Tuesday, January 28, 2020

यह भारतीय संभालेगी अमरीकी ५जी नेटवर्क की कमान

भारतीय मूल की अमरीकी नौकरशाह डॉ. मोनिका घोष को हाल ही अमरीकी संचार कानून और विनियम लागू करने वाले शक्तिशाली संघीय संचार आयोग (federal communication commision) की मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति की दो खास बातें हैं। एक वे एफसीसी की पहली महिला तकनीकी अधिकारी हैं और दूसरी की इस पद पर पहुंचने वाली वे पहली भारतीय भी हैं। एफसीसी के अध्यक्ष भारतीय मूूल के अजीत पई ने कहा कि घोष ने अमरीका में भारत का नाम ऊंचा किया है और एफसीसी की पहली महिला सीटीओ के रूप मेंं उनका कॅरियर युवा महिलाओं को प्रेरित करेगा। उनकी वायरलैस तकनीक में गहरी जानकारी और विशेषज्ञता अमरीका को 5जी तकनीक में अन्य देशों से आगे रखेगी। 13 जनवरी से पदभार ग्रहण करने वाली घोष एफसीासी को प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग मुद्दों पर सलाह देंगी और इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कार्यालय के साथ मिलकर काम करेगी।

5 जी तकनीक पर शोध

डॉ. मोनिशा घोष ने शिक्षा और उद्योग में अत्याधुनिक वायरलेस मुद्दों पर शोध किए हैं। वे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी), मेडिकल टेलीमेट्री और प्रसारण मानकों में भी विशेषज्ञता रखती हैं। 1991 में दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी करने वाली घोष ने 1986 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खडग़पुर से बीटेक किया है। एफसीसी के अनुसार, घोष कंप्यूटर एवं सूचना प्रणाली और इंजीनियरिंग निदेशालय के भीतर कंप्यूटर और नेटवर्क सिस्टम डिवीजन में कार्यक्रम निदेशक के रूप में भी काम कर चुकी हैं।

यह भारतीय संभालेगी अमरीकी ५जी नेटवर्क की कमान

बनाए वायरलैस स्पेक्ट्रम
उन्होंने अमरीका के नैशन साइंस फाउंडेशन में प्रोग्राम ऑफिसर के रूप में स्पेक्ट्रम और वायरलेस स्पेक्ट्रम साझा करने के लिए नए शोध और उपयोग किए। डॉ. मोनिशा घोष ने यहां कोर वायरलेस रिसर्च पोर्टफोलियो जैसे मशीन लर्निंग फॉर वायरलैस नेटवर्किंग सिंस्टम का भी प्रबंधन किया है। इतना ही नहीं वे शिकागो विश्वविद्यालय में रिसर्च प्रोफेसर भी हैं और इंटरनेट, 5जी सेलुलर, अगली पीढ़ी के वाई-फाई सिस्टम और स्पेक्ट्रम को-एग्जिस्टेंस (सह-आस्तित्व) के लिए वायरलेस तकनीकों पर शोध करती हैं।

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Monday, January 27, 2020

क्या 3 हजार साल पुरानी मिस्त्र की ये ममी फिर से बोल उठेगी?

जर्नल साइंटिफिक रिपोट्र्स में हाल ही प्रकाशित यह नया अध्ययन किसी विज्ञान कथा या मिस्र की ममियों पर बनीं किसी हॉलीवुड फिल्म की तरह जरूर दिखाई देता है। लेकिन इसके पीछे एक गंभीर प्रेरणा शामिल है। इस शोध में शामिल वैज्ञानिकों के अनुसार नेसयमुन नाम के इस पुजारी की आवाज को हजारों सालों के बाद फिर से पैदा (रि-क्रिएट) किया जाएगा। यूके के यॉर्क विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् जॉन स्कोफील्ड ने कहा कि मिस्र में पुनर्जीवन को सच मानते थे और इस ममी की आवाज के साथ ही मिस्रवासियों के उस विश्वास को सम्मान दिया जा रहा है।

क्या 3 हजार साल पुरानी मिस्त्र की ये ममी फिर से बोल उठेगी?

किसकी है ये ममी
नेसयमुन नाम का यह पुजारी थीब्स के कर्नाक शहर में एक मंदिर के मुंशी के रूप में काम करता था। उनके पूजा संबंधी रीति-रिवाजों के कारण उनकी आवाज का उतार-चढ़ाव और पिच अन्य लोगों से अलग होती थी। वे ऊंची आवाज में बोलते, जाप करते, और गाते थे। उनकी आवाज़ उनके पुरोहित कर्तव्यों में महत्वपूर्ण होती थी। मृत्यु के बाद नेसयमुन के शरीर को को ममी के रूप में सुरक्षित कर एक ताबूत में रखा गया था जिस पर बनी चित्रलिपी पर उनके बारे में जानकारी अंकित थी। इसे बुक ऑफ द डेड (book of dead) कहते हैं।

क्या 3 हजार साल पुरानी मिस्त्र की ये ममी फिर से बोल उठेगी?

सन 1823 से उनकी ममी ब्रिटेन के लीड्स सिटी संग्रहालय में है। यहां उनके शरीर को ताबूत से बाहर निकाला गया और माइक्रोस्कोप, एंडोस्कोप एवं एक्स-रे से ममी की जांच करने के बाद वैज्ञानिकों, विद्वानों, सर्जनों और रसायन विज्ञानियों ने अपने-अपने नजरिए से जांच की है। 1828 में हुई नेसयमुन की यह 'बहु-विषयक वैज्ञानिक जांच' दुनिया में अपनी तरह की पहली थी।

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ऐसे बनाया स्वरतंत्र
हाल में हुए शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन में लीड्स जनरल इन्फर्मरी में सीटी स्कैनर का उपयोग करते हुए नेसयमुन के अच्छी तरह से संरक्षित स्वरतंत्र (वोकल ट्रैक्ट) के सटीक माप लिए। इस स्कैन से, उन्होंने उसके गले की 3डी कॉपी बनाई और उसे लाउडस्पीकर पर लगा दिया। टीम ने आवाज पैदा करने के लिए एक मानव स्वरयंत्र ध्वनिक आउटपुट के माध्यम से वोकल टै्रक्ट में इलेक्ट्रॉनिक संकेत प्रवाहित किया।

क्या 3 हजार साल पुरानी मिस्त्र की ये ममी फिर से बोल उठेगी?

एकल स्वर उभरा
इलेक्ट्रॉनिक संकेत से स्वरतंत्र ने ए और ई का एकल स्वर निकाला। यह सिंगल साउंड एक 'रूफ. ऑफ. कॉन्सेप्ट' वर्क का प्रतिनिधित्व करता है। रॉयल हॉलवे विश्वविद्यालय के मानव भाषण विशेषज्ञ हार्वर्ड ने बताया कि अन्य स्वरों का उत्पादन करने के लिए वोकल ट्रैक्ट के आकार में परिवर्तन करने की जरुरत होगी। टीम अब इसी पर काम कर रही है। टीम अब इस डिजायन को और अपडेट कर इससे शब्द, गायन यहां तक कि भाषण भी बुलवाना का लक्ष्य रख रहे हैं।

क्या 3 हजार साल पुरानी मिस्त्र की ये ममी फिर से बोल उठेगी?

शोध से निकलेगी राह
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह पक्के तौर से नहीं कहा जा सकता कि यह स्वर जो ३डी स्वरतंत्र से निकले हैं वे मिस्र के पुजारियों की भाषा में थे भी या नहीं। वहीं ये इतना छोटा और क्षणिक है कि इसे समझना भी मुश्किल है। लेकिन आने वाले समय में शोध में विस्तार के साथ वैज्ञानिक उस समय के लोगों की भाषा और आवाज को सुनने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी की आवाज से ज्यादा व्यक्तिगत और क्या गुण हो सकता है। आज के मानव की तुलना में नेसयमुन के वोकल ट्रैक्ट छोटे हैं। इस आकार का भी आवाज पर असर हो सकता है।

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रोबोट्स को सिखा रहे मौसम पूर्वानुमान की तरह ट्रैफिक बताना

वैज्ञानिक दरअसल मानव मस्तिष्क की नकल के आधार पर बड़ी-बड़ी डेटा तकनीकों का उपयोग कर इसके लिए एक डिजिटल मैप बना रहे हैं। इससे भीउ़-भाड़ वाले इलाकों में यातायात जाम संबंधी जानकारी पहले ही प्रसारित की जा सकेंगी। हियर टेक्नोलॉजी की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक आधारित कंपनी ब्रेन स्थान और परिवहन संबंधी डेटा की आपूर्ति करता है। कंपनी ने हाल ही एक ट्रैफिक पूर्वानुमान लगाने संबंधी प्रतियोगिता का आयोजन किया था। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस पा्रतियोगिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर प्रतिभागियों ने मौसम संबंधी सटीक अनुमान लगाए थे। कंपनी का कहना है कि वे मशीन लर्निंग प्रोग्राम को और बेहतर प्रशिक्षित कर एआइ के जरिए मौसम के पूर्वानुमान की तरह ही शहरों के टै्रफिक संबंधी पूर्वानुमान भी प्रसारित कर सकते हैं।

रोबोट्स को सिखा रहे मौसम पूर्वानुमान की तरह ट्रैफिक बताना

हालांकि चालकों की मनमानी और मनमाने फैसले फिर भी जाम लगा सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रतियोगिता ने उम्मीद जगाई है कि अल सुबह ही मौसम की तरह हम शहर के ट्रैफिक का हाल भी बता सकते हैं। प्रतियोगिता के परिणाम बताते हैं कि हमारे तंत्रिका नेटवर्क की ही तरह ये जटिल कम्प्यूटेशनल सेटअप विशाल डेटा भ्संडार से कठिन से कठिन पैटर्न को ढूंढ सकते हैं।

रोबोट्स को सिखा रहे मौसम पूर्वानुमान की तरह ट्रैफिक बताना

भविष्य की जरुरत हैं ये सिस्टम
शोध के प्रमुख वैज्ञानिक और ऑस्ट्रिया स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड रिसर्च इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संस्थापक माइकल कोप ने कहा कि जिस तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ रही है ऐसा सिस्टम हमारे लिए भविष्य के ट्रैफिक की जरुरत है। मान लीजिए कि आने वाले 10 सालों में 10 फीसदी इलेक्ट्रिक कारें हमारी सड़कों पर बढ़ जाएं तो हम उस दबाव का सामना कैसे करेंगे। इससे होने वाले सीओ२ उत्सर्जन को रोकने के हमारे पास क्या उपाय हैं? ऐसे में ट्रैफिक को सुगम बनाने से काफी राहत मिल सकती है। क्योंकि हम हर कार के लिए तो हॉट लेन नहीं बना सकते। इसलिए आज हम ट्रैफिक दबाव के उस बिंदू पर पहुंच गए हैं जहां हमें कंप्यूटर पर ट्रैफिक के पूर्वानुमान के लिए आश्रित होना ही पड़ेगा।
कोप ने बताया कि वे अभी जर्मनी, तुर्की और रूस के शहरों के यातायात डेटा का उपयेाग कर मशीनों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। ये सभी डेटा रंगों में हैं। हरा रंग का कोड गति, नीला दिशा और लाल रंग ट्रैफिक घनत्व को दर्शाता है।

रोबोट्स को सिखा रहे मौसम पूर्वानुमान की तरह ट्रैफिक बताना

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आग की खोज से भी बड़े परिवर्तन लाएगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता

गूगल की पैरेंटल कंपनी अल्फाबेट इंक के सीईओ सुंदर पिचाई ने हाल ही स्विटजरलैंड के दावोस में world economic foram के एक इंटरव्यू में artificial intelligence के बारे में महत्त्वपूर्ण बातें कहीं। इंटरव्यू में उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में कहा कि एआई मानवता के भले के लिए काम करने वाली सबसे महत्त्वपूर्ण मानवीय तकनीकों में से एक है। पिचाई ने एआइ को आदिमानव द्वारा आग और औद्योगिक क्रांति के दौर में बिजली (इलेक्ट्रिसिटी) के अविष्कार से भी ज्यादा गहरा प्रभाव डालने वाला बताया। गौरतलब है कि अल्फाबेट को एआइ के विकास में काफी जूझना पड़ा है। इसमें उसके कर्मचारियों का अमरीकी सरकार के लिए एआइ तकनीक विकसित करने को लेकर विद्रोह भी शामिल है। वहीं 2018 में एक प्रभावशाली सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के समूह ने सुरक्षा संबंधी तकनीक विकसित करने में जानबूझकर विलंब किया जिससे गूगल अपने प्रतिद्वंद्वी की तुलना में अमरीकी सेना से अनुबंध नहीं कर सका था।

आग की खोज से भी बड़े परिवर्तन लाएगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता

सोच-समझकर कदम रख रहा गूगल
गूगल ने हाल ही कुछ एआई तकनीकों का एक सेट जारी किया है जो सैन्य हथियारों को प्रतिबंधित करने का काम करता है। लेकिन गूगल इसे सेना को बेचने से इनकार नहीं करता है। गूगल ने सेना के साथ अपने प्रोजेक्ट मावेन के अनुबंध को भी नवीनीकृत नहीं करने का भरोसा दिलाया है। इस प्रोजेक्ट में ड्रोन फुटेज का विश्लेषण करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया जाता है। 2015 से गूगल का नेतृत्व कर रहे पिचाई ने संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन के पद छोडऩे पर हाल ही अल्फाबेट के सीईओ का पदभार संभाला है।

आग की खोज से भी बड़े परिवर्तन लाएगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता

जलवायु की तरह है एआइ
दावोस में पिचाई ने कहा कि एआई जलवायु परिवर्तन से अलग मुद्दा नहीं है।आप किसी एक देश या उससे मुकाबला करने वाले कई देशों के समूह में शामिल होने भर से सुरक्षित नहीं हो जाते। इसके लिए आपको वैश्विक ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने अमरीका और यूरोपीय संघ का समर्थन करते हुए कहा कि अमरीका और यूरोप में प्रौद्योगिकी को विनियमित करने के लिए वर्तमान रूपरेखा एक शानदार शुरुआत है। उन्होंने अन्य देशों को पेरिस समझौते के अनुरूप अंतर्राष्ट्रीय समझौतों पर एक साथ काम करने की नसीहत भी दे डाली। उन्होंने फेस रिकग्निशन या चेहरा पहचान तकनीक को लेकर भी विचार रखे। पिचाई ने कहा कि इस तकनीक से डश्रने की जरुरत नहीं है और इस जैसी तकनीक का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए भी किया जा सकता है। इसमें लापता लोगों को ढूंढना या बड़े पैमाने पर समाज को नुकसान पहुंचाने वाले 'नकारात्मक तत्त्व' शामिल हैं।

आग की खोज से भी बड़े परिवर्तन लाएगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता

डेटा सेफ्टी पर भी बोले
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की क्षमता के बारे में भी बात की। पिचाई ने कहा कि उनकी कंपनी कम से कम ग्राहक डेटा का उपयोग करके नई तकनीकों और सेवाओं को विकसित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ताओं के डेटा को सुरक्षित रखना आज एक बहुत बड़ा जोखिम है। पिचाई ब्रसेल्स से दावोस आते समय रास्ते में रुककर लोगों से आमने-सामने मिले और अपने विचार रखे। यहां उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अपने दृष्टिकोण का समन्वय करने के लिए नियामकों को भी बुलाया। यूरोपीय संघ कंपनी के साथ एक शुरुआती मसौदे के अनुसार उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य देखभाल और परिवहन में एआई तकनीक विकसित करने वालों के लिए नए नियम लागू करने जा रहा है।

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हवा, पानी और बिजली से बना रहे नया प्रोटीन जिसे खा सकेंगे

दरअसल पूरी दुनिया में इस मुद्दे पर लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है कि 7 अरब से ज्यादा की वैश्विक जनसंख्या वाली पृथ्वी के लोगों का पेट भरने में हमारे ग्रह के संसाधनों पर जबरदस्त दबाव है। ऐसे में अगर खाने के नए विकल्प और सस्ते संसाधन न खोजे गए तो भविष्य में हमारे लिए पेट भरने संबंधी एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। खेतीबाड़ी ग्रीनहाउस गैसों के सबसे बड़े स्रोतों में से है एक है जो दुनिया का 14.5 फीसदी green house गैस उत्सर्जन करता है। इसमें पशुपालन एक बड़ा कारक है। वहीं बोईसीडी के अनुसार खेती के लिए हम दुनिया के 70 फीसदी पानी का उपयोग करते हैं। हेलसिंकी स्थित एक कंपनी सोलर फूड इस परिस्थिति को बदलने का प्रयास कर रही है। कंपनी के सीईओ पासी वैनिक्की का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी को बचाने के लिए हमें कृशि से खाद्य उत्पाद को अलग करने की जरुरत है।

पतली हवा से बना रहे भोजन, साथ ही पानी और स्वच्छ ऊर्जा भी

प्रोटीन पाउडर बना रहे
यह स्टार्टअप कंपनी अपने पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रोटीन का एक नया प्राकृतिक स्रोत विकसित करने का प्रयास कर रही है। दूसरे प्रोटीन की ही तरह इस प्रोटीन का भी स्वादिष्ट स्वाद नहीं है और इसे लगभग किसी भी स्नैक या भोजन में उपयोग किया जा सकता है। लेकिन सोलर फूड्स का कहना है कि इसमें एक-छोटा कार्बन फुटप्रिंट होगा। इसे कंपनी ने सॉलेन नाम दिया है जो एक प्रोटीन युक्त पाउडर है। इसे एक सूक्ष्म जीव द्वारा बनाया जाता है। निर्माताओं का कहना है कि यह मांस की तुलना में 100 गुना अधिक जलवायु के अनुकूल है। कंपनी के वैज्ञानिक एक किण्वन (फर्मेंटेशन या खमीर) टैंक में तरल में एक माइक्रोब विकसित करके सॉलेन बनाया जाता है। यह शीतल पेय बनाने में उपयोग की जाने वाली प्रक्रिया के समान है। लेकिन इसे शक्कर से बनाने की बजाय सोलर फूड्स का खास माइक्रोब केवल हाइड्रोजन बुलबुले, कार्बन डाइऑक्साइड, पोषक तत्व और विटामिन को खाता है।

पतली हवा से बना रहे भोजन, साथ ही पानी और स्वच्छ ऊर्जा भी

इतना ही नहीं कंपनी पानी से इलेक्ट्रिसिटी बनाकर हाइड्रोजन बनाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकाल देते हैं। इसलिए कंपनी इसे 'पतली हवा से बनाया भोजन' कहती है। यह सब अक्षय ऊर्जा से संचालित होता है कार्बन फुटप्रिंट को कम करता है। इसमें ६५ फीसदी प्रोटीन फैट और कार्बोहाइड्रेट्स हैं। इसे ब्रेड, पास्ता प्लांट बेस्ड मीट और डेयरी उत्पादों के साथ खाया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह मीट से १०० गुना ज्यादा पर्यावरण फे्रंडली है। जबकि पौधों से मिलने वाले प्रोटीन से १० गुना ज्यादा बेहतर है। इसे बनाने में पानी भी कम खर्च होता है। कंपनी २०२१ तक इसे मार्केट में उतारने पर विचार कर रही है।

पतली हवा से बना रहे भोजन, साथ ही पानी और स्वच्छ ऊर्जा भी

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आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस वाले भावुक और ह्यूमन बोट्स होंगे हमारे अकेलेपन के साथी

इस बार के कुछ तकनीकी रुझान वाकई दिलचस्प थे। फोल्डेबल लैपटॉप लोगों में खासे लोकप्रिय रहे क्योंकि यह तकनीक OLED को मोडऩे और कहीं भी टिका सकने की सुविधा देता है। वहीं टीवी में अब खुद ही अपनी पिक्चर क्वालिटी को ठीक करने की क्षमता है। वहीं पौधों से बना नकली मांस (प्लांट बेस्ड) अब अमरीका से बाहर निकलकर अन्य देशों में जगह बनाने लगा है। इन सबके बीच 'आर्टिफिशियल ह्यूमंस' or ARTIFICIAL HUMAN'S यानि कृत्रिम मनुष्य अब एक हकीकत हैं जो हमारे आभासी अवतार जैसे हैं। इन 'ह्यूमनबोट्स' से हम असली व्यक्ति की तरह बातचीत कर सकते हैं। सुरक्षा उपकरण और तकनीक विकसित करने वाली कंपनियां हमारे डेटा के चुराए जाने का डर दिखकर भले ही अपने उत्पाद बेचने में कामयाब हो रही हों, लेकिन हकीकत यही है कि व्यापारी है जो रात-दिन हमारे गोपनीय डेटा पर गिद्ध दृष्टि भी गड़ाए रखती हैं। सीईएस 2020 के कुछ बेहद खास और विचित्र इन्वेंशन पर आइए डालते हैं एक नजर।

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मानव जैसे रोबोट्स
हम भले ही अभी तक ह्यूमनॉइड रोबोट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के परिष्कृत 'शरीर या अवतार' बनाने में महारत हासिल नहीं कर पाए हों लेकिन सैमसंग की स्टार लैब्स डिवीजन का दावा है कि इसने 'आर्टिफिशियल ह्यूमन' यानि कृत्रिम मानव बना लिया है। लैब के वैज्ञानिकों ने इसे 'निऑन अवतार' नाम दिया है। निऑन एक कंप्यूटर-जनित एनीमेशन जैसा है जो किसी व्यक्ति की ही तरह दिखता है। जैसे किसी वीडियो गेम में दिखने वाले लोग। इसमें एलेक्सा की तरह बात करने का कौशल होता है। कंपनी का कहना है कि निऑन अवतार असली इंसान की तरह 'सहानुभूति' दिखा सकते हैं। इस प्रौद्योगिकी का उपयोग वे कंपनियां कर सकती हैं जो कंप्यूटराइज्ड संस्करणों के साथ अपने ग्राहक सेवा को बेहतर करना चाहते हैं। कंपनी का कहना है कि निऑन अवतारों का उपयोग आभासी स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं, द्वारपाल, टेलीविजन एंकर या फिल्म सितारे के रूप में भी किया जा सकता है।

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भावुक रोबोट भी
GOOGLE, APPLE और AMAZON की बात कर सकने वाली वॉयस असिस्टेंट तकनीक की बदौलत हम अपने प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर पा सकते हैं। लेकिन अब सिर्फ एक तरफा बात नहीं होगी। टोक्यो स्थित युकाई इंजीनियरिंग ऐसा रोबोट लाया है जो आपके साथ भावनात्मक रूप से जुड़ता है। यह हमारे साथ सहानुभूति प्रदर्शित कर सकता है। कंपनी ने इसे 'बोक्को इमो' नाम दिया है। यह एक घनिष्ठ मित्र की तरह हमारी हर बात को सुनता है और आपकी कही बातों के आधार पर भावनात्मक भाषा और हाव-भाव के साथ जवाब देता है। इतना ही नहीं इसका यांत्रिक सिर भी सहानुभूति के साथ ऊपर और नीचे हिलता-डुलता है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट हमारे खालीपन को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खासकर उन देशों में जहां बुजुर्ग आबादी ज्यादा है। यह रोबोट स्मार्ट लाइट चालू या बंद करने जैसे कुछ अन्य व्यावहारिक कार्य भी कर सकता है।

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अपने डेटा की सुरक्षा
तकनीक में बदलाव के साथ ही अब आखिरकार हमें अपनी गोपनीयता की रक्षा में कुछ मदद मिल रही है। विंस्टन नाम का एक खास बॉकनुमा उपकरण हमारे वाईफाई राउटर और मॉडेम के बीच सेट किए जाते हैं। यह हमारे घर में सभी डिवाइसों के डेटा फुटप्रिंट को कम करने में सक्षम है। यह सिर्फ एक वर्चुअल प्राइवेसी नेटवर्क (VPN) की तुलना में घर में आने और जाने वाले डेटा ट्रैफिक को स्कैन करता है। विंस्टन डेटा स्कैनिंग के जरिए विज्ञापनों को ब्लॉक करने, कुकीज़ को ट्रैक करने, फिल्टर वेबसाइट के 'फिंगरप्रिंट्स' की नकल बनाने से रोकने और हमारे इंटरनेट एड्रेस को ट्रैक करने से आसानी से रोक सकता है। विंस्टन का यह भी दावा है कि यह इंटरनेट की स्पीड बढ़ाता है क्योंकि यह बहुत सारे ऑनलाइन ट्रैकर्स और विज्ञापनों को लोड होने से रोकता है।

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अब स्मार्ट होंगे चश्मे भी
एन-रियल नाम के ये स्मार्ट ग्लासेज दिखने में सामान्य धूप के चश्मे जैसे ही दिखते हैं। लेकिन बीजिंग स्थित यह स्टार्टअप कंपनी के इस आरामदायक और हल्के स्मार्टग्लास में सामने की ओर ऑग् मेंटेड रियलिट वाले कैमरे लगे हैं जो कमरे में मौजूद आभासी वस्तुओं का पता लगाने में मदद करते हैं। इसका ऑपरेटिंग सिस्टम किसी भी एंड्रॉइड ऐप के साथ जुड़ जाता है। इतना ही नहीं यह यह स्नैप-इन प्रिस्क्रिप्शन लेंस को भी सपोर्ट करता है। इसे पहनकर आप 52 डिग्री तक देख संवर्धित दृश्य सकते हैं।

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Saturday, January 25, 2020

यह नया मेटल रोकेगा सड़क का शोर

अत्याधुनिक कारें भी रोड के शोर को अंदर आने से नहीं रोक पातीं। यह लंबे समय से कार निर्माताओं की एक प्रमुख समस्या है। इलेक्ट्रिक कारों में तो यह और अधिक बढ़ जाता है। लेकिन अब जापानी कार निर्माता कंपनी निसान ने एक ऐसा ध्वनि रोधी मेटा-मटीरियल विकसित किया है जो वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले ध्वनि रोधक सामग्रियों की तरह प्रभावी तो है लेकिन वजन में उसका एक चौथाई है।

कार निर्माता कार के केबिन में आने वाले सड़क के शोर को कम करने के लिए लंबे समय से रबर बोर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन ये भारी हैं और कार की फ्यूल एफिशिएंसी (ऊर्जा दक्षता) को भी कम करते हैं। यह मेटा-मटीरियल हैडफोन की तरह ध्वनि तरंगों को एक्टिव नॉइज कैसिंलेशन तकनीक का उपयोग कर शोर को अंदर आने से रोकता है। हालांकि इसके लिए इसे किसी महंगे माइक्रोफोन या स्पीकर सेटअप की आवश्यकता नहीं है।

यह नया मेटल रोकेगा सड़क का शोर

कंपनी का यह भी दावा है कि यह बड़े पैमाने पर रबर बोर्ड के उत्पादन की तुलना में सस्ता भी है। यह मेटा-मटेरियल एक पतली प्लास्टिक की फिल्म जैसी जाली संरचना जैसी है। यह 500 से 1200 हट्र्ज रेंज में व्यापक आवृत्ति के शोर को नियंत्रित करती है। इससे गुजरने पर ध्वनी की तीव्रता बिल्कुल कम हो जाती है।

यह नया मेटल रोकेगा सड़क का शोर

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Monday, January 20, 2020

63 साल पुराने इस सी-प्लेन पर टिकी हैं "ई-फ्लाइट" की उम्मीदें

इलेक्ट्रिक कारों के बाद इलेक्ट्रिक विमान के लिए भी airospace companies में प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। इलेक्ट्रिक विमान विकसित करने की इस दौड़ में बोइंग (Boeing) , नासा (NASA) और उबेर(UBER) के साथ एक छोटी कनाडाई एयरलाइन भी शामिल हो गई है जिसने हाल ही 63 साल पुराने एक सीप्लेन में इलेक्ट्रिक मोटर लगाई है। कंपनी ने अपने हार्बर एयर के संशोधित डी हैविलैंड बीवर विमान ने वैंकूवर के पास पानी के ऊपर से अपनी पहली उड़ान भरी। विमान कुछ मिनटों तक हवा में रहने के बाद जमीन पर उतर आया। कंपनी का दावा है कि उसने दुनिया की पहली वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक उड़ान भरने की उपलब्धि हासिल कर ली है।

63 साल पुराने इस सी-प्लेन पर टिकी हैं

हार्बर एयर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और विमान की पहली उड़ान के पायलट ग्रेग मैकडॉगल ने कहा कि यह एयरलाइंस व्यवसाय के लिए एक सस्ता, प्रदूषण रहित और शांत विमान की ओर हमारा पहला बड़ा कदम है। ग्रेग के अनुसार हाल के सालों में इलेक्ट्रिक प्लेन के प्रति विमानन कंपनियों की रुचि बढ़ी है। इसमें स्थापित कंपनियों के अलाव स्टार्टअप समूह भी शामिल हैं। इलेक्ट्रिक मोटर से उड़ान भरने की यह प्रौद्योगिकी (TECHNIQUE) पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना हवाई टैक्सी और उडऩे वाली कारों जैसे नए प्रकार के विमानन व्यवसायों के लिए अवसर के दरवाजा खोल सकती है। दरअसल, प्रौद्योगिकी में इतनी प्रगति के बाद, अब भी इलेट्रिक विमान की राह में चुनौतियां कम नहीं हैं। आज की बैटरियां उतनी ऊर्जा (ईंधन से उत्पन्न थस्र्ट) पैदा नहीं कर सकती हैं जितना कि तेल से चलने वाले इंजन।

63 साल पुराने इस सी-प्लेन पर टिकी हैं

यूं भरी पहली उड़ान
बीते साल फरवरी में मोटर कंपनी मैग्नी एक्स ने ग्रेग को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया। मोटर की क्षमता को बढ़ाने और तकनीक को उन्नत करने के बाद गत 10 दिसंबर को बीवर नाम के इस सी-प्लेन ने उड़ान भरी। बिना शोर के उडऩे के कारण भी इसने विमान नीतियां बनाने वाले अधिकारियों का ध्यान खींचा। नवंबर में सीनेटर बैन कार्डिन ने अपने साथियों के साथ नासा को इस प्रोजेक्ट को 120 करोड़ रुपए का फंड देने का अनुरोध किया। इस तरह यह विमान अब 2040 में बोइंग के 737 विमानों के बराबर आ गया है।
गौरतलब है कि नासा की टीम ने पहले से ही एक बैटरी सेटअप विकसित कर लिया है जो विमान की 5000 डबल-ए-आकार के सेल्स में आग लगने से बचाती है।

63 साल पुराने इस सी-प्लेन पर टिकी हैं

क्लार्क की टीम ने इस सी-प्लेन में धीरे-धीरे और अधिक इलेक्ट्रिक तकनीक को शामिल करने की योजना बनाई है, जो अगले साल के अंत तक उड़ान भरेगी। इस अंतिम प्रोटोटाइप डिजाइन में सभी 14 मोटरें होंगी जो विमान की दक्षता में सुधार करेंगी। यह एक ऐसी तकनीक है जो अगले 20 या 30 वर्षों में लोगों के जीवन को बदल सकती है।

63 साल पुराने इस सी-प्लेन पर टिकी हैं

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Saturday, January 18, 2020

Shattila Ekadashi 2020: इस दिन है षटतिला एकादशी, जानें क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत कथा

Shattila Ekadashi 2020: हिंदू धर्म में 12 मास में एकादशी के 24 व्रत पड़ते हैं। जिसमें से कुछ एकादशी बेहद खास मानी जाती है। इन्हीं खास एकादशी में से एक षटतिला एकादशी भी है। इस साल षटतिला...

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Shattila Ekadashi 2020: 20 जनवरी को है षटतिला एकादशी, जानें क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Shattila Ekadashi 2020: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बेहद शुभ और सर्वश्रेष्ठ तिथि माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने,दान, स्नान और तप करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती...

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Wednesday, January 15, 2020

मकर संक्रांति 2020: यहां पुरुष करते हैं शिकार पर महिलाएं रखतीं हैं उपवास, जानें बेझा-बिंधा पर्व के क्या हैं नियम

मकर संक्रांति पर्व को झारखंड का आदिवासी समाज अलग-अलग तरीके से मनाता है। संताल परगना के सफाहोड़ सनातन धर्मावलंबी आदिवासी शिव और त्रिशूल की पूजा करते हैं तो बहुत से समाज सोहराय के अंतिम दिन नाच-गाने और...

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Tuesday, January 14, 2020

Makar Sankranti 2020: त्याग, वैराग्य, कर्म और सत्य की क्रांति का पर्व है मकर संक्रांति

Makar Sankranti 2020: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार दान-पुण्य का महापर्व मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाएगा। संक्रांति का अर्थ है क्रांति। इससे तात्पर्य है- सत्य के संग क्रांति, संत के संग...

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मकर संक्रांति 2020: राशि अनुसार सफेद तिल के साथ करें इन मंत्रों का जाप और दान, दूर होगी पैसों से जुड़ी हर समस्या

Makar Sankranti 2020:  सनातन धर्म में मकर संक्रांति को दान-पुण्य का महापर्व भी कहा जाता है। यह पर्व हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। माना जाता है कि इस दिन दान करने से व्यक्ति को अभीष्ट...

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अब पुरुष भी शारीरिक सुंदरता को कॅरियर के लिए जरूरी मानने लगे

दुनिया भर की तकनीक और कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के लिए प्रसिद्ध अमरीका की सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) में हजारों टेक कंपनियां हैं। यहां काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को बेहतर प्रदर्शन के दबाव की कई परतों से रोज गुजरना पड़ता है। अभी तक यहां काम करने वाले पुरुष कर्मचारी मानते थे कि उनकी काबिलियत और लगातार काम करने की क्षमता उन्हें CARREER में आगे बढ़ाती है। लेकिन एक सर्वे में नई पीढ़ी के टेक इंजीनियर्स की विचारधारा में काफी अंतर आ गया है। सर्वे में सामने आया कि अपनी साथी महिला कर्मचारियों की ही तरह अब पुरुष भी यह ACCEPT करने लगे हैं कि सुंदर दिखना भी कॅरियर को आगे बढ़ाने में मदद करता है। यही वजह है कि यहां के पुरुष कर्मचारी अब अपने रंग-रूप, शारीरिक बनावट और समग्र व्यक्तित्त्व को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क और संवेदनशील हो गए हैं। यहां अपनी उम्र से कम दिखना भी एक महत्त्वपूर्ण तथ्य है। लोग घंटो जिम में पसीना बहा रहे हैं, डिटॉक्सीफिकेशन (DETOXIFICATION), प्लस्टिक सर्जरी (PLASTIC SURGERY), बोटॉक्स (BOTOX) और एस्ट्रॉएड्स का सेवन भी कर रहे हैंं ताकि अधिक युवा नजर आएं। इतना ही नहीं कुछ युवा मिडसेक्शन स्कल्पटिंग (MIDSECTION SCULPTING) के जरिए अपने कंधों की मसल्स (WASHBOARD ABS) को भी शर्ट के कॉलर जितना ऊंचा करवा रहे हैं।

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25 फीसदी पुरुष करवा रहे सर्जरी
सैन फ्रांसिस्को स्थित प्लास्टिक सर्जन लैरी फैन ने बताया कि अब उनके पास सर्जरी के लिए आने वाले कुल लोगों में से 25 फीसदी ऐसे ही युवा हैं जो अपनी उम्र को छिपाना चाहते हैं। अब ये युवक भी सौंदर्य की उस कसौटी का दबाव मानने लगे हैं जिस पर अभी तक महिलाओं को ही परखा जाता था। सिलिकॉन वैली में आमतौर पर 35 से ऊपर की उम्र के व्यक्ति को बूढ़े या सुस्त कर्मचारी के रूप में देखा जाता है। बोर्ड मीटिंग्स में सभी युवा नजर आते हैं जो इस आयु वर्ग के लोगों पर सुंदर और जवान दिखने का अतिरिक्त दबाव बनाता है। क्योंकि अधिकारी भी ऐसे युवाओं को ही प्रमोट करते हैं। सिलिकॉन-वैली में महिला कर्मचारियों की तुलना में पुरुषों की संख्या भी ज्यादा है।

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इसलिए डर रहे अधेड़ कर्मचारी
90 या 2000 के दशक में सिलिकॉन वैली की शुरुआत के समय ऐसा कल्चर नहीं था। लेकिन अब युवा प्रतिभाशाली सहकर्मियों के बीच अधेड़ उम्र के कर्मचारी खुद को कमतर आंकते हैं। बेरोजगारी से जूझते अमरीका में हर कोई अपनी नौकरी के लिए आशंकित है। ऐसे में वे खुद का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। इसे आर्थिक स्तर पर भी समझा जा सकता है। बीते साल गूगल (GOOGLE) ने 40 साल से ज्यादा उम्र वाले अपने 230 कर्मचारियों को 1.1 करोड़ रुपए ही वेतन दिया। कंपनी के अधेड़ कर्मचारियों ने आरोप भी लगाया कि वहां 'गूगलीनैस' और 'कल्चरल फिट' जैसी संज्ञाओं से हमें पुकारा जाता है। वहीं आईबीएम कंपनी ने भी 2018 में 7900 करोड़ के राजस्व में कटौती करने के लिए 40 से ज्यादा उम्र के अपने 20हजार अमरीकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।

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सुंदर दिखने की ये है लागत
अमरीकन सोसायटी फॉर एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी के अनुसार आज पुरुषों में कॉस्मेटिक सर्जरी दो दशकों की तुलना में सबसे अधिक हैं। हालांकि बोटॉक्स और हयालूरोनिक एसिड जैसे इंजेक्टेबल्स का उपयोग करने वालों में अब भी अधिकतर महिलाएं ही हैं। लेकिन 2010 से 2016 के बीच इस तरह की सर्जरी और सौंदर्य प्रक्रिया से गुजरने वाले पुरुषों की संख्या दोगुनी हो गई है। सिलिकॉन वैली के इन अधेड़ पुरुष कर्मचारियों में कॉस्मेटिक प्रक्रिया, कोलेजन-स्टिम्यूलेटिंग सर्जरी है जो चेहरे की त्वचा को युवा बनाकर उम्र को कम दिखाने में मदद करती है। इसे सामान्य शब्दों में 'रेडियो माइक्रोनीडलिंग' कहते हैं, जिसकी लागत लगभग 1500 डॉलर (1 लाख रुपए) प्रति सत्र हो सकती है। कुछ कर्मचारी बोटोक्स पर प्रत्येक 3-4महीने में 500 डॉलर (36 हजार रुपए) तक खर्च करते हैं।

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मोबाइल गेम जिसने लोकप्रियता में फोर्टनाइट को भी पीछे छोड़ दिया है

FORTNITE को भी टक्कर देता है लोकप्रियता में

आपको जानकर हैरानी होगी कि जापानी जिस गेम 'फेट/ग्रैंड ऑर्डर' (FATE/GRAND ORDER) को अपने मोबाइल पर खेलते हैं वह लोकप्रियता में फोर्टनाइट को भी टक्कर देता है। यह गेम चार साल पहले आरपीजी (ROLE PLAYING GAME) फॉरमैट में मोबाइल के लिए लॉन्च किया गया था।
हाल ही ट्विटर ने घोषणा की कि2018 की तुलना में 2019 में गेमिंग के संबंध में 1 बिलियन (100 करोड़) से अधिक ट्वीट किए गए जो 20 फीसदी ज्यादा थे। इन करोड़ों ट्वीट्स का केन्द्र भी यह जापानी आरपीजी गेम ही था। गौरतलब है कि लगातार दूसरे साल भी यह गेम ट्विटर की गेमिंग सूची में सबसे ऊपर है।

मोबाइल गेम जिसने लोकप्रियता में फोर्टनाइट को भी पीछे छोड़ दिया है

जापान है सबसे बड़ा वीडियो गेम प्रेमी देश

जापानी ट्विटर मेट्रिक्स (TWITTER MATRIX) में टॉप करने के लिए जाने जाते हैं। पूरी दुनिया में फोर्टनाइट के 25 करोड़ (250 मिलियन) सक्रिय वीडियो गेमर हैं। जबकि चार साल पहले लॉन्च हुए 'फेट/ग्रैंड ऑर्डर' को सितंबर 2018 तक अकेले जापान में ही 3 लाख लोग खेल रहे थे। गेम के मोबाइल और ऑर्केड संस्करणों (VERSION) ने अगस्त 2015 और दिसंबर 2018 के बीच लगभग 3.4 बिलियन डॉलर (३340 करोड़़) का कुल राजस्व अर्जित किया है।

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लगातार पिछड़ रहे हैं पश्चिमी वीडियो गेम
गेमिंग के मामले में पश्चिमी देश जापान से पिछड़ गए हैं। फोर्टनाइट यूं तो सूची में दूसरे स्थान पर काबिज है लेकिन वह फेट/ग्रैंड ऑर्डर को पछाड़ नहीं पा रहा। ट्विटर की जारी की गई सूची के अनुसार 2019 में गेमिंग के बारे में ट्वीट करने में जापान के बाद अमरीका दूसरे और कोरिया तीसरे स्थान पर रहा। वहीं निंजा पात्रों पर भी सबसे ज्यादा ट्वीट किए गए। जबकि इस सूची में दूसरे स्थान पर एलरुबिक्स और जैक सेप्टिक आई तीसरे स्थान पर रहे।

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