Monday, June 29, 2020

पैरों में छुपा है अल्सर का स्मार्ट इलाज, आप भी जानिये

दुनियाभर में डायबिटीज के बढ़ते शिकंजे के साथ ही उससे जुड़ी जटिलताओं जैसे डायबिटिक फुट अल्सर के मामले बढ़ने की भी आशंका है। डायबिटीज को ठीक से प्रबंधित न किया जाए तो इससे घातक स्थिति में नसें भी निष्क्रिय होने लगती हैं और मरीज की चाल असंतुलित हो सकती है जिससे पैरों में दबाव से अल्सर पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर इसका ढंग से इलाज नहीं किया जाए तो इनमें संक्रमण का खतरा पैदा हो जाता है और कभी-कभी तो पैर को काटना भी पड़ जाता है। अगर दुर्घटनाओं को छोड़ दें तो डायबिटिक फुट अल्सर के कारण आज दुनिया में सबसे ज्यादा पैर काटने की जरूरत पड़ती है। भारत में खासतौर पर यह चिंता का विषय है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन के आंकडों के अनुसार भारत में दुनिया भर के दूसरे सबसे ज्यादा वयस्क डायबिटीज़ के शिकार हैं।

सस्ता इलाज ढूंढ़ना था उद्देश्य

रिसर्चर कायला ह्यूमर का वर्ष 2018-19 का प्रोजेक्ट उन मरीजों के लिए कम खर्चीला इलाज सुझाने से संबंधित था जिन्हें पैरों में अल्सर होने का खतरा अधिक होता है। उन्होंने जिन डायबिटीज रोगियों के साथ काम किया, उनमें एक थर्मल पैटर्न देखा। इसलिए उन्होंने डायबिटिक फुट की पहचान के लिए थर्मल इमेजिंग का इस्तेमाल किया। इसका मकसद सबसे पहले कम खर्च में इस रोग के होने का पता लगाना और फिर उसकी गंभीरता को आंक कर पैरों में अल्सर बनने से रोकने के उपाय करना था चिकित्सा उपकरणों में ह्यूमर की दिलचस्पी कई साल पहले से थी। ह्यूमर साल 2016 में वह बेंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में एसएन बोस स्कॉलर प्रोग्राम के तहत एक रिसर्च इंटर्नशिप पर आई थीं। बेंगलुरू में, ह्यूमर ने डायबिटिक फुट अल्सर थेरेपी को बेहतर बनाने के लिए ऐसी तकनीक पर काम किया जिसे पैर में कहीं भी आसानी से पहना जा सके। इस उपकरण के विकास के बाद उन्होंने इस तरह के उपकरण की आवश्यकता के बारे में मेडिकल विभाग को आगाह किया। क्योंकि भारत में डायबिटीज बड़े पैमाने पर फैली हुई है।

मर्ज़ बिगड़ने से पहले मिले इलाज

अगस्त 2018 के बाद के नौ महीनों तक ह्यूमर ने क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लूर कीटीम के साथ उस तकनीक पर काम किया जिसे डायबिटिक फुट अल्सर वाले पैरों में पहना जा सके। यह उपकरण मरीज के अल्सर वाले पैरों में दबाव को माप कर डॉक्टरों को ऐसे समाधान को प्रेरित करता है जिससे कि दबाव को कम करके घाव को भरने में मदद की जा सके। इस प्रोजेक्ट पर काम करते हुए ह्यूमर को अहसास हुआ कि मरीज पहले कई बार उस हालत में आते थे जब घाव बहुत गहरे होते थे और डॉक्टरों के लिए उनका इलाज कर पाना मुश्किल होता था और पैर काटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता था। ऐसी हालत में उन्होंने सोचा कि क्यों न मरीज को इन हालात में पहुंचने से पहले ही मदद दी जाए और सबसे पहले अल्सर को बनने से ही रोका जाए और वह भी कम खर्च में।

थर्मल सिस्टम से ढूंढा समाधान

ह्यूमर कुछ अलग तरह के समाधान की तलाश में थी, तभी उन्होंने यह देखा कि अल्सर बनने से पहले मरीज के पैरों में हल्की सूजन आती है और उस जगह पर कुछ गर्म महसूस होता है। इससे एक नई आइडिया उभरा- तापमान पर ध्यान दिया जाए। ह्यूमर ने इसी के चलते रोगियों के पैरों की सैंकडों थर्मल इमेज लीं। वह कहती हैं,वे बतौर एफिलिएट रिसर्चर इन आंकड़ों पर काम कर रही हैं जिससे कि थर्मल स्कैन में अल्सर होने से पहले के चेतावनी देने वाले संकेत मिल सकें।

बता दें कि अल्सर शरीर के अंदर छोटी आंत के शुरुआती स्थान या म्यूकल झिल्ली पर होने वाले छाले या घाव होते हैं। अल्सर का प्रमुख कारण पेट में एसिड बढ़ना, चाय, कॉफी, सिगरेट व शराब आदि का अधिक सेवन है। इसके अलावा ज्यादा खट्टी, मसालेदार और गर्म पदार्थ का सेवन करने से अल्सर की समस्या हो जाती है।



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डेटा स्टोरेज चूड़ी जो गर्भस्थ शिशु की देखभाल भी करती है

भारत में खून की कमी या एनीमिया बहुत बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। न्यूट्रिशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया की और से वर्ष 2018 में प्रकाशित एक शोधपत्र के अुनसार देश में हर उम्र के महिला-पुरुष बहुतायत में इसके शिकार हैं। एनीमिया ऐसी स्थिति है जब किसी व्यक्ति के खून में लाल रक्त कोशिकाओं या हिमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है। इससे खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता भी कम हो जाती है और कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हिमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाने से व्यक्ति की उत्पादकता कम हो जाती है, बीमारियां हो जाती हैं और कई बार तो मौत भी हो सकती है। समय पर ध्यान देने से एनीमिया से बचा जा सकता है या फिर इसका इलाज कराया जा सकता है। लेकिन इस तरह की देखभाल तभी संभव है जब स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पास ऐसे उपकरण हों जो सटीक और सक्षम तरीके से जांच कर सकें।

लाइडर ने हिमोग्लोबिन मापने की नयी तकनीक डिज़ाइन की।

वर्ष 2018-2019 में रिसर्चर हना लाइडर तिलोनिया, राजस्थान के बेयरफुट कॉलेज में महिला स्वास्थ्य पहल टीम में शामिल हुईं। उनका उद्देश्य था हिमोग्लोबिन मापन के मौजूदा उपकरणों की बाधाओं को जानना और ऐसी जांच विधि डिज़ाइन करना जो सक्षम होने के साथ ही कम खर्चीली हो और जिसे गांवों के मोबाइल क्लीनिक में इस्तेमाल में लाया जा सके। लाइडर ने हिमोग्लोबिन मापने की नयी तकनीक डिज़ाइन की। लाइडर ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ विस्कांसिन-मैडिसन से पढ़ाई की। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री लेने वाली लाइडर ने भारत के सुदूर गांवों के क्लीनिकों में इस्तेमाल हो रहे हिमोग्लोबिन मापन के तरीकों की तुलनात्मक पड़ताल उनका प्रोजेक्ट बनक लिया।

ये डेटा स्टोरेज चूड़ी जो गर्भस्थ शिशु की देखभाल भी करती है

लाइडर स्वास्थ्य सखी प्रोजेक्ट में काम करते हुए एक चूड़ीुनुमा तकनीक विकसित की है जिसे आसानी से पहना जा सकता है। इसमें स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां और चिकित्सा का पिछला विवरण दर्ज हो सकता है। प्रोग्राम का फोकस गर्भ धारण करने से पहले और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की सेहत पर है। उनका कहना है, ‘‘यह आइडिया खुशी बेबी प्लेटफ़ार्म की तरह है जिसमें एक पहने जा सकने वाला हार होता है जिसमें बच्चे के टीकाकरण से जुड़ी सारी जानकारियां होती हैं। इस तकनीक भारत के ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में माँ और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थय सम्बन्धी आंकड़ों का डाटा स्टोर करने में किया जा सकता है जहां बेहतर स्वास्थय व्यवस्थाएं न हों।



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Tuesday, June 23, 2020

अमरीकी कंपनी एपल चीन के हजारों अनलाइसेंस्ड आइफोन गेम्स हटाएगी अपने प्लेटफॉर्म से

अमरीकी कंपनी एपल (apple) ने चीन में डवलपर्स और प्रकाशकों को सचेत किया है कि जुलाई से उनके आइओएस गेम (iOS) को जारी रखने के लिए अधिकृत लाइसेंस की आवश्यकता होगी। कंपनी ने कहा कि इस निर्णय के बाद अब चीन में बिना अमरीकी प्राधिकरण की अनुमति के किसी भी चीन निर्मित मोबाइल गेम को आइफोन में संचालित करने करने की अनुमति समाप्त करता है। गौरतलब है कि चीन में अमरीकी कंपनी एपल के प्लेस्टोर पर ऐसे हजारों गेम्स मौजूद हें जिनके लिए अब तक औपचारिक अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन चीन-अमरीका में पहले ट्रेड वॉर (America-China Trade War) और अब कोरोना वायरस के चलते आई तल्खी के बाद एपल ने अपने प्ले स्टोर से ऐसे हजारों चीनी मोबाइल गेम्स को हटाने का निर्णय किया है।

नियमों में भी 'चीनी' कम
अब तक ग्रैंड थेफ्ट ऑटो (Grand Theft Auto) जैसे खेल की अनुमति थी। गेम में हिंसा के बावजूद कभी भी चीन के सेंसर बोर्ड ने इस पर आपत्ति नहीं जताई और एपल को आगे भी ऐसा होने की उम्मीद नहीं है। गौरतलब है कि चीन के नियामकों को किसी भी गेम की समीक्षा करने और लॉन्च करने से पहले लाइसेंस की अनिवार्यता के लिए या तो भुगतान किया जाता है या इन-ऐप खरीदारी की पेशकश की जाती है।चीन के प्रमुख एंड्रॉइड ऐप स्टोरों ने 2016 से इस तरह के नियम लागू कर रखे हैं। लेकिन अब एपल ने अपने आइफोन प्लेटफॉर्म पर ऐसे गेम्स पर रोक लगाने का निर्णय किया है। यह भी जानना आवश्यक है कि चीन के अलीबाबा ग्रुप और शाओमी कॉर्प के ऐप स्टोर की तुलना में एपल की रफ्तार ड्रैगन के मुकाबले बहुत धीमी रही है। इसी महीने चीन की रिक््रवेस्ट पर एपल ने अपने चीनी ऐप स्टोर से दो चीनी पोडकास्ट एप्स को हटा दिया है। इस निर्णय के लागू होने के बाद इन हजारों चइनीज ऐप्स को हटाने में कितना समय लगेगा यह कोई नहीं बता रहा है।

डिजिटल बाजार का पांचवा हिस्सा
एनालिसिस ग्रुप के अनुसार चीन ने साल 2019 में एपल ऐप स्टोर के जरिए बेची जाने वाली तमाम डिजिटल वस्तुओं और सेवाओं के 61 बिलियन डॉलर (46.10 ख़रब रूपये) बाजार का लगभग पांचवां हिस्सा कमाया था, जो एपल को अमरीका के बाद बाजार का दूसरा सबसे बड़ा खिलाड़ी बनाता है। एपल चीन में ऐसे लेन-देन में 30 फीसदी का हिस्सा अपने नाम करता है। गौरतलब है कि एपल इन चाइना के मुताबिक चीन में एपल के आइओएस स्टोर पर तकरीबन 60 हजार से ज्यादा मोबाइल गेम्स उपलब्ध हैं जो या तो भुगतान के जरिए अथवा इन-ऐप खरीदारी के तहत आइओएस स्टोर पर अपलोड किए गए हैं। उनमें से कम से कम एक तिहाई के पास तो लाइसेंस भी नहीं है।



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Monday, June 22, 2020

कोरोना वायरस के चलते 100 गुना वृद्धि हुयी है यूट्यूब यूजर की संख्या में

भारत में कोरोना को लेकर बेचैनी साफ नजर आ रही है। भारत कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है। वहीँ देश में रोज़ संक्रमितों के रिकॉर्ड बन रहे हैं। भारत में बीते एक दिन में कोरोना संक्रमण के 14,821 नए मामले दर्ज किए गए हैं और 445 लोगों की मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी नए आकड़ों के अनुसार देश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़कर 426,910 से अधिक हो गए हैं। देश में अभी तक कोरोना वायरस से 13,703 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 237,252 से अधिक लोग इलाज के बाद ठीक हुए हैं। हालांकि इस दौरान घर से काम के रहे लोग, स्कूल बंद होने के कारण घर में रहे बच्चे और कॉलेज स्टूडेंट्स, गृहिणियां एवं ऑनलाइन क्लासेज के चलते नेट की खपत और विभिन्न सोशल साइट्स पर यूजर की तादाद में जबरदस्त उछाल आया है।

कोरोना संक्रमण के रोज़ संक्रमितों के टूट रहे रिकॉर्ड के बीच शनिवार शाम तक 400,724 कुल संक्रमण के मामले दर्ज हुए हैं. जबकि संक्रमण से मरने वालों की संख्या भी 13,035 हुयी।
शुक्रवार तक बीते 24 घंटों में रेकॉर्ड 14,516 नए मामले सामने आए थे और 375 लोगों की मौत हो गई थी। उससे पहले गुरुवार तक 13 हज़ार से ज़्यादा और बुधवार को 12 हज़ार से ज़्यादा कोरोना संक्रमण के मामले एक दिन में आये थे। गौरतलब है की लॉक डाउन हटाने के बाद संक्रमण के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हुयी है। अब भारत रूस से 157770 संक्रमित मामलों से पीछे है। सबसे अधिक कोरोना प्रभावित देशों की सूची में टेबल में 2,356,715 दर्ज संक्रमित मामलों के साथ अमरीका पहले, 1,086,990 के साथ ब्राज़ील दुसरे और 584,680 मामलो के साथ रूस तीसरे स्थान पर है।

कोरोना वायरस के चलते 100 गुना वृद्धि हुयी है यूट्यूब यूजर की संख्या में

मनोरंजन और समय बिताने का एक बड़ा जरिया ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी रहे। आम दिनों की तुलना में कोरोना वायरस के दौरान भारत में इंटरनेट और डिजिटल संबंधी उपयोग में दोगुना वृद्धि हुई है। खासकर कोरोना से जुड़ी जानकारी, विकल्प, उपाय, नई जानकारियां, देश-विदेश का हाल, अपनों की खैरियत लेने और ऑफिस संबंधी जरूरी कामों के लिए भी इंटरनेट सबसे प्राथमिक साधन बना रहा। आइए जानें कोरोना काल में ऑनलाइन और डिजिटल डिपेडेेंंसी के बारे में।

-100 गुना वृद्धि हुई है यू-ट्यूब की यूजर संख्या में, गूगल ट्रेंड्स के अनुसार। शुरुआती रुझान में लोग वीडियो गेम, ऑनलाइन एप्लीकेशंस और सोशल मीडिया पर खुद को व्यस्त रख रहे हैं। इस दौरान हॉटस्टार और नेटफ्लिक्स की व्यूअरशिप में वृद्धि हुई है।
-28 फीसदी की वृद्धि हुई है ऑनलाइन उपलब्ध कार्ड गेम्स, पोकर और रमी गेम्स में। खासकर कार्ड गेम्स (ताश) में 40 फीसदी और रमी एवं पोकर गेम्स में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है।

कोरोना वायरस के चलते 100 गुना वृद्धि हुयी है यूट्यूब यूजर की संख्या में

-50 फीसदी दांतों की सफाई और 25 फीसदी सौंदर्य और सैलून संबंधी जानकारी भी जुटाई गई है। इसमें पेडिक्योर के लिए सबसे ज्यादा जानकारी सर्च की गई।
-1.5 से 2.5 गुना वृद्धि हुई है ऑनलाइन दवाओं और घर की जरुरत के सामान की खरीदारी में क्योंकि कोरोना के चलते मार्केट में चीजों की कमी हो गई है। इसमें ई-फार्मेसी और मेडिसिन डिलीवरी के लिए सबसे ज्यादा सर्च किया गया।
-100 फीसदी की वृद्धि हुई है ग्रॉफर्स और बिग बास्केट जैसी ई-ग्रोसरी सााइट्स की बिक्री में।

-71 फीसदी भारतीयों ने माना की इस समय ई-कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी पोर्टल्स जीवनरेखा का काम कर रहे हैं। अकेले यूएई में ही 70 से 100 फीसदी की वृद्धि हुई है इसमें।

कोरोना वायरस के चलते 100 गुना वृद्धि हुयी है यूट्यूब यूजर की संख्या में

-40 फीसदी की वृद्धि हुई है घर में व्यायाम करने के लिए ऑनलाइन फिटनेस ट्रेनिंग में, जबकि 15 फीसदी की वृद्धि हुई है जिम उपकरणों की खरीदारी में।
-60 फीसदी की वृद्धि हुई है ऑनलाइन एज्यूकेशन टूल्स और प्लेटफॉर्म में। 800 करोड़ की भारतीय ऑनलाइन एज्यूकेशन स्टार्टअप बाइजूज की ऑनलाइन सेवाएं लेने वालों की संख्या में भी 60 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। स्कूल और कॉललेज बंद होने एवं परीक्षाओं के स्थगित होने से इसमें अभी और इजाफा हो सकता है।



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Monday, June 1, 2020

Nirjala Ekadashi Vrata: आज है निर्जला एकादशी व्रत, इस व्रत को रखने से मिलता है मोक्ष

हिंदु पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस भगवान विष्णु के लिए भक्त पूरे दिन बिना जल और अन्न के व्रत रखते हैं। निर्जला का मतलब ही होता है बिना जल के, इसलिए इस व्रत को...

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