पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse Gases) के उत्सर्जन से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) दिनों-दिन बढ़ रहे हैं। पेरिस समझौते (Paris Climate Conclave) के तहत दुनिया भर के देशों ने इस कार्बन उत्सर्जन को 2030 तक प्रत्येक साल 1 डिग्री तक कम करने का लक्ष्य रखा है लेकिन अभी तक कोई भी देश इस लक्ष्य के आस-पास भी नहीं पहुंच सका है। वहीं हाल के कुछ नए शोधों मेंवैज्ञानिकों ने प्रति वर्ष 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर से बढऩे का दावा किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए परंपरागत तरीकों (Traditional Ways of Reducing Pollution) के साथ इनोवेटिव सोच (Innovative Idea's) की भी जरुरत है। कुछ ऐसी ही कोशिश कर रहे हैं पोलैंड (Poland) की राजधानी वारसा में स्थानीय निवासी और प्रशासन वो भी शहर को पहले से ज्यादा खूबसूरत बनाते हुए। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।
वॉल पेंटिंग से सजा रहे शहर
राजधानी वारसा में स्थानीय प्रशासन और इंजीनियर शहर की बहुमंजिला इमारतों की बाहरी दीवारों पर एक खास किस्म के वॉल पेंटिंग (Wall Painting) बना रहे हैं। पर्यावरण बचाने के लिए शुरू हुए 'सिटी फॉरेस्ट मूवमेंट' के अंतर्गत उकेरे जा रही इन वॉल पेंटिंग को शुद्ध आबो-हवा के लिए बनाया जा रहा है। पोलिश कलाकार मैकिएक पोलाक और डेविड रिस्की ने इन वॉल पेंटिंग्स को डिजाइन किया है। उन्होंने चित्रों के साथ पर्यावरण को बचाने केसंदेश भी उकेरे हैं। कलाकारों को विश्वास है कि इससे लोगों को पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा मिलेगी।
खास स्मॉग पेंट का उपयोग
बहुमंजिला इमारतों की बाहरी दीवारों पर बनाई गई इन वॉल पेंटिंग्स को विशेष 'सन एक्टिवेटेड स्मॉग क्लीनिंग पिग्मेंट' (Sun Activated Smog Cleaning Pigment) से बनाया जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि धूप खिलते ही पेंट में मौजूद सन एक्टिवेटेड स्मॉग क्लीनिंग पिग्मेंट के कण हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड सहित अन्य जहरीले तत्वों को अवशोषित करना शुरू कर देता है। अच्छी बात ये है कि ये पेंटिंग्स इतनी खूबसूरत हें कि इन्हें देखने वाले घंटो इनकी तस्वीरें लेता रहता है।
स्पोट्र्स कंपनी ने शुरू किया अभियान
'सिटी फॉरेस्ट मूवमेंट' का सारा श्रेय यूं तो पोलैंड की स्पोट्र्स कंपनी कॉन्वर्स ने की है। लेकिन इसमें स्थानीय प्रशासन और नागरिकों ने भी पूरा साथ दिया है। अभियान के तहत टाइटेनियम डाइऑक्साइड और फोटोकैटेलिटिक पेंट की मदद से इन वॉल पेंटिंग्स को दीवारों पर जीवंत किया जाता है। दरअसल, इन दोनों तत्वों में वायुप्रदूषकों को आकर्षित करने का गुण होता है। यह एक रासायनिक प्रक्रिया के जरिये प्रदूषण के कणों को नाइट्रेट में बदल देते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य कें लिए ज्यादा नुकसानदेह नहीं है।
720 पेड़ जितना जहर सोख रहे
कंपनी के इंजीनियर्स और इस पेंट को बनाने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि टाइटेनियम डाइऑक्साइड और फोटोकैटेलिटिक पेंट से शहर की दीवार पर बना हर वॉल पेंटिंग 720 पेड़ों के जितना हवा में मौजूद हानिकारक तत्व और ग्रीनहाउस गैसों जैसे कार्बन पार्टिकल्स को अवशोषित कर लेती है। अब इस अभियान से प्रेरित हो पोलैंड के पड़ोसी देश भी इन वॉल पेंटिंग्स से अपने शहर को सजाने की योजना बना रहे हैं। इनसे करीब तीन लाख पेड़ों जितना लाभ हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
5 साल तक सक्रिय रहता है पेंट
पर्यावरण को बचाने की इस मुहिम में अकेले पोलैंड की स्पोट्र्स कंपनी कॉन्वर्स ही नहीं है। अन्य देशों में भी इस तरह की मुहिम शुरू हो चुकी है जहां कलाकार प्रशासन की मदद से हवा में घुले जहर को सोखने के लिए खास तरह के पेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा ही इनोवेशन किया है डच डिजाइनर स्टूडियो रूसेगार्डे ने मॉन्टेरी ने जिन्होंने फोटोकैटेलिटिक पेंट की मदद से खास बिलबोर्ड बनाए हैं। हर बिलबोर्ड छह घंटे में 30 पेड़ों के जितनी कार्बन और डस्ट पार्टिकल जैसे हानिकारक तत्व सोख सकता है। इतना ही नहीं यह खास पेंट पांच साल तक हवा में घुले जहर को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
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