शताब्दी से हो रहा है मीम्स का इस्तेमाल

तीसरी सदी के पहले से हो रहा उपयोग
आज भले ही मीम्स, विभिन्न भावनाओं, विचारों यहां तक कि सिर्फ सादे चुटकुलों के भी दृश्यात्मक प्रस्तुतिकरण बन गए हों, लेकिन ये इतने पुराने हैं कि आज की तकनीकी पीढ़ी के रूप में हम कल्पना भी नहीं कर सकते। पुरातत्वविदों ने कथित तौर पर वर्तमान तुर्की के एक प्राचीन शहर एंटिओक से एक मोजाइक चित्र (चमकीले पत्थरों, कांच और मिट्टी के छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़कर बनाई गई कोई आकृति या पैटर्न) ढूंढा है जो कार्बन डेटिंग के आधार पर तीसरी सदी ईसा पूर्व (3 B.C) से भी पहले का है। यह मोजाइक तीन अलग-अलग फ्रेम से बना था, जो स्नान से जुड़े किसी खास दृश्य को दर्शाता था।

तीसरी शताब्दी से हो रहा है मीम्स का इस्तेमाल

'द ऑरिजनल योलो' था मोजाइक
मोजाइक के पहले फ्रेम में एक नौकर स्नान की तैयारी कर रहा है, दूसरे में एक युवक भाग रहा है और नौकर उसे पकडऩे के लिए उसके पीछे भाग रहा है और तीसरे फ्रेम में वह युवक जाम पकड़े पजर आ रहा है। इसका संदेश था कि 'खुश रहो और अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जियो'। इस कहानी के अनुसार मरना तो एक दिन सभी को है, इसलिए जब तक जिंदा हैं, अपनी खुशी से जैसे चाहें वैसे जिएं। यह वास्तव में दुनिया का पहला 'योलो' (very first YOLO or You Only Live Once) हो सकता है, जो एक समय दुनियाभर के देशों में बहुत लोकप्रिय था।

the Meaning of 'YOLO' for Those Who Have No Idea or Real Time Object Detection

तीसरी शताब्दी से हो रहा है मीम्स का इस्तेमाल

कैसे-कैसे मीम्स
अब तो जानवरों, टीवी शो और फिल्मों पर भी बहुत सारे मीम्स हैं। अब इंटरनेट पर लाखों मीम्स हैं और प्रतिदिन हजारों और अपलोड हो रहे हैं। जब भी ऑनलाइन कुछ मजेदार घटित होता है, तो वे आम तौर पर मीम बन जाते हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर मीम्स प्रशंसकों के ग्रुप्स भी बने हुए हैं, जो अपने पसंदीदा मीम्स साझा करते हैं। ऐसा ही एक ग्रुप है फेसबुक का 'द ऑफिस एडिक्ट्स' ग्रुप जो विशेष रूप से शो के बारे में मेम साझा करता है।

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Wednesday, May 19, 2021

NFT आर्ट के रूप में बिकेगा 14 साल पुराना यूट्यूब वीडियो

फरवरी 2005 को शुरू हुए वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब (youtube) पर सबसे पहला वीडियो इसके को-फाउंडर जावेद करीम ने अपलोड किया था। उन्होंने 15 सेकंड का एक वीडियो 'मी एट जू' अप्रेल 20005 में अपलोड किया था जिसे 13 मई, 2021 तक 1 करोड़ 65 लाख (165 मिलियन) से ज्यादा लोग देख चुके हैं। सोशल मीडिया उस समय इतना फास्ट नहीं था और बहुत कम वीडियो अपलोड और वायरल होते थे।

एनएफटी आर्ट के रूप में बिकेगा 14 साल पुराना यूट्यूब वीडियो

ऐसा ही 55 सेकंड का एक और वीडियो था 'चार्ली बाइट माय फिंगर अगेन' (the once-viral video popular "Charlie bit my finger..again") जो 2007 में यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर खूब वायरल हुआ था। इस फोटो में दो भाई नजर आ रहे हैं। दोनों भाई-बहन हैरी और चार्ली डेविस-कैर ने अब इस वीडियो को एनएफटी कलाकृति (NON FUNGIBLE TOKEN or NFT) के रूप में बेचने का निर्णय किया है।

एनएफटी आर्ट के रूप में बिकेगा 14 साल पुराना यूट्यूब वीडियो

14 मई से शुरू हुई है नीलामी
हाल ही 14 साल पूरे होने पर भाई-बहन ने इस क्लिप को 14 मई से ऑनलाइन नीलामी शुरू की है। जैसे ही कोई खरीदार मिल जाता है, यूट्यूब मूल क्लिप को आधिकारिक रूप से अपने प्लेटफॉर्म से हटा देगा। इस क्लिप को यूट्यूब पर अब तक 88.1 करोड़ (881 मिलियन) बार देखा चुका है, इतना ही नहीं, 22 लाख (2.2 मिलियन) लोगों ने इसे पसंद भी किया है। इस वीडियो में हैरी उस समय 3 साल के और चार्ली 1 साल की थी।

एनएफटी आर्ट के रूप में बिकेगा 14 साल पुराना यूट्यूब वीडियो

क्लिप खरीदने वाले एनएफटी बायर को इस वीडियो का अपना वर्जन बनाने का अधिकार भी मिलेगा वह भी ऑरिजनल एक्टर्स (हैरी और चार्ली) के साथ। दोनों का मानना है कि उनकी यह क्लिप आज मीमर्स और वीडियो डवलपर्स के लिए एक एनएफटी प्रॉपर्टी हो सकती है। इससे पहले 'ओवरली अटैच्ड गर्लफ्रेंड' (OVERLY ATTACHED GIRLFRIEND) वीडियो को भी एनएफटी के रूप में 3एफ म्यृूजिक कंपनी ने 3 करोड़ रुपए (4,11,000 डॉलर्स) में खरीदा था। एलन मस्क (Ellon Musk) भी अपनी एक एनएफटी 42 करोड़ रुपए (420 मिलियन) में बेच चुके हैं।

एनएफटी आर्ट के रूप में बिकेगा 14 साल पुराना यूट्यूब वीडियो

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Friday, May 14, 2021

पूरा जापान जिस फीमेल बाइकर का दीवाना वह पुरुष निकला

सोशल मीडिया की दुनिया देखने में जितनी हसीन लगती है दरअसल उतनी होती नहीं है। यहां लोअकेलापन बांटने आते हैं लेकिन अक्सर धोखे का शिकार हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही बीते दिनों जापान में देखने को मिला। यहां, जापानी युवा ट्विटर पर एक खूबसूरत फीमेल बाइकर के दीवाने थे। यह लड़की रोज़ सुपरबाइक चलती हुयी अपनी शानदार सेल्फीज़ पोस्ट करती जिस पर लाखों लोग कमैंट्स करते। धीरे धीरे यह लड़की सोशल मीडिया और ट्विटर पर जापानी युवाओं में पॉपुलर हो गयी। लेकिन इसी साल मार्च में ट्विटर पर लाखों जापानियों का उस समय दिल टूट गया जब उन्हें पता चला की जिस लड़की की खूबसूरत अदाओं पर वे मर मिटने को तैयार थे वह दरअसल कोईलड़की नहीं बल्कि एक पुरुष था। आइये जानते हैं पूरा माजरा....

दरअसल, जापान की सोया नो सोही, ट्विटर पर सैकड़ों जापानियों की पसंदीदा फीमेल बाइकर हैं। उन्हें फॉलो करने वाले उनके पीछे दीवाने हैं। लेकिन मार्च में उनके चाहने वालों की संख्या और बढ़ गई। दरअसल, सोया कोई लड़की नहीं बल्कि 50 साल के यासुओ नाकाजिमा थे।

पूरा जापान जिस फीमेल बाइकर का दीवाना वह निकला पुरुष

यासुओ नाकाजिमा फेस ऐप की मदद से हर फ्रेम में चेहरा लड़की से रिप्लेस कर देते थे। बीते गर्मियों में उन्होंने 300 से ज्यादा सेल्फी सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं, जो वायरल हो गईं। इस सच्चाई का पता लगने पर उनके फैंस की तादाद और बढ़ गई है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि कोई भी सोशल मीडिया पर उनके जितनी उम्र के व्यक्ति की पोस्ट पढऩे में रुचि नहीं लेता।

पूरा जापान जिस फीमेल बाइकर का दीवाना वह निकला पुरुष

यासुओ नाकाजिमा कहते हैं की जब हम बच्चे होते हैं तो बड़े हमें गलतियों पर डांटते हैं लेकिन इस उम्र में ऐसी किसी बात का दर नहीं। मैं अपनी ज़िंदगी के सबसे बेहतरीन समय से गुज़र रहा हूँ। जहां तक बात है लोगों को मूर्ख बनाने की तो मैंने सिर्फ अपना चेहरा बदला है लेकिन वास्तव में यह मैं ही हूँ इसलिए मुझे दोष न दें। इस उम्र में आकर युवाओं के पास हम जैसे प्रौढ़ पीढ़ी केलोगों की बात सुनने का वक्त ही कहाँ है? अपनी बात उन तक पहुंचाने और यह बताने की हम में अब बी ज़िंदगी और रोमांच बाकी है मैंने यह कदम उठाया है।



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Wednesday, May 12, 2021

अब Google Maps से मिलेगी अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में जानकारी

टेक दिग्गज कंपनी गूगल नए-नए फीचर्स पर काम करती रहती है। अब कोरोना की इस दूसरी लहर में लोगों की परेशानी को देखते हुए गूगल ने अपने गूगल मैप्स में एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रही है। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपा रखा है। लोग ईलाज के लिए एक अस्पताल ये दूसरे अस्पताल में चक्कर काट रहे हैं। लोगों को बेड नहीं मिल रहे हैं और ऑक्सीजन की किल्लत हो रही है। वहीं कई मरीजों को यह पता नहीं होता है कि कौन से अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन उपलब्ध है। अब आपको गूगल मैप्स की सहायता से पता चल जाएगा कि कहां पर ये सुविधाएं उपलब्ध है।

नए फीचर पर टेस्टिंग
दिग्गज टेक गूगल ने कहा है कि वह चुनिंदा जगहों पर बेड और चिकित्सीय ऑक्सीजन की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी देने के लिए गूगल मैप्स में एक नई सुविधा का परीक्षण कर रही है। इस फीचर के जािए लोग इससे जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और दूसरों के साथ भी शेयर कर सकते हैं। गूगल ने एक बयान में कहा कि कंपनी मैप्स में सवाल-जवाब का इस्तेमाल कर एक नए फीचर का परीक्षण कर रही है। इस सुविधा के जरिए लोग चुनिंदा जगहों पर बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में पूछ सकेंगे।

यह भी पढ़ें— WhatsApp के जरिए कैसे ढूंढे घर के नजदीक कोविड वैक्सीनेशन सेंटर

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इस तरह काम करेगा फीचर
गूगल मैप्स के इस नए फीचर में जब कोई यूजर किसी हॉस्पिटल या ऑक्सीजन सप्लाई वाली जगह पर होगा, तो गूगल मैप्स उस यूजर से बेड और मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता से जुड़े सवाल पूछेगा। इसके बाद उस यूजर द्वारा दी गई जानकारी का उपयोग दूसरे लोग कर पाएंगे और उन्हें उस अस्पताल या ऑक्सीजन सप्लायर के बारे में जानकारी मिल जाएगी। हालांकि इस जानकारी का इस्तेमाल करने से पहले उसे वेरिफाई करना जरूरी होगा।

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तीन क्षेत्रों में काम कर रही गूगल
टेक दिग्गज गूगल ने कहा कि उसकी टीमें तीन क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ काम कर रही हैं। इनमें यह सुनिश्चित करना कि लोग सबसे नई और अधिकृत सूचना पाएं। दूसरा लोगों को सुरक्षा एवं टीकाकरण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश मिले। साथ ही प्रभावित समुदायों, स्वास्थ्य अधिकारियों और दूसरे संगठनों के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध हो सके।



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Sunday, May 9, 2021

गूगल यूजर्स की बढ़ा रहा है सिक्योरिटी, अब अकाउंट नहीं हो सकेगा हैक!

नई दिल्ली। इंटरनेट पर कुछ भी सर्च करने के लिए सभी लोग गूगल का सहारा लेते हैं। आज के समय में हम बड़े पैमाने पर गूगल सर्च इंजन का इस्तेमाल करते हैं। किसी भी सवाल का जवाब जानने के लिए लोग तुरंत गूगल सर्च करते हैं और इसका सटीक जवाब मिलता है। दुनिया के सबसे लोकप्रिय इंटरनेट सर्च इंजन गूगल के यूजर के लिए जल्द ही सिक्योरिटी बढ़ने जा रही है। गूगल अपने यूजर्स की सिक्योरिटी चिंता को कम करने के लिए एक नया फीचर लॉन्च करने जा रहा है। इस फीचर की मदद से यूजर अपने आपको टू स्टेप वेरीफिकेशन पर एनरोल हो जाएंगे। अब यूजर्स के अकाउंट को हैक नहीं किया जा सकेगा। गूगल ने हाल ही में इसके बारे में जानकारी दी है। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर यूजर्स की सिक्योरिटी को लेकर कई प्रकार के सवाल उठाए गए थे।

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कई अकाउंट्स के लिए एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल
गूगल के प्रोडक्ट मैनेजमेंट, आइडेंटिटी एंड यूजर सिक्योरिटी डायरेक्टर मार्क रिशर ने एक ब्लॉग में बताया कि आपको पता नहीं है लेकिन पासवर्ड आपकी ऑनलाइन सिक्योरिटी के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसको चुराना भी बहुत आसान है। उन्होंने कहा कि इसको याद रखना और इसे संभाल कर रखना काफी मुश्किल है। बहुत से लोग मानते हैं कि पासवर्ड जितना अधिक हो यानी जितना लंबा और जटिल हो सुरक्षित रहता है। लेकिन बहुत से मामलों में यह बहुत ही जोखिम भरा है। उन्होंने कहा अमेरिका में 60 प्रतिशत यूजर के एक ही पासवर्ड के कई साइड पर इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। इससे एक भी साइट का पासवर्ड हैक होने पर सभी अकाउंट के लिए खतरा हो सकता है।

एक बार में 1000 पासवर्ड तक अपलोड करने की सुविधा
बता दे कि गूगल का टू स्टेप वेरीफिकेशन पहले से ही मौजूद है। इससे एक्टिवेट करने का विकल्प है। गूगल अब इस फीचर को अनिवार्यता बनाने जा रहा है। हालांकि इसके बारे में अभी तक कोई तारीख तय नहीं की है। गूगल ने हाल ही में एक नया पासवर्ड इंपोर्ट फीचर लॉन्च किया है। जिसमें यूजर को जिसमें यूजर्स को विभिन्न थर्ड पार्टी साइड से एक बार में 1000 तक पासवर्ड गूगल के मैनेजर अपलोड करने की सुविधाएं दी जा रही है। टू स्टेप वेरीफिकेशन में पासवर्ड इंपोर्ट पासवर्ड मैनेजर और सिक्योरिटी चेक अब जैसे कहीं ऑनलाइन सिक्योरिटी मिलेगी। इसके साथ ही पासवर्ड को याद रखने में भी आसानी होगी।



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Wednesday, May 5, 2021

WhatsApp के जरिए कैसे ढूंढे घर के नजदीक कोविड वैक्सीनेशन सेंटर

भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपा रखा है। इस बीच देश में कोविड वैक्सीनेशन भी जारी है। बता दें कि देश में 1 मई से 18 से 44 साल के लोगों का भी कोविड वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है। कोविड वैक्सीन लगवाने के लिए सभी को पहले रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। हालांकि वैक्सीनेशन के लिए आपको यह मालूम होना चाहिए कि आपके घर के पास कौन—कौन से सेंटर हैं, जहां जाकर आप कोविड वैक्सीनेशन लगवा सकते हैं। इसके लिए कुछ ऐप्स हैं, जिनके जरिए आप कोविड वैक्सीनेशन का रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। अगर आपने रजिस्ट्रेशन करा लिया है और आपको यह पता नहीं है कि आपके घर के आस-पास कौन-कौन से सेंटर हैं, जहां आप वैक्सीन लगवा सके हैं तो इस काम में अब WhatsApp आपकी मदद करेगा।

WhatsApp बताएगा वैक्सीनेशन सेंटर के बारे में
अगर आपको भी घर के आस—पास वैक्सीनेशन सेंटर तलाशने में समस्या हो रही है तोे आप WhatsApp के जरिए आसानी से वैक्सीनेशन सेंटर ढूंढ सकते हैं। My Gov India ने सोशल मीडिया के बारे में इस बारे में जानकारी दी है कि यूजर्स अब व्हाट्सएप के जरिए वैक्सीनेशन सेंटर का पता लगा सकते हैं। सरकार ने लिखा है कि व्हाट्सएप पर My Gov Corona Helpdesk यूजर्स को नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर के बारे में बताएगा। खास बात यह है कि यह हेल्पडेस्क हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं को सपोर्ट करता है।

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फॉलो करने होंगे ये स्टेप्स
व्हाट्सएप पर नजदीकीे कोविड वैक्सीनेशन सेंटर का पता लगाने के लिए आपको कुछ स्टेप्स फॉलो करने होंगे। जानते हैं उनके बारे में। सबसे पहले आपको अपने फोन में 9013151515 नंबर को सेव करना होगा। इसके बाद आप बाद अपने फोन में WhatsApp ओपन कीजिए। इसके बाद आपने जो नंबर सेव किया है, उसके साथ चैट बॉक्स ओपन करें। इसमें आपको Hi, Hello या Namaste लिखकर भेजना होगा। जवाब में आपके पास 9 ऑप्शन आएंगे।

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ऐसे मिलेगी सेंटर की जानकारी
अगर आप वैक्सीनेशन सेेंटर के बारे में पता करना चाहते हैं तो आपको 1 लिखकर भेजना होगा। इसके बाद आपको चैट बॉक्स में 2 ऑप्शन रिप्लाई में मिलेंगे। सेंटर की जानकारी के लिए फिर से 1 लिखकर भेजना होगा। इसके बसद आपको पिन कोड डालने के लिए कहा जाएगा। जैसे ही आप अपने क्षेत्र का पिन कोड लिखकर भेजेंगे तो आपके अपने घर के नजदीक स्थित कोविड वैक्सीनेशन सेंटर की जानकारी मिल जाएगी। इतना ही नहीं अगर आपने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो आपको चैटबॉट CoWIN पोर्टल का लिंक भी देगा, जिसके जरिए आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।



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