Thursday, March 26, 2020

मायावती ने कहा, लॉकडाउन में लोगों तक खाने पीने की वस्तुएं पहुंचाने की व्यवस्था करे सरकार

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा लाकडाउन के दौरान केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा राहत पैकेज की व्यवस्था बहुत ही जरूरी है। लोगों तक खाने पीने की वस्तुएं पहुंचाए जाने की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से होनी...

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Wednesday, March 25, 2020

अपनी कैलिग्राफी कला से दुनिया की सबसे पुरानी लिपी में शुमार भाषा लिपि को कर रहीं संरक्षित

आकागावा की दादी भी खास महिलाओं द्वारा बनाई और महिलाओं द्वारा ही उपयोग की जाने वाली एक लुप्त हो चुकी जापानी लिपी 'काना स्क्रिप्ट' का उपयोग करने वाली अंतिम पीढ़ी की कैलिग्राफरों में से एक थीं। इसे 9वीं शताब्दी में एक महंत और संस्कृत की विद्वान महिला कैलिग्राफर कुकाई ने विकसित किया था। काना लिपी के वर्ण ही काना शोडो का आधार हैं जो जापानी भाषा के अक्षरों की ध्वनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि इसे महिलाओं ने अलग-अलग सदी में विकसित किया लेकिन इसका उपयोग महिला-पुरुष दोनों ही करते हैं। यह महिलाओं की अपनी भाषा थी जिसके माध्यम से वह खुद को अभिव्यक्त करती थीं। साथ ही अपने अनुभवों को साहित्य और संस्मरणों के रूप में संकलित भी कर सकती थीं।

अपनी कैलिग्राफी कला से दुनिया सबसे पुरानी में शुमार लिपि को कर रहीं संरक्षित

दुनिया का पहला नॉवेल भी
ऐसा माना जाता है कि दुनिया का सबसे पहला नॉवेल भी इसी लिपी में लिखा गया था। ग्यारहवीं सदी में लिखी गई पटकथा 'द टेल ऑफ गेंजी' को दुनिया का संभवत: पहला नॉवेल मानते हैं जिसे जापानी लेखिका मुरासाकी शिकिबू ने लिखा था। इस नॉवेल का एक खोया हुआ पन्ना 2019 में खोजा गया था। इस लिपी का इस्तेमाल 20वीं शताब्दी तक जापान में किया जाता था। लेकिन जब जापान सरकार ने भाषा के स्तर में सुधार किया तो उन्होंने 300 काना वर्णों में से केवल 46 वर्णों को ही नई भाषा में स्थान दिया।

अपनी कैलिग्राफी कला से दुनिया सबसे पुरानी में शुमार लिपि को कर रहीं संरक्षित

स्क्रिप्ट का संरक्षण
अकागावा इस प्राचीन महिला लिपी को संरक्षित करने का काम कर रही हैं। उन्होंने काना शोडो को नई तकनीक के साथ मिलाकर एक नई कला विकसित की है जिसे वे 'काना आर्ट' कहती हैं। उन्होंने सदियों पुरानी काना वर्णों से विशाल चित्रनुमा आर्ट बनाए हैं जो कला के साथ ही साहित्य को संजोने का काम भी कर रहे हैं। इ न्हें बनाने में अकागावा को महीनों लग जाते हैं। अकागावा बताती हैं कि जापान में उस समय महिलाओं को पढऩे-लिखने और सरकारी कामकाज में शामिल नहीं होने दिया जाता था। लेकिन कुछ उदारवादी पुरुषों ने अपनी बेटियों को भी पढ़ाया। लेकिन क्योंकि उन्हें इसे गुप्त रखना था इसलिए उन्होंने अपनी खुद की भाषा विकसित की।

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महिला साहित्यकारों की भाषा बन गई

काना कैलिग्राफी दरअसल कांजी कैलिग्राफी से प्रेरित है। 10वीं सदी के आखिर में महिलाएं अपने अधिकारों, व्यक्तिगत आजादी, उपयोग की वस्तु से इतर खुद को बुद्धीजीवियों के रूप में स्थापित करने के लिए करती थीं। इस लिपी के विकसित होने से पहले जापान में सारे कवि पुरुष ही थे लेकिन इस लिपी के बाद महिलाओं ने साहित्य के हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया। 21 महिला कवियित्रियों ने 7वीं सदी से 13वीं सदी के बीच हर तरह के साहित्य में काना स्क्रिप्ट का उपयोग किया। आज भी जापान के सबसे बेहतरीन बुद्धिजीवियों में 21 फीसदी महिला साहित्यकार ही हैं जिन्होंने काना में ही अपना साहित्य लिखा था।

अपनी कैलिग्राफी कला से दुनिया सबसे पुरानी में शुमार लिपि को कर रहीं संरक्षित

कौन हैं अकागवा

47 साल की अकागावा जापान की सबसे युवा काना लिपी विशेषज्ञ और कैलिग्राफर भी हैं। वे दो दशकों से इसका अभ्यास कर रही हैं। उन्होंने जर्मन ओपेरा को जापानी भाषा में अनूदित करने के बाद इसे भी काना कैलिग्राफी में एक आर्ट फॉर्म का रूप दिया है। काना शोडो को परंपरागत कैलिग्राफर्स जापान की मूल भाषा नहीं मानते।

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आपका कॉर्पोरेट ईमेल भी जालसाजी का जरिया बन सकता है

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो होशियार हो जाएं। क्योंकि अब जालसाज इन्हीं कॉर्पोरेट ईमेल का सहारा लेकर ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं। अप्रैल 2019 में एक अमरीकी कंपनी की अकाउंटेंट जोआना को उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी का ईमेल मिला। इसी ईमेल से इन जालसाजों के ठगी करने के इस नए तरीके का खुलासा हुआ। ईमेल में सीईओ बारबरा ने जोआना को साइबर सुरक्षा देने वाली कंपनी को एक चेक भेजने के लिए कहा था। जोआना को इस पर संदेह हुआ। उन्होंने कंपनी से इस बारे में पूछा तो साइबर सुरक्षा देने वाली कंपनी ने कहा कि हां वे उन्हें चेक भेज दें। ठग कंपनी और फर्म दोनों के अधिकारिक ईमेल के फर्जी अकाउंट से जवाब दे रहे थे।

उड़ाए 2600 करोड़ रुपए
जब ठगों को पकडऩे के मकसद से वास्तविक साइबर सुरक्षा कंपनी ने खोजबीन की तो पता चला कि फर्जी अकाउंट से ईमेल भेजने वाले गिरोह के सदस्य नाइजीरिया, घाना और केन्या से नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। बीते सप्ताह प्रकाशित अगारी साइबर सुरक्षा कंपनी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, बीते साल अप्रैल और अगस्त के बीचइस गिरोह ने दुनियाभर में लगभग 2100 कंपनियों में 3000 से अधिक लोगों को ऐसे कॉर्पोरेट मेल के जरिए अपना निशाना बनाया था। वहीं हाल ही मामले की जांच कर रही अमरीकी जांच एजेंसी एफबीआई की रिपोर्ट के अनुसार अमरीका में इस तरह के ईमेल ठगी के मामले उन राज्यों में ज्यादा बढ़ गई है जहां आमतौर पर प्रायोजित हैक या रैंसमवेयर जालसाजी के मामले बहुत सामान्य न हों। एफबीआई का कहना है कि कॉर्पोरेट ईमेल के जरिए ठगी करने वाले गिरोह की वारदातें मई 2018 से जुलाई 2019 तक 100 फीसदी तक बढ़े हैं। जून 2016 से जुलाई 2019 तक 166,349 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान जालसाजों ने 262० करोड़ रुपए की वैश्विक ठगी कर डाली थी।

आपका कॉर्पोरेट ईमेल भी जालसाजी का जरिया बन सकता है

ऐसे करते हैं ठगी
ठग पैसों के ट्रांजेक्शन के लिए एक ईमेल करते हैं जिसमें तत्काल एक तय राशि चेक द्वारा देने के लिए कहा जाता है। ईमेल अक्सर सीईओ, वाइस प्रेसिडेंट या डायरेक्टर जैसे किसी उच्च पद के अधिकारी की ईमेल के फर्जी अकाउंड से भेजा जाता है। ईमेल में अधिकारी तुरंत पैसा ट्रांसफर करने का अनुरोध करेगा। ऐसे ही कई बार पेरोल कर्मचारियों को प्रीपेड कार्ड खाते में अपनी प्रत्यक्ष जमा जानकारी (डीडीआइ) को अपडेट करने का अनुरोध करने वाला ईमेल मिलेगा। जब तक कंपनियों को इस ठगी का पता चलता है बहुत देर हो चुकी होती है।

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Tuesday, March 24, 2020

पीएम नरेंद्र मोदी का ऐलान- कोरोना वायरस रोकने के लिए पूरे भारत देश में 14 अप्रैल तक 21 दिन यानी तीन सप्ताह संपूर्ण लॉकडाउन

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए भारत में 24 मार्च की रात 12 बजे से 14 अप्रैल तक कुल तीन सप्ताह यानी 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया...

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3डी प्रिंटिंग से बेघरों को दे रहे सपनों का आशियाना

हाल ही टेक्सास के ऑस्टिन शहर में बेघरों के लिए छह खास डिजायन वाले किराए के घरों का निर्माण किया गया है। इन घरों की खासियत ये हैं कि इन्हें 3डी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर डिजायन और निर्माण किया गया है। इन 3डी प्रिंटेड हाउस को अमरीकी हाउसिंग इंडस्ट्री भविष्य के घर बता रही है जो घर बनाने के व्यवसाय में क्रांति ला सकती है। 69 साल के शिया इस 3डी प्रिंटेड घर में रहने वाले पहले व्यक्ति हैं। आर्थराइटिस से पीडि़त शिया अभी तक व्हीलचेयर के सहारे आस-पास घूमफिर रहे थे। उनके लिए उनके पास अपना घर खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे।

180 बेघरों को मिली छत
ऑस्टिन में बेघरों के लिए बनाए रैन बसेरों की जगह अब इन इस नए ३डी प्रिंटेड घरों को रहने के लिए सेट किया गया है। इन छह घरों में फिललहाल 180 बेघर रह रहे हैं। 51 एकड़ में फैले इस कम्युनिटी फस्र्ट विलेज में बेघरों और सेवानिवृत्त बुजुर्गों के लिए ५०० घर बनाए गए हैं जिनमें से ये इस नए 3डी प्रिंटेड घर भी शामिल हैं। कंस्ट्रक्शन टेक्नालॉजी कंपनी आइकन ने इन घरों का निर्माण किया है। कंपनी का इससे समय और पैसे की भी बचत होती है और ये घर ज्यादा जगह भी नहीं घेरते।

3डी प्रिंटिंग से बेघरों को दे रहे सपनों का आशियाना

पहला थ्रीडी प्रिंटेड घर
आइकन कंपनी का दावा है कि 400 स्क्वेयर फुट में बने ये घर अमरीका के पहले 3डी प्रिंटेड घर हैं। इन घरों की डिजायन और फ्रेमिंग 11 फुट ऊंचे और करीब 1800 किलोग्राम वजनी 3डी प्रिंटर से बनाई जाती है। यह पूरी तरह से रोबोटिक आधारित मशीनी प्रक्रिया है। एक ठोस कंक्रीट सामग्री 'लवमेक्रीट ओवेज़' को बीफॉथ प्रिंटर की सहायता से दीवारें, छतें और फर्श बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे बनी दीवारों के कोने घुमावदार और ठोस होते हैं। आइकन के सह-संस्थापक एवं सीईओ जैसन बैलार्ड का कहना है कि इस 3डी प्रिंटेड हाउस का आइडिया अवासीय परियोजनाओं में लगने वाले समय और पारंपरिक निर्माण से जुड़ी फिजूल लागत को कम करने के लिए आया था। इसके अलावा पर्यावरण एवं कार्बन फुटप्रिंट और कर्मचारियों की संख्या को सीमित करने भी इसका एक उद्देश्य था। इस प्रक्रिया ने घरों के डिजायनिंग का तरीका ही बदल दिया है। क्योंकि यह प्रिंटर स्लोप और कर्व का उपयोग करता है इसलिए भविष्य में 3डी प्रिंटिंग से जुड़ी नई डिजाइन भाषाएं उभरेंगी जो केवल 3 डी प्रिंटिंग के माध्यम से ही संचालित होंगी।

3डी प्रिंटिंग से बेघरों को दे रहे सपनों का आशियाना

गौरतलब है कि अमरीका में 2007 के 22.9 फीसदी की तुलना में 2017 में बेघरों की आबादी बए़कर 33.8 फीसदी हो गई। ऐसे में बढ़ती आबादी और बेघरों को आवास उपलब्ध कराने के लिए 3डी प्रिंटिंग तकनीक ही सर्वोत्तम उपाय है। कम्युनिटी फस्र्ट विलेज में 430 डॉलर किराए पर इन मकानों में रहने की सुविधा है। इन मकानों को आइकन कंपनी ने सेकंड जनरेशन के थ्रीडी प्रिंटर वल्कन-।। से बनाया है।



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३डी प्रिंटिंग से बेघरों को दे रहे सपनों का आशियाना

हाल ही टेक्सास के ऑस्टिन शहर में बेघरों के लिए छह खास डिजायन वाले किराए के घरों का निर्माण किया गया है। इन घरों की खासियत ये हैं कि इन्हें 3डी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर डिजायन और निर्माण किया गया है। इन 3डी प्रिंटेड हाउस को अमरीकी हाउसिंग इंडस्ट्री भविष्य के घर बता रही है जो घर बनाने के व्यवसाय में क्रांति ला सकती है। 69 साल के शिया इस 3डी प्रिंटेड घर में रहने वाले पहले व्यक्ति हैं। आर्थराइटिस से पीडि़त शिया अभी तक व्हीलचेयर के सहारे आस-पास घूमफिर रहे थे। उनके लिए उनके पास अपना घर खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे।

180 बेघरों को मिली छत
ऑस्टिन में बेघरों के लिए बनाए रैन बसेरों की जगह अब इन इस नए ३डी प्रिंटेड घरों को रहने के लिए सेट किया गया है। इन छह घरों में फिललहाल 180 बेघर रह रहे हैं। 51 एकड़ में फैले इस कम्युनिटी फस्र्ट विलेज में बेघरों और सेवानिवृत्त बुजुर्गों के लिए ५०० घर बनाए गए हैं जिनमें से ये इस नए 3डी प्रिंटेड घर भी शामिल हैं। कंस्ट्रक्शन टेक्नालॉजी कंपनी आइकन ने इन घरों का निर्माण किया है। कंपनी का इससे समय और पैसे की भी बचत होती है और ये घर ज्यादा जगह भी नहीं घेरते।

पहला थ्रीडी प्रिंटेड घर
आइकन कंपनी का दावा है कि 400 स्क्वेयर फुट में बने ये घर अमरीका के पहले 3डी प्रिंटेड घर हैं। इन घरों की डिजायन और फ्रेमिंग 11 फुट ऊंचे और करीब 1800 किलोग्राम वजनी 3डी प्रिंटर से बनाई जाती है। यह पूरी तरह से रोबोटिक आधारित मशीनी प्रक्रिया है। एक ठोस कंक्रीट सामग्री 'लवमेक्रीट ओवेज़' को बीफॉथ प्रिंटर की सहायता से दीवारें, छतें और फर्श बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे बनी दीवारों के कोने घुमावदार और ठोस होते हैं। आइकन के सह-संस्थापक एवं सीईओ जैसन बैलार्ड का कहना है कि इस 3डी प्रिंटेड हाउस का आइडिया अवासीय परियोजनाओं में लगने वाले समय और पारंपरिक निर्माण से जुड़ी फिजूल लागत को कम करने के लिए आया था। इसके अलावा पर्यावरण एवं कार्बन फुटप्रिंट और कर्मचारियों की संख्या को सीमित करने भी इसका एक उद्देश्य था। इस प्रक्रिया ने घरों के डिजायनिंग का तरीका ही बदल दिया है। क्योंकि यह प्रिंटर स्लोप और कर्व का उपयोग करता है इसलिए भविष्य में 3डी प्रिंटिंग से जुड़ी नई डिजाइन भाषाएं उभरेंगी जो केवल 3 डी प्रिंटिंग के माध्यम से ही संचालित होंगी।

गौरतलब है कि अमरीका में 2007 के 22.9 फीसदी की तुलना में 2017 में बेघरों की आबादी बए़कर 33.8 फीसदी हो गई। ऐसे में बढ़ती आबादी और बेघरों को आवास उपलब्ध कराने के लिए 3डी प्रिंटिंग तकनीक ही सर्वोत्तम उपाय है। कम्युनिटी फस्र्ट विलेज में 430 डॉलर किराए पर इन मकानों में रहने की सुविधा है। इन मकानों को आइकन कंपनी ने सेकंड जनरेशन के थ्रीडी प्रिंटर वल्कन-।। से बनाया है।



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Monday, March 23, 2020

कोरोना वायरस की वजह से मंगलवार आधी रात से घरेलू उड़ानों पर भी रोक

कोरोना वायरस के संक्रमण को और अधिक फैलने से रोकने के लिए सरकार ने अब घेरलू विमानन सेवा को भी मंगलवार आधी रात से रोकने का फैसला किया है। हालांकि, यह प्रतिबंध माल ढुलाई वाले जहाजों पर नहीं है। विदेशी...

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कोरोना वायरस से देश ठप, लेकिन समय पर हो सकता है राज्यसभा चुनाव

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए देशभर में सभी तरह की गतिविधियां ठप हो गई हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव पर इसका असर नहीं हुआ है। राज्यसभा चुनाव पहले से निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 26 मार्च को...

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Sunday, March 22, 2020

Chaitra Navratri 2020: संसार के दुख दूर करने की कामना के साथ ऐसे नवरात्रि पूजन, इन बातों का रखें ध्यान

कोरोना वायरस के खतरे के बीच इस बार त्योहारों का रंग कुछ फीका-सा कर दिया। जहां लोगों ने होली भी काफी सर्तकता के बीच मनाई, वहीं ऐसे भी लोग थे जिन्होंने होली नहीं मनाने में ही अपनी भलाई समझी।बहरहाल,...

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Tuesday, March 17, 2020

राजस्थान में होली के दो दिन बाद से शुरू होती है गणगौर की पूजा

राजस्थान में जैसलमेर एवं बाड़मेर जिले में इन दिनों महिलाओं के धार्मिक आस्था का प्रतिक गणगौर पर्व की धूम है। होलिका दहन के दूसरे दिन से शुरू हुए गणगौर पर्व में कुंवारी कन्याएं और विवाहिताएं पूजन...

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Sunday, March 15, 2020

Sheetala ashtami 2020: संतान को निरोगी रखने को पूजन

होली के बाद शीतला सप्तमी मनाई गई। घरों में पकवान बनाए गए। इन पकवानों को अगले दिन सोमवार को शीतला माता को मंदिरों में चढ़ाया जाएगा। शीतला माता मंदिर में दिनभर भक्तों का रेला लगेगा। श्रद्धालु दिनभर...

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Sheetala Ashtami 2020: आज है शीतला अष्टमी, जानें क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Sheetala Ashtami 2020: हिंदू धर्म में हर साल होली के आठवें दिन शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस साल शीतला अष्टमी आज यानी 16 मार्च को मनाई जा रही है। कृष्ण पक्ष की इस शीतला अष्टमी को बासौड़ा (Basoda) और...

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Saturday, March 14, 2020

COVID-19: : सिंगापुर से हनीमून मनाकर अमेठी लौटे दंपति की निगरानी बढ़ी

हाल ही में सिंगापुर से हनीमून मनाकर लौटे दंपति की निगरानी कोरोना वायरस से संक्रमण के संदेह में बढ़ा दी गयी है। शासन के निर्देशानुसार दम्पति के विदेश दौरे की डिटेल लेने के साथ ही शनिवार को जिला...

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Tuesday, March 3, 2020

499 साल बाद होली पर शुभ संयोग, मकर में शनि व धनु राशि में गुरु

सन 1521 के बाद इस वर्ष होली पर 9 मार्च को मकर राशि में शनि ग्रह और गुरु अपनी धनु राशि में रहेंगे। जिसके चलते होली पर शुभ संयोग रहेगा। इससे पूर्व 3 मार्च 1521 यानि 499 वर्ष पहले होली के दिन दोनों...

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Holashtak 2020 Date: होलाष्टक में इस तरह करें पूजा, नौकरी में तरक्की के साथ पैसों की समस्या होगी दूर

Holashtak 2020 Date: हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार होलाष्टक होली से ठीक 8 दिन पहले से शुरू हो जाते हैं। हर साल होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक रहते हैं। इस साल...

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तकनीक जिसमें हवाई सफर में भी नहीं बंद होगा इंटरनेट

हवाई यात्रा में बिना बफरिंग और रुकावट के इंटरनेट का उपयोग अक्सर संभव नहीं होता। लेकिन तकनीक के कारण अब यह भी संभव है। जल्द ही हम जमीन से 40 हजार फीट की ऊंचाई पर भी बिना रुकावट के इंटरनेट का आनंद ले सकेंगे। यह संभव हो सकेगा वाई-फाई तकनीक में बदलाव करने से। अब हजारों फीट ऊंचाई पर एयरप्लेन वाई-फाई बिना रुकावट इंटरनेट की सुविधा देगा। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में एयरलाइंस कंपनियों पर अपने ग्राहकों को बेहतर एक्सक्लूसिव सेवाएं देने का जबरदस्त दबाव है। लेकिन 'जमीनी इंटरनेट सुविधा की गुणवत्ता' में सुधार इस दबाव को काफी हद तक कम कर अरबों डॉलर मेंटिनेंस खर्च बचा सकता है।

तकनीक जिसमें हवाई सफर में भी नहीं बंद होगा इंटरनेट

दरअसल, 30 एयरलाइंस कंपनियों के एक गैर-लाभकारी समूह 'सीमलेस एयर एलायंस' का दावा है कि उनकी नई तकनीक खुले इंटरफेस और सिस्टम के साथ जहाज के अंदर इंटरनेट कनेक्टिविटी सिस्टम को मॉड्यूलर बनाएगी, जिसे आसानी से swap किया जा सकता है। इस समूह में एयरबस और डेल्टा एयरलाइंस शामिल हैं। कंपनी की महत्त्वकांक्षी योजनाओं को पूरा करने का काम समूह से जुड़ी सैटेलाइट कंपनियां, तकनीकी उपकरण निर्माता कंपनियां और मोबाइल-नेटवर्क प्रदाता कंपनियां शामिल हैं। ये सभी साथ मिलकर सेलुलर और वाई-फाई उद्योगों से आउटसोर्स कर मिले प्रोटोकॉल का उपयोग करके एक वैश्विक मानक प्रस्तुत करना चाहते हैं। इस समूह के सीईओ जैक मंडाला का कहना है कि वर्तमान में एयरलाइंस कंपनियां अपने चुने हुए नेटवर्क प्रदाता के उपकरण का उपयोग कर रही हैं लेकिन समूह की यह योजना इस पूरे खेल को ही बदल कर रख देगी।

तकनीक जिसमें हवाई सफर में भी नहीं बंद होगा इंटरनेट

यात्रियों के लिए एयरपोर्ट का अनुभव बिल्कुल अलग होगा। मोबाइल कनेक्शन एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम पर, टर्मिनल ब्रिज से जेट ब्रिज पर और आपकी सीट पर आने-जाने के लिए लॉग-इन करने या भुगतान किए बिना माइग्रेट हो जाएगा। अब आप उन एयरलाइन फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहेंगे बल्कि अपनी पसंद के सीरियल, फिल्में, ऑनलाइन एपिसोड और वीडियो गेम भी खेल सकते हैं। मंडाला का कहना है कि ऑनबोर्ड इंटरनेट सेवा एयरलाइंस के ब्रांड के लिए एक बड़ा घाटा है। यात्रियों की शिकायत होती है कि वे सोशल मीडिया और इन्फोनेट से दूर हो जाते हैं। लेकिन इसके लिए वे इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी की बजाय एयरलाइंस को दोष देते हैं। मंडाला का दावा है कि नई इंटरनेट प्रदाता कंपनियां इन एकीकृत मानकों से आकर्षित होकर बाजार में उतरेंगी जिससे एक नए उद्योग की शुरुआत होगी। प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता को बढ़ाएगी। हालांकि इस सेवा की इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी की उच्च लागत एक बड़ी चुनौती है।
समूह का कहना है कि इस

तकनीक जिसमें हवाई सफर में भी नहीं बंद होगा इंटरनेट

नए प्रोटोकॉल से एयरलाइनों को अरबों डॉलर भी बचेंगे। क्योंकि वे तेजी से न केवल नई तकनीकों को अपना सकेंगे बल्कि अपनी जरुरत और यूजर फे्रंडली वाई-फाई कनेक्टिविटी को अधिक कुशलता से प्रबंधित करने में सक्षम होंगे। इसके लिए समूह लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट नेटवर्क Low Earth Orbit Satelite Network की एक नई पीढ़ी की सेवाएं लेगा। इनमें एलोन मस्क की स्टारलिंक कंपनी भी शामिल हो सकती है। बीते दस सालों के विश्लेषण के आधार पर समूह का अनुमान है कि इन क्षेत्रों में 5 फीसदी का सुधार भी 2028 तक इंटरनेट से जुड़े विमानों के बेड़े में 10 हजार से बढ़कर 25,500 पैसेंजर होने का अनुमान है। इतना ही नहीं इससे एयरलाइंस कंपनियों की इन-फ्लाइट सेवा बाजार में 11.4 बिलियन डॉलर (1140 करोड़ रुपए) की वृद्धि होने की उम्मीद है। 2019 में किए इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि तीन अन्य क्षेत्रों में 5फीसदी सुधार के साथ ग्राहक सुविधा को दोगुना करने पर यह लाभ लगभग 3700 करोड़ रुपए होने की उम्मीद है। जो कंपनियां इंटरनेट सुविधा देती हैं वहां खराब सेवा के चलते ग्राहकों की संख्या 10 फीसदी तक घट जाती है। ज्यादातर यात्री विमान के सर्वर से वायरलेस स्ट्रीमिंग एंटरटेनमेंट से जुड़े होते हैं।

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फारेस्ट गार्डन लगाकर ये वैज्ञानिक 24 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड ख़त्म कर चुका 20 सालों में

इसीलिए WORLD ECONOMIC FORAM से लेकर YOUTUBE INFLUENCERS जैसे सभी प्रभावशाली समूह और सदस्य बड़े पैमाने पर पौधरोपण कार्यक्रम की शुरुआत कर रहे हैं। लेकिन अक्सर ऐसे जोशीले अभियानों की परिणीति या उनकी सफलता दर निराशाजनक होती है। कुछ मुहिम तो पौधों के पनपने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। लेकिन सालों के प्रयोगों के बाद, जॉन लीयरी का मानना है कि उन्होंने इन प्रयासों को सफल बनाने का मंत्र ढूंढ निकाला है। दरअसल, अक्सर ऐसे अभियानों में स्थानीय लोगों खासकर किसानों की अनदेखी कर दी जाती है। लेकिन ये ही वे घटक हैं जो ऐसे अभियानों को सफल बनाने की वास्तविक कुंजी हैं। लीयरी मैरीलैंड में 1989 में स्थापित एक गैर-लाभकारी समूह 'ट्रीज फॉर द फ्यूचर' (TFF) के कार्यकारी निदेशक हैं। 

फारेस्ट गार्डन लगाकर ये वैज्ञानिक 24 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड ख़त्म कर चुका 20 सालों में

उनकी टीम ने शुरुआत में लाखों की संख्या में उन क्षेत्रों में पौधे रोपे जहां वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण कार्बन ऑफसेट और वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों को हानि पहुंची थी। लेकिन स्थानीय लोगों की मदद के बिना इनमें से केवल 5 फीसदी पौधे ही बच सके। इससे सबक लेते हुए उनकी टीम ने 'फारेस्ट गार्डन एप्रोच' की शुरुआत की जो स्थानीय स्तर पर लोगों खासकर किसानों को पेड़-पौधों का इस्तेमाल उपजाऊपन खो चुकी कृषि भूमि को फिर से उर्वरा बनाने के लिए प्रशिक्षित करती है। इस प्रयास से अब किसान कार्बन उत्सर्जन की बजाय वन उद्यान लगाकर बीते 20 साल की अवधि में प्रति एकड़ 230 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड खपा रहे हैं। 'फारेस्ट गार्डन एप्रोच' का प्राथमिक उद्देश्य पहले किसानों को आर्थिक रूप से सश्सक्त बनाना है उसके बाद पौधरोपण करना है।

फारेस्ट गार्डन लगाकर ये वैज्ञानिक 24 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड ख़त्म कर चुका 20 सालों में

लीयरी और उनकी टीम अब तक किसानों के साथ मिलकर 10 हजार से ज्यादा 'फारेस्ट गार्डन' का निर्माण कर चुके हैं, जो 20 सालों के दौरान २24 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड का उपयोग कर चुके हैं। यह 25 हजार कारों को सड़क से हटाने जैसा है। यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों, सीनेगल, कीनिया और तंजानिया में केन्द्रित है। टीएफएफ निर्धन देशों के वनविहीन क्षेत्रों में इस प्रोजेक्ट के जरिए हरियाली लाने और जलवायु परिवर्तन से लडऩे का काम कर रहे हैं। चार साल के इस प्रोजेक्ट के अंत तक 1500 से ज्यादा पौधे बढ़ जाते हैं। लीयरी कहते हैं कि भूमि की उर्वरा शक्ति के कमजोर पडऩे का एक बड़ा कारण किसानों का गलत फसलें बोना है। लीयरी यहां भी किसानों की मदद करते हैं।

फारेस्ट गार्डन लगाकर ये वैज्ञानिक 24 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड ख़त्म कर चुका 20 सालों में

जुलाई 2019* तक 12 महीनों के दौरान ही लीयरी और उनकी टीम 6 हजार से ज्यादा फॉरेस्ट गार्डन विकसित कर चुके हैं जिनमें करीब 1.1 करोड़ पेड़ हैं। अब उन्होंने एक MOBILE APP भी बनाया है जिसे अंग्रेजी और फ्रेंच समझने वाला कोई भी व्यक्ति एपयोग कर सकता है। इस ऐप में बताए गए तरीकों का इस्तेमाल कर कोई भी किसान फॉरेस्ट गार्डन बना सकता है। इस ऐप को सबसे ज्यादा भारत, ऑस्ट्रेलिया, जाम्बिया में डाउनलोड किया गया है।

फारेस्ट गार्डन लगाकर ये वैज्ञानिक 24 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड ख़त्म कर चुका 20 सालों में

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इस महीने दो अमरीकी अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस भेजेंगे एलोन मस्क

वे यहीं नहीं रुके थाइलैंड में गुफा में फंसे स्कूली बच्चों को बचाने वाले मुख्य रेस्क्यूअर को उन्होंने भद्दा बूढ़ा आदमी और बच्चों का दुष्कर्म करने वाले कहा था जिसके बाद उन्हें चौतरफा आलोचना और मानहानि का मुकदमा तक झेलना पड़ा था। इतना ही नहीं उन्होंने एक इंटरनेट प्रसारण के दौरान उसे रुकवा दिया जिससे NASA ने उनके खिलाफ सुरक्षा समीक्षा शुरू कर दी थी। लेकिन अब मस्क वह पुराने मस्क नहीं रह गए हैं जो हर समय विवादों और मुकद्दमों में उलझे रहते हैं। उन्होंने खुद को इन सालों में न केवल निखारा है बल्कि अपने लिए सम्मान भी अर्जित किया है। आज उनकी ऑटो कंपनी TESLA के शेयर की कीमत चौगुनी हो गई है और कंपनी का बाजार मूल्य अब GENERAL MOTORS और FORD के संयुक्त से भी अधिक है। वे मानहानि के मुकद्दमे से भी बरी हो गए हैं। इतना ही नहीं उनकी स्पेस ट्यूरिज्म की उड़ान 'SPACE X' लगातार अपनी मंजिल के करीब आता जा रहा है। इतना ही नहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हाल ही में उनकी तुलना थॉमस एडिसन से की थी और उन्हें अमरीकी की महान प्रतिभाओं में से एक बताया था।

इस महीने दो अमरीकी अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस भेजेंगे एलोन मस्क

संयम ने बनाया शहंशाह
TWITTER पर अपने आलोचकों पर कटाक्ष करने के लिए जाने जाने वाले मस्क अब बहुत संयम बरतते हैं। मस्क को करीब से जानने वाले लोग कहते हैं कि वे लगातार खुद को सुधार रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें दुनियश भर में 5करोड़ से ज्यादा लोग सोशल मीडिया पर फॉलो करते हैं। उनका अधिकतर बचपन दक्षिण अफ्रीका में बीता है जहां उन्हें BULLYING का शिकार होना पड़ा। इसलिए वे किशोरावस्था में ही उत्तरी अमरीका चले आए। 2000 में बाहर होने से पहले वे PAY-PAL के सीईओ थे। उन्हें स्थापित मानदंडों को चुनौती देने में मजा आता है। उन्हें 'ये नहीं हो सकता' से चिढ़ है। उन्होंने २2001 में स्पेसएक्स की स्थापना ऐसी ही एक असंभव थ्योरी 'स्पेस ट्यूरिज्म' को कर के दिखाने के लिए की थी। आज अमरीका की स्पेस इंडस्ट्री में वे शीर्ष पर हैं। 2018 में कंपनी के कुछ प्रतिभाशाली प्रमुख अधिकारियों के कंपनी छोडऩे से उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। लेकिन कड़ी मेहनत और अपनी काबिलियत से वे इससे भी उबर गए।

इस महीने दो अमरीकी अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस भेजेंगे एलोन मस्क

कंपनी में ही सोते थे
स्पेसएक्स के फॉल्कन रॉकेट के विंग डोर बनाने में जब उनकी कंपनी फेल हो गई तो वे बहुत अधिक चिंति हो गए। दरअसल दरवाजे इतने सख्त थे कि उन्हें फिट ही नहीं किया जा सका। तब उन्होंने दो सप्ताह कंपनी के अंदर ही बिताए और रात-दिन अपने इंजीनियर्स के साथ काम किया। यहां वे स्लीपिंग बैग्स में ही सो जाते और उठते ही फिर से काम पर जुट जाते। वे रॉकेट के पेंट से भी खुश नहीं थे। इसलिए वे लगातार कई सप्ताहों तक वर्कशॉप के पेंट सेक्शन में ही रहे और अपने हाथों से काम किया। इसी मेहनत का नतीजा था कि उन्होंने पिछले साल मार्च में अपने ड्रैगन स्पेस क्राफ्ट की सफल उड़ान को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन तक उड़ाकर वापस सुरक्षित जमीन पर उतारने का कारनामा कर दिखाया। लेकिन अगले महीने ऐसा ही एक ड्रैगन स्पेस क्राफ्ट इमरजेंसी में यान के इंजन से अलग होने की टेस्टिंग के दौरान हवा में ही विस्फोट हो गया। इससे एक बार फिर मस्क का सपना टूट गया। लेकिन उन्होंने हार तब भी नहीं मानी।

इस महीने दो अमरीकी अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस भेजेंगे एलोन मस्क

वहीं ये सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या मस्क अमरीकी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित स्पेस तक ले जा सकेंगे? इस का जवाब भी आने वाले दो महीनों में मिल जाएगा। दरअसल, स्पेसएक्स दो अमरीकी अंतरिक्ष यात्रियों बॉब बेन्केन और डग हर्ली को अपने यान में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन तक ले जाने वाला है। मस्क को पूरी उम्मीद है कि वे इस बार नहीं चूकेंगे।

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Monday, March 2, 2020

वर्चुअल रियलिटी से जिम में ही नहीं दुनिया में जहां चाहें वहां करें कसरत

तकनीक ने अब कसरत को पहले से ज्यादा मनोरंजक और रुचिकर बना दिया है। इसी का ताजा उदाहरण है वीरजूम कंपनी का वीजेड फिट। एक ही जगह पैडलिंग करते-करते दुनिया की सैर करने और सेहत बनाने का इससे बेहतर विकल्प नहीं हो सकता। दरअसल, इस खास वर्चुअल रियलिटी (वीआर) फिटनेस उपकरण में जिम बाइक के हैंडलबार्स और बाइक के कै्रंक तक सेंसर कंट्रोलर लगा है। ऑक्यूलस वीआर हैडसेट को आंखों पर पहनकर जब हम पैडलिंग करते हैं तो लगता है कि हम जिम या घर के बाहर खुले मैदान, पहाड़ों, गलियों, समुद्र किनारे, जंगलों और यहां तक की बादलों में साइकिल चला रहे हैं। यह एक ऐसी बाइक है जो अपनी जगह से एक इंच भी सरके आपको पूरी दुनिया की सैर कराने की क्षमता रखती है।

वर्चुअल रियलिटी से जिम में ही नहीं दुनिया में जहां चाहें वहां करें कसरत

वीरजूम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक जानजेन का कहना है कि वीजफिट एक्सप्लोरर प्रोग्राम में 360-डिग्री लैंडस्केप को गूगल स्ट्रीट व्यू (Google Street view) से एक साथ करोड़ों-अरबों चित्रों को एकसाथ मिलाकर अनगिनत जगहें (Locations) बनाई गई हैं। एरिक का कहना है कि उनकी तकनीक इनडोर फिटनेस (Indoor Fitness) में जबरदस्त परिवर्तन ला सकती है। यह तकनीक केवल साइकिलिंग में ही नहीं बल्कि ट्रेडमिल और अन्य ज्वाइंट फिटनेस उपकरणों में भी उपयोग किया गया है। ऑक्यूलस वीआर हैडसेट को आंखों पर पहनकर कंसोल में अपने फेवरिट लैंडस्केप या जगह का वीडियो देखते हुए दौडऩे का आनंद ले सकते हैं।

वर्चुअल रियलिटी से जिम में ही नहीं दुनिया में जहां चाहें वहां करें कसरत

वर्चुअल फिटनेस ट्रेनर करवाएंगे एक्सरसाइज
वीजफिट के विभिन्न मॉडल के आधार पर अलग-अलग फीचर्स आते हैं। नॉर्डिकट्रैक का एक्स32आइ मॉडल 32-इंच की इंटरेक्टिव टच स्क्रीन के साथ एक ऐसा पैकेज पेश करता है जिसमें गूगल मैप्स-संचालित एक्सरसाइज कोर्सेज हमें जॉग करने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही 'ग्लोबल वर्कआउट्स' के बारे में ट्रेंड करने वाले प्रशिक्षक भी हैं जो हमें पैटागोनिया, अर्जेंटीना, रोम या स्पेन की वादियों में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं। अगर आप मैदान की बजाय किसी पहाड़ी पर एक्सरसाइज करते हैं तो यह स्वचालित रूप से ऐसा करने के लिए डिजायन किया गया है। इतना ही नहीं इसकी आउटडोर मोबाइल ऐप एक ऐसा ऐप है जो बाइक या ट्रेडमिल दोनों पर समान रूप से काम करता है। यह अपने वर्चुअल फिटनेस कोर्स में हमें एक साथ अलग-अलग जगहों का आनंद लेते हुए कसरत करने की सुविधा देता है।

वर्चुअल रियलिटी से जिम में ही नहीं दुनिया में जहां चाहें वहां करें कसरत

इतना ही नहीं अगर आप रोवरिंग का मजा लेना चाहते हैं तो वीआर तकनीक ने उसका भी प्रबंध कर दिया है। पूर्व अमरीकी राष्ट्रीय टीम के रोइंग कोच ब्रूस स्मिथ हाइड्रो के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उन्होंने दुनिया का पहला लाइव वर्चुअल रियलिटी रोवर विकसित किया है। यानी अब आप बिना कहीं जाए घर बैठे-बैठे नदी और वॉटरफॉल्स में रोवरिंग का मजा ले सकते हैं। कंपनी के ये नए गैजेट जिम बैग में आसानी से फिट हो जाते हैं। 2019 में जॉर्जिया विश्वविद्यालय के एक शोध में सामने आया कि वर्चुअल रियलिटी के कारण बहुत ज्यादा साइकिलिंग करने से होने वाले दर्द में भारी कमी आई है।

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हवाई जहाज में अब यात्रियों को मिलेगा वाई-फाई इंटरनेट, मूवी देखने के साथ ही कर सकेंगे चैट

दिल्ली।

भारत में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। केंद्र सरकार ने उड़ान के दौरान हवाई जहाज के अंदर वाई-फाई ( Wifi Internet in Airplanes ) इंटरनेट की सुविधा के लिए अनुमति दे दी है, जिसके तहत यात्री अब उड़ान के दौरान इंटरनेट ( Wifi Internet in Flights ) चला सकेंगे। इसके लिए सरकार ने विमान कंपनियों को अधिसूचना जारी की हैं, जिसमें कहा गया है कि उड़ान के दौरान हवाई जहाज में अगर यात्री का स्मार्टफोन, लैपटाॅप, टैबलेट, स्मार्टवाॅच फ्लाइट मोड पर हो, तो विमान में सवार पायलट यात्रियों को इंटरनेट उपयोग के लिए अनुमति दे सकता है। आपको बता दें कि विस्तारा एयरलाइंस के सीईओ लेस्ली थिंग ने शुक्रवार को पहले बोइंग 787-9 विमान की डिलीवरी लेते हुए कहा था कि भारत में यह पहला विमान होगा, जो इन फ्लाइट वाई-फाई सेवाएं प्रदान करेगा।

मूवी, फेसबुक, व्हाट्सएप यूज कर सकेंगे यात्री

आपको बता दें कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथारिटी ऑफ इंडिया ( TRAI ) ने हवाई यात्रा के दाैरान इंटरनेट यूज के लिए पहले ही अनुमति दे दी थी। अब केंद्र सरकार के आदेश के बाद जल्द ही हवाई जहाज में भी यात्री वाई-फाई इंटरनेट का यूज कर सकेंगे। नई सेवा के जरिए यात्री विमान से ही यार-दोस्तों, परिवार, रिश्तेदारों से चैट कर सकते है। इसके अलावा मूवी देखने सहित इंटरनेट के जरिए अन्य कार्य भी कर सकते है। हालांकि, वाई-फाई सेवाएं के लिए यात्रियों से चार्ज वसूला जा सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर है रोका

आपको बता दें कि एयरक्राफ्ट कानून 1937 के 29बी के तहत विमान में कोई भी यात्री और पायलट किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को काम में नहीं ले सकता है लेकिन, अब सरकार ने पायलट इन कमांड को इस सेवा को उपलब्ध कराने के लिए अनुमति दी है।ऐसे में अब पायलट इन कमांड यात्री को वाई-फाई इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए इजाजत दे सकता है।



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