Friday, July 31, 2020

शनिवार को ऐसे करें पीपल की पूजा, कभी नहीं होगी पैसों की किल्लत

पीपल के पेड़ को हिंदू धर्म में शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, पीपल में देवताओं का वास होता है और शनिवार के दिन इसकी पूजा का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, शनिवार के दिन सुबह पेड़ में जल...

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Tuesday, July 28, 2020

सोशल मीडिया पर इस साल ढाई घंटे बढ़ा मल्टीनेटवर्किंग

बीते कुछ सालों में सामाजिक नेटवर्क ने मार्केटिंग की प्रकृति को बदल कर रख दिया है। January-2020 तक हुए नवीनतम वैश्विक सामाजिक मीडिया सांख्यिकी अनुसंधान के अनुसार इन सोशल मीडिया ऐप्स (Social Media Apps) की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। ग्लोबल वेबइंडेक्स (Global Web Index) के अनुसार सोशल नेटवर्क अलग-अलग देशों की संस्कृति और सामाजिक ढाँचे (जनसांख्यिकी) के अनुपात में लोकप्रियता के मापदंडों पर भिन्न हो सकती है। वेबइंडेक्स के अनुसार आज सोशल मीडिया यूजर 8 सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप की सहायता से औसतन 2 घंटे और 24 मिनट प्रतिदिन मल्टीनेटवर्किंग पर खर्च कर रहे हैं। इन ऐप्स की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि महज पांच साल पहले लॉन्च हुआ चीनी कंपनी बाइट डांस (bitedance) का शॉर्ट वीडियो मैसेजिंग ऐप टिकटोक (tiktok) अब हमारे सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्क के शीर्ष 10 में शामिल है। अकेले भारत में इसके 12 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर थे।

सोशल मीडिया बनाम गलोबल इंटरनेट यूज
जहां कुछ देश सोशल मीडिया उपयोग में बहुत आगे हैं वहीं पश्चिम के बहुत से देश सोशल मीडिया के जरिए मल्टीनेटवर्किंग में अब भी बहुत पीछे छूट गए। ऐसा क्यों? इसका अंदाजा हर साल डेटारिपोर्टल की ओर से अपलोड किया जाने वाला वैश्विक आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 30 जनवरी को प्रकाशित डेटा रिपोर्टल के डिजिटल-2020 ग्लोबल डिजिटल ओवर-व्यू आंकड़ों के अनुसार-
-450 करोड़ (4.5 बिलियन) से अधिक लोग इस समय इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं दुनिया में
-09 फीसदी (321 मिलियन नए यूजर) की दर से जनवरी 2019 से अब तक 380 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है
-60 फीसदी आबादी पहले से ही इंटरनेट से जुड़े हुए हैं दुनिया के, दुनिया की कुल आबादी के आधे से अधिक लोग इस साल के मध्य तक सोशल मीडिया का उपयोग करने लगे हैं
-49 फीसदी सक्रिय इंटरनेट यूजर हैं इन आंकड़ों में जो बताते हैं कि 2019-2020 के बीच सोशल मीडिया उपयोगकर्ता लगभग 10 प्रतिशत बढ़ गए
-71 फीसदी पूर्वी एशिया में, 69 फीसदी उत्तरी अमरीका में, 67 फीसदी दक्षिणी अमरीका और उत्तरी यूरोप में और 59 फीसदी की दर से सोशल मीडिया ने अपने पांव जमाए हैं। सबसे कम 39 फीसदी उत्तरी अफ्रीका और 6 फीसदी मध्य अफ्रीका

सबसे लोकप्रिय सामाजिक नेटवर्क (उम्र और gender के आधार पर)
यह संकलन व्हाट्सएप (whatts app), फेसबुक मैसेंजर (facebook messanger) और वीचैट जैसे मैसेंजर प्लेटफॉर्म के महत्व को दर्शाता है। यह मुख्य सोशल नेटवर्क में से एक टिकटोक की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता पर भी रोशनी डालता है। द सोशल बेकर्स सोशल मीडिया ट्रेंड रिपोर्ट से पता चलता है कि फेसबुक (facebook) और इंस्टाग्राम (instagram) मिलेनियल्स (millenials) और जनरेशन जेड (Generation Z) की मार्केटिंग के लिए दो सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्क हैं।
-1/4 अमरीकी आबादी बिजनेस नेटवर्किंग के लिए लिंक्डइन (Linkedin) का उपयोग करती है, फेसबुक और यू-ट्यूब सूची में दूसरे नंबर पर हैं, प्यू इंटरनेशनल सोशल मीडिया फैक्टशीट के अनुसार
-12 से 15 साल के किशोरों ने फेसबुक के उपयोग में जबरदस्त कमी की है। इस आयु वर्गमें 2017 में 40 फीसदी और 2018 में 31 फीसदी फेसबुक प्रोफाइल में गिरावट दर्ज की गई है। (ऑफकॉम, यूके के अनुसार)
-14 से 23 फीसदी की वृद्धि हुई इसी दौरान अमरीका में 12 से 15 साल के किशोरों में, स्नैपचैट (snapchat) ने भी 31 फीसदी की वृद्धि दर्ज की

सोशल मीडिया पर इस साल ढाई घंटे बढ़ा मल्टीनेटवर्किंग

सबसे तेज बढ़ता हुआ सोशल मीडिया नेटवर्क
-फेसबुक: 2 अरब (2449 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर
-यू-ट्यूब: 1.8 अरब (2000 मिलियन) से ज्यादा एक्टिवयूजर
-वॉट्सऐप: 1.5 अरब (1500 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर
-एफबी मैसेंजर: 1.3 अरब (1300 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर
-वीचैट: 1 अरब (1151 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर
इंस्टाग्राम: 1अरब (1000 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर
-टिकटॉक- 80 करोड़ (800 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर
-ट्विटर: 50 करोड़ (340 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर
-रेडइट- 50 करोड़ (430 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर
-पिनट्रेस्ट: 50 करोड़ (322 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर

शॉपिंग आदतों पर सोशल मीडिया का प्रभाव
उत्पादों के चुनाव और किसी भी तरह की सर्विस का चयन करते समय सोशल मीडिया का उपयोग और ब्रांड्स की संवेदनशीलता का बहुत असर होता है। ग्लोबल वेब इन्डेक्स के अनुसार 2020 के सोशल मीडिया ट्रेंड पर किए गए शोध से पता चलता है कि सोशल मीडिया यूजर की खरीदारी संबंधी आदतों पर गहरा प्रभाव डालता है। यह दर्शाता है कि सोशल नेटवर्क के माध्यम से ऑनलाइन उत्पादों पर शोध करने के लिए युवा आयु वर्ग विशेष रूप से उत्सुक हैं। ऑर्गेनिक और पेड पोस्ट दोनों ही इस प्रक्रिया का समर्थन करते हैं। 16 से 64 वर्ष के 2.84 लाख इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पर किए शोध में यह बात सामने आई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा समय बिता रहे हैं
-2.24 घंटे बढ़ गया है औसतन प्रतिदिन बिताया जाने वाला समय इन प्लेटफॉम्र्स पर, ग्लोबल वेब इन्डेक्स के अनुसार
-6.2 सोशल मीडिया अकाउंट थे औसतन एक व्यक्ति के वल्र्ड वाइड 2015 में जो 2019 में बढ़कर 8 हो गए हैं
-3.80 बिलियन या 380 करोड़ है दुनिया भर में एक्टिव इंटरनेट यूजर की संख्या
-49 फीसदी दुनिया की कुल आबादी का सोशल मीडिया पर सक्रिय है
-9.2 फीसदी की वार्षिक दर से सोशल मीडिया यूजर की संख्या बढ़ रही है
-375 करोड़ or 99 फीसदी से ज्यादा सोशल मीडिया यूजर अपने मोबाइल का उपयोग करते हैं
-18 फीसदी बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट है 8 से 11 साल के बच्चों के
-12 से 15 साल के 59 फीसदी किशोरों के भी सोशल मीडिया पर अकाउंट बने हुए हैं



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Sunday, July 26, 2020

क्या भविष्य में इंटरनेट 'चीन' के कब्जे में होगा?

भारत के टिकटोक (India Ban 59 Chinese Apps Including Tiktok) समेत 58 चीनी सोशल मीडिया ऐप पर प्रतिबंध की तारीफ करते हुए अमरीकी संसद (American Cenate) ने भी इस सप्ताह चीन (China) की बढ़ती सोशल मीडिया (Social Media) ताकत को रोकने के लिए एकमत से सहमती जताई। वहीं ब्रिटेन (Britain) ने अपने 5जी नेटवर्क (5G Network) से चीनी कंपनी हुआवेई (Huwei) को प्रतिबंधित कर यह साबित कर दिया है कि यूरोपीय और पश्चिमी देश (Europian & Western Countries) चीनी की लगातार बढ़ती प्रौद्योगिकी शक्ति (Technology Power) को लेकर चिंतित है। अमरीकी संसद की विदेश संबंध समिति के सबसे वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि चीन अब अमरीका से 'साइबर डोमेन' (Cyber Domain) के भविष्य को छीन लेने की तैयारी में है।' रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन डिजिटल दुनिया में घरेलू और विदेशी धरती पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाए रखता है तो चीन अमरीका और उसके सहयोगी देशों को पीछे छोड़कर भविष्य में इंटरनेट का नियंत्रक होगा।

क्या भविष्य में इंटरनेट 'चीन' के कब्जे में होगा?

तकनीक के दम पर नया शासन मॉडल
रिपोर्ट के अनुसार चीन ने अपने देश की टेक कंपनियों से बड़े पैमाने पर 'शासन का एक ऐसा नया मॉडल बनाने की मांग की है जहां वह 'मॉस सर्विलांस टेक्नोलॉजी और इंटरनेट' से मिलने वाली सूचना एवं सामग्री तक लोगों की पहुंच को नियंत्रित कर सके।' ताकि इसके माध्यम से वह 'डिजिटल डोमेन' पर काबिज हो शासन का एक नया मॉडल खड़ा कर सके। गौरतलब है कि चीन में अमरीकी सर्च इंजन गूगल (Google), सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (twitter) और फेसबुक (facebook) प्रतिबंधित हैं। रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ सालों से चीन ने देश और विदेश में प्रौद्योगिकी में खरबों रुपए का निवेश किया है जो उसे ज्यादा नियंत्रण देता है। इसमें फेस रिकग्निशन (face recognition) तकनीक और अन्य निगरानी तकनीक शामिल हैं। यह तकनीक अब वेनेजुएला, उज्बेकिस्तान, जिम्बाब्वे जैसे दुनिया भर के अनेक देशों को निर्यात की जा रही है। गौरतलब है कि चीन में शी जिनपिंग (Xi Jinping) की कम्यूनिस्ट पार्टी (Chinese Communist Party) पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में बसे मुस्लिम अल्पसंख्यक आबादी की डिजिटल निगरानी का विस्तार कर रही है। इतना ही नहीं यहां के स्थानीय लोगों के डीएनए नमूने, फिंगरप्रिंट्स व उंगलियों के निशान, आवाज के नमूने और ब्लड ग्रुप जैसे डेटा एकत्र कर रही है।

क्या भविष्य में इंटरनेट 'चीन' के कब्जे में होगा?

50 चीनी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट
अमरीकी वित्त विभाग ने हाल ही 11 चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया है जिससे अमरीका में चीन की प्रतिबंधित कंपनियों की संख्या अब 50 हो गई है। रिपोर्ट के जरिए अमरीका और उसके सहयोगी देशों से चीन द्वारा डिजिटल प्रौद्योगिकियों का गलत उपयोग करने के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। कोरोनोवायरस में संक्रमण की जांच की आड़ में चीन ने बड़ी मात्रा में अपने नागरिकों का डेटा संग्रह किया है। इसका उपयोग सरकार अपने आलोचकों की पहचान करने के लिए कर सकती है। हाल ही हांगकांग में चीन की ओर से पारित नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून इसी दबंगई की एक बानगी है।

क्या भविष्य में इंटरनेट 'चीन' के कब्जे में होगा?

ट्रंप चीन को नहीं दे पाए जवाब
ह्यूमन राइट्स वॉच की चीन की वरिष्ठ शोधकर्ता माया वांग का कहना है कि चीनी सरकार मानव इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी मानव निगरानी पर काम कर रही है। इससे पहले इतिहास में किसी भी देश की सरकार इतने व्यापक स्तर पर लोगों के बारे में इतनी गहन और गोपनीय जानकारियां नहीं थीं। और यह सब वे डेटा की शक्ति से कर रहे हैं। 5जी तकनीक की आड़ में वे हुआवेई और सोशल मीडियाऐप टिकटोक के जरिए चीन अपने डिजिटल अधिनायकवाद का लगातार विस्तार कर रहा है। वहीं मेनेंडेज की रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प प्रशासन 'साइबर स्पेस' के लिए चीन से उत्पन्न खतरे का पर्याप्त रूप से जवाब देने में विफल रहा है।



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Friday, July 24, 2020

COVID-19 : अपने मोबाइल को कैसे करें साफ, जानिए

जयपुर. कोरानाकाल में सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वायरस से बचाव के लिए बार-बार हाथ धोने की सलाह दी जा रही है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि बार-बार मोबाइल को हाथ लगाने पर आप अपने हाथों में कितने असंख्य बैक्टीरिया और वायरस को बुलावा दे रहे हैं? आज के समय में मोबाइल फोन एक ऐसी चीज है जिसके बिना कोई नहीं रहना चाहता है और हर वक्त यह हमारे हाथ में भी रहता है। हम मोबाइल को छूते हैं फिर अपनी आंखों व चेहरे को कई बार टच करते हैं। यह हमारे लिए बहुत घातक सिद्ध हो सकता है। इसलिए घर की अन्य चीजों की ही तरह हमारे मोबाइल फोन को भी साफ यानी कीटाणुमुक्त रखना बेहद जरूरी है, वरना फोन की सतह पर मौजूद बैक्टीरिया और वायरस हमारे हाथ, चेहरे और शरीर तक पहुंच सकते हैं।

ऐसे रखें अपने मोबाइल को साफ
70त्न से अधिक आइसोप्रोपाइल अल्कोहल (इसे रबिंग अल्कोहल भी कहा जाता है) या इथेनॉलयुक्त उत्पाद से इसे साफ कर सकते हैं। साफ करने से पहले अपने मोबाइल फोन का स्विच ऑफ कर दें। अब मोबाइल का कवर भी निकालकर रख दें। मुलायम कपड़े को आइसोप्रोफाइल अल्कोहल से सिर्फ हल्का-सा नम करें। ध्यान रहे कि ज्यादा गीला नहीं करना है। अब इस कपड़े से अपने मोबाइल को आगे-पीछे से अच्छी तरह से साफ करें। इसके बाद मोबाइल के कवर को भी अच्छी तरह से आगे-पीछे करके साफ करें।



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Thursday, July 23, 2020

FACEBOOK : प्राइवेसी के लिए फेसबुक लेकर आया ऐप लॉक

सैन फ्रांसिस्को. फेसबुक की तरफ से मैसेंजर में ऐप लॉक नामक एक ऐसे फीचर की पेशकश की गई है, जिससे यूजर्स अपने प्राइवेट मैसेज को दूसरों के पढऩे से रोक सकेंगे। ऐप लॉक की मदद से निजी संदेशों को बेहतर सुरक्षा प्रदान किया जा सकेगा जैसे अगर कोई आपसे आपका फोन कुछ समय के लिए मांगता है तो ऐप लॉक के उपयोग से आप इस बात को निश्चिंत हो सकते हैं कि कोई भी आपके चैट वगैरह को नहीं पढ़ सकता है। मैसेंजर प्राइवेसी एंड सेफ्टी, प्रॉडक्ट मैनेजमेंट के निदेशक जे सुलिवन कहते हैं, प्राइवेसी की मैसेंजर में महत्वपूर्ण भूमिका होगी, चाहें वह मैसेज की बात हो या वीडियो चैट, कॉल या मैसेंजर रूम की ही बात क्यों न हो। प्राइवेसी सेटिंग्स के नए सेक्शन में ऐप लॉक मौजूद है जिसके तहत मैसेंजर ऐप को अनलॉक करने के लिए फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन जैसे प्राइवेसी सेटिंग्स की जरूरत पड़ेगी।

अब आइफोन और आइपैड के लिए ये सुविधा
फेसबुक ने बुधवार को यह जानकारी दी कि यह फीचर फिलहाल आईफोन और आईपैड के लिए उपलब्ध है और अगले कुछ ही महीनों में इसे एंड्रॉयड के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। फेसबुक ने कहा कि यह कुछ नए नियंत्रणों पर भी काम करेगा जैसे कि मैसेंजर यूजर्स डिसाइड कर सकेंगे कि कौन उन्हें सीधे तौर पर कॉल या मैसेज कर सकता है, कौन उनके रिक्वेस्ट फोल्डर में जाएगा और कौन उन्हें बिल्कुल भी कॉल या मैसेज नहीं कर सकेगा। यह इंस्टाग्राम पर मैसेज कंट्रोल के समान होगा।



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Monday, July 20, 2020

ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी का अकाउंट भी हो चुका है हैक, क्रिप्टो स्कैम बस एक और पन्ना है

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर के 14 साल पुराने प्लेटफॉर्म पर हाल ही हैकर्स ने सेंध लगाकर दुनिया के कुछ बेहद प्रभावशाली शख्सियतों के अकाउंट हैक कर लिए। बिटकॉइन से जुड़ी इस सेंधमारी का निशाना बने अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन, अमेजन के जेफ बेजोस, माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स, अमरीकी निवेशक वॉरेन बफेट और टेस्ला कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और स्पेस-एक्स के निदेशक एलोन मस्क सहित कुछ अन्य हाई प्रोफाइल कारोबारियों और राजनेताओं के ट्विटर अकाउंट हैक कर लिए गए थे। ट्विटर ने हैक हुए सभी अकाउंट्स पर किसी भी तरह की पोस्ट करने या पासवड्र्स बदलने की कोशिश को अवरुद्ध कर दिया है और मामले की जांच की मांग की है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब 33 करोड़ मासिक user और करीब 14.5 करोड़ डेली यूजर वाले इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सेलिब्रिटीज, राजनीतिज्ञों और प्रभावशाली लोगों के अकाउंट हैकर्स का निशाना बने हों। ट्विटर पहले भी डेटा और साइबर सुरक्षा संबंधी चूक कर चुका है। आइए देखें कैसे हाल ही में कुछ प्रमुख हस्तियों के ट्विटर अकाउंट्स को हैक कर लिया गया।

ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी का अकाउंट भी हो चुका है हैक, क्रिप्टो स्कैम बस एक और पन्ना है

बिटकॉइन स्कैम के तहत साजिश
इस हैकिंग को बिटकॉइन स्कैम कहा जा रहा है। इसकी वजह है कि जो अकाउंट हैक किये गए थे उनके ज़रिये ट्वीट कर लोगों से बिटक्वाइन में दान मांगा गया था। मसलन, माइक्रोसॉफ्ट के सीइओ बिल गेट्स के अकाउंट से ट्वीट किया गया कि हर कोई मुझसे समाज को कुछ वापस लौटाने के लिए कहता रहा है, अब वो समय आ गया। आप मुझे एक हज़ार डॉलर भेजिए, मैं आपको दो हज़ार डॉलर वापस भेजूंगा। कुछ ही देर में हैकरों को सैकड़ों लोगों ने एक लाख डॉलर से अधिक बिटक्वाइन भेज दिए।ऐसा इसलिए संभव हो सके जिन अकाउंट्स को निशाना बनाया गया उन सभी के कई लाख फॉलोअर्स हैं।

ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी का अकाउंट भी हो चुका है हैक, क्रिप्टो स्कैम बस एक और पन्ना है

क्या है बिटकॉइन
बिटकॉइन एक डिजिटल करेंसी या एक प्रकार की वर्चुअल करेंसी है। रुपया, डॉलर, पाउंड की तरह यह फिजिकल करेंसी नहीं है। इसे किसी देश की करेंसी की तरह सरकारें नहीं छापतीं। यही वजह है कि इसे वर्चुअल करेंसी कहा जाता है। यह डिजिटल यानी इंटरनेट के ज़रिए इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है और इसे पारंपरिक मु्द्रा के विकल्प के तौर पर देखा जाता है। इसे ऑनलाइन प्राप्त किया जाता है। एक्सपीडिया और माइक्रोसॉफ़्ट जैसी कुछ बड़ी कंपनियां बिटक्वाइन में लेन-देन करती हैं। यह एक वर्चुअल टोकन की तरह काम करती है। इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल निवेश के लिए किया जाता है।

ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी का अकाउंट भी हो चुका है हैक, क्रिप्टो स्कैम बस एक और पन्ना है

जनवरी-2020: एनएफएल टीमों के अधिकारिक अकाउंट
इस साल की शुरुआत में नेशनल फुटबॉल लीग से जुड़ी दर्जनों फुटबॉल टीमों के अधिकारिक ट्विटर अकाउंट सुपर बॉल प्रतियोगिता से ठीक एक सप्ताह पहले हैक कर लिए गए। ऐसी ही एक टीम ग्रीन बे पैकर्सके अधिकारिक ट्विटर हेंडल से हैकर्स ने ट्वीट कर कहा कि 'हम लोगों को यह दिखाना चाहते हैं कि हर चीज हैक की जा सकती है। ऑवरमाइन हैकर्स समूह ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। ट्विटर ने कहा कि इन टीमों के अकाउंट्स को थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म के जरिए हैक किया गया था।

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अगस्त-2019: टिवटर के निदेशक का ही अकाउंट हो गया
बीते साल अगस्त में 40 लाख फॉलोवर्स वाले ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक डॉर्सी (Jack Dorcy) ने अपने अकाउंट से कुछ नस्लीय, अभद्र और आपत्तिजनक ट्वीट्स किए। ट्विटर पर 20 मिनट तक वायरल रहने के बाद पता चला कि दरअसल ये ट्वीट उनका अकाउंट हैक करने वाले हैकर्स की टीम ने किए थे। ट्विटर के प्रवक््रता की ओर से सफाई दी गई कि जिस मोबाइल से डॉर्सी का अकाउंट जुड़ा हुआ था उससे झेड़छाड़ की गई थी। चकलिंग स्क्वायड नाम के हैकर्स समूह ने इसकी जिम्मेदारी ली थी।

जुलाई-2016:
चार साल पहले ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक डॉर्सी ने अपने अकाउंट से ट्वीट किया-'तुम्हारी सुरक्षा जांच रहा हूं'। इसे ऑवरमाइन नाम के कुख्यात हैकर्स ग्रुप ने अंजाम दिया था। हालांकि एक घंटे में ही ट्विटर ने इस ट्वीट को हटा दिया लेकिन इसने ट्विटर के कमजोर साइबर सुरक्षाचक्र की पोल खोल दी।

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नवंबर-2018: ट्विटर के सपोर्ट ग्रुप पर शोषण हुआ
इस विवाद की जड़ अमरीका से बाहर साइबर हमले करने के लिए विख्यात चीन और खाड़ी देश सऊदी अरब से जुड़े थे। दरअसल, ट्विटर को जानकारी मिली की उनके सपोर्ट फोर्म केसाथ छेड़छाड़ कर हैकर्स ने उपयोगकर्ताओं के फोन में मौजूद उनके देश के अंतरराष्ट्रीय कोड की पहचान उजागर करने की धमकी दी थी। हैकर्स चीन और सऊदी अरब से व्यक्तिगत आइपी एड्रेस हैक कर यूजर की गोपनीय जानकारियां चुरा रहे थे। हैकर्स ने कहा कि वे देश के प्रभावशाली लोगों के अकाउंट्स भी हैक कर सकते हैं।

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जून-2016: 32 करोड़ पासवर्ड्स की कालाबाज़ारी
ट्विटर पर इस बड़ा साइबर हमला अब तक नहीं हुआ। जून 2016 में ट्विटर पर मौजूद यूजर्स के करीब 32 करोड़ पासवर्ड्स को साइबर चोरों ने डार्कवेब पर बेचने के लिए डाल दिया। हैकर्स ने इन पासवड्र्स को चुराने के लिए वायरस का इस्तेमाल किया था। हालांकि ट्विटर ने सफाई देते हुए कहा कि उनके अपने सिस्टम से ये डेटा चोरी नहीं हुए हैं।

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जनवरी-2015: अमरीकी सेना किया आतंकी संगठन का मैसेज
सीरिया के खतरनाक आइएसआइएस आतंकी समूह के मैसेज जब अमरीकी सेना के अधिकारिक ट्विटर अकाउंट्स से ट्वीट होने लगे तो सभी को अंदाजा हो गया था कि हैकर्स ने आर्मी को भी निशाना बनाने से नहीं छोड़ा। हैकर्स ने अमरीकी सेना की सेंट्रल कमांड के अकाउंट्स से धमकी भरे ट्वीट्स किए और उनके हैडर पर 'आई लव यू आइएसआइएस' लिख दिया था। सेना ने तुरंत अपना अकाउंट ऑफलाइन कर दिया।

ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी का अकाउंट भी हो चुका है हैक, क्रिप्टो स्कैम बस एक और पन्ना है

दरअसल, इस घटना को सिर्फ हैकर्स की नाकाम कोशिश न मानकर नवंबर होने वाले अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं ट्विटर ने कहा है कि वह अब घटना की जांच में कर्मचारियों के ऑफिस लॉग-इन, ईमेल और फोन records खंगालने की बात कह रहा है। गौरतलब है कि बुधवार को हुए इस साइबर स्कैम में बिटकॉइन वॉलेट्स ने क्रिप्टोकरेंसी में 1.20 लाख के करीब एकत्र किए गए ट्वीट्स के जरिए अपना प्रचार किया था।



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Sunday, July 19, 2020

नागपंचमी: काशी में ऑनलाइन होगा शास्त्रार्थ, नागकूप पर सदियों पुरानी है परंपरा

काशी में नागपंचमी को नागकूप पर होने वाले शास्त्रार्थ की सदियों पुरानी परंपरा का इस वर्ष ऑनलाइन निर्वहन होगा। कोरोना संक्रमण के चलते ऐसा पहली बार होगा। नागकूप का संबंध महर्षि पतंजलि से है। ऐसी मान्यता...

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Tuesday, July 14, 2020

Sanitizing device : 15 मिनट में कमरे को ऐसे कीटाणुमुक्त करेगा ‘शुद्ध’

कानपुर. देश में निरंतर बढ़ रहे कोरोना प्रकोप के बीच कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) के वैज्ञानिकों ने ऐसा अल्ट्रा वायलट (यूवी) सैनिटाइजिंग उत्पाद विकसित किया है जो स्मार्टफोन की मदद से मात्र 15 मिनट में आपके घर दफ्तर को कीटाणमुक्त बना देगा। आइआइटी कानपुर की इमेजिनरी लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों प्रो. जे. रामकुमार, डॉ. अमनदीप ङ्क्षसह और शिवम सचान ने शुद्ध (स्मार्टफोन संचालित हैंडी अल्ट्रावॉयलेट डिस्नेफेक्शन हेल्पर) नामक एक यूवी सैनिटाइजिंग उत्पाद विकसित किया है। उन्होने कहा कि कोविड-19 दूषित वस्तुओं और कमरों से और भी बढ़ रहा है। लोग सांस लेने या किसी भी चीज को छूने से डरते हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां लोगों को आना पड़ता है। लिक्विड सैनिटाइजिंग को इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें रासायनिक जोखिम है। इसको देखते हुये यह उत्पाद असरकारक साबित होगा।

15 वाट की लाइट्स हैं
प्रो. राजकुमार ने बताया कि एक एंड्रॉइड एप्लिकेशन इंस्टॉल करके आप अपने उपलब्ध स्मार्टफोन का उपयोग करके उत्पाद के ऑन/ ऑफ, गति और स्थान को दूरस्थ रूप से नियंत्रित कर सकते है। शुद्ध में 15 वाट की छह यूवी लाइट्स हैं जिन्हें व्यक्तिगत रूप से दूर से ही नियंत्रित की जा सकती है। प्रारंभिक परीक्षण ने साबित कर दिया है कि अपने पूर्ण ऑपरेशन में डिवाइस लगभग 15 मिनट में 10 गुना 10 वर्ग फुट के कमरे को कीटाणुरहित कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि ‘शुद्ध’ अत्यधिक प्रवण स्थानों जैसे कि अस्पताल, होटल, मॉल, कार्यालय, स्कूल, आदि में कोरोनावायरस के प्रसार को मारने में सहायता कर सकता है।



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ब्रिटेन ने 5जी नेटवर्क के लिए हुवावे पर प्रतिबंध लगाया

लंदन. ब्रिटेन की सरकार ने मंगलवार को बड़ा यू-टर्न लेते हुए अगले साल से 5जी के लिए नए हुवावे किट की खरीद पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और कहा कि 2027 के अंत तक चीनी दूरसंचार दिग्गज के उपकरण 5जी नेटवर्क से पूरी तरह से हटा दिए जाएंगे।
यह निर्णय दूरसंचार कंपनी के खिलाफ अमरीकी प्रतिबंधों के प्रभाव पर राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र (एनसीएससी) द्वारा दी गई नई सलाह के बाद लिया गया है। नए अमरीकी प्रतिबंधों के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

एनसीएससी के तकनीकी विशेषज्ञों ने अमेरिकी प्रतिबंधों के परिणामों की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि कंपनी को अपनी आपूर्ति शृंखला की एक बड़ा पुनर्संरचना करनी होगी। इसकी वजह यह है कि अब उसकी उस तकनीक तक पहुंच नहीं होगी जिस पर वह वर्तमान में निर्भर है और उसके पास इसका कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने पाया कि नए प्रतिबंध भविष्य में हुवावे उपकरणों की सुरक्षा की गारंटी देना जारी रखना असंभव बनाते हैं। इसके बाद, मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि ब्रिटेन के ऑपरेटरों को प्रतिबंधों से प्रभावित हुवावे उपकरणों की खरीद को रोकना चाहिए।



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Monday, July 6, 2020

Alert : लापरवाही बरते तो हो जाएंगे साइबर अटैक के शिकार

चीन की तरफ से भारत की सरकारी एजेंसी, विभाग व ट्रेड एसोसिएशनों पर साइबर अटैक हो सकता है। यह हमला कोविड-19 की फ्री जांच के नाम पर फिशिंग मेल, एसएमएस व फेक वेबसाइट आईडी से हो सकता है। व्यक्तिगत व...

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Saturday, July 4, 2020

जानिये कैसा हो आपके बच्चों का पहला मोबाइल

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (Harward medical school) के बाल रोग विशेषज्ञ माइकल रिच का कहना है कि बच्चों की मैच्योरिटी का सतर अलग-अलग हो सकता है। 13 साल का बच्चा सोशल मीडिया संभाल सकता हो लेकिन शायद 23 साल के युवा के लिए यह मुश्किल हो। इसलिए मोबाइल दिलाते समय बच्चों की उम्र को निर्णायक न मानें। इसकी जगह माता-पिता को बच्चे की परिपक्वता को परख कर निर्णय करना चाहिए। क्योंकि आज हमें अपने बच्चों को डिजिटल दुनिया में पालना है जहां वे चारों ओर गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक तरंगों से घिरे हुए हैं। आइए जानते हैं कि पहली बार इस्तेमाल करने के लिहाज से बच्चों के लिए किस तरह के सेलफोन बेहतर होंगे।

01. फ्लिप फोन: सस्ते और बहुत ज्यादा फीचर से परे ये फोन शुरुआत के लिहाज से बेहतर विकल्प हैं। इनसे केवल कॉल और टैक्स्ट मैसेज किए जा सकते हैं। स्मार्टफोन से परहेज करने वाले अभिभावक इससे शुरुआत कर सकते हैं।
02. रिले किड्स फोन: इसमें कोई स्क्रीन नहीं होती, कोई जीपीएस ट्रैकर नहीं, एसओएस बटन न ही आइओएस होता है। इससे केवल बात कर सकते हैं।
03. फीचर फोन: इस फोन से बच्चे बात कर सकते हैं, मैसेज भेज सकते हैं, ट्वीट और फेसबुक चला सकते हैं। शुरुआत के लिए अच्छा और सस्ता विकल्प है।



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Thursday, July 2, 2020

टिकटॉक ऐप बैन हुआ है आपका टैलेंट नहीं, जानिए कितने फॉलोवर्स से आप भी बन सकते हैं एक सोशल मीडिया सेलिब्रिटी

चीनी कंपनी बाइट डांस (bite dance) के स्वामित्त्व वाली वीडियो शेयरिंग ऐप टिकटॉक (tiktok) के अकेले भारत में 12 करोड़ से ज्यादा सक्रिय मासिक यूजर्स थे। इस चीनी ऐप की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2019 के शुरुआती 11 महीनों में इस ऐप को भारत में 27.7 करोड़ बार डाउनलोड किया गया था। लेकिन अब भारत सरकार ने ऐसी 59 सोशल मीडिया ऐप पर बैन लगा दिया है जो चीन में निर्मित या वहां की स्थानीय कंपनी से निवेश प्राप्त हैं। इतना ही नहीं टिकटॉक को भारत की गूगल प्ले स्टोर (google play store) से भी हटा दिया गया है। तो क्या अब टिकटॉक पर दिनरात वीडियो अपलोड कर रातों-रात फेमस होने वाले प्रतिभाशाली लोगों का टैलेंट बेकार धरा रह जाएगा। नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। इन ऐप्स की फिर से बहाली या इनके जैसे सिमिलर ऐप (similar app like tiktok) आने तक भारत की कुछ स्वदेशी वीडियो शेयरिंग ऐप्स पर भी आप अपने टैलेंट का जलवा दिखा सकते हैं। साथ ही यह भी जान लीजिए कि सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटी का दर्जा पाने के लिए आपको लाखों फॉलोवर्स (social media followers) की जरुरत नहीं है। अगर आपके सोशल मीडिया अकाउंट पर 30 हजार फॉलोवर्स हैं तो आप भी सेलिब्रिटी हैं।

टिकटॉक ऐप बैन हुआ है आपका टैलेंट नहीं, जानिए कितने फॉलोवर्स से आप भी बन सकते हैं एक सोशल मीडिया सेलिब्रिटी

...तो आप भी सोशल मीडिया सेलिब्रिटी
सोशल मीडिया पर आधिकारिक तौर पर एक सेलिब्रिटी का दर्जा पाने के लिए हमें कितने फॉलोवर्स की जरुरत होती है? 300, 30 हजार या ३० लाख? हाल ही ब्रिटेन के एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (विज्ञापन नियामक) ने अपने एक फैसले में खुलासा किया कि सोशल मीडिया पर 30 हजार फॉलोवर्स वाले किसी भी व्यक्ति को सोशल ्रमीडिया सेलिब्रिटी का दर्जा दिया जा सकता है। इसका मतलब है कि सोशल मीडिया पर 30 हजार से अधिक फॉलोवर्स वाला कोई भी व्यक्ति सेलिब्रिटी है। विज्ञापन मानक एजेंसी के इस फैसले से सोशल मीडिया में सक्रिय रहने वाले युवाओं में खुशी की लहर है। यह सारा मामला एक सोशल मीडिया ब्लॉगर सारा विलॉक्स नॉट के इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़ा हुआ है। उन्हें एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी के नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया था।

टिकटॉक ऐप बैन हुआ है आपका टैलेंट नहीं, जानिए कितने फॉलोवर्स से आप भी बन सकते हैं एक सोशल मीडिया सेलिब्रिटी

क्या था सारा का मामला
दरअसल, सारा ने एक प्रयोजित पोस्ट को अस्वीकार कर दिया क्योंकि वे खुद को एक सेलिब्रिटी मानती थीं और ऐसे ही किसी की भी स्पॉन्सर्ड पोस्ट को स्वीकार नहीं कर सकतीं। एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (ASA) ने इसे अपने नियमों का उल्लंघन माना। 27 साल की ब्लॉगर सारा के इस मामले से एएसए के सामने इस बात का खुलासा हुआ कि एक खास फॉलोवर्स की संख्या हासिल कर लेने के बाद कई लोग अब खुद को प्रसिद्ध मान लेते हैं। ब्लॉगर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक फोटो पोस्ट की थी जिसमें वे एलर्जी की दवाइयों का एक पैकेट दिखा रही थीं। तस्वीर में रात के कपड़ों में थीं। एएसए ने इसी बात पर आपत्ति जताते हुए इसे अपने विज्ञापन नियमों का उल्लंघन माना। एएसए ने कहा कि वे ऐसा नहीं कर सकती थीं क्योंकि वे कोई सेलिब्रिटी नहीं हैं। उस समय तक सारा का अकाउंट 32 हजार फॉलोवर्स की संख्या पार कर गया था। इस पर एएसए ने अपना फैसला सुनाते हुए 30 हजार को सेलिब्रिटी का दर्जा पाने के लिए आदर्श संख्या करार दिया।

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इन भारतीय ऐप्स से दिखाएं टैलेंट
मित्रों ऐप- यह ऐप टिकटॉक का भारतीय विकल्प बन रहा है। इस ऐप के ४.७ रेटिंग के साथ अब ५० लाख से अधिक डाउनलोड हैं। मित्रों ऐप को आइआइटी रुढ़की के एक छात्र शिवांक अग्रवाल ने बनाया है। यह ऐप गूगल प्ले व ऐपल स्टोर पर भी उपलब्ध है।


चिंगारी- टिकटॉक को ही टक्कर देने के लिए बैंगलुरू के दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर छात्रों बिस्वत्मा नायक और सिद्धार्थ गौतम ने एक शॉर्ट वीडियो शेयरिंग ऐप चिंगारी भी बनाया है। गूगल प्ले स्टोर पर इस ऐप की 5 में से 4.7 स्टार रेटिंग है। ऐप को गूगल प्ले स्टोर से 2.5 मिलियन बार डाउनलोड किया जा चुका है। साथ ही, वीडियो के वायरल होने पर यह ऐप कंटेंट क्रिएटर को भुगतान भी करता है। यह देसी ऐप हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली, गुजराती, मराठी, कन्नड़, पंजाबी, मलयालम, तमिल और तेलुगु भाषाओं में गूगल प्ले व ऐपल स्टोर पर उपलब्ध है।

टिकटॉक ऐप बैन हुआ है आपका टैलेंट नहीं, जानिए कितने फॉलोवर्स से आप भी बन सकते हैं एक सोशल मीडिया सेलिब्रिटी

बोलो इंडया- ऐप SynergyByte Media Pvt Ltd. द्वारा डवलप्ड एक भारतीय शार्ट वीडियो ऐप है। प्ले स्टोर पर इसकी 4.6 स्टार रेटिंग है। इस भारतीय ऐप को अब तक 1 लाख से अधिक यूजर डाउनलोड कर चुके हैं। बोलो इंडया में यूजर्स अपनी पसंदीदा क्षेत्रीय भाषाओं में वीडियो बना और देख सकते हैं। ऐप एंटरटेनमेंट के बजाय इन्फोटेनमेंट पर केंद्रित है।

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रोपोसो- यह ऐप भारत में वीडियो शेयरिंग ऐप की दुनिया में संभवत: सबसे पुराना ऐप है । टिकटॉक की ही तरह इसमें भी यूजर्स 20 सेकंड के छोटे वीडियो बना सकते हैं। प्ले स्टोर पर इसकी रेटिंग 4.2 है और ५ लाख से अधिक यूजर्स हैं। ऐप यूजर्स को अपने वीडियो के माध्यम से पैसे कमाने का अवसर भी देता है। फीचर किए गए प्रत्येक वीडियो के लिए, रोपोसो उपयोगकर्ता को साइंस देता है। गूगल प्ले व ऐपल स्टोर पर भी उपलब्ध है।



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